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    9. चुनिंदा शेर - Chuninda Sher - Class 12 - Yuvakbharati

    • Apr 23
    • 4 min read

    Updated: Apr 25

    कवि: कैलाश सेंगर | विधा: गजल


    १. शब्दार्थ और मुहावरे (Glossary with English Context)

    क. शब्दार्थ (Word Meanings)


    शब्द

    अर्थ (Hindi)

    अर्थ (English Context)

    परिंदा

    पक्षी

    Bird

    घुन

    अनाज को खोखला करने वाला कीड़ा

    Weevil/Woodworm

    इन्कलाब

    क्रांति

    Revolution

    अषाढ़

    वर्षा ऋतु का एक महीना

    A month of rainy season

    इत्र

    सुगंधित तेल

    Perfume/Attar

    हुनर

    कौशल/कला

    Skill/Talent

    निरक्षर

    अनपढ़

    Illiterate

    साहूकार

    महाजन/कर्ज देने वाला

    Moneylender

    फकीर

    साधु/भिक्षु

    Mendicant/Ascetic

    जुगनू

    खद्योत

    Firefly

    ख. मुहावरे (Idioms)


    मुहावरा

    अर्थ (Meaning)

    वाक्य प्रयोग (Sentence Usage)

    चट्टानों पर फूल खिलाना

    कठिन परिश्रम से सफलता पाना

    हमारे सैनिकों ने रेगिस्तान में भी चट्टानों पर फूल खिला दिए हैं।


    सिर से पानी गुजर जाना

    सहने की सीमा समाप्त होना

    जब अन्याय सिर से पानी गुजर गया, तब जनता विद्रोह पर उतर आई।


    २. परिचय और सारांश (Introduction & Summary)


    कवि परिचय: कैलाश सेंगर (जन्म: १९५४, नागपुर) अपनी सहज-सरल हिंदुस्तानी भाषा और मौलिक प्रयोगों के लिए जाने जाते हैं । वे गजल के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं ।


    केंद्रीय भाव (Central Idea):

    • हिन्दी: इन शेरों के माध्यम से कवि ने सामाजिक अव्यवस्था, आम आदमी की विवशता और उसकी अनसुनी कराहों को वाणी दी है ।


    • English: Through these couplets, the poet voices social disorder, the helplessness of the common man, and their unheard cries .


    सारांश (Summary):  कैलाश सेंगर जी की गजलें यथार्थ की जमीन पर खड़ी हैं। कवि कहते हैं कि विपरीत परिस्थितियों में भी संघर्ष करना उन्हें आता है। वे व्यवस्था पर चोट करते हुए कहते हैं कि आज परिंदों (जनता) को शिकायत है कि उन्हें मिलने वाले दानों में भी भ्रष्टाचार का घुन लगा है । आम आदमी की स्थिति ऐसी है कि उसकी अपनी साँसें भी गिरवी रखे कंगन जैसी परायी लगती हैं । समाज में कोई भूखा है तो कोई ठंड से ठिठुर रहा है क्योंकि व्यवस्था की 'चादर' ठीक से नहीं बुनी गई है । कवि मज़दूर और निरक्षर व्यक्ति के भीतर छिपे क्रांतिकारी विचारों (इन्कलाब) को पहचानते हैं, जो भले ही पढ़ना न जानता हो, पर अपने भीतर रोज़ एक नई किताब (सपना) लिखता है ।


    ४. HSC पद्य आकलन (Poetry Pattern)


    कृति १: पद्यांश आकलन (2 Marks) 

    • प्रश्न १: लिखिए: परिंदों को यह शिकायत है कि -

      • उत्तर: उनके मालिक द्वारा दिए गए दानों में भी शायद घुन लगा है ।


    • प्रश्न २: नदी के प्रति उत्तरदायित्व:

      • १. उसे माँ कहकर पूजने वालों को उसे साफ़ (बँगाल) कर लेना चाहिए ।

      • २. उसमें लाशें मिलने जैसी गंदगी को रोकना चाहिए ।


    • प्रश्न ३: परिणाम लिखिए:

