1.7. चींटी एवं चंद्रलोक में प्रथम बार - Cheenti or Chandralok mein Pratham Baar - Class 10 - पद्य-खंड - Rajeev Prakashan
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पाठ का प्रकार: पद्य-खंड (काव्य)
लेखक का नाम: सुमित्रानंदन पंत
विधा: छायावादी एवं प्रगतिवादी कविता
शीर्षक: चींटी एवं चंद्रलोक में प्रथम बार
परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)
विषय | विवरण |
कवि | सुमित्रानंदन पंत |
जन्म वर्ष | सन् 1900 ई. |
जन्म स्थान | कौसानी, अल्मोड़ा (उत्तराखंड) |
उपाधि | प्रकृति के सुकुमार कवि |
मुख्य सम्मान | ज्ञानपीठ (चिदम्बरा हेतु), पद्मभूषण, साहित्य अकादमी |
काव्य विकास | छायावादी, प्रगतिवादी और आध्यात्मवादी |
भाषा | कोमलकांत पदावली युक्त खड़ी बोली |
1. लेखक परिचय (Author Introduction)
जन्म एवं लालन-पालन: सुमित्रानंदन पंत का जन्म सन् 1900 ई. में अल्मोड़ा के कौसानी ग्राम में हुआ था । जन्म के कुछ समय बाद ही माता का निधन हो जाने के कारण इनका पालन-पोषण प्रकृति की गोद में हुआ, जिसका गहरा प्रभाव इनके काव्य पर पड़ा ।
शिक्षा एवं नाम परिवर्तन: आपकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में हुई। अल्मोड़ा में पढ़ते समय इन्होंने अपना नाम 'गुसाईंदत्त' से बदलकर 'सुमित्रानंदन पंत' रख लिया ।
साहित्यिक यात्रा: सन् 1921 में असहयोग आंदोलन के कारण कॉलेज छोड़कर आप पूर्णतः साहित्य साधना में लग गए । आपने 'रूपाभ' पत्रिका का संपादन किया और ऑल इंडिया रेडियो में परामर्शदाता भी रहे ।
प्रमुख रचनाएँ: वीणा, ग्रंथि, पल्लव, गुंजन, युगांत, युगवाणी, ग्राम्या, स्वर्णधूलि, कला और बूढ़ा चाँद, लोकायतन, चिदम्बरा ।
निधन: सन् 1977 ई. ।
2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)
हिन्दी:'चींटी' कविता (युगवाणी से) में कवि ने चींटी जैसे लघु जीव को एक 'सुनागरिक' और 'श्रमजीवी' के रूप में प्रस्तुत किया है । वह निरंतर कार्य करती है और सामाजिक सामंजस्य का संदेश देती है। 'चंद्रलोक में प्रथम बार' कविता में मानव के चंद्रमा पर कदम रखने को एक ऐतिहासिक क्षण मानकर कवि ने विश्व में शांति, सद्भाव और भेदभाव रहित मानवतावादी समाज की कामना की है ।
English: In the poem 'Cheenti', Pant presents the ant as a 'good citizen' and a 'diligent worker'. Despite its small size, it works tirelessly, teaching us the value of social harmony. In 'Chandralok Mein Pratham Baar', the poet celebrates man's first step on the moon as a historic milestone and prays for a world filled with peace, discarding hatred and national boundaries .
3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)
इस पाठ का मूल संदेश कर्मठता और वैश्विक एकता है। 'चींटी' के माध्यम से कवि मनुष्य को बिना थके सतत कार्य करने की प्रेरणा देते हैं । वहीं, चंद्र विजय के माध्यम से वे विज्ञान का उपयोग विनाश (अणु-युद्ध) के बजाय 'स्वर्ग सृजन' और मानवता की सेवा के लिए करने का संदेश देते हैं ।
4. पद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Critical Verses)
महत्वपूर्ण अंश 1: "चींटी को देखा? ... वह है पिपीलिका पाँति!"
