1.0. हिंदी पद्य साहित्य का विकास - Hindi Padya Sahitya ka Vikas - Class 10 - Rajeev Prakashan
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1. रीतिकाल (सन् 1643 - 1843 ई.)
रीतिकाल को 'उत्तरमध्य काल' , 'शृंगार काल' , 'अलंकार काल' और 'कला काल' जैसे विभिन्न नामों से जाना जाता है। 'रीति' का अर्थ काव्य-रचना की पद्धति या प्रणाली है ।
प्रमुख काव्य धाराएँ:
रीतिबद्ध: इन कवियों ने काव्यशास्त्र के नियमों (लक्षण-ग्रंथों) के आधार पर रचनाएँ कीं । प्रमुख कवि: केशवदास, मतिराम, देव, भिखारीदास ।
रीतिसिद्ध: इन्होंने काव्यशास्त्र के नियमों का पालन तो किया, पर अलग से लक्षण-ग्रंथ नहीं लिखे । प्रमुख कवि: बिहारीलाल ।
रीतिमुक्त: ये कवि काव्यशास्त्रीय परंपरा से मुक्त होकर स्वच्छंद रूप से काव्य सृजन करते थे । प्रमुख कवि: घनानंद, बोधा, आलम, ठाकुर ।
प्रमुख विशेषताएँ (प्रवृत्तियाँ):
ब्रजभाषा की प्रधानता और साहित्यिक उन्नति ।
शृंगार रस की प्रधानता (संयोग एवं वियोग दोनों पक्ष) ।
काव्यांग विवेचन (रस, अलंकार, छंद, नायिका भेद) ।
प्रकृति का उद्दीपक रूप में चित्रण ।
2. आधुनिक काल (सन् 1843 ई. से अब तक)
विद्वानों ने इसे 'पुनर्जागरण काल' या 'गद्य काल' भी कहा है । इसे प्रमुखतः निम्नलिखित युगों में बाँटा गया है:
क. भारतेंदु युग (सन् 1868 - 1900)
इसे 'नवजागरण काल' भी कहते हैं । भारतेंदु हरिश्चंद्र को 'आधुनिक हिंदी का जन्मदाता' माना जाता है ।
विशेषताएँ: राष्ट्रीयता की भावना, सामाजिक चेतना, और हास्य-व्यंग्य शैली ।
प्रमुख कवि: भारतेंदु हरिश्चंद्र, प्रतापनारायण मिश्र, बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' ।
ख. द्विवेदी युग (सन् 1900 - 1918)
इसे 'जागरण सुधार काल' कहा जाता है । आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी के नाम पर इसका नामकरण हुआ ।
विशेषताएँ: खड़ी बोली की प्रतिष्ठा, मानवतावादी दृष्टिकोण, और नैतिकता पर बल ।
प्रमुख रचनाएँ: मैथिलीशरण गुप्त कृत 'साकेत' और अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' कृत 'प्रियप्रवास' ।
ग. छायावाद (सन् 1918 - 1936)
विशेषताएँ: वैयक्तिक अनुभूति (आत्मपरकता), प्रकृति का मानवीकरण, और नारी सौंदर्य का चित्रण ।
प्रमुख कवि (चार स्तंभ): जयशंकर प्रसाद ('कामायनी'), सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' ('राम की शक्तिपूजा'), महादेवी वर्मा ।
घ. प्रगतिवाद (सन् 1936 - 1943)
इसने छायावाद की सूक्ष्म कल्पना का विरोध कर स्थूल जगत की वास्तविकता पर ध्यान दिया ।
विशेषताएँ: शोषक वर्ग के प्रति विद्रोह, शोषितों के प्रति सहानुभूति, और यथार्थवाद ।
प्रमुख कवि: नागार्जुन, दिनकर, केदारनाथ अग्रवाल ।
ङ. प्रयोगवाद एवं नई कविता (सन् 1943 से अब तक)
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' के 'तारसप्तक' (1943) से प्रयोगवाद का आरंभ माना जाता है ।
विशेषताएँ: नवीन उपमानों का प्रयोग, बौद्धिकता, और लघु मानववाद की प्रतिष्ठा ।
प्रमुख कवि: अज्ञेय, गजानन माधव 'मुक्तिबोध', धर्मवीर भारती, भवानीप्रसाद मिश्र ।
3. महत्त्वपूर्ण कवि और उनकी रचनाएँ (Table)
कवि | प्रमुख रचनाएँ |
केशवदास | रामचंद्रिका, कविप्रिया |
बिहारीलाल | बिहारी-सतसई |
भूषण | शिवराज भूषण, शिवा बावनी, छत्रसाल दशक |
मतीराम | रसराज, ललित-ललाम, मतीराम सतसई |
पद्माकर | पद्माभरण, जगद्विनोद, गंगालहरी |
जयशंकर प्रसाद | कामायनी, लहर, झरना, आँसू |
अज्ञेय | हरी घास पर क्षण भर, आँगन के पार द्वार, इन्द्रधनुष रौंदे हुए ये |
महादेवी वर्मा | यामा, नीरजा, दीपशिखा |
मैथिलीशरण गुप्त | साकेत, भारत-भारती, यशोधरा |
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