14. बादल को घिरते देखा है - Baadal ko Ghirte Dekha Hai - Class 11 - Antra 1
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लेखक: नागार्जुन
1. लेखक परिचय (Literary Profile)
साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): नागार्जुन (मूल नाम: वैद्यनाथ मिश्र) आधुनिक हिंदी कविता के 'जनकवि' माने जाते हैं। वे 'यात्री' उपनाम से मैथिली में भी लिखते थे। फक्कड़पन और घुमक्कड़ी उनके जीवन की विशेषता रही है, जिसका प्रभाव उनके प्रकृति चित्रण में स्पष्ट दिखता है। उनकी कविताओं में लोक-संस्कृति, राजनीति और प्रकृति का अद्भुत समन्वय है। वे अपनी बात को बेबाकी और धारदार व्यंग्य के साथ कहने के लिए प्रसिद्ध हैं।
प्रमुख रचनाएँ (Key Works): युगधारा, सतरंगे पंखों वाली, प्यासी पथराई आँखें, तालाब की मछलियाँ, चंदना, खिचड़ी विप्लव देखा हमने।
संदर्भ: 'बादल को घिरते देखा है' कविता नागार्जुन के हिमालय प्रवास के अनुभवों पर आधारित है। इसमें कालिदास के 'मेघदूत' के पौराणिक संदर्भों के साथ हिमालय के यथार्थ और अलौकिक सौंदर्य का वर्णन किया गया है।
2. पाठ का सार (Executive Summary)
प्रतिपाद्य (Central Theme): यह कविता हिमालय की चोटियों, झीलों और वहाँ के जीव-जंतुओं के प्राकृतिक सौंदर्य का सजीव चित्रण है। कवि ने मानसरोवर की सुंदरता, कमलों पर गिरती ओस की बूँदों और चक्रवाक-चक्रवाकी के विरह-मिलन के माध्यम से प्रकृति के रागात्मक रूप को उभारा है। साथ ही, कवि कालिदास के 'मेघदूत' के विलासी वैभव (अलकापुरी) को कल्पना मानकर यथार्थ के बादलों की खोज करते हैं।
English Summary: 'Baadal Ko Ghirte Dekha Hai' is a vivid landscape poem by Nagarjun, capturing the ethereal beauty of the Himalayas. The poet describes the golden sunrise on snow-clad peaks, the serenity of Lake Mansarovar, and the seasonal changes affecting the flora and fauna (like the migration of swans). He juxtaposes Kalidasa’s mythical descriptions of 'Meghdoot' with the raw, chilly reality of the mountains, focusing on the natural cycle of love and separation among creatures like the Chakravaka birds.
Key Points:
हिमालय का प्रातःकालीन सौंदर्य: बर्फीली चोटियों पर पड़ने वाली सूरज की पहली सुनहरी किरणें।
मानसरोवर झील: स्वर्ण कमलों पर ओस की बूँदों का गिरना और शीतल जल में हंसों का तैरना।
कालिदास का संदर्भ: कवि प्रश्न करते हैं कि कालिदास के मेघ और कुबेर की अलकापुरी कहाँ खो गई? उन्हें तो केवल यहाँ ठंडी हवा और गरजते बादल दिखते हैं।
जीव-जगत: रात भर अलग रहने वाले चकवा-चकवी का सुबह मिलन और किन्नर-किन्नरियों का संगीत और मदिरा में डूबा विलासी जीवन।
2.1 पद्यांश अनुवाद (Line-by-Line Translation)
पंक्ति (Original Line) | हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning) | English Translation |
अमल धवल गिरि के शिखरों पर, बादल को घिरते देखा है। | निर्मल और सफेद पर्वत की चोटियों पर मैंने बादलों को उमड़ते-घुमड़ते देखा है। | I have seen clouds gathering on the pure, white peaks of the mountains. |
छोटे-छोटे मोती जैसे उसके शीतल तुहिन कणों को, मानसरोवर के उन स्वर्णिम कमलों पर गिरते देखा है। | ओस की ठंडी बूंदें जो छोटे मोतियों जैसी लगती हैं, उन्हें मानसरोवर के सुनहरे कमलों पर गिरते देखा है। | I've seen tiny, pearl-like cold dew drops falling on the golden lotuses of Mansarovar. |
समतल देशों से आ-आकर... पावस की ऊमस से आकुल, तिक्त-मधुर विसतंतु खोजते हंसों को तिरते देखा है। | गर्मी से परेशान होकर मैदानी इलाकों से आए हंसों को कमलनाल के रेशे खोजते हुए तालाब में तैरते देखा है। | I've seen swans from the plains, troubled by heat, swimming and searching for bitter-sweet lotus stalks. |
