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    1.1. प्रभुजी तुम चंदन हम पानी - (Prabhuji Tum Chandan Hum Paani) - Class 9 - पद्य-खंड - Rajeev Prakashan

    • Apr 27
    • 11 min read

    Updated: May 6

    पाठ का प्रकार: पद्य

    लेखक / कवि का नाम: रैदास (रविदास)

    विधा: पद (भजन)


    परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts) लेखक / कवि[रैदास (संत रविदास)] जन्म वर्ष[सन् 1388 ई.] पाठ की विधा[पद] पाठ्यपुस्तक[पद्य-खंड, कक्षा 9]सबसे प्रसिद्ध पंक्ति / वाक्य["प्रभुजी तुम चंदन हम पानी। जाकी अँग अँग बास समानी।"] पाठ का केंद्रीय विषय[ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति और पूर्ण समर्पण] परीक्षा में सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न[रैदास ने किन उपमाओं के माध्यम से अपनी भक्ति प्रकट की है?]


    1. लेखक / कवि परिचय (Author / Poet Introduction) जन्म एवं स्थान: संत रैदास का जन्म सन् 1388 ई. में बनारस (वाराणसी) में हुआ था । मृत्यु: आपका निधन सन् 1518 ई. में बनारस में ही माना जाता है । शिक्षा एवं जीवन-वृत्त: रैदास साक्षर नहीं थे, किंतु उनका व्यावहारिक ज्ञान और अनुभव अत्यंत व्यापक था । वे मध्ययुगीन संतों में अपनी विनम्रता और अहंकार रहित व्यक्तित्व के लिए विशिष्ट थे । कबीर ने उन्हें 'संतनि में रविदास संत' कहकर सम्मानित किया है । प्रमुख रचनाएँ: रैदास के चालीस पद सिखों के पवित्र धर्मग्रंथ 'गुरुग्रंथ साहब' में संकलित हैं । 'प्रभुजी तुम चंदन हम पानी' उनका सबसे प्रसिद्ध पद है । भाषा-शैली: रैदास ने सरल और प्रवाहमयी ब्रजभाषा का प्रयोग किया है । उनकी भाषा में अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और अरबी-फारसी के शब्दों का सहज मिश्रण मिलता है । उनकी काव्य शैली दैन्य भाव और आत्म-निवेदन से पूर्ण है । हिंदी साहित्य में योगदान / स्थान: रैदास निर्गुण भक्ति धारा के प्रमुख संत कवि हैं । उन्होंने जाति-प्रथा और छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों का विरोध किया और 'सहज मार्ग' अपनाने पर बल दिया ।

      English Summary of Introduction: Raidas (Sant Ravidas) was a prominent 15th-century Nirguna saint-poet born in Banaras. Despite being formally uneducated, his profound spiritual wisdom earned him immense respect, leading Meerabai to accept him as her guru. His poetry, characterized by deep humility and total surrender to a formless God, is featured in the Guru Granth Sahib.


    परीक्षक की दृष्टि से: जीवन परिचय में रचनाओं की सूची और भाषा-शैली - ये दो बिंदु सबसे अधिक अंक दिलाते हैं। जन्म-मृत्यु की तारीख सटीक लिखें। उत्तर 80-100 शब्दों में सीमित रखें।


    1. पाठ का सारांश (Bilingual Summary) हिन्दी: 'प्रभुजी तुम चंदन हम पानी' पद में संत रैदास ने ईश्वर के प्रति अपनी अनन्य निष्ठा और समर्पण भाव को व्यक्त किया है । कवि ईश्वर को स्वयं से श्रेष्ठ मानते हुए विभिन्न उपमाओं का सहारा लेते हैं । वे कहते हैं कि यदि ईश्वर चंदन हैं, तो भक्त पानी है, जिसकी सुगंध भक्त के रोम-रोम में व्याप्त हो गई है । यदि ईश्वर बादल हैं, तो भक्त जंगल का मोर है; यदि ईश्वर चंद्रमा हैं, तो भक्त चकोर पक्षी है । इसी प्रकार वे दीपक-बाती और मोती-धागा के उदाहरणों से ईश्वर और भक्त के अटूट संबंध को दर्शाते हैं । अंत में वे स्वयं को दास और ईश्वर को स्वामी मानकर अपनी दास्य भाव की भक्ति प्रकट करते हैं । रैदास का मानना है कि ईश्वर का सामीप्य ही सबसे बड़ी निधि है ।


