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    4.3. समास: परिभाषा, भेद एवं विग्रह - Samas - Class 10 - संस्कृत व्याकरण खंड - Rajeev Prakashan

    • May 22
    • 5 min read

    Updated: 4 days ago

    पाठ का विवरण (Lesson Details)


    • पाठ का प्रकार: व्याकरण खंड (समास)

    • विषय: समास: परिभाषा, भेद एवं विग्रह (Compounds: Definition, Types & Resolution)

    • मुख्य समास (कक्षा 10): कर्मधारय, द्विगु, बहुव्रीहि और द्वंद्व समास

    • परीक्षा भार: बोर्ड परीक्षा के बहुविकल्पीय (MCQs) और समस्तपदों के विग्रह खंड में अनिवार्य रूप से पूछे जाने वाले अंक।


    समास निरूपण: त्वरित तथ्य सारणी (Quick Exam Facts)

    समास का नाम

    प्रधान पद (Dominant Word)

    मुख्य पहचान / लक्षण

    परीक्षा उदाहरण

    कर्मधारय

    उत्तर पद प्रधान

    विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय का संबंध।

    नीलकमल (नीला कमल)

    द्विगु

    उत्तर पद प्रधान

    पूर्व पद हमेशा संख्यावाचक (नंबर) होता है।

    चौमासा (चार मासों का समूह)

    बहुव्रीहि

    अन्य पद प्रधान

    दोनों पद मिलकर किसी तीसरे (भगवान आदि) की ओर संकेत करते हैं।

    चंद्रशेखर (शिव)

    द्वंद्व

    दोनों पद प्रधान

    पदों के बीच में 'और' (च) का लोप होता है।

    माता-पिता (माता और पिता)

    1. समास का परिचय (Introduction to Samasa)


    • परिभाषा: 'समास' का शाब्दिक अर्थ होता है— संक्षेप। जब दो या दो से अधिक शब्द अपनी-अपनी विभक्तियों या परसर्गों (कारक चिह्नों) को छोड़कर आपस में मिलकर एक स्वतंत्र शब्द बनते हैं, तो इस संक्षिप्त करने की प्रक्रिया को समास कहते हैं।


    • मुख्य पारिभाषिक अंतर:

      • समस्त पद (सामासिक पद): समास की प्रक्रिया के बाद बनने वाला नया संक्षिप्त शब्द; जैसे- 'गृहस्वामी'।

      • समास-विग्रह: समस्त पद को पुनः उसके पहले वाले विस्तृत रूप में तोड़ने या अलग करने की प्रक्रिया को विग्रह कहते हैं。


    2. पाठ्यक्रम के अनुसार समासों का विस्तृत विवेचन


    (क) कर्मधारय समास

    • लक्षण: यह तत्पुरुष समास का ही एक उपभेद है। इसमें उत्तर पद (दूसरा पद) प्रधान होता है। इसका पहला पद 'विशेषण' (विशेषता बताने वाला) तथा दूसरा पद 'विशेष्य' (जिसकी विशेषता बताई जाए) होता है। इसमें उपमान-उपमेय का संबंध भी हो सकता है।

    • परीक्षा-उपयोगी उदाहरण:

      • नीलकमलम् = नीलम् कमलम् (नीला है जो कमल)

      • घनश्यामः = घन इव श्यामः (बादल के समान काला)

      • महात्मा = महान् असौ आत्मा (महान है जो आत्मा)


    (ख) द्विगु समास

    • लक्षण: यह भी तत्पुरुष का उपभेद है। जिस समस्त पद का पहला पद संख्यावाचक विशेषण (Number) हो और पूरा पद किसी 'समूह' या 'समाहार' का बोध कराता हो, उसे द्विगु समास कहते हैं।

    • परीक्षा-उपयोगी उदाहरण:

      • त्रिलोकी = त्रयाणाम् लोकानाम् समाहारः (तीन लोकों का समूह)

      • पञ्चवटी = पञ्चानां वटानां समाहारः (पाँच वटों का समूह)

      • चौमासा = चार मासों का समूह


    (ग) बहुव्रीहि समास

    • लक्षण: इस समास में न तो पूर्व पद प्रधान होता है और न ही उत्तर पद। दोनों पद मिलकर किसी अन्य (तीसरे) पद के अर्थ की प्रधानता सिद्ध करते हैं। विग्रह करते समय अंत में 'जिसका, जिसके, वह' (यस्य सः) आता है।

    • परीक्षा-उपयोगी उदाहरण:

      • चन्द्रशेखरः = चन्द्रः शेखरे यस्य सः (चन्द्रमा है मस्तक पर जिसके अर्थात् शिव)

      • लम्बोदरः = लम्बा है उदर (पेट) जिसका अर्थात् गणेश

      • दशाननः = दस हैं आनन (मुख) जिसके अर्थात् रावण


    (घ) द्वंद्व समास

    • लक्षण: इस समास में दोनों ही पद (पूर्व पद और उत्तर पद) समान रूप से प्रधान होते हैं। इनके विग्रह में हिंदी में 'और' तथा संस्कृत में 'च' अव्यय का प्रयोग किया जाता है।

