5. रहीम के दोहे - Rahim Ke Dohe - CBSE - Std 6 - Malhar
Updated: 5 days ago

SECTION 1 – पाठ परिचय | Lesson Introduction
पाठ संख्या: 5
पाठ का नाम: रहीम के दोहे
रचनाकार / कवि: अब्दुर्रहीम खानखाना (रहीम)
पुस्तक: मल्हार
कक्षा: 6
विषय: हिंदी
विधा: दोहे (पद्य) मुख्य
विषय: नीति, लोक-व्यवहार, आत्म-संयम और मानवीय मूल्य
एक वाक्य में पाठ यह पाठ रहीम के नीतिपरक दोहों के माध्यम से दैनिक जीवन में विनम्रता, रिश्तों के सम्मान, परोपकार, सोच-समझकर बोलने और सच्चे मित्र की पहचान करने की व्यावहारिक सीख देता है।
SECTION 2 – इस पाठ से आप क्या सीखेंगे? | What Will You Learn?
रहीम के दोहों के सरल और व्यावहारिक अर्थ को अपनी भाषा में समझ सकेंगे।
पुरानी ब्रज और अवधी मिश्रित भाषा के प्रमुख शब्दों के आधुनिक हिंदी अर्थ पहचान सकेंगे।
दोहों में दिए गए प्राकृतिक और दैनिक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से मानवीय गुणों की व्याख्या कर सकेंगे।
संकट, मित्रता और वाणी के संयम से जुड़े नैतिक विचारों को अपने शब्दों में व्यक्त कर सकेंगे।
SECTION 3 – रचनाकार परिचय | Author Introduction
रहीम (1556–1627) भक्तिकाल के एक अत्यंत प्रसिद्ध और सहृदय कवि थे। उनका पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था। उन्होंने मुख्य रूप से नीति, भक्ति और प्रेम से संबंधित रचनाएँ कीं। वे अवधी और ब्रजभाषा दोनों के प्रकांड विद्वान थे तथा रामायण एवं महाभारत जैसे प्राचीन भारतीय ग्रंथों के गहरे जानकार थे। जीवन के गहन अनुभवों को अत्यंत सरल, संक्षिप्त और व्यावहारिक दोहों में ढालना उनकी सबसे बड़ी विशेषता है। जन-साधारण में उनके नीतिपरक दोहे आज भी अत्यंत लोकप्रिय हैं।
SECTION 4 – पाठ की रूपरेखा | Outline of the Lesson
विचार 1 – हर छोटी-बड़ी वस्तु का महत्व: बड़ों को देखकर छोटों की उपेक्षा न करना, क्योंकि जहाँ सुई काम आती है वहाँ तलवार व्यर्थ है।
विचार 2 – परोपकार का संदेश: वृक्ष और सरोवर की तरह दूसरों की भलाई के लिए धन व साधन संचित करना। विचार 3 – रिश्तों की कोमलता: प्रेम रूपी धागे को न तोड़ना, क्योंकि टूटने के बाद जुड़ने पर भी उसमें गाँठ पड़ जाती है।
विचार 4 – आत्म-सम्मान और मान: पानी (सम्मान/चमक/जल) का महत्व, जिसके बिना मनुष्य, मोती और चून सब व्यर्थ हो जाते हैं।
विचार 5 – विपत्ति का सदुपयोग: थोड़े समय का संकट भी अच्छा होता है, क्योंकि वह अपनों और परायों की सच्ची पहचान करा देता है।
विचार 6 – वाणी पर नियंत्रण: जीभ बिना सोचे-समझे बोलकर भीतर छिप जाती है और उसका दंड सिर को भुगतना पड़ता है।
विचार 7 – सच्चे मित्र की पहचान: सुख में बहुत से लोग सगे बनते हैं, परंतु जो संकट की कसौटी पर खरा उतरे वही सच्चा मित्र है।
