top of page

    10. परीक्षा - Pariksha - CBSE - Std 6 - Malhar

    Oct 13
    8 min read

    Updated: 6 days ago

    SECTION 1 – पाठ परिचय | Lesson Introduction


    • पाठ संख्या: 10

    • पाठ का नाम: परीक्षा

    • रचनाकार: प्रेमचंद

    • पुस्तक: मल्हार

    • कक्षा: 6

    • विषय: हिंदी

    • विधा: कहानी मुख्य

    • विषय: वास्तविक योग्यता, कर्तव्य-परायणता, दया और आत्मबल की परख  

     

    एक वाक्य में पाठ यह कहानी दर्शाती है कि उच्च प्रशासनिक पद के लिए केवल डिग्री या बाहरी दिखावा पर्याप्त नहीं होता, बल्कि संकट में फँसे असहाय के प्रति दया, निस्वार्थ सेवा और सच्चा आत्मबल ही मनुष्य की वास्तविक योग्यता है।   


    SECTION 2 – इस पाठ से आप क्या सीखेंगे? | What Will You Learn?


    1. कहानी के प्रमुख घटना-क्रम और पात्रों के व्यवहार के पीछे के कारणों को समझ सकेंगे।   

    2. डिग्री या डिग्रियों के आडंबर और वास्तविक मानवीय गुणों (दया, साहस, कर्तव्य) के बीच का अंतर स्पष्ट कर सकेंगे।   

    3. पाठ में आए मुहावरों, कहावतों और भाववाचक संज्ञाओं की पहचान कर उनका वाक्य में प्रयोग कर सकेंगे।   

    4. यह कारण समझा सकेंगे कि सरदार सुजानसिंह ने केवल पंडित जानकीनाथ को ही दीवान पद के लिए सर्वथा योग्य क्यों चुना।   


    SECTION 3 – रचनाकार परिचय | Author Introduction


    मुंशी प्रेमचंद (1880–1936) हिंदी साहित्य के युगप्रवर्तक कथाकार और 'कथा-सम्राट' के रूप में विख्यात हैं। उनका वास्तविक नाम धनपतराय था। उन्होंने समाज-सुधार, मानवीय संवेदना और राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत सैकड़ों अमर कहानियाँ और कई कालजयी उपन्यास लिखे। 'ईदगाह', 'बड़े भाई साहब', 'दो बैलों की कथा' और 'गुल्ली डंडा' उनकी अत्यंत लोकप्रिय रचनाएँ हैं। आम जन-जीवन के यथार्थ और मनुष्य के अंतर्मन की सूक्ष्म परीक्षा को अत्यंत स्वाभाविक व सजीव शैली में प्रस्तुत करना उनकी प्रमुख विशेषता है।   


    SECTION 4 – पाठ की रूपरेखा | Outline of the Lesson


    1. दीवान सुजानसिंह की सेवा-निवृत्ति और राजा की शर्त – चालीस वर्ष की निष्कलंक सेवा के बाद वृद्ध दीवान का पद छोड़ना और राजा द्वारा नया दीवान खोजने का दायित्व उन्हीं को सौंपना।   

    2. अनोखा विज्ञापन और उम्मीदवारों का आगमन – समाचार पत्रों में कर्तव्य और आचार-विचार की परीक्षा का विज्ञापन निकलना तथा देश भर से ग्रेजुएटों व युवाओं का देवगढ़ पहुँचना।   

    3. एक महीने का दिखावा और बगुला-भगत रूप – उम्मीदवारों द्वारा नौकरी पाने के लिए बनावटी सादगी, नम्रता, धार्मिकता और सदाचार का प्रदर्शन करना।   

    4. हॉकी का खेल और नाले में फँसा किसान – आधुनिक खेल के बाद संध्या समय एक वृद्ध किसान की अनाज से भरी गाड़ी का कीचड़ भरे नाले में फँस जाना।   

    5. स्वार्थी उम्मीदवारों की उपेक्षा और जानकीनाथ की मदद – चोटिल और लँगड़ाते होने के बावजूद पंडित जानकीनाथ द्वारा दलदल में उतरकर गाड़ी को बाहर निकालना।   

    6. दरबार में अंतिम घोषणा – सरदार सुजानसिंह द्वारा सभी के सामने दया, साहस और अटूट आत्मबल के धनी पंडित जानकीनाथ को दीवान घोषित करना।   


    SECTION 5 – पाठ का सारांश | Summary


    'परीक्षा' देवगढ़ रियासत के नए दीवान के चुनाव पर आधारित एक अत्यंत विचारोत्तेजक कहानी है। रियासत के अनुभवी दीवान सरदार सुजानसिंह वृद्ध होने पर सेवा-मुक्त होना चाहते थे। राजा साहब ने उनसे ही नया दीवान ढूँढ़ने को कहा। समाचार पत्रों में ऐसा विज्ञापन निकाला गया जिसमें डिग्रियों की जगह आचरण, कर्तव्य और स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई। देश भर से सैकड़ों उम्मीदवार देवगढ़ पहुँचे और एक महीने तक सबने अपने दुर्गुण छिपाकर नम्रता, सदाचार और सेवा का झूठा नाटक किया।   