    • विशिष्ट भेद (एकशेष द्वंद्व): जब दो पदों में से केवल एक पद शेष बचे और वह दोनों का अर्थ दे; जैसे— 'पितरौ' (माता च पिता च)।

    • परीक्षा-उपयोगी उदाहरण:

      • माता-पिता / पितरौ = माता च पिता च (माता और पिता)

      • पुत्रपुत्री = पुत्रः च पुत्री च (पुत्र और पुत्री)

      • श्वेतकृष्णौ = श्वेतः च कृष्णः च (सफेद और काला)


    3. शब्दार्थ एवं पारिभाषिक शब्दावली (Glossary)

    शब्द

    अर्थ / व्याकरणिक महत्व

    पूर्व पद

    सामासिक शब्द का पहला या प्रथम पद।

    उत्तर पद

    सामासिक शब्द का दूसरा या अंतिम पद।

    विशेषण

    संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताने वाला पद।

    विशेष्य

    वह संज्ञा पद जिसकी विशेषता विशेषण द्वारा बताई जा रही है।

    परसर्ग / विभक्ति

    शब्दों को आपस में जोड़ने वाले कारक चिह्न (जैसे- का, की, के, से)।

    4. सही या गलत (True or False)

    • कथन 1: बहुव्रीहि समास में उत्तर पद के अर्थ की प्रधानता होती है।

      • उत्तर: गलत। कारण: बहुव्रीहि समास में अन्य पद के अर्थ की प्रधानता होती है।


    • कथन 2: 'त्रिलोकी' द्विगु समास का सटीक उदाहरण है।

      • उत्तर: सही।


    • कथन 3: समस्त पद को पृथक या तोड़ने की प्रक्रिया 'विग्रह' कहलाती है।

      • उत्तर: सही。


    5. लघु उत्तरीय परीक्षा प्रश्न (Short Answers - 2 अंक)

    • प्रश्न 1: समास किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।

      • उत्तर: दो या दो से अधिक पदों के मेल से शब्दों को संक्षिप्त करने की प्रक्रिया समास कहलाती है। जैसे: गृहस्य स्वामी = गृहस्वामी।


    • प्रश्न 2: 'पितरौ' का समास विग्रह कीजिए तथा समास का नाम लिखिए।

      • उत्तर: विग्रह: माता च पिता च (माता और पिता)। समास: द्वंद्व समास (एकशेष द्वंद्व)।


    • प्रश्न 3: 'नीलकमल' में कौन सा समास प्रयुक्त है और क्यों?

      • उत्तर: इसमें कर्मधारय समास है, क्योंकि पहला पद 'नील' (विशेषण) दूसरे पद 'कमल' (विशेष्य) की विशेषता बता रहा है।


    6. दीर्घ उत्तरीय / प्रयोगात्मक वर्गीकरण प्रश्न (5 अंक)

    • प्रश्न: निम्नलिखित समस्तपदों का समास-विग्रह कीजिए तथा उनके समासों के नाम भी स्पष्ट कीजिए: धर्मात्मा, चौमासा, चन्द्रशेखर, प्रतिदिन, नीलकमल।

      • उत्तर:

        | समस्त पद | समास-विग्रह | समास का नाम |

        | धर्मात्मा | धर्म में है जिसकी आत्मा (अर्थात विशिष्ट व्यक्ति) | बहुव्रीहि समास |

        | चौमासा | चार मासों (महीनों) का समूह | द्विगु समास |

        | चन्द्रशेखर | चन्द्रमा है मस्तक (शिखर) पर जिसके (अर्थात शिव) | बहुव्रीहि समास |

        | प्रतिदिन | दिनम् दिनम् प्रति (दिन-दिन) | अव्ययीभाव समास |

        | नीलकमल | नीला है जो कमल | कर्मधारय समास |


    7. पिछले वर्षों के बोर्ड प्रश्न (Previous Years' Board Questions)


    • प्रश्न 1: "पंचानन" में कौन सा समास स्वीकृत है? (UP Board)

      • उत्तर: बहुव्रीहि समास (पाँच हैं आनन/मुख जिसके अर्थात् शिव)।


    • प्रश्न 2: 'उत्तर पद' की प्रधानता किस समास के उपभेदों में होती है?

      • उत्तर: तत्पुरुष समास के उपभेदों (जैसे- कर्मधारय और द्विगु) में उत्तर पद की प्रधानता होती है。


    8. अपेक्षित परीक्षा प्रश्न (Expected Exam Questions)


    • बहुविकल्पीय प्रश्न: निम्नलिखित में से संख्यावाचक विशेषण की प्रधानता वाला समास कौन सा है?

      • (क) द्वंद्व (ख) द्विगु (ग) कर्मधारय (घ) बहुव्रीहि

      • उत्तर: (ख) द्विगु。


    • अभ्यास: 'रामलक्ष्मणभरतशत्रुध्नाः' का समास विग्रह संस्कृत में क्या होगा? (उत्तर: रामः च लक्ष्मणः च भरतः च शत्रुध्नः च)।

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