3.5. सीमा-रेखा - (Seema-Rekha) - Class 9 - एकांकी - Rajeev Prakashan
- May 4
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Updated: May 6

पाठ का प्रकार: एकांकी
लेखक का नाम: विष्णु प्रभाकर
विधा: राष्ट्रीय चेतना प्रधान सामाजिक एकांकी
परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)
विषय | विवरण |
लेखक | विष्णु प्रभाकर (1912–2009) |
मुख्य पात्र | लक्ष्मीचंद्र (व्यापारी), शरतचंद्र (मंत्री), विजय (पुलिस कप्तान), सुभाष (जन-नेता) |
मुख्य समस्या | जनतंत्र में व्यवस्था और जन-आक्रोश के बीच का द्वंद्व |
प्रसिद्ध जीवनी | आवारा मसीहा (शरतचंद्र की जीवनी) |
मूल संदेश | जनतंत्र में सरकार और जनता के बीच कोई विभाजक रेखा नहीं होती |
1. लेखक परिचय (Author Introduction)
जन्म एवं स्थान: विष्णु प्रभाकर का जन्म सन् 1912 ई. में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरपुर जिले के मीरापुर गाँव में हुआ था। जीवन संघर्ष: आर्थिक कठिनाइयों के कारण आपने चतुर्थ श्रेणी की सरकारी नौकरी की, लेकिन अपनी मेधा से हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी में उच्च डिग्रियाँ प्राप्त कीं। साहित्यिक व्यक्तित्व: आप गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित थे। आपने उपन्यास, नाटक, कहानी और जीवनी जैसी कई विधाओं में लेखन किया। आपकी कालजयी कृति 'आवारा मसीहा' (शरतचंद्र की जीवनी) ने साहित्य जगत में धूम मचा दी थी। प्रमुख रचनाएँ:
नाटक: नवप्रभात, डॉक्टर, युगे युगे क्रांति।
एकांकी: इंसान, सीमा रेखा, स्वराज्य की नींव, लिपस्टिक की मुस्कान।
कहानी: धरती अब भी घूम रही है। निधन: सन् 2002 ई. में आपका देहावसान हुआ।
2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)
हिन्दी: 'सीमा-रेखा' एकांकी एक ही परिवार के चार भाइयों के माध्यम से स्वतंत्र भारत के चार अलग-अलग वर्गों के विचारों के टकराव को दर्शाती है। शहर में उग्र भीड़ पर पुलिस द्वारा गोली चलाने से तनाव पैदा हो जाता है। सबसे बड़ा भाई लक्ष्मीचंद्र (व्यापारी) और शरतचंद्र (उपमंत्री) व्यवस्था बनाए रखने के लिए गोली चलाने का समर्थन करते हैं, जबकि सुभाषचंद्र (जन-नेता) इसे बर्बरता मानता है। एकांकी में मोड़ तब आता है जब पता चलता है कि पुलिस की गोली से लक्ष्मीचंद्र का बेटा अरविंद मारा गया है। प्रायश्चित स्वरूप पुलिस कप्तान विजय अगली बार भीड़ पर गोली चलाने से मना कर देता है और शांति स्थापित करने के प्रयास में भीड़ द्वारा कुचल दिया जाता है। अंत में सुभाष और विजय दोनों के शव साथ आते हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि राष्ट्रहित में सरकार और जनता के बीच की कोई विभाजक रेखा नहीं होनी चाहिए।
English: The play 'Seema-Rekha' portrays the ideological conflict within a family of four brothers representing different sectors of post-independence India: a businessman, a minister, a police captain, and a public leader. Tensions rise when police open fire on a violent mob to protect public property. While the merchant and the minister justify the force, the public leader condemns it as an atrocity. The tragedy hits home when the merchant’s son, Arvind, falls victim to a police bullet. In a moment of ultimate sacrifice and remorse, Captain Vijay refuses to fire on the mob again, leading to his and Subhash's tragic deaths in the chaos. The play concludes that in a democracy, there is no boundary line (Seema-Rekha) between the government and its people.
3. मुख्य पात्रों का परिचय (Character Representation)
लक्ष्मीचंद्र: व्यापारी वर्ग का प्रतिनिधि, जो संपत्ति की रक्षा को प्राथमिकता देता है।
शरतचंद्र: शासन और नौकरशाही का प्रतिनिधि, जो कानून के राज में विश्वास करता है।
विजय: सुरक्षा तंत्र (पुलिस) का प्रतिनिधि, जो अंत में मानवता के लिए प्राणों का बलिदान देता है।
सुभाषचंद्र: जन-चेतना और विपक्ष का प्रतिनिधि, जो जनता के अधिकारों के लिए खड़ा है।
4. महत्वपूर्ण संवाद - व्याख्या (Key Dialogues & Explanation)
अंश 1: "अपना राज समझता कौन है? जब तक अपना राज नहीं समझेंगे, तब तक गोली चलेगी ही।"
प्रसंग: शरतचंद्र अपनी पत्नी अन्नपूर्णा से व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा करते समय यह कहते हैं।
व्याख्या: लेखक स्पष्ट करना चाहते हैं कि जब तक जनता शासन को अपना नहीं समझेगी और कानून हाथ में लेगी, तब तक टकराव और हिंसा की स्थिति बनी रहेगी।
अंश 2: "जनतंत्र में सरकार और जनता के बीच कोई विभाजक रेखा नहीं होती।"
प्रसंग: एकांकी के अंत में तीनों शवों को देखकर शरतचंद्र यह मार्मिक सत्य बोलते हैं।
व्याख्या: यह एकांकी का मुख्य संदेश है। लोकतंत्र में शासक और शासित अलग नहीं हैं; एक की क्षति पूरे देश और समाज की क्षति है।
5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)
शब्द | अर्थ | पर्यायवाची | विलोम |
अल्हड़
| बेपरवाह / नासमझ | भोला | समझदार |
मुअत्तिल
| निलंबित (Suspended) | बर्खास्त | बहाल |
विक्षिप्त
| पागल जैसा | विक्षुब्ध | संतुलित |
मदांध
| शक्ति के नशे में अंधा | गर्वीला | विनम्र |
निरीह
| निर्दोष / बेचारा | लाचार | सचेष्ट |
अंकुश
| नियंत्रण / रोक | पाबंदी | स्वच्छंदता |
क्षति
| नुकसान / हानि | हानि | लाभ |
बर्बर
| क्रूर / असभ्य | जघन्य | सभ्य |
6. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: अरविंद कौन था और उसकी मृत्यु कैसे हुई?
