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    12. लोकगीत - Lokgeet - Class 12 - Yuvakbharati

    • Apr 23
    • 3 min read

    Updated: Apr 25

    विधा परिचय: प्रस्तुत काव्य लोकगीत का एक प्रकार है।

    लोकगीत मुख्यतः जनसाधारण के त्योहारों से संबंधित होते हैं और परंपरा द्वारा अगली पीढ़ी तक पहुँचते हैं। 'कजरी', 'सोहर', और 'बन्ना-बन्नी' इसके प्रमुख प्रकार हैं।


    १. शब्दार्थ (Glossary with English Context)

    क. सुनु रे सखिया (वसंत ऋतु)


    शब्द

    अर्थ (Hindi)

    अर्थ (English Context)

    आइल

    आया

    Arrived/Came

    हरसाइल

    हर्षित होना

    To be delighted

    अइसन

    ऐसा

    Like this/Such

    चिटकाइल

    चटककर खिलना

    To bloom/Burst open

    सरसाइल

    फूलों से लदना

    To blossom/Be lush

    गइल

    गया

    Gone

    कजराइल

    काजल लगाया

    Applied kohl

    करिया

    काला

    Black

    अँचरा

    आँचल

    Edge of a saree

    ख. कजरी (सावन ऋतु)


    शब्द

    अर्थ (Hindi)

    अर्थ (English Context)

    पुरवैया

    पूर्व की हवा

    Easterly wind

    दादुर

    मेंढक

    Frog

    सर

    तालाब

    Pond/Lake

    मेहा

    मेघ/बादल

    Cloud/Rain

    हुलसावै

    आनंदित होना

    To feel joy/Exult

    सरसै

    आनंद से भर जाना

    To be filled with delight

    २. परिचय और सारांश (Introduction & Summary)


    पाठ परिचय: इस पाठ में दो ऋतुओं—सावन और वसंत—का सजीव वर्णन किया गया है। सावन में प्रकृति के मनमोहक दृश्य और नवविवाहिताओं के हर्ष को दर्शाया गया है, जबकि वसंत में प्रकृति के खिलने और यौवन के सौंदर्य का चित्रण है।


    सारांश (Summary): 'कजरी' में सावन के महीने का वर्णन है जहाँ बादल घिरते हैं, बिजली चमकती है और रिमझिम वर्षा से धरती नहा उठती है। दादुर, मोर और पपीहा अपनी आवाजों से मन को हर्षित करते हैं और जुगनू रात की चमक बढ़ाते हैं। दूसरी ओर, 'सुनु रे सखिया' में वसंत ऋतु के आने पर सरसों के लहलहाने, अलसी के आलसाने और धरती के हर्षित होने का वर्णन है। खेत और मन इंद्रधनुष के रंगों में रँग जाते हैं। अंत में पिया के वियोग की स्थिति को 'बबूल के फूल' बोने के बिंब से दर्शाया गया है, जहाँ आँचल आँसुओं से भीग जाता है।


    ३. आकलन और शब्द संपदा (Assessment & Vocabulary)


    कृति १: आकलन (Understanding - 2 Marks) 


    • प्रश्न १: उत्तर लिखिए:

      • (१) मन को प्रसन्न करने वाले: सावन के गीत (कजरी) 

      • (२) धरती को नहलाने वाले: रिमझिम मेहा (बादल) 


    • प्रश्न २: परिवर्तन लिखिए (वसंत ऋतु के आगमन पर):

      • (अ) बाग-बगीचों में: खिल उठना/मुस्कुराना 

      • (आ) खेतों में: सरसों का सरसाना (लहलहाना) 


    कृति २: उचित जोड़ियाँ मिलाइए (Vocabulary - 2 Marks) 


    'अ'

    'ब' (उत्तर)

    (१) तालाब

    सर

    (२) नदी

    सरिता

    (३) बयार

    हवा

    (४) भौंरा

    भ्रमर

    ७.शब्दसमूह के लिए एक शब्द (One Word Substitutes)

    1. मन का गर्व: अहंकार 


    2. आंतरिक प्रसन्नता: हर्ष 


    3. जिस वस्तु का मूल्य आँका न जा सके: अमूल्य 


    4. धार्मिक विषयों पर दिया जाने वाला व्याख्यान: प्रवचन 


    5. किसी अच्छे कार्य से प्रसन्न होकर दी जाने वाली धनराशि: पुरस्कार 


    6. प्रिय व्यक्ति की मृत्यु पर प्रकट किया जाने वाला दुख: शोक 


    7. बड़ों के प्रति किया जाने वाला अभिवादन: प्रणाम 


    8. कम व्यय करने वाला: मितव्ययी 


    9. आकाश को चूमने वाला: गगनचुंबी 


    10. जो विधि या कानून के विरुद्ध हो: अवैध 


    11. क्षमा के लिए प्रार्थना करने वाला: क्षमाप्रार्थी 


    12. सभ्य पुरुषों का आचरण: शिष्टाचार 


    13. मन को हरने वाला: मनोहर 


    14. जो दिखाई न दे: अदृश्य 


    15. जो खाने योग्य न हो: अखाद्य 


    ८. बोर्ड परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण प्रश्न

    • प्रश्न १: लोकगीतों की दो विशेषताएँ लिखिए।

      • उत्तर: १. इनमें गेयता का तत्त्व प्रमुख होता है। २. इनकी भाषा में ग्रामीण जनजीवन और बोली का स्पर्श रहता है।


    • प्रश्न २: लोकगीतों के दो प्रकारों के नाम लिखिए।

      • उत्तर: कजरी और सोहर।


    • प्रश्न ३: "सावन बड़ा मनभावन" क्यों कहा गया है?

      • उत्तर: सावन में प्रकृति हरी-भरी हो जाती है, वर्षा की रिमझिम फुहारें धरती को नहलाती हैं और मोर-पपीहा की आवाज़ें मन को आनंदित करती हैं।


    • प्रश्न ४: वसंत ऋतु में प्रकृति में क्या परिवर्तन होते हैं?

      • उत्तर: सरसों के पीले फूल लहलहाने लगते हैं, मस्त हवा (बयार) बहती है और कलियाँ चटककर मुस्कुराने लगती हैं।


    • प्रश्न ५: लोकगीत हमारी संस्कृति को कैसे अक्षुण्ण रखते हैं?

      • उत्तर: लोकगीत परंपरा द्वारा अगली पीढ़ी तक पहुँचते हैं और हमारे लोकजीवन की संस्कृति व सामाजिक कर्तव्यों का निर्वाह करते हैं।


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