5.1. गुरुबानी - Gurubani - Class 12 - Yuvakbharati
- Apr 22
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Updated: Apr 25

कवि: गुरु नानक | विधा: पद
१. शब्दार्थ और मुहावरे (Glossary with English Context)
क. शब्दार्थ (Word Meanings)
शब्द | अर्थ (Hindi) | अर्थ (English Context) |
सऊ | ईश्वर | God/Divine |
मसि | स्याही | Ink |
अहिनिसि | दिन-रात | Day and Night |
गुपता | अप्रकट/गुप्त | Hidden/Unmanifest |
सकल | संपूर्ण | Entire/All |
बिसरे | भूले | To forget |
चितु | चित्त/मन | Mind/Consciousness |
जुग | युग | Era/Age |
भेरी | बड़ा ढोल | Large drum |
बुआड़ | बुआई करना | Sowing |
२. परिचय और सारांश (Introduction & Summary)
कवि परिचय: गुरु नानक जी (१४६९-१५३९) का जन्म तलवंडी में हुआ । आप सर्वेश्वरवादी थे और आपके व्यक्तित्व में समाज सुधारक, दार्शनिक और कवि के गुण समाहित हैं ।
केंद्रीय भाव (Central Idea):
हिन्दी: गुरु नानक जी ने गुरु की महिमा, उत्तम कर्मों की महत्ता और सच्ची शिक्षा के द्वारा मनुष्य के चरित्र निर्माण पर बल दिया है ।
English: Guru Nanak emphasizes the greatness of the Guru, the importance of good deeds, and the role of true education in building human character .
सारांश (Summary): गुरुबानी में गुरु नानक जी कहते हैं कि गुरु के बिना ज्ञान संभव नहीं है और गुरु का मार्गदर्शन ही शिष्य की असली पूँजी है । उन्होंने बाह्याडंबरों का विरोध करते हुए कहा कि मनुष्य की श्रेष्ठता उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके उत्तम कर्मों से सिद्ध होती है । कविता में ईश्वर की विराट आरती का वर्णन है, जिसमें आकाश थाल है और सूर्य-चंद्र दीपक के समान हैं । कवि के अनुसार, संसार में वे ही लोग विरले हैं जिन्हें एक क्षण के लिए भी ईश्वर का नाम नहीं विसरता । सच्ची लेखनी वही है जो गुरु की सलाह लेकर ईश्वर के गुणों का बखान करे ।
४. HSC पद्य आकलन (Poetry Pattern)
कृति १: पद्यांश आकलन (2 Marks)
प्रश्न १: संजाल पूर्ण कीजिए: नाम स्तुति के लिए ये आवश्यक हैं -
उत्तर: १. मोह को जलाकर स्याही बनाना २. बुद्धि को श्रेष्ठ कागज बनाना ३. प्रेम को कलम बनाना ४. चित्त को लेखक बनाना ।
प्रश्न २: आकाश के दीप:
उत्तर: १. रवि (सूर्य) २. चंद (चंद्रमा) ।
प्रश्न ३: गुरु के बिना इनकी स्थिति खेत में छूटे हुए तिल जैसी होती है:
उत्तर: जो अपने मन में स्वयं को चतुर समझते हैं और गुरु का ध्यान नहीं करते ।
कृति २: पद्य विश्लेषण / रसास्वादन (6 Marks)
शीर्षक: गुरुबानी ।
रचनाकार: गुरु नानक ।
केंद्रीय कल्पना: गुरु की महत्ता और निष्काम भक्ति के द्वारा चरित्र निर्माण ।
रस/अलंकार: इसमें 'भक्ति रस' और 'शांत रस' की प्रधानता है। 'गगन में काल रविचंद दीपक बने' में रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग है ।
प्रतीक विधान: 'स्याही' मोह के त्याग का, 'कागज' निर्मल बुद्धि का और 'आरती' ब्रह्मांडीय भक्ति का प्रतीक है ।
भाव पक्ष: कवि ने कर्मकांडों के स्थान पर मानसिक शुद्धि और नामस्मरण को प्राथमिकता दी है ।
कला पक्ष: यह 'पद' शैली में है, जो गेय है । भाषा में पंजाबी, फारसी और खड़ी बोली का मिश्रण है ।
७. व्याकरण (Grammar Corner)
शब्द संपदा (प्रत्यययुक्त शब्द):
१. दान -> दानी / दानवीर
२. दया -> दयालु / दयावान
३. गुण -> गुणी / गुणवान
४. अंतर -> आंतरिक
वचन परिवर्तन (Number Transformation):
१. हथकड़ी लगाकर अकबर बादशाह के दरबार को ले चले। (हथकड़ियाँ -> हथकड़ी)
२. चप्पे-चप्पे पर काँटे की झाड़ी है। (काँटों की झाड़ियाँ -> काँटे की झाड़ी)
३. उसकी समस्त खूबी कमी के साथ स्वीकार कर अपना लें। (खूबियों कमियों -> खूबी कमी)
४. शब्दों में अर्थ छुपे होते हैं। (शब्द -> शब्दों)
५. ओजोन विघटन का खतरा क्या है? (खतरे -> खतरा)
८. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न
प्रश्न १: गुरु नानक जी की भाषाशैली की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: आपकी काव्यभाषा में फारसी, मुल्तानी, पंजाबी, सिंधी और अरबी का मिश्रण है। आप सहज-सरल भाषा में अपनी बात कहने में सिद्धहस्त हैं ।
प्रश्न २: कवि के अनुसार 'सच्ची आरती' क्या है?
उत्तर: प्रकृति द्वारा निरंतर की जा रही आरती ही सच्ची आरती है, जिसमें आकाश थाल है, धूप सुगंध है और पवन चॅवर कर रहा है ।
प्रश्न ३: गुरु नानक जी की किन्हीं दो रचनाओं के नाम लिखिए।
उत्तर: १. गुरुग्रंथसाहिब २. जपुजी (प्रमुख कृति गुरुग्रंथसाहिब में संकलित हैं) ।
प्रश्न ४: "गुरु बिन ज्ञान न होई" उक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: मनुष्य के जीवन को उदात्त बनाने और आध्यात्मिक मार्ग पर चलने के लिए गुरु का मार्गदर्शन अनिवार्य है; गुरु ही अज्ञान का अँधेरा दूर करते हैं ।
प्रश्न ५: संसार किसका सम्मान करता है?
उत्तर: संसार मनुष्य की जाति का नहीं, अपितु उसके द्वारा किए गए उत्तम कर्मों का सम्मान करता है ।
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