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    3.4. लक्ष्मी का स्वागत - (Lakshmi Ka Swagat) - Class 9 - एकांकी - Rajeev Prakashan

    • May 4
    • 6 min read

    Updated: May 8

    पाठ का प्रकार: एकांकी

    लेखक का नाम: उपेंद्रनाथ 'अश्क'

    विधा: सामाजिक और यथार्थवादी एकांकी  


    परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)

    विषय

    विवरण

    लेखक

    उपेंद्रनाथ 'अश्क' (1910–1996)  


    मुख्य पात्र

    रोशन (नायक), सुरेंद्र (मित्र), रोशन के माता-पिता  


    मुख्य समस्या

    मध्यमवर्गीय समाज की हृदयहीनता और धन-लोलुपता  


    बीमारी

    डिप्थीरिया (रोशन के पुत्र अरुण को)

    स्थान

    जालंधर, पंजाब

    शीर्षक का अर्थ

    'लक्ष्मी' (नई बहू/दहेज) के स्वागत के लिए मानवीय संवेदनाओं की बलि

    1. लेखक परिचय (Author Introduction)


    जन्म एवं स्थान: उपेंद्रनाथ 'अश्क' का जन्म सन् 1910 ई. में जालंधर, पंजाब के एक मध्यवर्गीय परिवार में हुआ था। साहित्यिक यात्रा: उन्होंने अपना लेखन उर्दू से शुरू किया, लेकिन प्रेमचंद की सलाह पर हिंदी की ओर मुड़े। वे ऑल इंडिया रेडियो में नाटककार और सलाहकार भी रहे। साहित्यिक व्यक्तित्व: अश्क हिंदी में यथार्थवादी एकांकी के सूत्रधार माने जाते हैं। उन्होंने मध्यमवर्गीय जीवन की विसंगतियों और मनोवैज्ञानिक द्वंद्वों को अपनी रचनाओं का आधार बनाया। प्रमुख रचनाएँ:  


    • एकांकी: तौलिये, सूखी डाली, लक्ष्मी का स्वागत, देवताओं की छाया में।

    • नाटक: अंजो दीदी, छठा बेटा, अलग-अलग रास्ते।

    • उपन्यास: गिरती दीवारें, शहर में घूमता आइना। निधन: सन् 1996 ई. में आपका देहावसान हुआ।  


    2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)


    हिन्दी:

    'लक्ष्मी का स्वागत' एक मार्मिक और यथार्थवादी एकांकी है जो समाज की संवेदनहीनता पर चोट करती है। रोशन का इकलौता बेटा अरुण डिप्थीरिया से मरणासन्न है, जबकि एक महीने पहले ही रोशन की पत्नी का देहांत हुआ है। रोशन अपने बेटे को बचाने के लिए व्याकुल है, लेकिन उसके माता-पिता उसकी दूसरी शादी कराने के लिए उत्सुक हैं। सियालकोट से एक संपन्न व्यापारी अपनी बेटी का रिश्ता लेकर आए हैं। रोशन के पिता उस धनी परिवार से 'शगुन' (दहेज/लक्ष्मी) लेने के लिए इतने लालायित हैं कि वे बीमार पोते की भी परवाह नहीं करते। एकांकी का अंत तब होता है जब एक तरफ पिता शगुन लेकर 'लक्ष्मी के स्वागत' की बधाई देते हैं और दूसरी तरफ रोशन अपने मृत पुत्र का शव लेकर कमरे से बाहर आता है।


    English:

    'Lakshmi Ka Swagat' is a poignant satire on the greed and emotional coldness of the middle class. The protagonist, Roshan, is grieving his wife's recent death while his only son, Arun, is dying of diphtheria. While Roshan is desperate to save his son, his parents are obsessed with his remarriage to a wealthy family from Sialkot. For the father, the arrival of a rich proposal is the 'arrival of Goddess Lakshmi' (wealth), which he prioritizes over the life of his grandson. The play reaches a tragic climax when the father celebrates the acceptance of the marriage proposal at the exact moment Roshan emerges with his son's lifeless body.