    English: In this poem, Raidas expresses his unwavering devotion and total surrender to God through various metaphors. He describes God as sandalwood and himself as water, symbolizing how the divine fragrance has permeated his entire being. He further compares God to clouds and himself to a peacock, and God to the moon while he is the chakora bird. Through pairings like lamp-wick and pearl-thread, he illustrates that the devotee is incomplete without the divine. Finally, he establishes a master-servant relationship, highlighting that closeness to God is the ultimate treasure of life.


    परीक्षक की दृष्टि से: सारांश में पाठ की मुख्य घटनाओं / विचारों का क्रमबद्ध उल्लेख होना चाहिए। शुरुआत, मध्य और अंत - तीनों स्पष्ट होने चाहिए। केवल महत्त्वपूर्ण बातें लिखें, अनावश्यक विस्तार से बचें।


    1. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme) हिन्दी: इस पद का केंद्रीय भाव ईश्वर और भक्त के बीच के सायुज्य और अटूट प्रेम को दर्शाना है । रैदास संदेश देते हैं कि ईश्वर कहीं बाहर नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर ही सहज रूप में सुलभ है । सच्चा भक्त वही है जो अहंकार का त्याग कर पूर्ण विनम्रता के साथ स्वयं को ईश्वर को समर्पित कर दे ।


    English: The central theme is the inseparable bond and spiritual unity between the devotee and the Divine. Raidas conveys that God is not found in external rituals but resides within, accessible only through humility and the abandonment of ego. It emphasizes that true devotion requires total self-surrender.


    परीक्षक की दृष्टि से: केंद्रीय भाव और सारांश में स्पष्ट अंतर होना चाहिए। सारांश "क्या हुआ" बताता है, केंद्रीय भाव "क्यों लिखा गया" बताता है। यहाँ लेखक/कवि के उद्देश्य और पाठ की आज के संदर्भ में प्रासंगिकता पर ध्यान दें।


    1. पात्रों का चरित्र-चित्रण (Character Sketch) (गद्य पाठों के लिए)

      (यह एक पद्य पाठ है, अतः यह खंड लागू नहीं होता।)


    2. गद्यांश / पद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation) महत्वपूर्ण अंश 1: "प्रभुजी तुम चंदन - - - बास समानी।" (क) सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'पद्य-खंड' के 'प्रभुजी तुम चंदन हम पानी' नामक पद से लिया गया है। इसके रचयिता संत 'रैदास' हैं । (ख) प्रसंग: इस पंक्ति में कवि ईश्वर की श्रेष्ठता और भक्त के साथ उनके गहरे संबंध को स्पष्ट कर रहे हैं । (ग) व्याख्या: रैदास कहते हैं कि हे प्रभु! आप चंदन के समान गुणकारी और सुगंधित हैं और मैं पानी के समान साधारण हूँ। जिस प्रकार चंदन के संपर्क में रहने से पानी में भी उसकी सुगंध रच-बस जाती है, उसी प्रकार आपकी भक्ति से मेरे अंग-अंग में आपकी सुगंध (पवित्रता) समा गई है । (घ) काव्यगत सौंदर्य / साहित्यिक विशेषता:


    अलंकार: 'अँग अँग' में पुनरुक्ति प्रकाश और संपूर्ण पंक्ति में उपमा अलंकार है । रस: भक्ति रस (शांत रस) । भाषा एवं शैली: सरल ब्रजभाषा और प्रतीकात्मक शैली । भाव / संदेश: ईश्वर के गुण भक्त के चरित्र में ढलने चाहिए।


