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    4.7. गोपालनन्दनः (Krishnah Gopalanandanah) - Class 9 - संस्कृत-खंड: - Rajeev Prakashan

    • May 5
    • 3 min read

    Updated: May 6

    पाठ का मुख्य विषय: भगवान श्री कृष्ण का अलौकिक जन्म, उनकी बाल-लीलाएं और परोपकारी चरित्र।


    1. गद्यांशों का ससन्दर्भ हिन्दी अनुवाद (Translation)


    गद्यांश (क): "सुविदितमेव श्रीकृष्णः... विराजमानः अस्ति।"


    • सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के 'संस्कृत-खंड' के 'कृष्णः गोपालनन्दनः' नामक पाठ से उद्धृत है।

    • अनुवाद: यह अच्छी तरह ज्ञात ही है कि श्री कृष्ण अलौकिक महापुरुष थे। हजारों वर्ष पहले उत्पन्न यह महापुरुष आज भी लोगों के हृदयों में विराजमान हैं।


    गद्यांश (ख): "श्रीकृष्णस्य मातुलः... श्रीकृष्णः जातः।"

    • अनुवाद: श्री कृष्ण का मामा कंस एक अत्याचारी शासक था। उसने पहले अपनी बहन देवकी का विवाह श्री वसुदेव के साथ किया, लेकिन बाद में आकाशवाणी द्वारा देवकी के पुत्र से अपनी मृत्यु का समाचार जानकर उन दोनों को ही जेल (कारागार) में डाल दिया। वहीं जेल में ही श्री कृष्ण का जन्म हुआ।


    गद्यांश (ग): "श्रीकृष्णस्य जन्म... हृदयवल्लभः अभवत्।"

    • अनुवाद: श्री कृष्ण का जन्म भादों के महीने में कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मथुरा में हुआ था। आधी रात को जब ये उत्पन्न हुए, तब आकाश में घटाओं के समूह वाले बादलों ने मुसलाधार वर्षा की। वह रात घोर अंधकारपूर्ण थी, परंतु वसुदेव पुत्र की रक्षा के लिए नवजात बालक को लेकर, ऊँची लहरों वाली यमुना को पार कर गोकुल में नन्द के घर पहुँचा दिया। वहाँ बचपन से ही श्री कृष्ण लोगों के हृदय के प्यारे बन गए।


    गद्यांश (घ): "बाल्यकाले अयं... तस्मिन् स्निह्यन्ति।"

    • अनुवाद: बचपन में इन्होंने अपने सौंदर्य और बाल-लीला से सभी लोगों के मन को हर लिया। कोई गोपिका इन्हें गोद में उठाकर अपने घर ले जाती, दूसरी इन्हें दूध पिलाती और कोई अन्य इन्हें मक्खन देती। श्री कृष्ण प्रेम से दिए गए दूध को पीते और मक्खन खाते। अवसर पाकर वे अपने मित्रों के साथ किसी घर में प्रवेश कर दही खाते, मित्रों को देते, बचे हुए दही को जमीन पर गिरा देते और कभी-कभी दही के बर्तन भी तोड़ देते। यह सब करने पर भी उनके स्वभाव और सौंदर्य से प्रभावित होकर कोई उन पर क्रोध नहीं करता, बल्कि सभी उनसे प्रेम करते हैं।


    2. महत्वपूर्ण शब्दार्थ (Glossary)


    • मातुलः: मामा।

    • विज्ञाय: जानकर।

    • घटाटोपाः: घनघोर बादलों वाले।

    • सद्योजातम्: नवजात (तुरंत उत्पन्न हुआ)।

    • अङ्के: गोद में।

    • नवनीतं: मक्खन।

    • वेणुं: बाँसुरी।

    • अविगणय्य: परवाह न करके।

    • वह्नौ: अग्नि में।


    3. संस्कृत में प्रश्नोत्तर (Questions in Sanskrit)


    प्रश्न (क): लोकोत्तरः महापुरुषः कः आसीत्? (अलौकिक महापुरुष कौन थे?)

    उत्तर: श्रीकृष्णः लोकोत्तरः महापुरुषः आसीत्।


    प्रश्न (ख): श्रीकृष्णस्य मातुलः कः आसीत्? (श्री कृष्ण का मामा कौन था?)

    उत्तर: श्रीकृष्णस्य मातुलः कंसः आसीत्।


    प्रश्न (छ): श्रीकृष्णस्य जन्म कुत्र अभवत्? (श्री कृष्ण का जन्म कहाँ हुआ था?)

    उत्तर: श्रीकृष्णस्य जन्म मथुरायाम् अभवत्।


    प्रश्न (झ): कः श्रीकृष्णं नन्दगृहं प्रापयत्? (कौन श्री कृष्ण को नन्द के घर पहुँचा आया?)

    उत्तर: वसुदेवः श्रीकृष्णं नन्दगृहं प्रापयत्।


    प्रश्न (ठ): श्रीकृष्णस्य बाललीलायाः वर्णनं हिन्दीभाषायां कः अकरोत्? (श्री कृष्ण की बाल-लीला का वर्णन हिंदी भाषा में किसने किया?)

    उत्तर: भक्तकविः सूरदासः हिन्दी-भाषायां श्रीकृष्णस्य बाललीलायाः वर्णनम् अकरोत्।


    4. व्याकरण-बोध (Grammar)


    सन्धि-विच्छेद:

    1. अद्यापि: अद्य + अपि (दीर्घ सन्धि)

    2. पश्चाच्च: पश्चात् + च (श्चुत्व/व्यंजन सन्धि)

    3. कुर्वतोऽपि: कुर्वतः + अपि (विसर्ग/पूर्वरूप सन्धि)

    4. स्वोत्तमैः: स्व + उत्तमैः (गुण सन्धि)


    विभक्ति एवं वचन:

    1. हृदयेषु: सप्तमी विभक्ति, बहुवचन।

    2. कारागारे: सप्तमी विभक्ति, एकवचन।

    3. मनांसि: द्वितीया/प्रथमा विभक्ति, बहुवचन।

    4. तस्मै: चतुर्थी विभक्ति, एकवचन।


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