3.3. दीपदान - (Deepdan) - Class 9 - एकांकी - Rajeev Prakashan
- May 4
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Updated: May 8

पाठ का प्रकार: एकांकी
लेखक का नाम: डॉ. रामकुमार वर्मा
विधा:ऐतिहासिक एवं चरित्र-प्रधान एकांकी
परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)
विषय | विवरण |
लेखक | डॉ. रामकुमार वर्मा (एकांकी सम्राट) |
मुख्य पात्र | पन्ना धाय (महान बलिदान की प्रतिमूर्ति) |
ऐतिहासिक काल | सन् 1536 ई., चित्तौड़गढ़ (मेवाड़) |
प्रमुख द्वंद्व | कर्तव्यनिष्ठा बनाम ममता; राष्ट्रहित बनाम पुत्र-मोह |
सबसे प्रसिद्ध पंक्ति | "नमक से रक्त बनता है, रक्त से नमक नहीं।" |
शीर्षक की सार्थकता | पन्ना द्वारा अपने 'कुल-दीपक' (पुत्र) का रक्त की धारा पर किया गया दान |
1. लेखक परिचय (Author Introduction)
जन्म एवं स्थान: डॉ. रामकुमार वर्मा का जन्म सन् 1905 ई. में मध्य प्रदेश के सागर जिले में हुआ था।
शिक्षा एवं कार्यक्षेत्र: आपने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. किया और वहीं हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे। आपने 'हिंदी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास' लिखकर साहित्येतिहास में महत्वपूर्ण स्थान बनाया।
साहित्यिक व्यक्तित्व: वर्मा जी को हिंदी एकांकी का जनक/सम्राट माना जाता है। उनके एकांकियों में भारतीय संस्कृति, आदर्शवाद और मानवीय संवेदनाओं का सुंदर समन्वय मिलता है।
प्रमुख रचनाएँ:
एकांकी संग्रह: पृथ्वीराज की आँखें, रेशमी टाई, चारुमित्रा, रिमझिम, दीपदान।
नाटक: महाराणा प्रताप, शिवाजी, नाना फड़नवीस।
सम्मान: भारत सरकार द्वारा 'पद्मभूषण' (1963) से अलंकृत।
निधन: सन् 1990 ई. में आपका स्वर्गवास हुआ।
2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)
हिन्दी:
'दीपदान' एकांकी मेवाड़ की धाय माँ पन्ना के अभूतपूर्व त्याग की अमर गाथा है। महाराणा सांगा के निधन के बाद उनका छोटा पुत्र उदयसिंह उत्तराधिकारी था, जिसकी रक्षा की जिम्मेदारी पन्ना पर थी। दासी-पुत्र बनवीर ने सत्ता हथियाने के लिए महाराणा विक्रमादित्य की हत्या कर दी और उत्सव (दीपदान) का ढोंग रचाकर उदयसिंह को मारने की योजना बनाई। पन्ना को इस षड्यंत्र का पता चल गया। उसने कीरत बारी की मदद से उदयसिंह को टोकरी में छिपाकर महल से बाहर भेज दिया और उदयसिंह की शय्या पर अपने इकलौते पुत्र चंदन को सुला दिया। बनवीर ने उदयसिंह के धोखे में चंदन की हत्या कर दी। इस प्रकार पन्ना ने राष्ट्र के भविष्य को बचाने के लिए अपनी ममता का बलिदान कर दिया।
English:
'Deepdan' is a poignant historical play centered on the supreme sacrifice of Panna Dhai, the nursemaid of Mewar. After Rana Sanga's death, the minor prince Udai Singh was the rightful heir. The treacherous Banvir killed King Vikramaditya and organized a festival of lights (Deepdan) as a distraction to assassinate Udai Singh. Aware of the plot, Panna displayed extraordinary courage by smuggling the prince out in a basket with Kirat Bari's help. To deceive the assassin, she placed her own son, Chandan, in the prince's bed. Banvir struck down the innocent Chandan, thinking him to be Udai Singh. Panna thus sacrificed her maternal love to ensure the survival of the royal lineage.