(क) सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के 'चींटी' शीर्षक से लिया गया है। इसके रचयिता सुमित्रानंदन पंत हैं।
(ख) प्रसंग: कवि चींटी की गति और उसके लघु स्वरूप का वर्णन कर रहे हैं।
(ग) व्याख्या: कवि पूछते हैं कि क्या तुमने चींटी को देखा है? वह एक सरल, विरल और काली रेखा के समान दिखाई देती है, जो अंधेरे के धागे सी हिलती-डुलती अपने छोटे पैरों से मिल-जुल कर चलती है । वह चींटियों की एक पंक्ति (पिपीलिका पाँति) है ।
(घ) काव्यगत विशेषता:
अलंकार: 'तम के तागे सी' में उपमा अलंकार है ।
महत्वपूर्ण अंश 2: "अणु-युग बने धरा जीवन हित... भू-राष्ट्र करें आत्मार्पण।"
(क) सन्दर्भ: शीर्षक— 'चंद्रलोक में प्रथम बार'।
(ख) प्रसंग: विज्ञान के रचनात्मक उपयोग और विश्व बंधुत्व की कामना।
(ग) व्याख्या: कवि मंगल कामना करते हैं कि यह परमाणु युग (अणु-युग) पृथ्वी पर जीवन के कल्याण और स्वर्ग के निर्माण का साधन बने 。 विश्व का सबसे बड़ा सत्य 'मानवता' होनी चाहिए और सभी राष्ट्रों को आपसी भेदभाव भूलकर मानवता के प्रति समर्पित (आत्मार्पण) हो जाना चाहिए ।
5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)
शब्द | अर्थ | पर्यायवाची | विलोम |
पिपीलिका | चींटी | चिनगी, द्विज | --- |
अविरत | बिना रुके | निरंतर, सतत | रुक-रुक कर |
दुर्जय | जिसे जीतना कठिन हो | अजेय | सुजय |
श्यामल | हरा-भरा | साँवला, कृष्ण | श्वेत |
धरा | पृथ्वी | भू, वसुधा | गगन |
विषाद | दुःख | संताप, शोक | हर्ष |
6. सही या गलत (True or False)
कथन 1: सुमित्रानंदन पंत को 'प्रकृति का सुकुमार कवि' कहा जाता है।
उत्तर: सही ।
कथन 2: 'चींटी' कविता 'पल्लव' काव्य-संग्रह से ली गई है।
उत्तर: गलत । कारण: यह 'युगवाणी' से ली गई है।
कथन 3: पंत जी को 'चिदम्बरा' के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला।
उत्तर: सही ।
7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answers - 2 अंक)
प्रश्न 1: कवि ने चींटी को 'सामाजिक प्राणी' क्यों कहा है?
उत्तर: क्योंकि वह मिल-जुलकर रहती है, अपनी सेना सँवारती है, घर-आँगन साफ करती है और अनुशासन का पालन करती है ।
प्रश्न 2: 'चंद्रलोक में प्रथम बार' मानव के पदार्पण पर कवि क्या मंगल कामना करता है?
उत्तर: कवि कामना करता है कि पृथ्वी के देशों का विरोध शांत हो, सब जन निकट आएँ और धरती पर सुख-संपदा की वर्षा हो ।
प्रश्न 3: 'हृदय-सिंधु' में कौन सा अलंकार है?
उत्तर: इसमें रूपक अलंकार है, क्योंकि हृदय पर समुद्र (सिंधु) का आरोप किया गया है ।
8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answers - 5 अंक)
प्रश्न: सुमित्रानंदन पंत की भाषा-शैली की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: पंत जी की भाषा-शैली अद्वितीय है:
कोमलकांत पदावली: उनकी भाषा में अत्यंत कोमलता और मधुरता है ।
चित्रमयी भाषा: वे शब्दों के माध्यम से आँखों के सामने चित्र (बिंब) खींच देते हैं ।
खड़ीबोली का परिमार्जन: उन्होंने खड़ीबोली को ब्रजभाषा जैसी सरसता प्रदान की ।
गीतात्मकता: उनकी शैली मुक्तक और संगीतात्मक है, जिसे आसानी से गाया जा सकता है ।
9. व्याकरण (Grammar)
उपसर्ग पहचानें:
सुनागरिक: सु
उपग्रह: उप
अक्षय: अ
प्रत्यय अलग करें:
सामाजिक: समाज + इक
मानवता: मानव + ता
ऐतिहासिक: इतिहास + इक
संधि-विच्छेद:
समारंभ: सम् + आरम्भ
10. UP Board परीक्षा हेतु अपेक्षित प्रश्न
व्याख्या हेतु: "वह है पिपीलिका पाँति... कन-कन करके चुनती अविरत!"
काव्य सौंदर्य: "हृदय-सिंधु में उठता, स्वर्गिक ज्वार देख चंद्रानन!"
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