निशा काल से चिर-अभिशापित... चकवा-चकई का बंद हुआ क्रंदन। | रात भर अलग रहने के श्राप से दुखी चकवा-चकई का रोना सुबह होते ही बंद हो गया। | The crying of the Chakwa-Chakwi birds, cursed to stay apart at night, finally stopped at dawn. |
ऋतु वसंत का सुप्रभात था... अगल-बगल स्वर्णिम शिखर थे। | वसंत ऋतु की सुंदर सुबह थी और चारों ओर सूर्य की किरणों से चमकते सुनहरे शिखर थे। | It was a beautiful spring morning, with golden peaks shining on all sides. |
तरल तरुण कस्तूरी मृग को अपने पर चिढ़ते देखा है। | युवा कस्तूरी मृग अपनी ही नाभि से आने वाली खुशबू को बाहर ढूँढते हुए थककर खुद पर झुँझला रहा है। | I've seen the young musk deer getting frustrated with himself while chasing his own fragrance. |
कहाँ गया धनपति कुबेर वह... जाने दो वह कवि-कल्पित था। | कालिदास के मेघदूत और कुबेर की अलकापुरी का पता नहीं, शायद वह कवि की कल्पना मात्र थी। | Where is the wealthy Kubera or his city Alaka? Let it be, perhaps it was just a poet's imagination. |
शत-शत निर्झर-निर्झरणी-कल मुखरित देवदारु कानन में। | देवदार के जंगलों में सैकड़ों झरनों की मधुर आवाज़ गूँज रही है। | Hundreds of streams and waterfalls are echoing in the cedar forests. |
मदिरा पीने से लाल हुई आँखोंवाले... किन्नर-किन्नरियों को वंशी पर अंगुलियाँ फेरते देखा है। | मदमस्त आँखों वाले किन्नर-किन्नरियों को मैंने बांसुरी बजाते और विलास करते देखा है। | I've seen the Kinnars and Kinnaris with intoxicated eyes playing flutes. |
3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)
Word | Hindi Meaning | English Context |
अमल (Amal) | निर्मल/स्वच्छ | Pure / Clean |
तुहिन कण (Tuhin Kan) | ओस की बूंदें | Dew drops |
विसतंतु (Vis-tantu) | कमलनाल के रेशे | Lotus fiber |
क्रंदन (Krandan) | रोना/विलाप | Wailing |
परिमल (Parimal) | सुगंध | Fragrance |
झंझानिल (Jhanjhanil) | तूफानी हवा | Gale / Stormy wind |
द्राक्षासव (Drakshasav) | अंगूर की मदिरा | Grape wine |
4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)
भाव पक्ष (Thematic Aspect): कविता में श्रृंगार रस (संयोग और विप्रलभ) और अद्भुत रस की प्रधानता है। कवि ने प्रकृति को एक सजीव पात्र के रूप में चित्रित किया है।
कला पक्ष (Artistic Aspect):
तत्सम प्रधान शब्दावली: संस्कृतनिष्ठ शब्दों का प्रयोग हिमालय की भव्यता के अनुकूल है।
बिंब-विधान (Imagery): 'कमलनाल के विसतंतु खोजते हंस' और 'गर्दन झुकाकर तिरते हंस' दृश्य बिंब (Visual Imagery) के सुंदर उदाहरण हैं।
पौराणिक संदर्भ: कालिदास, मेघदूत, कुबेर और अलकापुरी के उल्लेख से कविता में ऐतिहासिक और साहित्यिक गहराई आती है।
5. काव्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)
Extract 1: "कहाँ गया धनपति कुबेर वह? कहाँ गई उसकी वह अलका? / नहीं ठिकाना कालिदास के व्योम-प्रवाही गंगा का।"
Interpretation: कवि ने कुबेर और अलकापुरी के अस्तित्व पर प्रश्न क्यों उठाया? (उत्तर: क्योंकि उन्हें प्रत्यक्ष रूप से हिमालय पर कोई वैभवशाली नगरी नहीं दिखी; उन्हें केवल प्रकृति का यथार्थ रूप दिखा)।
Author's Intent: 'व्योम-प्रवाही गंगा' का पौराणिक संदर्भ क्या है? (उत्तर: यह आकाश गंगा की ओर संकेत है जिसका वर्णन कालिदास ने अपने काव्यों में किया है)।
Inference: कवि ने कालिदास के मेघदूत के स्थान पर क्या देखा? (उत्तर: उन्होंने उन बादलों को देखा जो पहाड़ों से टकराकर गरज रहे थे और बर्फीले तूफानों को जन्म दे रहे थे)।
6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)
1. मानसरोवर के कमलों पर ओस की बूँदों के गिरने का कवि ने किस प्रकार वर्णन किया है?
