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    1.3. सवैया एवं कवित्त - Savaiya and Kavitta - Class 10 - पद्य-खंड - Rajeev Prakashan

    • 4 days ago
    • 4 min read

    • पाठ का प्रकार: पद्य-खंड (काव्य)   

    • लविधा: सवैया एवं कवित्त   


    परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)

    विषय

    विवरण

    कवि

    रसखान (वास्तविक नाम: सैयद इब्राहिम)

    जन्म वर्ष

    सन् 1533 ई. (लगभग)

    प्रमुख रचनाएँ

    सुजान-रसखान, प्रेमवाटिका

    भक्ति शाखा

    सगुण कृष्णभक्ति शाखा

    भाषा

    शुद्ध और साहित्यिक ब्रजभाषा

    प्रसिद्ध उक्ति

    'इन मुसलमान हरि जनन पर, कोटिक हिंदू वारिए' (भारतेंदु)

    मुख्य रस

    शृंगार, वात्सल्य और भक्ति

    1. लेखक परिचय (Author Introduction)

    • जन्म एवं स्थान: रसखान का जन्म सन् 1533 ई. के आसपास माना जाता है। कुछ विद्वान इनका जन्म स्थान पिहानी, हरदोई (उ.प्र.) मानते हैं। ये दिल्ली के पठान सरदार थे।   


    • गुरु: गोस्वामी विट्ठलनाथ जी।   


    • साहित्यिक व्यक्तित्व: रसखान प्रेम और शृंगार के कवि हैं। इनका प्रेम श्रीकृष्ण के प्रति अलौकिक था और वे ब्रज के प्राकृतिक सौंदर्य पर मुग्ध थे।   


    • प्रमुख रचनाएँ:

      • सुजान-रसखान: सवैया और घनाक्षरी छंदों का संग्रह।   

      • प्रेमवाटिका: दोहा छंद में रचित काव्य (रचना काल 1614 ई.)।   


    • निधन: सन् 1628 ई. के लगभग।   


    2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)


    हिन्दी: संकलित 'सवैया' छंदों में रसखान ने श्रीकृष्ण और ब्रजभूमि के प्रति अपनी अटूट भक्ति प्रकट की है। वे हर जन्म में (चाहे वे मनुष्य, पशु, पत्थर या पक्षी बनें) कृष्ण के सान्निध्य में ब्रज में ही रहना चाहते हैं। कवि ने कृष्ण के मनमोहक बाल-सौंदर्य, उनकी मुरली के प्रभाव और गोपियों की विरह-व्याकुलता का सजीव चित्रण किया है।   

    English: In the compiled 'Sawaiya' verses, Raskhan expresses his deep devotion to Lord Krishna and the land of Braj. He wishes to reside in Braj in every birth, whether as a human, animal, stone, or bird, to stay close to Krishna. The poet vividly describes Krishna's enchanting childhood beauty, the magical influence of his flute, and the intense longing of the Gopis.   


    3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)

    इस पाठ का मूल संदेश कृष्ण-भक्ति और समर्पण है।  रसखान के अनुसार, ईश्वर की समीपता प्राप्त करना ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है। वे कृष्ण से जुड़ी हर वस्तु (जैसे मुरली, लकुटी, पीतांबर) को अत्यधिक महत्व देते हैं।   

    4. पद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Critical Verses)


    महत्वपूर्ण अंश 1: "मानुष हौं तो वही रसखानि... कदंब की डारन।"   


    • (क) सन्दर्भ: प्रस्तुत सवैया हमारी पाठ्यपुस्तक के 'सवैया' शीर्षक से लिया गया है। इसके रचयिता रसखान हैं।   

    • (ख) प्रसंग: कवि अगले जन्म में भी कृष्ण की जन्मभूमि ब्रज में रहने की इच्छा व्यक्त कर रहे हैं।   

    • (ग) व्याख्या: रसखान कहते हैं कि यदि मैं मनुष्य बनूँ तो ब्रज के गोकुल गाँव के ग्वालों के बीच रहूँ। यदि पशु बनूँ तो नंद की गायों के बीच चरूँ। यदि पत्थर बनूँ तो उसी गोवर्धन पर्वत का हिस्सा बनूँ जिसे कृष्ण ने अपनी उँगली पर उठाया था। और यदि पक्षी बनूँ तो यमुना किनारे कदम्ब के पेड़ों की डालियों पर बसेरा करूँ।   

    • (घ) काव्यगत विशेषता:

      • अलंकार: अनुप्रास अलंकार।   

      • रस: भक्ति रस।   


    महत्वपूर्ण अंश 2: "धूरि भरे अति सोभित स्यामजू... माखन-रोटी।"   