    महत्वपूर्ण अंश 2: "प्रभुजी तुम मोती - - - मिलत सोहागा।" (क) सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'पद्य-खंड' के 'प्रभुजी तुम चंदन हम पानी' नामक पद से लिया गया है। इसके रचयिता संत 'रैदास' हैं । (ख) प्रसंग: कवि ईश्वर के साथ अपने एकनिष्ठ और अटूट संबंध को विभिन्न प्रतीकों द्वारा स्पष्ट कर रहे हैं । (ग) व्याख्या: रैदास कहते हैं कि हे प्रभु! आप एक सुंदर और उज्ज्वल मोती के समान हैं और मैं वह धागा हूँ जिसमें यह मोती पिरोया जाता है। हमारा मिलन वैसा ही सुखद और श्रेष्ठ है जैसे सोने में सोहागा मिलने से उसकी शुद्धता और चमक बढ़ जाती है । (घ) काव्यगत सौंदर्य / साहित्यिक विशेषता:


    अलंकार: उपमा एवं दृष्टांत अलंकार । रस: भक्ति रस । भाषा एवं शैली: प्रवाहमयी और सहज ब्रजभाषा । भाव / संदेश: भक्त की सार्थकता ईश्वर से जुड़े रहने में ही है।


    (महत्वपूर्ण अंश 3 हेतु पद का अंतिम अंश भी इसी प्रकार तैयार किया जा सकता है।)


    1. पंक्तियों का सरल अर्थ (Simple Meaning of Lines) (पद्य पाठों के लिए)पद / छंद 1: प्रभुजी तुम चंदन हम पानी। जाकी अँग अँग बास समानी। परिचय: कवि ईश्वर को चंदन मानकर स्वयं की तुच्छता और उनके प्रभाव को व्यक्त कर रहे हैं। सरल अर्थ: हे भगवान, आप चंदन के समान हैं और मैं पानी हूँ। आपकी भक्ति की सुगंध मेरे शरीर के हर हिस्से में बस गई है।


    पद / छंद 2: प्रभुजी तुम घन बन हम मोरा। जैसे चितवत चंद चकोरा। परिचय: भक्त की एकाग्रता और ईश्वर के प्रति उसके आकर्षण का वर्णन है। सरल अर्थ: आप आकाश के बादल हैं और मैं जंगल का मोर हूँ जो आपको देखकर नाचता है। मेरी अवस्था वैसी ही है जैसे चकोर पक्षी चंद्रमा को एकटक देखता रहता है।


    पद / छंद 3: प्रभुजी तुम दीपक हम बाती। जाकी जोति बरै दिन राती। परिचय: यहाँ ईश्वर को प्रकाश का स्रोत बताया गया है। सरल अर्थ: आप दीपक हैं और मैं उसकी बत्ती हूँ। आपकी भक्ति की ज्योति मेरे हृदय में दिन-रात जलती रहती है।


    पद / छंद 4: प्रभुजी तुम मोती हम धागा। जैसे सोनहिं मिलत सोहागा। परिचय: भक्त और भगवान के मेल की पवित्रता का चित्रण है। सरल अर्थ: आप मोती के समान कीमती हैं और मैं वह धागा हूँ जो आपको थामे रहता है। हमारा मिलना सोने में सोहागा मिलने जैसा उत्तम है।


    पद / छंद 5: प्रभुजी तुम स्वामी हम दासा। ऐसी भक्ति करै रैदासा। परिचय: रैदास अपनी भक्ति के स्वरूप (दास्य भाव) को स्पष्ट कर रहे हैं। सरल अर्थ: हे प्रभु, आप मेरे मालिक हैं और मैं आपका सेवक (दास) हूँ। मैं (रैदास) इसी सेवा भाव से आपकी पूजा करता हूँ।


    परीक्षक की दृष्टि से: सरल अर्थ को बहुत सरल रखें - कठिन साहित्यिक भाषा से बचें। परिचय वाक्य प्रत्येक छंद के लिए अलग और विशिष्ट होना चाहिए - सभी के लिए एक जैसा परिचय मत लिखें।


    1. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary) शब्द (Word)अर्थ (Meaning)पर्यायवाची (Synonym)विलोम (Antonym)बाससुगंध महक, खुशबूदुर्गंधसमानीव्याप्त समायी हुई---घनबादल मेघ, जलद---चितवतदेखता है निहारना---चंदचाँद चंद्रमा, मयंक---बातीबत्ती वर्तिका---जोतिज्योति प्रकाश, लौअंधकारबरैजलती हैप्रज्वलित होना---सोनहिंस्वर्ण कनक, कुंदन---दासासेवक अनुचरस्वामी