SECTION 5 – मुख्य भाव | Central Idea of the Dohas
रहीम के दोहे जीवन जीने की सच्ची कला और नैतिक समझ सिखाते हैं। कवि बताते हैं कि संसार में हर छोटी और बड़ी वस्तु का अपना अलग महत्व होता है, इसलिए किसी को हीन नहीं समझना चाहिए। सज्जन व्यक्ति हमेशा निस्वार्थ भाव से दूसरों की भलाई करते हैं। मानवीय संबंधों में प्रेम अत्यंत कोमल होता है, जिसे क्रोध या लापरवाही से नहीं तोड़ना चाहिए। इसके साथ ही वे वाणी पर नियंत्रण रखने, आत्म-सम्मान बनाए रखने और थोड़े समय की विपत्ति से सीख लेकर सच्चे मित्रों व हितैषियों को पहचानने पर बल देते हैं।
SECTION 6 – पाठ को समझें | Understand the Lesson
समान महत्व और परोपकार की भावना रहीम समझाते हैं कि बड़े लोगों या बड़ी वस्तुओं के मिलने पर छोटे लोगों या साधनों का तिरस्कार नहीं करना चाहिए। कपड़े सिलने के लिए केवल सुई काम आती है, वहाँ तलवार का कोई उपयोग नहीं होता। इसी प्रकार प्रकृति के माध्यम से वे बताते हैं कि जैसे पेड़ कभी अपने फल खुद नहीं खाते और तालाब अपना पानी खुद नहीं पीते, वैसे ही सज्जन लोग केवल दूसरों की सहायता के लिए धन एकत्र करते हैं।
English Support:
Every person and object has unique value regardless of size, and true nobility lies in using one's resources selflessly for the welfare of others.
संबंधों की मर्यादा और आत्म-सम्मान प्रेम का संबंध धागे के समान अत्यंत नाजुक होता है; यदि एक बार झटका देकर तोड़ दिया जाए तो पहले जैसा नहीं जुड़ता और बीच में मनमुटाव की गाँठ रह जाती है। 'पानी' के माध्यम से कवि मनुष्य के आत्म-सम्मान और चरित्र की रक्षा पर जोर देते हैं। जिस प्रकार चमक के बिना मोती और जल के बिना आटे का कोई उपयोग नहीं, उसी प्रकार मान-सम्मान के बिना मनुष्य का जीवन व्यर्थ है।
English Support:
Relationships are fragile like threads that require gentle care, while personal dignity and self-respect are essential for a meaningful life.
वाणी का संयम और संकट की कसौटी रहीम असंतुलित बोली के खतरों से आगाह करते हैं। जीभ नासमझी में कुछ भी उल्टा-सीधा बोलकर मुँह के भीतर सुरक्षित हो जाती है, किंतु जूते सिर को खाने पड़ते हैं, इसलिए हमेशा सोच-समझकर बोलना चाहिए। वहीं थोड़े समय की विपत्ति को वे उपयोगी मानते हैं क्योंकि खुशहाली में तो सभी रिश्तेदार बन जाते हैं, पर विपत्ति की कसौटी ही सच्चे मित्र की असलियत सामने लाती है।
English Support:
We must carefully measure our words to avoid negative consequences, while difficult times serve to reveal who our genuine friends really are.