    एक दिन हॉकी मैच समाप्त होने के बाद, शाम के समय एक गरीब किसान की अनाज से भरी गाड़ी कीचड़ भरे नाले में फँस गई। अधिकांश उम्मीदवार किसान को असहाय देखकर भी मुँह फेरकर चले गए। परंतु खेल में चोट खाए पंडित जानकीनाथ ने अपनी पीड़ा भूलकर दलदल में घुटनों तक उतरकर गाड़ी को नाले से बाहर निकाला। वह किसान वास्तव में स्वयं भेष बदले सरदार सुजानसिंह थे। चुनाव के दिन दरबार में सुजानसिंह ने घोषणा की कि जिस व्यक्ति में विपत्ति का सामना करने का आत्मबल और गरीबों के प्रति सच्ची दया है, वही रियासत का सच्चा दीवान हो सकता है, और उन्होंने जानकीनाथ को दीवान पद सौंप दिया।  



    SECTION 6 – पाठ को समझें | Understand the Lesson


    दिखावे का आचरण बनाम आंतरिक गुण उम्मीदवार जानते थे कि एक महीने तक उनके रहन-सहन पर नजर रखी जा रही है, इसलिए देर से उठने वाले भोर में टहलने लगे और नौकरों को डाँटने वाले अचानक अत्यंत विनीत बन गए। यह दर्शाता है कि लोग स्वार्थ सिद्धि के लिए कितनी सरलता से सदाचार का मुखौटा पहन लेते हैं। परंतु चतुर जौहरी सुजानसिंह इन बगुलों में असली हंस की तलाश कर रहे थे।   

    English Support: The candidates put on a false display of politeness and virtue to secure the job, but true character cannot be judged by temporary pretenses.  

     

    कठिन परिस्थिति में परीक्षा असली परीक्षा कक्षा या कागजों पर नहीं, बल्कि जीवन की अप्रत्याशित परिस्थितियों में हुई। नाले में फँसी गाड़ी और बेबस किसान को देखकर अधिकांश शिक्षित युवाओं में केवल स्वार्थ और दर्प दिखाई दिया, करुणा नहीं। खेल में पैर में चोट लगने के बावजूद केवल जानकीनाथ का हृदय उस असहाय किसान की व्यथा देखकर पसीजा।   

    English Support: The true test occurred unexpectedly at the muddy ditch, where most educated young men walked past indifferently, while only Janki Nath stopped to help despite his injury.   


    सच्चे शासक की कसौटी सरदार सुजानसिंह ने स्पष्ट किया कि दीवान के पद पर ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है जिसके पास न केवल विद्या हो, बल्कि संकट का सामना करने का साहस और प्रजा के प्रति सच्ची हमदर्दी हो। जो व्यक्ति स्वयं घायल होकर भी किसी अनजान गरीब को दलदल से निकाल सकता है, वह कभी सत्ता के नशे में गरीबों पर अत्याचार नहीं करेगा।   

    English Support: An ideal leader must possess courage, selfless empathy, and resilience, ensuring that authority serves justice and protects the vulnerable.   


    SECTION 7 – महत्वपूर्ण शब्दार्थ | Important Vocabulary


    मंदाग्नि | पाचन शक्ति का कमजोर होना या पेट की बीमारी | indigestion / weak digestion |

    विज्ञापन में शारीरिक रूप से अस्वस्थ लोगों के संदर्भ में सनद | डिग्री या प्रमाण-पत्र | degree / official certificate |

    कॉलेज की औपचारिक उपाधि के संदर्भ में कंटोप | कान ढकने वाली ऊनी टोपी | winter cap covering the ears |

    उम्मीदवारों की विविध और पारंपरिक वेशभूषा के संदर्भ में जौहरी | रत्नों की परख करने वाला पारखी | jeweler / expert assessor |

    मनुष्यों के सच्चे गुणों को परखने वाले सरदार सुजानसिंह के लिए अप्रेंटिस | नया काम सीखने वाला शिक्षार्थी | apprentice / trainee |

    दफ्तर में धक्के खाने वाले नए कर्मचारी की उपमा के रूप में भलेमानुस | सज्जन और प्रतिष्ठित लोग | gentlefolk / respectable persons |

    रियासत के शतरंज खेलने वाले संभ्रांत लोगों के संदर्भ में मद | अहंकार या घमंड | arrogance / pride |