    3. मुख्य पात्रों का चरित्रांकन (Character Sketches)


    • रोशन: एक संवेदनशील और शिक्षित युवक। वह अपनी पत्नी की मृत्यु के दुख से अभी उभरा नहीं है और अपने बीमार बेटे से अगाध प्रेम करता है। वह समाज की रूढ़ियों और अपने माता-पिता की संवेदनहीनता के खिलाफ संघर्ष करता है।

    • पिता: स्वार्थी और धन-लोलुप पात्र। उनके लिए रिश्तों और भावनाओं से अधिक महत्व 'फर्म के लेन-देन' और 'शगुन' का है। वे पोते की बीमारी को केवल एक 'बहानेबाजी' मानते हैं।

    • माँ: पुरानी सोच वाली महिला। वह 'गिरे हुए मकान की नींव पर दूसरा मकान खड़ा होने' (पुनर्विवाह) के सिद्धांत में विश्वास करती है और पुत्र के दुख की तुलना में भविष्य की चिंता अधिक करती है。

    • सुरेंद्र: रोशन का सच्चा मित्र। वह रोशन की भावनाओं को समझता है और कठिन समय में उसके साथ खड़ा रहता है。


    4. महत्वपूर्ण संवाद - व्याख्या (Key Dialogues & Explanation)


    अंश 1: "गिरे हुए मकान की नींव पर ही दूसरा मकान खड़ा होता है।"

    • प्रसंग: रोशन की माँ सुरेंद्र से रोशन के पुनर्विवाह का समर्थन करते हुए यह कहती है।

    • व्याख्या: यह समाज की निष्ठुरता का परिचायक है। माँ का मानना है कि पत्नी की मृत्यु के बाद तुरंत दूसरी शादी कर लेनी चाहिए, जैसे पुरानी नींव पर नई इमारत बनाई जाती है। यहाँ मानवीय भावनाओं की कोई जगह नहीं है।


    अंश 2: "घर आई लक्ष्मी का निरादर नहीं कर सकता।"

    • प्रसंग: रोशन के पिता शगुन लेने का निर्णय लेते समय यह कहते हैं।

    • व्याख्या: यहाँ 'लक्ष्मी' का अर्थ अमीर घर की लड़की और उसके साथ आने वाले दहेज से है। पिता के लिए मरता हुआ पोता गौण है और धन (लक्ष्मी) प्राथमिक है। यही एकांकी के शीर्षक का मूल आधार है।


    5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)

    शब्द

    अर्थ

    पर्यायवाची

    विलोम

    अचेत

    बेहोश

    मूर्छित

    सचेत

    मूसलधार

    बहुत तेज़ वर्षा

    भारी वर्षा

    ---

    मर्मस्पर्शी

    हृदय को छूने वाला

    मार्मिक

    ---

    फतवा

    निर्णय / आदेश

    आज्ञा

    ---

    दाह-कर्म

    अंतिम संस्कार

    अंत्येष्टि

    ---

    शगुन

    मंगल द्रव्य / रिश्ता

    नेग

    ---

    असमंजस

    दुविधा

    उधेड़बुन

    निश्चित

    निर्मम

    जिसमें ममता न हो

    क्रूर

    दयालु

    6. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)


    प्रश्न 1: रोशन का दिल क्यों डर रहा था?

    • उत्तर: रोशन का पुत्र अरुण डिप्थीरिया से पीड़ित था और उसकी साँसें उखड़ रही थीं। रोशन को डर था कि कहीं उसकी पत्नी सरला की तरह उसका बेटा भी उसे छोड़कर न चला जाए।


    प्रश्न 2: डिप्थीरिया कैसी बीमारी है?