SECTION 7 – महत्वपूर्ण शब्दार्थ | Important Vocabulary
लघु | छोटा या साधारण | small / humble |
समाज के साधारण लोगों या छोटी वस्तुओं के संदर्भ में तरुवर | श्रेष्ठ वृक्ष या पेड़ | large tree |
प्रकृति के परोपकारी स्वभाव को दर्शाने के लिए सरवर | सरोवर या तालाब | pond / lake |
दूसरों को शीतल जल देने वाले प्राकृतिक स्रोत के अर्थ में सुजान | ज्ञानी, सज्जन और चतुर व्यक्ति | wise / noble person
दूसरों के हित में धन संचित करने वाले भले मनुष्य के लिए छिटकाय | झटककर या लापरवाही से | abruptly / carelessly |
प्रेम के नाजुक धागे को झटके से तोड़ने के संदर्भ में सून | सूना या व्यर्थ | empty / desolate |
सम्मान और गरिमा के बिना जीवन के निरर्थक होने के अर्थ में चून | आटा या चूना | flour / lime |
जल के बिना उपयोग में न आ सकने वाले पदार्थ के संदर्भ में बावरी | पगली या नासमझ | foolish / crazy |
बिना सोचे-समझे अनुचित बात कह देने वाली जीभ के लिए कपाल | सिर या माथा | head / forehead |
अनुचित बात बोलने पर जूते की मार सहने वाले अंग के रूप में मीत | मित्र या सखा | friend |
संकट के समय साथ निभाने वाले सच्चे साथी के संदर्भ में
SECTION 8 – मुख्य विचार | Key Ideas
केंद्रीय विचार जीवन में बाहरी दिखावे और धन-दौलत से अधिक मूल्यवान विनम्रता, निस्वार्थ परोपकार, मधुर व संयमित वाणी और रिश्तों की गरिमा होती है।
अन्य महत्वपूर्ण विचार
किसी की उपयोगिता उसके आकार या सामाजिक कद से तय नहीं होती; प्रत्येक का अपना स्वतंत्र महत्व है।
कठिन परिस्थितियाँ मनुष्य को जीवन की सच्चाई और स्वार्थी-निस्वार्थी लोगों का भेद समझाती हैं।
कड़वी या बिना सोची-समझी वाणी केवल दूसरों को दुख ही नहीं पहुँचाती, बल्कि स्वयं के लिए भी अपमान और संकट लाती है।
SECTION 9 – भाषा और साहित्य की खास बातें | Language Focus
विशेषता: दृष्टांत और व्यावहारिक उदाहरण पाठ में रूप: सुई-तलवार, पेड़-सरोवर तथा मोती-मानुष-चून के सादृश्य। प्रभाव: गूढ़ और कठिन नैतिक बातों को सामान्य जन-जीवन की वस्तुओं से जोड़कर अत्यंत सरल व बोधगम्य बना दिया गया है। English Support: Exemplification (दृष्टांत) uses concrete everyday objects like needles and trees to explain abstract moral wisdom clearly.
विशेषता: श्लेष और बहुअर्थी शब्द-प्रयोग पाठ में रूप: 'पानी' शब्द के तीन अलग-अलग अर्थ—मोती के लिए 'चमक', मनुष्य के लिए 'सम्मान/गरिमा' और चून के लिए 'जल'। प्रभाव: एक ही शब्द से एक साथ तीन भिन्न संदर्भों में गहरा अर्थ व्यक्त होकर काव्य-सौंदर्य बढ़ता है। English Support: Pun / double meaning (श्लेष) enriches the verse by applying multiple meanings of the same word to different contexts.
विशेषता: ब्रज और पुरानी हिंदी का सहज प्रवाह पाठ में रूप: 'बड़ेन', 'तलवारि', 'पियहिं', 'सँचहि', 'परि जाय', 'कपाल' आदि। प्रभाव: पदों में लय, संगीत और जनभाषा का स्वाभाविक आकर्षण उत्पन्न होता है।
SECTION 10 – एक महत्वपूर्ण विचार | An Important Thought
स्थिति / संदर्भ रहीम कहते हैं कि जीवन में थोड़े दिनों की विपत्ति भी भली होती है, क्योंकि उसी संकट के समय हमें यह समझ में आता है कि इस संसार में कौन हमारा वास्तविक शुभचिंतक है और कौन केवल दिखावा कर रहा है।
यह महत्वपूर्ण क्यों है? सामान्यतः लोग संकट से डरते हैं और केवल सुख की कामना करते हैं। परंतु यह विचार हमारे सोचने का नजरिया बदल देता है और कठिनाई को एक सीख के रूप में देखना सिखाता है।
सोचिए जब हमारे पास सुख और साधन होते हैं, तब सच्चे और झूठे मित्र की पहचान करना कठिन क्यों होता है?
