3.2. नए मेहमान - (Naye Mehman) - Class 9 - एकांकी - Rajeev Prakashan
- May 4
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Updated: May 8

पाठ का प्रकार: एकांकी
लेखक का नाम: उदयशंकर भट्ट
विधा: समस्या-प्रधान सामाजिक एकांकी
परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)
विषय | विवरण |
लेखक | उदयशंकर भट्ट (1898–1966) |
मुख्य पात्र | विश्वनाथ (गृहपति), रेवती (पत्नी), नन्हेमल और बाबूलाल (अतिथि) |
स्थान | महानगर का एक छोटा और गरम मकान |
मुख्य समस्या | मध्यम वर्ग की आवास समस्या और अनचाहे मेहमानों का बोझ |
संदेश | अपनत्व और दिखावे के बीच का अंतर तथा शहरी जीवन की विडंबना |
1. लेखक परिचय (Author Introduction)
जन्म एवं स्थान: उदयशंकर भट्ट का जन्म सन् 1898 ई. में उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में हुआ था। शिक्षा एवं कार्यक्षेत्र: आपने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से बी.ए. और कलकत्ता से 'काव्यतीर्थ' किया। आप लाहौर के नेशनल कॉलेज में प्राध्यापक रहे और स्वातंत्र्योत्तर काल में आकाशवाणी के निदेशक पद पर कार्य किया। साहित्यिक व्यक्तित्व: भट्ट जी एक यथार्थवादी एकांकीकार थे। उन्होंने पौराणिक और सामाजिक दोनों प्रकार के एकांकियों की रचना की। उनकी दृष्टि बौद्धिक विवेचना और आलोचनात्मक रही है। प्रमुख रचनाएँ:
एकांकी: समस्या का अंत, परदे के पीछे, आज का आदमी, नए मेहमान, स्त्री का हृदय।
नाटक: विक्रमादित्य, सागर विजय, मुक्तिदूत।
उपन्यास: सागर, लहरें और मनुष्य, लोक परलोक। निधन: सन् 1966 ई. में आपका देहावसान हुआ।
2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)
हिन्दी: 'नए मेहमान' महानगरों में रहने वाले मध्यम वर्ग की आवास और अतिथ्य समस्या पर आधारित एक यथार्थवादी एकांकी है। भीषण गर्मी की रात में विश्वनाथ और उनकी पत्नी रेवती अपने छोटे से मकान में परेशान हैं। तभी दो अपरिचित व्यक्ति, नन्हेमल और बाबूलाल, उनके घर आ धमकते हैं। वे विश्वनाथ को अपनी बातों में उलझाकर वहीं जम जाते हैं, जिससे रेवती और भी चिड़चिड़ी हो जाती है और खाना बनाने से मना कर देती है। अंत में पता चलता है कि वे गलत पते पर आ गए थे और उन्हें पड़ोस के वैद्य जी के यहाँ जाना था। उनके जाने के तुरंत बाद रेवती का सगा भाई आ जाता है। अब रेवती का व्यवहार पूरी तरह बदल जाता है; वह सिर दर्द भूलकर खुशी-खुशी उसके लिए भोजन बनाने लगती है।
English: 'Naye Mehman' is a realistic one-act play focusing on the housing crisis and the burden of uninvited guests in metropolitan cities. Vishwanath and his wife Revati are struggling in their small, suffocating house during a scorching summer night. Suddenly, two strangers, Nanhemal and Babulal, arrive and take advantage of Vishwanath's hesitant nature to settle in. Revati gets annoyed and refuses to cook for them. It is later revealed that they had come to the wrong address and were supposed to visit a neighboring physician. Immediately after their departure, Revati's brother arrives. Her attitude changes completely; she forgets her ailment and happily prepares a feast for him, highlighting the difference between duty and genuine affection.
3. मुख्य पात्रों का चरित्रांकन (Character Sketches)
विश्वनाथ: एक संकोची, सुसंस्कृत और शांतिप्रिय मध्यमवर्गीय व्यक्ति। वह अनचाहे मेहमानों से परेशान है पर उन्हें कड़वी बात नहीं कह पाता।
रेवती: विश्वनाथ की पत्नी, जो घर की तंगहाली और बीमारी से परेशान है। वह व्यावहारिक है और अजनबियों के लिए भोजन बनाने का विरोध करती है, पर अपने भाई के लिए समर्पित है।
नन्हेमल और बाबूलाल: ये अनपढ़, बातूनी और अवसरवादी मेहमानों के प्रतीक हैं जो दूसरों की निजता का सम्मान नहीं करते।
4. गद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation)
महत्वपूर्ण अंश 1: "इन बंद मकानों में रहना कितना भयंकर है! मकान है कि भट्ठी!"