उत्तर: कवि कहते हैं कि ऊँची चोटियों के शिखर पर शीतल जल वाले तालाबों में, सुंदर कमलों पर ओस की शीतल और उज्ज्वल बूँदें गिर रही हैं। वे बूँदें मोतियों जैसी चमकती हुई दिखाई देती हैं।
2. चकवा-चकवी के विरह और मिलन का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
उत्तर: कवि के अनुसार चकवा और चकवी को यह अभिशाप मिला है कि वे रात में एक साथ नहीं रह सकते। वे रात भर अलग रहकर क्रंदन (दुख) करते हैं, लेकिन सुबह होते ही उनका विरह समाप्त हो जाता है और वे सरोवर के किनारे प्रेम-क्रीड़ा (प्रणय-कलह) में लीन हो जाते हैं।
3. 'बादल को घिरते देखा है' कविता में प्रकृति का मानवीकरण कहाँ-कहाँ हुआ है?
उत्तर: पर्वत चोटियों के आपस में टकराने (तूतू-मैंमैं), बादलों के गरजने और किन्नर-किन्नरियों के विलासी जीवन के वर्णन में प्रकृति और मानवीय भावनाओं का सुंदर घालमेल हुआ है।
7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)
Topic: "हिमालय: कवियों की शाश्वत प्रेरणा"
Key Points:
कालिदास से नागार्जुन तक: हिमालय के चित्रण में बदलाव।
प्रकृति संरक्षण और बढ़ता प्रदूषण: हिमालय का बदलता स्वरूप।
पर्यटन और पर्यावरण के बीच संतुलन।
8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)
"अमल धवल गिरि के शिखरों पर, बादल को घिरते देखा है।"
"कहाँ गया धनपति कुबेर वह? कहाँ गई उसकी वह अलका?"
"ऋतु वसंत का सुप्रभात था, मंद-मंद था अनिल बह रहा।"
9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)
Spelling: 'चक्रवाक', 'प्रणय-कलह' और 'तुहिन-कण' की वर्तनी पर ध्यान दें।
Conceptual: यह न समझें कि नागार्जुन कालिदास की आलोचना कर रहे हैं। वे वास्तव में कालिदास की कल्पना और हिमालय के यथार्थ के बीच के अंतर को स्पष्ट कर रहे हैं।
10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)
Short Answer (2 marks): 'कवि-कल्पित' शब्द का प्रयोग नागार्जुन ने किसके लिए किया है?
Model Answer: यह शब्द 'मेघदूत' के उन काल्पनिक बादलों और अलकापुरी के लिए किया गया है जिनका वर्णन कालिदास ने किया था, लेकिन वे नागार्जुन को वास्तविक हिमालय पर दिखाई नहीं दिए।
Long Answer (5 marks): "बादल को घिरते देखा है" कविता के आधार पर नागार्जुन के प्रकृति-चित्रण की विशेषताएँ बताइए।
Model Answer: नागार्जुन का प्रकृति चित्रण अत्यंत सूक्ष्म और यथार्थवादी है। वे केवल दृश्य नहीं दिखाते, बल्कि गंध, स्पर्श और ध्वनि का भी अनुभव कराते हैं। उन्होंने हिमालय को केवल एक निर्जीव पर्वत नहीं, बल्कि जीवंत गतिविधियों (हंसों का तैरना, चिड़ियों का चहचहाना, बादलों का गरजना) के केंद्र के रूप में चित्रित किया है। उनकी भाषा में संस्कृत की तत्समता और लोक-जीवन की तरलता का अद्भुत संगम है।
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