    हॉकी खेल चुके युवाओं के हृदय में छिपे दंभ के संदर्भ में उबारना | संकट या मुसीबत से बचाना | to rescue / salvage |

    दलदल में फँसी गाड़ी और किसान को बाहर निकालने के अर्थ में धनाढ्य | अत्यंत धनी या पैसे वाले लोग | wealthy / affluent people |

    दरबार में उपस्थित नगर के अमीर सेठों के संदर्भ में आत्मबल | अंतरात्मा की शक्ति या मानसिक दृढ़ता | moral strength / inner willpower |

    विपत्ति का डटकर मुकाबला करने के गुण के रूप में   


    SECTION 8 – पात्र और व्यक्तित्व | Characters and Personality


    सरदार सुजानसिंह देवगढ़ रियासत के वृद्ध, अनुभवी और नीतिकुशल दीवान। वे इंसानी स्वभाव के पारखी जौहरी हैं जो बाह्य दिखावे के पीछे छिपे यथार्थ को भाँप लेते हैं। उन्होंने स्वयं भेष बदलकर किसान का रूप धरा ताकि उम्मीदवारों की वास्तविक दया और कर्मठता की गुप्त परीक्षा ले सकें।  

     

    पंडित जानकीनाथ कहानी के नायक और दीवान पद के सफल उम्मीदवार। वे सादगीपसंद, साहसी, दृढ़निश्चयी और दयालु हृदय वाले व्यक्ति हैं। पैर में चोट लगने के बावजूद वे कीचड़ में उतरकर अनजान किसान की सहायता करते हैं। उनका आत्मबल और निस्वार्थ सेवा भाव उन्हें सभी उम्मीदवारों में श्रेष्ठ बनाता है।   


    अन्य उम्मीदवार (सामूहिक पात्र) डिग्रीधारी और नए फैशन के शौकीन युवा, जो स्वयं को सदाचारी दिखाने के लिए पाखंड रचते हैं। संकट के समय उनमें सहानुभूति और कर्तव्यबोध का अभाव दिखाई देता है।   


    SECTION 9 – मुख्य विचार | Key Ideas


    केंद्रीय विचार मनुष्य की सच्ची पहचान उसकी उपाधियों, ठाठ-बाट या मीठी बातों से नहीं होती, बल्कि विपत्ति के समय दूसरों की सहायता करने के उसके साहस, दया और कर्तव्य-निष्ठा से होती है।   

    अन्य महत्वपूर्ण विचार

    • स्वार्थ के लिए किया गया सदाचार का दिखावा संकट की पहली कसौटी पर ही उजागर हो जाता है।   

    • एक अच्छे प्रशासक या नेता में बौद्धिक ज्ञान के साथ-साथ गरीबों और दुर्बलों के प्रति गहरी संवेदनशीलता होनी चाहिए।   


    SECTION 10 – भाषा और साहित्य की खास बातें | Language Focus


    विशेषता: व्यंग्यात्मक और पैनी अवलोकन शैली पाठ में रूप: "मिस्टर 'अ' नौ बजे दिन तक सोया करते थे, आजकल वे बगीचे में टहलते हुए ऊषा का दर्शन करते थे।" प्रभाव: उम्मीदवारों के झूठे पाखंड और दिखावे की असलियत अत्यंत चुटीले व मनोरंजक ढंग से सामने आती है।   


    विशेषता: जीवंत चित्रात्मक भाषा पाठ में रूप: "लोग पसीने से तर हो गए। खून की गरमी आँख और चेहरे से झलक रही थी। हाँफते-हाँफते बेदम हो गए..." प्रभाव: मैदान में चल रहे हॉकी मैच की तीव्रता और खिलाड़ियों की शारीरिक थकान आँखों के सामने सजीव हो उठती है।   


    विशेषता: लोक-कहावतों और प्रतीकों का स्वाभाविक प्रयोग पाठ में रूप: "इन बगुलों में हंस कहाँ छिपा हुआ है" और "गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।" प्रभाव: भाषा अत्यंत प्रभावशाली बन जाती है और गहरा नैतिक अर्थ सहज ही स्पष्ट हो जाता है। English Support: Proverbs and metaphors add philosophical depth, underlining that precious virtues lie deep beneath surface appearances.   


    SECTION 11 – एक महत्वपूर्ण प्रसंग | An Important Incident


    स्थिति / संदर्भ हॉकी मैच के बाद कीचड़ भरे नाले में किसान की अनाज से भरी गाड़ी फँस जाती है। खेल में पैर में चोट खाए हुए जानकीनाथ बिना किसी हिचकिचाहट के अपना कोट उतारते हैं और घुटनों तक दलदल में धँसकर गाड़ी को बाहर निकाल देते हैं।   


    यह महत्वपूर्ण क्यों है? यही प्रसंग पूरी कहानी का निर्णायक मोड़ (चरमोत्कर्ष) है। यहाँ जानकीनाथ को यह बिल्कुल ज्ञात नहीं था कि वह किसान ही दीवान सुजानसिंह हैं। उन्होंने किसी लाभ या पद के लालच में नहीं, बल्कि विशुद्ध दया और मानवता के कारण यह कठिन कार्य किया।   


    सोचिए यदि जानकीनाथ को पहले से पता होता कि वह किसान वास्तव में दीवान सरदार सुजानसिंह हैं, तो क्या उनकी मदद का वही नैतिक मूल्य रह जाता?   