    • (क) सन्दर्भ: पूर्ववत्।

    • (ख) प्रसंग: श्रीकृष्ण के बाल-सौंदर्य का अनुपम वर्णन।   

    • (ग) व्याख्या: धूल से सने हुए श्याम वर्ण के कृष्ण अत्यधिक सुंदर लग रहे हैं और वैसी ही सुंदर उनकी चोटी बनी हुई है। वे आँगन में खेलते-खाते फिर रहे हैं और उनके पैरों की पैंजनी बज रही है।  उस छवि को देखकर कामदेव भी अपनी करोड़ों कलाएँ न्यौछावर कर देता है। रसखान कहते हैं कि उस कौवे के भाग्य कितने बड़े हैं जो कृष्ण के हाथ से माखन-रोटी छीन ले गया।   


    5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)

    शब्द

    अर्थ

    पर्यायवाची

    विलोम

    पाहन

    पत्थर / पाषाण

    प्रस्तर, शिला

    कोमल

    पुरंदर

    इंद्र

    देवराज, सुरेश

    ---

    कालिंदी

    यमुना नदी

    तरणिजा, भानुजा

    ---

    धेनु

    गाय

    गऊ, सुरभि

    ---

    खग

    पक्षी

    विहग, नभचर

    ---

    सिगरो

    सम्पूर्ण / सारा

    समस्त, निखिल

    अल्प

    6. सही या गलत (True or False)

    • कथन 1: रसखान का वास्तविक नाम सैयद इब्राहिम था।   

      • उत्तर: सही।


    • कथन 2: रसखान ने 'रामचरितमानस' की रचना की है।

      • उत्तर: गलत। कारण: 'रामचरितमानस' की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने की थी।   


    • कथन 3: गोपियाँ कृष्ण की मुरली को अपनी सखी समझती थीं।   

      • उत्तर: गलत। कारण: वे मुरली को अपनी सौत (शत्रु) समझती थीं।   


    7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answers - 2 अंक)

    • प्रश्न 1: रसखान ने पशु के रूप में जन्म लेने पर क्या इच्छा जताई है?

      • उत्तर: पशु के रूप में जन्म लेने पर वे बाबा नंद की गायों के बीच चरने की इच्छा रखते हैं।   


    • प्रश्न 2: 'डिठौनहिं' शब्द का क्या अर्थ है?

      • उत्तर: इसका अर्थ है बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए लगाया गया 'काला टीका'।   


    • प्रश्न 3: गोपियाँ ब्रज छोड़कर क्यों भागना चाहती हैं?

      • उत्तर: क्योंकि कृष्ण पूरी तरह से मुरली के वश में हो गए हैं और गोपियों को लगता है कि अब ब्रज में केवल मुरली ही रहेगी।   


    8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answers - 5 अंक)

    • प्रश्न: रसखान के काव्यगत सौंदर्य (साहित्यिक अवदान) पर प्रकाश डालिए।   


      • उत्तर: रसखान के काव्य में भाव और भाषा का अद्भुत संगम है:

        1. भाव-सौंदर्य: वे कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम रखते हैं। उनके काव्य में भक्ति, शृंगार और वात्सल्य रस की प्रधानता है।   

        2. भाषा-शैली: रसखान की भाषा शुद्ध और परिमार्जित ब्रजभाषा है। उन्होंने परंपरागत पद-शैली के बजाय सवैया, कवित्त और दोहा छंदों का प्रयोग किया है।   

        3. अलंकार: उनके काव्य में अनुप्रास, यमक, रूपक और उत्प्रेक्षा अलंकारों का सहज प्रयोग मिलता है।   

        4. लोकप्रियता: उनकी सरल और मधुर वाणी के कारण ही भारतेंदु हरिश्चंद्र ने उन्हें महान भक्त कवि माना।   


    9. व्याकरण (Grammar)


    • समास-विग्रह:   

      • बालपतंग: बाल रूपी पतंग (सूर्य) (कर्मधारय)

      • त्रिभुवन: तीन भुवनों का समूह (द्विगु)

      • पर्णकुटी: पत्तों से बनी कुटी (तत्पुरुष)


    • खड़ी बोली रूप:   

      • करोर: करोड़

      • काग: कौआ

      • लकुटी: छोटी लाठी

      • सिगरो: सम्पूर्ण / सारा


    10. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न

    • प्रश्न 1: रसखान किसके शिष्य थे?

      • उत्तर: गोस्वामी विट्ठलनाथ जी के।   


    • प्रश्न 2: 'मोर-पखा सिर ऊपर राखिहौं' पंक्ति में कौन सा भाव व्यक्त हुआ है?   

      • उत्तर: इसमें गोपियों का कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और उनके जैसा रूप धारण करने की इच्छा (अनुकरण) व्यक्त हुई है।   

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