प्रसंग: विश्वनाथ गर्मी से बेहाल होकर कमरे में प्रवेश करते समय यह कहता है।
व्याख्या: लेखक ने शहरी आवास की समस्या को उजागर किया है। घनी बस्तियों के मकान इतने छोटे और हवा रहित होते हैं कि गर्मी में वे भट्ठी की तरह तपने लगते हैं, जिससे मध्यम वर्ग का जीवन नर्क जैसा हो जाता है।
महत्वपूर्ण अंश 2: "यहाँ कर्तव्य के साथ प्रेम है... अपनत्व तो है ही।"
प्रसंग: एकांकी के अंत में जब रेवती अपने भाई के लिए खाना बनाने लगती है, तब विश्वनाथ यह टिप्पणी करता है।
व्याख्या: विश्वनाथ रेवती के बदले हुए व्यवहार पर व्यंग्य करता है। वह कहना चाहता है कि अपरिचितों के प्रति सेवा केवल एक बोझ (दिखावा) लगती है, लेकिन जब कोई अपना आता है, तो वही काम खुशी और प्रेम (अपनत्व) के साथ किया जाता है।
5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)
शब्द | अर्थ | पर्यायवाची | विलोम |
आगंतुक
| आने वाला | अतिथि | --- |
निश्चेष्ट
| बिना हिले-डुले | सुप्त | सचेष्ट |
अनायास
| बिना प्रयास के | सरलता से | सायास |
अवमानित
| अपमानित | तिरस्कृत | सम्मानित |
हबड़-तबड़
| जल्दीबाज़ी | अफरा-तफरी | --- |
मक्कार
| धोखेबाज | धूर्त | ईमानदार |
निर्दय
| दयाहीन | क्रूर | सदय |
आस्था
| विश्वास | श्रद्धा | अनास्था |
6. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: विश्वनाथ और रेवती गर्मी के अलावा किस बात से परेशान थे?
उत्तर: वे अपने छोटे मकान, पड़ोसियों के निर्दयी व्यवहार और बार-बार आने वाले अनचाहे मेहमानों से परेशान थे।
प्रश्न 2: पड़ोसी विश्वनाथ की छत पर खाट क्यों नहीं बिछाने देते थे?
उत्तर: पड़ोसी स्वभाव से संकीर्ण और निर्दयी थे। वे दूसरों को आराम से सोता देख जलते थे और तर्क देते थे कि इससे उनकी हवा रुक जाएगी।
प्रश्न 3: नन्हेमल और बाबूलाल ने अपनी पहचान क्या बताई?
उत्तर: उन्होंने खुद को बिजनौर का निवासी बताया और संपतराम गोटेवाले तथा सेठ जगदीश प्रसाद का रिश्तेदार बताया।
प्रश्न 4: एकांकी का अंत किस प्रकार होता है?
उत्तर: एकांकी का अंत विनोदपूर्ण है। रेवती के भाई के आने पर घर का तनाव दूर हो जाता है और रेवती खुशी-खुशी भोजन बनाने में जुट जाती है।
7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: 'नए मेहमान' एकांकी के माध्यम से शहरी मध्यम वर्ग की किन समस्याओं को चित्रित किया गया है?
उत्तर: लेखक ने मुख्य रूप से दो समस्याओं को दिखाया है:
आवास समस्या: शहरों में हवा और रोशनी की कमी वाले छोटे-छोटे मकान भट्ठी की तरह तपते हैं, जहाँ सामान्य सुख-सुविधाओं का अभाव होता है।
अतिथ्य समस्या: अनचाहे और अपरिचित मेहमानों का आगमन मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए आर्थिक और मानसिक बोझ बन जाता है। इसके अतिरिक्त पड़ोसियों के बीच आत्मीयता का अभाव और संवेदनहीनता भी दिखाई गई है।
प्रश्न 2: एकांकी के शीर्षक 'नए मेहमान' की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: यह शीर्षक बहुत सटीक और व्यंग्यपूर्ण है। पूरी कहानी 'मेहमानों' के इर्द-गिर्द घूमती है। पहले दो 'नए मेहमान' (नन्हेमल और बाबूलाल) गलत पते पर आकर परेशानी खड़ी करते हैं, जो समाज के अनचाहे बोझ का प्रतीक हैं। दूसरा मेहमान (रेवती का भाई) सगा होने के कारण खुशी और अपनत्व का स्रोत है। यह शीर्षक पाठकों में कौतूहल बनाए रखता है कि वास्तव में कौन मेहमान आने वाला है और उसका क्या प्रभाव होगा।
8. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)
प्रत्यय पहचानें:
उष्णता: उष्ण + ता (इसी प्रकार: गंभीरता, शालीनता)
सम्मानित: सम्मान + इत (इसी प्रकार: विचलित, खंडित)
आध्यात्मिक: अध्यात्म + इक
लुहारिन: लुहार + इन
समास-विग्रह:
साधु-संग: साधुओं का संग (तत्पुरुष)
माता-पिता: माता और पिता (द्वंद्व)
लघुप्राण: लघु हैं प्राण जिसके (बहुब्रीहि)
अनायास: बिना प्रयास के (अव्ययीभाव)
9. UP Board परीक्षा में अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)
5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:
विश्वनाथ का चरित्र-चित्रण करते हुए उनकी विवशता पर प्रकाश डालिए।
6 अंक - गद्यांश व्याख्या:
"मकान मिलता ही नहीं। आज दो साल से दिन-रात एक करके ढूँढ़ रहा हूँ... जाने कब तक इस जेलखाने में सड़ना होगा।"
2 अंक - लघु उत्तरीय:
'अनासक्ति योग' किसकी रचना है? (महात्मा गाँधी की गीता पर टीका)
रेवती खाना बनाने के लिए तुरंत क्यों तैयार हो गई?
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