    • उत्तर: यह गले का एक संक्रामक रोग है जिसमें गले में झिल्ली बन जाने से साँस लेने में भारी कष्ट होता है और कुछ ही घंटों में मृत्यु हो सकती है。


    प्रश्न 3: रोशन के पिता ने शगुन लेने का निर्णय क्यों लिया?

    • उत्तर: क्योंकि सियालकोट के जिस परिवार से रिश्ता आया था, उनकी बड़ी फर्म थी और हजारों का लेन-देन था। पिता इस आर्थिक लाभ (लक्ष्मी) को नहीं छोड़ना चाहते थे。


    प्रश्न 4: एकांकी के अंत में सुरेंद्र ने माँ से क्या कहा?

    • उत्तर: सुरेंद्र ने भारी आवाज़ में कहा कि अरुण इस संसार से जा रहा है, इसलिए दाने लाओ और दिए का प्रबंध करो。


    7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)


    प्रश्न 1: 'लक्ष्मी का स्वागत' एकांकी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

    • उत्तर: इस एकांकी का शीर्षक अत्यंत व्यंग्यात्मक और सार्थक है। 'लक्ष्मी' शब्द यहाँ दहेज और धन-संपत्ति का प्रतीक है। रोशन का पिता बीमार पोते और दुखी पुत्र की भावनाओं को ताक पर रखकर धनी घर से आए विवाह के रिश्ते (लक्ष्मी) को स्वीकार करता है। एकांकी का चरम बिंदु वह है जहाँ एक ओर पिता शगुन लेकर लक्ष्मी के स्वागत की खुशियाँ मनाता है, वहीं दूसरी ओर घर का कुल-दीपक (अरुण) बुझ जाता है। यह शीर्षक समाज की उस क्रूर वास्तविकता को उजागर करता है जहाँ धन के सामने रिश्तों का कोई मूल्य नहीं है।


    प्रश्न 2: रोशन के माता-पिता की मानसिकता पर टिप्पणी कीजिए।

    • उत्तर: रोशन के माता-पिता मध्यमवर्गीय समाज की संवेदनहीन और स्वार्थी मानसिकता के प्रतीक हैं। माँ जहाँ परंपराओं की दुहाई देकर रोशन की भावनाओं को कुचलना चाहती है, वहीं पिता पूरी तरह से भौतिकवादी और पत्थर-दिल हैं। पिता पोते की जानलेवा बीमारी को भी केवल एक 'बहानेबाजी' करार देते हैं क्योंकि वह उनके धन कमाने के रास्ते में बाधा है। उनका व्यवहार यह दर्शाता है कि वृद्ध पीढ़ी कभी-कभी संकीर्ण स्वार्थों के कारण युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य और भावनाओं की बलि देने से भी पीछे नहीं हटती。


    8. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)


    प्रश्न 1: उपेंद्रनाथ 'अश्क' का जन्म कहाँ हुआ था?  

    • उत्तर: उनका जन्म सन् 1910 ई. में जालंधर (पंजाब) में हुआ था।  


    प्रश्न 2: 'अंजो दीदी' किसकी रचना है?

    • उत्तर: यह उपेंद्रनाथ 'अश्क' का प्रसिद्ध नाटक है。


    9. UP Board परीक्षा में अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)


    5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:

    • रोशन का चरित्र-चित्रण कीजिए और उसकी विवशता के कारणों पर प्रकाश डालिए।


    6 अंक - गद्यांश व्याख्या:

    • "दुनिया की रीत निष्ठुर... निर्मम... क्रूर! नहीं जानती कि जो मर जाती है, वह भी किसी की लड़की होती है..."


    2 अंक - लघु उत्तरीय:

    • सियालकोट के व्यापारी रोशन के लिए पहली बार रिश्ता कब लाए थे? (जब सरला का चौथा हुआ था)

    • डॉक्टर ने बच्चे की हालत के बारे में क्या बताया?

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