      • १. पानी सर से गुजर जाएगा तो: वह सीने में नई आग (विद्रोह) लगाएगा ।

      • २. कवि जिंदगी के सवालों में खो गए तो: सारे जवाब उजालों में खो गए ।


    कृति २: पद्य विश्लेषण / रसास्वादन (6 Marks)

    • शीर्षक: चुनिंदा शेर।

    • रचनाकार: कैलाश सेंगर।

    • केंद्रीय कल्पना: सामाजिक विडंबनाओं और आम आदमी के संघर्ष का चित्रण।

    • रस/अलंकार: इसमें 'करुण रस' और 'शांत रस' का मिश्रण है। रूपक और विरोधाभास अलंकारों का सुंदर प्रयोग मिलता है।

    • प्रतीक विधान: 'चट्टान' बाधाओं का, 'जुगनू' छोटी आशा का और 'घुन' भ्रष्टाचार का प्रतीक है ।

    • भाव पक्ष: कवि अत्यंत संवेदनशील हैं। वे समाज के अंतिम व्यक्ति (मज़दूर) की वेदना को शब्दों में पिरोते हैं। उनका मानना है कि दुःख को हँसी के मुखौटे से छिपाना दुनिया की रीत बन गई है ।

    • कला पक्ष: गजल उर्दू का लोकप्रिय काव्य प्रकार है । सेंगर जी ने इसे हिंदुस्तानी भाषा में ढालकर यथार्थवादी बना दिया है ।


    ७. व्याकरण (Grammar Corner)

    काल परिवर्तन (Tense Change): 

    • १. एक-एक क्षण आपको भेंट कर देता हूँ। (सामान्य भविष्यकाल)

      • उत्तर: एक-एक क्षण आपको भेंट कर दूँगा।


    • २. बैजू का लहू सूख गया है। (सामान्य भूतकाल)

      • उत्तर: बैजू का लहू सूख गया।


    • ३. यात्रा की तिथि भी आ गई। (सामान्य वर्तमानकाल)

      • उत्तर: यात्रा की तिथि भी आ जाती है।


    • ४. सुधारक आते हैं। (पूर्ण भूतकाल)

      • उत्तर: सुधारक आए थे।


    • ५. मन बहुत दुखी हुआ था। (अपूर्ण भूतकाल)

      • उत्तर: मन बहुत दुखी हो रहा था।


    ८. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न

    • प्रश्न १: कैलाश सेंगर जी के गजल संग्रह का नाम लिखिए।

      • उत्तर: 'सूरज तुम्हारा है' ।


    • प्रश्न २: "साँस हमारी हमें पराये धन-सी लगती है" पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।

      • उत्तर: कवि कहते हैं कि गरीब आदमी का अपनी साँसों पर भी अधिकार नहीं है; उसका जीवन साहुकार के कर्ज के नीचे दबा है, जैसे कोई गिरवी रखा कंगन हो ।


    • प्रश्न ३: "चट्टानों पर फूल खिलाना" मुहावरे का गजल के संदर्भ में अर्थ क्या है?

      • उत्तर: इसका अर्थ है कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपनी मेहनत और जज्बे से खुशहाली और सफलता प्राप्त करना ।


    • प्रश्न ४: गजल विधा के बारे में संक्षिप्त जानकारी दीजिए।

      • उत्तर: गजल उर्दू का लोकप्रिय काव्य प्रकार है जो शेरों से मिलकर बनती है। हिंदी में यह यथार्थवादी विषयों को व्यक्त करने का माध्यम बनी है ।


    • प्रश्न ५: कवि ने 'चादरों' को ढंग से बुनने के लिए किसे और क्यों कहा है?

      • उत्तर: कवि ने ईश्वर (मालिक) से प्रार्थना की है कि समाज में आर्थिक विषमता दूर हो, जहाँ किसी का सर खुला है तो किसी के पाँव बाहर हैं ।


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