3. मुख्य पात्रों का चरित्रांकन (Character Sketches)
पन्ना धाय: एकांकी की नायिका, कर्तव्यनिष्ठ, स्वामिभक्त और त्याग की साक्षात् प्रतिमा। वह व्यक्तिगत हितों से ऊपर राष्ट्रहित को रखती है।
कुँवर उदयसिंह: महाराणा सांगा का 14 वर्षीय भोला पुत्र, जो राजनीति के दाँव-पेंचों से अनभिज्ञ है।
बनवीर: क्रूर, विलासी, सत्तालोलुप और हत्यारा, जो छल-कपट से राज्य प्राप्त करना चाहता है।
चंदन: पन्ना का 13 वर्षीय वीर पुत्र, जो अपनी माँ के आदेश पर मृत्यु-शय्या पर हँसते-हँसते लेट जाता है。
कीरत बारी: एक छोटा कर्मचारी लेकिन महान देशभक्त, जो प्राणों की बाजी लगाकर कुँवर की रक्षा करता है。
4. महत्वपूर्ण संवाद - व्याख्या (Key Dialogues & Explanation)
अंश 1: "नमक से रक्त बनता है, रक्त से नमक नहीं।"
प्रसंग: जब सामली पन्ना से कुँवर की रक्षा के बारे में पूछती है, तब पन्ना यह कहती है।
व्याख्या: पन्ना के अनुसार, जिस स्वामी का हमने नमक खाया है, उसके प्रति वफादारी हमारे रक्त (परिवार) से भी अधिक मूल्यवान है। वह कुँवर (राज्य के उत्तराधिकारी) को बचाने के लिए अपने पुत्र के बलिदान को तैयार है。
अंश 2: "चित्तौड़ रास-रंग की भूमि नहीं है, जौहर की भूमि है।"
प्रसंग: पन्ना विलासिनी सोना को डाँटते हुए यह कहती है।
व्याख्या: पन्ना यहाँ मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा का स्मरण कराती है, जहाँ त्याग और बलिदान की महत्ता है, न कि नाच-गाने और विलासिता की。
5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)
शब्द | अर्थ | पर्यायवाची | विलोम |
निष्कंटक | बाधा रहित | निर्बाध | कंटकपूर्ण |
अंतःपुर | रनिवास / महल के भीतर | जनानाखाना | --- |
मर्यादा | सीमा / मान | प्रतिष्ठा | अमर्यादा |
नराधम | मनुष्यों में नीच | दुष्ट | महात्मा |
अमोघ
| अचूक | सफल | विफल |
मूर्छित | बेहोश | अचेत | सचेत |
6. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: पन्ना ने उदयसिंह को महल से बाहर कैसे भेजा?
उत्तर: पन्ना ने कीरत बारी को विश्वास में लिया और उदयसिंह को उसकी पत्तलों वाली बड़ी टोकरी में लिटाकर, उन पर जूठी पत्तलें डालकर सुरक्षित रूप से महल से बाहर भिजवाया。
प्रश्न 2: बनवीर ने दीपदान उत्सव का आयोजन क्यों किया था?
उत्तर: बनवीर का उद्देश्य लोगों का ध्यान नृत्य और उत्सव में व्यस्त करना था ताकि वह चुपके से महाराणा विक्रमादित्य और कुँवर उदयसिंह की हत्या कर निष्कंटक राज्य कर सके。
प्रश्न 3: चंदन ने उदयसिंह की शय्या पर लेटने के बारे में क्या कहा?
उत्तर: चंदन बहुत खुश हुआ और बोला कि आज वह भी राजकुमार हो गया और कितनी नरम शय्या है। उसे आभास नहीं था कि यह उसकी अंतिम नींद होगी。
7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: 'दीपदान' एकांकी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: एकांकी का शीर्षक अत्यंत सार्थक और मार्मिक है। जहाँ बनवीर ने षड्यंत्र के लिए मयूर-पक्ष कुंड में दीपदान का आयोजन किया था, वहीं पन्ना धाय ने अपने पुत्र चंदन (जो उसके वंश का कुल-दीपक था) का बलिदान देकर सच्चा 'दीपदान' किया। उसने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी ममता के दीप को रक्त की धारा पर तैरा दिया。 यह बलिदान भौतिक दीपों के दान से कहीं ऊँचा और पवित्र है。
प्रश्न 2: पन्ना धाय की चारित्रिक विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: पन्ना धाय त्याग और वीरता का अनुपम उदाहरण है:
अतुलनीय स्वामिभक्ति: उसने स्वामी के पुत्र को बचाने के लिए अपने कलेजे के टुकड़े का बलिदान कर दिया।
दृढ़ निश्चयी: बनवीर द्वारा दिए गए जागीर और प्रलोभनों को उसने ठुकरा दिया।
सूझबूझ: उसने संकट के समय कीरत बारी की मदद से उदयसिंह को बचाने की सफल योजना बनाई。
साहसी क्षत्राणी: वह बनवीर पर कटार से हमला करने की हिम्मत भी रखती है।
8. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)
समास पहचानें:
कुल-दीपक: कुल का दीपक (तत्पुरुष)
दासी-पुत्र: दासी का पुत्र (तत्पुरुष)
राजवंश: राजा का वंश (तत्पुरुष)
विपरीतार्थक शब्द:
पवित्रता: कलुष
मर्यादा: अमर्यादा
विश्राम: परिश्रम
9. UP Board परीक्षा में अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)
5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:
एकांकी के आधार पर 'बनवीर' का चरित्र-चित्रण कीजिए और उसकी विफलता के कारण बताइए।
6 अंक - गद्यांश व्याख्या:
"माँ ! तुम्हारे अँगूठे से रक्त की धारा बहे, मेरी आँखों से एक बूँद पानी भी न निकले?"
"यमराज ! लो इस दीपक को। यह मेरा दीपदान है।"
1 अंक - MCQ:
कुँवर उदयसिंह के संरक्षक कौन थे? (बनवीर)
पन्ना ने उदयसिंह को कहाँ मिलने को कहा था? (बेरिस नदी के किनारे)
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