    परीक्षक की दृष्टि से: शब्दार्थ तालिका में वे शब्द चुनें जो MCQ में पर्यायवाची / विलोम के रूप में पूछे जा सकते हैं। पाठ-विशिष्ट कठिन या साहित्यिक शब्द ही शामिल करें।


    1. सही या गलत - कारण सहित (True or False with Reason) कथन 1: रैदास सगुण भक्ति धारा के कवि थे। उत्तर: गलत - कारण: पाठ के अनुसार रैदास निर्गुण भक्ति धारा के प्रसिद्ध कवि थे । कथन 2: मीराबाई ने रैदास को अपना गुरु माना था। उत्तर: सही - कारण: ऐसी मान्यता है कि कृष्ण भक्त मीरा ने रैदास का शिष्यत्व ग्रहण किया था । कथन 3: रैदास के पद 'गुरुग्रंथ साहब' में संकलित नहीं हैं। उत्तर: गलत - कारण: 'गुरुग्रंथ साहब' में रैदास के चालीस पद संकलित हैं । कथन 4: 'चितवत चंद चकोरा' में चकोर एक पक्षी का नाम है। उत्तर: सही - कारण: चकोर एक ऐसा पक्षी है जो चंद्रमा को एकटक देखता रहता है । कथन 5: रैदास ने ईश्वर को दीपक और स्वयं को बाती कहा है। उत्तर: सही - कारण: पद्यांश में स्पष्ट उल्लेख है—"प्रभुजी तुम दीपक हम बाती" ।


    2. तथ्यात्मक एवं बोधात्मक प्रश्न (Comprehension Questions) प्रश्न 1: रैदास ने स्वयं को पानी और ईश्वर को चंदन क्यों कहा है? उत्तर: चंदन अपनी सुगंध और शीतलता के लिए प्रसिद्ध है। रैदास का मानना है कि ईश्वर रूपी चंदन के संपर्क में आने से उनका (पानी रूपी भक्त का) जीवन भी सुगन्धित और धन्य हो गया है। जैसे पानी चंदन के बिना सुगंधित नहीं हो सकता, वैसे ही भक्त ईश्वर के बिना अधूरा है । प्रश्न 2: 'सोनहिं मिलत सोहागा' के माध्यम से कवि क्या कहना चाहते हैं? उत्तर: सोहागा एक ऐसा क्षार है जो सोने को शुद्ध करने और चमकाने के काम आता है। इस उपमा से रैदास कहना चाहते हैं कि ईश्वर के मिलने से भक्त का मूल्य और पवित्रता उसी प्रकार बढ़ जाती है जैसे सोहागा मिलने से सोने की । प्रश्न 3: रैदास की भक्ति-भावना की मुख्य विशेषता क्या है? उत्तर: रैदास की भक्ति 'दास्य भाव' की है, जिसमें पूर्ण समर्पण, विनम्रता और अहंकार का अभाव होता है। वे ईश्वर को निराकार और अविनाशी मानते हैं तथा स्वयं को केवल एक माध्यम मात्र समझते हैं ।


    3. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक) प्रश्न 1: रैदास का जन्म और निधन कब हुआ था? उत्तर: रैदास का जन्म सन् 1388 ई. में और निधन सन् 1518 ई. में बनारस में हुआ था । प्रश्न 2: कबीर ने रैदास के बारे में क्या कहा है? उत्तर: कबीर ने रैदास के महत्त्व को प्रतिपादित करते हुए उन्हें 'संतनि में रविदास संत' कहा है । प्रश्न 3: चकोर पक्षी की क्या विशेषता है? उत्तर: चकोर पक्षी चंद्रमा का अनन्य प्रेमी माना जाता है जो रात भर उसे एकटक देखता रहता है 。 प्रश्न 4: रैदास ने किस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया है? उत्तर: रैदास ने सरल, प्रवाहमयी ब्रजभाषा का प्रयोग किया है जिसमें अन्य लोकभाषाओं के शब्द भी शामिल हैं । प्रश्न 5: 'जाकी जोति बरै दिन राती' का क्या अर्थ है? उत्तर: इसका अर्थ है कि ईश्वर रूपी दीपक की प्रकाशमय भक्ति भक्त के हृदय में निरंतर (दिन-रात) प्रज्वलित रहती है ।