संभावित उत्तर सुख और संपन्नता के समय लोग अपने स्वार्थ और लाभ के कारण आसानी से मित्र बन जाते हैं। उस समय हर कोई मीठी बातें करता है, इसलिए यह जान पाना संभव नहीं होता कि कौन वास्तव में साथ खड़ा है और कौन केवल हमारे साधनों के कारण साथ है।
SECTION 11 – अपनी समझ जाँचें | Check Your Understanding
प्रश्न 1 (सीधी समझ): रहीम ने बड़ों को देखकर छोटों को न छोड़ने की बात किस उदाहरण से समझाई है?
उत्तर: रहीम ने सुई और तलवार का उदाहरण देकर समझाया है कि जहाँ सिलाई के लिए छोटी सुई काम आती है, वहाँ बड़ी तलवार कोई काम नहीं कर सकती।
प्रश्न 2 (कारण / व्याख्या): रहीम ने जीभ को 'बावरी' (नासमझ) क्यों कहा है और इसका क्या परिणाम होता है? उत्तर: जीभ को नासमझ इसलिए कहा गया है क्योंकि वह बिना विचारे अनर्गल बातें कह देती है और तुरंत मुँह के भीतर छिप जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि उसके अनुचित बोलने का दंड सिर को जूतों की मार के रूप में सहना पड़ता है।
प्रश्न 3 (अनुमान / मुख्य विचार): प्रकृति के अंग (वृक्ष और सरोवर) मनुष्य को समाज सेवा का क्या संदेश देते हैं? English Support: What lesson of social service do elements of nature like trees and lakes convey?
उत्तर: वृक्ष अपने मीठे फल स्वयं नहीं खाते और सरोवर अपना जल स्वयं नहीं पीते, बल्कि वे सब-कुछ दूसरों की प्यास और भूख मिटाने के लिए अर्पित कर देते हैं। इनसे मनुष्य को यह सीख मिलती है कि अपनी अर्जित संपत्ति और सामर्थ्य का उपयोग केवल निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की भलाई के लिए करना चाहिए।
प्रश्न 4 (व्यक्तिगत प्रतिक्रिया): "टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।" इस विचार को ध्यान में रखते हुए आप अपने मित्रों और परिजनों के साथ बातचीत में किन बातों का ध्यान रखेंगे?
संभावित दिशा:
विद्यार्थी लिख सकते हैं कि वे क्रोध में आकर कभी कोई ऐसा कड़वा शब्द नहीं बोलेंगे जिससे किसी के आत्म-सम्मान को ठेस पहुँचे।
यह भी लिख सकते हैं कि किसी मतभेद की स्थिति में तुरंत शांति से बातचीत कर गलतफहमी दूर करने का प्रयास करेंगे ताकि रिश्ते में कभी कोई गाँठ न पड़ने पाए।
SECTION 12 – याद रखने योग्य 5 बातें | Things to Remember
किसी भी छोटी वस्तु या साधारण व्यक्ति को उपेक्षित नहीं समझना चाहिए, क्योंकि सबका अपना निश्चित महत्व होता है।
प्रकृति के परोपकारी स्वभाव की तरह सज्जनों का धन और ज्ञान भी दूसरों के कल्याण के लिए ही होता है।
प्रेम और मित्रता के संबंध अत्यंत संवेदनशील होते हैं, जिन्हें क्रोध या अहंकार में कभी नहीं तोड़ना चाहिए।
मनुष्य के लिए आत्म-सम्मान और मर्यादित वाणी सबसे बड़े आभूषण हैं।
सच्चा मित्र केवल सुख में नहीं, बल्कि संकट और कठिन समय की कसौटी पर ही पहचाना जाता है।