उत्तर: अरविंद व्यापारी लक्ष्मीचंद्र का 10 वर्षीय पुत्र था। वह भीड़ का हिस्सा नहीं था, लेकिन बाजार जाते समय पुलिस की गोली का शिकार हो गया।
प्रश्न 2: विजय ने दोबारा गोली चलाने से क्यों इनकार कर दिया?
उत्तर: अपने ही भतीजे अरविंद की मृत्यु से आहत होकर और अपराध बोध (ग्लानी) के कारण विजय ने निहत्थी भीड़ पर दोबारा गोली चलाने से इनकार कर दिया।
प्रश्न 3: सुभाषचंद्र की क्या माँग थी?
उत्तर: सुभाषचंद्र की माँग थी कि निहत्थी जनता पर गोली चलाने वाले पुलिस कप्तान को मुअत्तिल (निलंबित) किया जाए और घटना की निष्पक्ष जाँच हो।
प्रश्न 4: एकांकी के अंत में कौन-कौन शहीद हुए?
उत्तर: पुलिस कप्तान विजय और जन-नेता सुभाषचंद्र दोनों ही भीड़ को नियंत्रित करने और शांति स्थापित करने के प्रयास में शहीद हो गए।
7. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: 'सीमा-रेखा' एकांकी के शीर्षक की सार्थकता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: 'सीमा-रेखा' शीर्षक इस एकांकी के मूल भाव को पूर्णतः व्यक्त करता है। आरंभ में परिवार के चारों भाई अपने-अपने कार्यों और स्वार्थों की अलग-अलग सीमा-रेखाओं में बँधे थे—व्यापारी के लिए व्यापार, मंत्री के लिए शासन और नेता के लिए जनता प्रमुख थी। परंतु एकांकी का अंत इन सभी विभाजक रेखाओं को मिटा देता है। यह सिद्ध करता है कि जनतंत्र में सरकार और जनता के बीच की रेखा कृत्रिम है; वास्तव में दोनों एक ही राष्ट्र के अंग हैं। जब घर का बच्चा मरता है या भाई शहीद होता है, तो वह केवल एक वर्ग की नहीं बल्कि पूरे देश की क्षति बन जाती है।
प्रश्न 2: 'सीमा-रेखा' एकांकी के माध्यम से लेखक ने समाज को क्या संदेश दिया है?
उत्तर: लेखक ने इस एकांकी के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना और लोकतांत्रिक मूल्यों का संदेश दिया है। उन्होंने बताया है कि हिंसा और तोड़फोड़ कभी भी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकते। शासन को संवेदनशील होना चाहिए और जनता को कानून का सम्मान करना चाहिए। एकांकी यह महत्वपूर्ण सीख देती है कि अधिकार और कर्तव्य के बीच संतुलन आवश्यक है। अंततः, आपसी मनमुटाव और स्वार्थों को त्यागकर ही एक अखंड और सुरक्षित राष्ट्र का निर्माण संभव है, जहाँ सरकार और जनता मिलकर कार्य करें।
8. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)
प्रश्न 1: 'आवारा मसीहा' किसकी जीवनी है और इसके लेखक कौन हैं?
उत्तर: यह महान बाँग्ला लेखक शरतचंद्र की जीवनी है और इसके लेखक विष्णु प्रभाकर हैं।
प्रश्न 2: विजय और सुभाष के चरित्र में कौन सा प्रमुख अंतर था?
उत्तर: विजय कानून और व्यवस्था (प्रशासन) का रक्षक था, जबकि सुभाष जनता की आवाज़ और लोक-भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता था।
9. UP Board परीक्षा में अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)
5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:
एकांकी के आधार पर 'सविता' के चरित्र की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
6 अंक - गद्यांश व्याख्या:
"सब अंधे हैं। ताकत के अंधे! जो सामने आता है उसे कुचल देना चाहते हैं! चाहे वह धूल हो, चाहे पत्थर।"
2 अंक - लघु उत्तरीय:
'अंकुश लगना' मुहावरे का पाठ के संदर्भ में अर्थ स्पष्ट कीजिए।
मंत्रिमंडल की बैठक में कौन अनुपस्थित था? (उपमंत्री शरतचंद्र)
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