    4. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक) प्रश्न 1: पाठ में प्रयुक्त उपमाओं के आधार पर रैदास और उनके ईश्वर के संबंध की व्याख्या कीजिए। अथवा "प्रभुजी तुम चंदन हम पानी" पद का सारांश अपने शब्दों में लिखिए। उत्तर: इस पद में रैदास ने भक्त और भगवान के अटूट संबंध को कई प्रतीकों से समझाया है। यदि प्रभु चंदन हैं तो भक्त पानी है, प्रभु बादल हैं तो भक्त मोर है, प्रभु चंद्रमा हैं तो भक्त चकोर है। इसी प्रकार मोती-धागा और दीपक-बाती के उदाहरणों से वे स्पष्ट करते हैं कि भक्त का अस्तित्व पूर्णतः ईश्वर पर निर्भर है। अंत में वे स्वयं को दास बताकर अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त करते हैं। यह संबंध अत्यंत विमल और कोमल है जहाँ भक्त प्रभु के सामीप्य को ही जीवन की सबसे बड़ी निधि मानता है


    प्रश्न 2: रैदास की सामाजिक चेतना और उनके 'सहज मार्ग' पर विचार व्यक्त कीजिए। अथवा रैदास हमें किन सामाजिक बुराइयों के प्रति सचेत करते हैं? उत्तर: रैदास मध्यकाल के एक क्रांतिकारी संत थे। उन्होंने जाति-प्रथा, छुआछूत और धार्मिक आडंबरों जैसी सामाजिक कुरीतियों का कड़ा विरोध किया । उनके अनुसार 'सहज मार्ग' ही ईश्वर प्राप्ति का सही रास्ता है। इस मार्ग का अर्थ है—सुख-दुख, मान-अपमान और आशा-निराशा से ऊपर उठकर ईश्वर को अंतिम सत्य मानना । वे झूठी श्रेष्ठता के दंभ से बचने की सलाह देते हैं और कर्म के प्रति पूरी निष्ठा रखने पर बल देते हैं ।


    1. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson) रस (Ras): पंक्ति (पाठ से)रस का नामस्थायी भाव"ऐसी भक्ति करै रैदासा"भक्ति रसदेव विषयक रति


    अलंकार (Alankar): पंक्ति (पाठ से)अलंकार का नामकारण"चितवत चंद चकोरा"अनुप्रास / उपमा'च' वर्ण की आवृत्ति और चकोर से तुलना "प्रभुजी तुम दीपक हम बाती"उपमा / रूपकप्रभु और भक्त की दीपक-बाती से तुलना

    समास (Samas): समस्तपद (पाठ से)विग्रहसमास का भेददिन-रातीदिन और रात द्वंद्व समासअहंहीनताअहं (अहंकार) से हीन तत्पुरुष समास

    उपसर्ग / प्रत्यय (Prefix / Suffix): शब्दउपसर्ग / प्रत्ययमूल शब्दअविनाशीअ- (उपसर्ग)विनाश समानी-ई (प्रत्यय)समान


    परीक्षक की दृष्टि से: व्याकरण प्रश्नों में उदाहरण पाठ से होना अतिरिक्त अंक दिलाता है। अलंकार में केवल नाम लिखना पर्याप्त नहीं - कारण भी लिखें। समास में विग्रह सटीक होना चाहिए।


    1. संस्कृत अनुभाग (Sanskrit Section)

      संस्कृत पद्यांश:

      "नमोऽस्तु अनन्ताय सहस्रमूर्तये, सहस्रपादाक्षिशिरोरुबाहवे।

      सहस्रनाम्ने पुरुषाय शाश्वते, सहस्रकोटीयुगधारिणे नमः॥"