    संभावित उत्तर यदि उन्हें पहले से सच्चाई ज्ञात होती, तो उनकी मदद दया या कर्तव्य न होकर पद पाने का एक सोचा-समझा स्वार्थी प्रयास बन जाती। उनकी सहायता का वास्तविक मूल्य इसीलिए था क्योंकि वह सर्वथा निस्वार्थ और सहज मानवीय भावना से प्रेरित थी।   


    SECTION 12 – अपनी समझ जाँचें | Check Your Understanding


    प्रश्न 1 (सीधी समझ): दीवान पद के विज्ञापन में उम्मीदवारों के लिए कौन-सी मुख्य शर्त रखी गई थी? उत्तर: विज्ञापन में यह शर्त थी कि उम्मीदवार का ग्रेजुएट होना आवश्यक नहीं है, परंतु उसका हृष्ट-पुष्ट होना जरूरी है और विद्या की तुलना में उसके कर्तव्य व आचार-विचार की अधिक परीक्षा ली जाएगी।   


    प्रश्न 2 (कारण / व्याख्या): हॉकी खेल चुके अन्य उम्मीदवारों ने नाले में फँसे किसान की मदद क्यों नहीं की? उत्तर: अन्य उम्मीदवारों के मन में केवल स्वार्थ, अपनी थकान और घमंड था। वे केवल अधिकारियों के सामने अच्छा बनने का नाटक कर रहे थे, परंतु उनके मन में किसी दीन-दुखियारे के लिए वास्तविक सहानुभूति और दया नहीं थी।   


    प्रश्न 3 (अनुमान / मुख्य विचार): सरदार सुजानसिंह ने पंडित जानकीनाथ को ही दीवान पद के लिए सर्वथा योग्य क्यों माना? English Support: Why did Sardar Sujan Singh consider Pandit Janki Nath truly deserving of the Dewan's post? उत्तर: सुजानसिंह ने देखा कि जानकीनाथ स्वयं घायल और लँगड़ाते होने के बावजूद एक असहाय किसान की मदद के लिए दलदल में उतर गए। जिस व्यक्ति में ऐसा अदम्य साहस, आत्मबल और परोपकार की भावना हो, वह सत्ता पाकर भी कभी गरीबों को नहीं सताएगा और धर्म के मार्ग से विचलित नहीं होगा।   


    प्रश्न 4 (व्यक्तिगत प्रतिक्रिया): यदि आपको अपनी कक्षा का मॉनिटर या दल का नेता चुनना हो, तो आप उसमें किन मानवीय गुणों को प्राथमिकता देंगे? संभावित दिशा:   

    • विद्यार्थी लिख सकते हैं कि वे केवल अधिक अंक लाने वाले को नहीं, बल्कि सभी सहपाठियों की निष्पक्ष मदद करने वाले और शांत स्वभाव वाले छात्र को चुनेंगे।

    • यह भी लिख सकते हैं कि वे उस सहपाठी को चुनेंगे जो कठिन समय में जिम्मेदारी ले सके और नियमों का पालन स्वयं ईमानदारी से करता हो।


    SECTION 13 – याद रखने योग्य 5 बातें | Things to Remember


    1. रियासत देवगढ़ के वृद्ध दीवान सरदार सुजानसिंह ने राजा की शर्त पर अपने उत्तराधिकारी की खोज के लिए एक अनोखी परीक्षा आयोजित की।   

    2. दीवान पद के उम्मीदवारों ने एक महीने तक अपने वास्तविक दोषों को छिपाकर सदाचार और विनम्रता का झूठा दिखावा किया।   

    3. शाम को नाले के कीचड़ में फँसे किसान की अनाज भरी गाड़ी को स्वार्थी और घमंडी उम्मीदवारों ने पूरी तरह अनदेखा कर दिया।   

    4. पैर में चोट लगने के बावजूद पंडित जानकीनाथ ने कीचड़ में उतरकर अपनी शक्ति से किसान की गाड़ी को बाहर निकाला।   

    5. सुजानसिंह ने साबित किया कि उच्च प्रशासनिक पद के लिए केवल डिग्रियां नहीं, बल्कि दया, आत्मबल और निस्वार्थ कर्तव्य-परायणता ही सर्वोच्च योग्यता है।  


     
     
    bottom of page