    (क) सन्दर्भ: यह श्लोक ईश्वर के अनंत और निराकार स्वरूप की स्तुति करता है, जैसा रैदास भी मानते हैं 。 (ख) कठिन शब्दार्थ: संस्कृत शब्दहिंदी अर्थEnglish Meaningअनन्तायजिसका अंत न होEndlessशाश्वतेहमेशा रहने वालाEternalसहस्रमूर्तयेहजारों रूपों वालाWith thousand forms (ग) हिंदी अनुवाद: उन अनंत भगवान को नमस्कार है जो हजारों रूपों वाले हैं, जिनके हजारों पैर, आँखें, सिर और हाथ हैं। उन शाश्वत पुरुष को नमस्कार है जिनके हजारों नाम हैं। (ङ) पाठ से संबंध: यह श्लोक रैदास के उस 'अविनाशी ईश्वर' की अवधारणा से जुड़ता है जो लौकिक विशेषताओं से परे और सर्वश्रेष्ठ है ।


    हिंदी से संस्कृत अनुवाद अभ्यास:

    हिंदी वाक्यसंस्कृत अनुवादईश्वर चंदन है।ईश्वरः चन्दनम् अस्ति।मैं पानी हूँ।अहं जलम् अस्मि।भक्त सेवा करता है।भक्तः सेवां करोति।ईश्वर कहाँ है?ईश्वरः कुत्र अस्ति?अहंकार का त्याग करो।अहंकारं त्यज।


    1. पद विश्लेषण / काव्य-सौंदर्य (Poetry Appreciation) (पद्य पाठों के लिए) रचनाकार का नाम: संत रैदास रचना का प्रकार: भक्तिपरक पद (Devotional Lyric) पसंदीदा पंक्तिपसंदीदा होने का कारणपंक्ति से प्राप्त संदेश"प्रभुजी तुम चंदन हम पानी"चंदन और पानी का मेल अत्यंत सरल एवं गहरा है।ईश्वर के गुण भक्त में समाहित होने चाहिए।"जैसे चितवत चंद चकोरा"यह एकनिष्ठ प्रेम का सुंदर उदाहरण है।लक्ष्य के प्रति एकाग्रता आवश्यक है।"जाकी जोति बरै दिन राती"यह निरंतर साधना का प्रतीक है।ज्ञान का प्रकाश सदैव जलते रहना चाहिए।"जैसे सोनहिं मिलत सोहागा"यह सत्संगति के लाभ को दर्शाता है।अच्छी संगति से मूल्य बढ़ जाता है।"प्रभुजी तुम स्वामी हम दासा"यह अहंकार शून्यता की पराकाष्ठा है।सेवा ही सच्ची भक्ति है।


    2. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions) प्रश्न 1: रैदास के कितने पद गुरुग्रंथ साहब में मिलते हैं? उत्तर: रैदास के 40 पद गुरुग्रंथ साहब में संकलित हैं । प्रश्न 2: रैदास ने अपनी तुलना 'धागा' से क्यों की है? उत्तर: रैदास ने स्वयं को धागा और ईश्वर को मोती कहा है। जैसे धागा मोतियों को माला के रूप में पिरोकर स्वयं को विलीन कर देता है, वैसे ही भक्त ईश्वर में समाकर अपना अस्तित्व सार्थक करता है । प्रश्न 3: 'सहज मार्ग' से रैदास का क्या आशय है? उत्तर: सहज मार्ग का अर्थ है आडंबरों से दूर रहकर मन की निर्मलता और सहजता से ईश्वर की भक्ति करना ।


    3. UP Board परीक्षा में इस पाठ से अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)

    5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:

    • रैदास की भक्ति-भावना की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।

    • संत रैदास का जीवन परिचय एवं साहित्यिक योगदान लिखिए ।


    6 अंक - पद्यांश व्याख्या:

    • "प्रभुजी तुम घन बन हम मोरा... जाकी जोति बरै दिन राती" ।


    2 अंक - लघु उत्तरीय:

    • रैदास ने ईश्वर को 'अविनाशी' क्यों कहा है?

    • भक्त और भगवान का संबंध 'सोने और सोहागे' जैसा क्यों है?


    1 अंक - MCQ (तथ्य / व्याकरण / लेखक):

    • रैदास का जन्म स्थान कहाँ है? (बनारस)

    • 'बाँस' शब्द का तद्भव रूप क्या है? (बास - सुगंध)

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