1.12. युगवाणी - (Yugvaani) - Class 9 - पद्य-खंड - Rajeev Prakashan
- May 2
- 7 min read
Updated: May 8

पाठ का प्रकार: पद्य
लेखक का नाम: शिवमंगल सिंह 'सुमन'
विधा: कविता
परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)
विषय | विवरण |
लेखक | शिवमंगल सिंह 'सुमन' |
जन्म वर्ष | सन् 1915 ई. |
पाठ की विधा | कविता |
पाठ्यपुस्तक | पद्य-खंड, कक्षा 9 |
सबसे प्रसिद्ध पंक्ति | "जिस दिन संघर्षों पर जाली चढ़ जाएगी, उस दिन जीवन से मौत कहीं बढ़ जाएगी।" |
पाठ का केंद्रीय विषय | मानवता का कल्याण और श्रमिक वर्ग का सम्मान |
सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न | सुमन जी का जीवन-परिचय और 'युगवाणी' कविता का मूल भाव। |
1. लेखक परिचय (Author Introduction)
जन्म एवं स्थान: शिवमंगल सिंह 'सुमन' का जन्म सन् 1915 ई. में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के झंगरपुर गाँव में हुआ था। शिक्षा: आपकी प्रारंभिक शिक्षा रीवां में हुई और उच्च शिक्षा काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से एम.ए. और डी. लिट. के रूप में हुई। कार्यक्षेत्र: आपने इंदौर और उज्जैन के शिक्षण संस्थानों में अध्यापन किया और नेपाल में भारतीय दूतावास के सांस्कृतिक सचिव भी रहे। साहित्यिक विशेषता: आप प्रगतिशील काव्य-धारा के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं। आपकी कविताओं में जन-सामान्य की भाषा, सरलता और संगीतात्मकता का अद्भुत मिश्रण है। प्रमुख रचनाएँ:
काव्य: हिल्लोल, जीवनगान, प्रलयसृजन, विंध्य हिमालय, मिट्टी की बारात, विश्वास बढ़ता ही गया। सम्मान: 'मिट्टी की बारात' के लिए आपको साहित्य अकादमी और सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार मिला। आपको पद्मश्री, पद्मभूषण और भारत-भारती से भी अलंकृत किया गया। निधन: सन् 2002 ई. में आपका देहावसान हो गया।
English Summary of Introduction: Shivamangal Singh 'Suman' (1915–2002) was a preeminent poet of the Progressive movement in Hindi literature. Born in Unnav, UP, he held various academic and diplomatic positions. His work is celebrated for its musicality and focus on the common man. He received several prestigious awards, including the Sahitya Akademi Award, Padma Shri, and Padma Bhushan.
2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)
हिन्दी: 'युगवाणी' कविता मानवता के कल्याण की एक बुलंद पुकार है। कवि प्रकृति के हर रूप (क्यारी, डाली, अंकुर) में श्रमिक और किसान के संघर्षपूर्ण पद-चिह्नों को देखते हैं। वे समाज के कर्णधारों को चेतावनी देते हैं कि यदि उन्होंने 'सर्वहारा' (गरीब वर्ग) का विश्वास खोया, तो भविष्य का इतिहास उन्हें कभी माफ नहीं करेगा। कवि का मानना है कि वास्तविक विकास तभी संभव है जब समाज के अंतिम व्यक्ति के घर तक 'आजादी की किरण' पहुँचे। वे नव-निर्माण की लपटों को तेज करने और खुशहाल हवाओं के लिए खिड़कियाँ खुली रखने का आह्वान करते हैं।
English: The poem 'Yugvaani' (The Voice of the Era) is a prayer for the welfare of humanity. The poet identifies the hard work of laborers and farmers in every aspect of nature, from flowerbeds to blooming buds. He warns the leaders of society that history will not forgive them if they betray the trust of the 'proletariat' (the common working class). The poem emphasizes that true progress occurs only when the light of freedom reaches the humblest home. Suman urges the world to embrace new construction and let the breeze of prosperity flow without barriers.
3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)
हिन्दी: इस कविता का मूल संदेश श्रमिक वर्ग के प्रति सम्मान और सामाजिक न्याय है। कवि पाठकों को सचेत करते हैं कि केवल बातों से जनता को बहलाना बंद करें और यथार्थ में उनके उत्थान के लिए कार्य करें। यह कविता संघर्ष और नव-निर्माण की प्रेरणा देती है।
English: The core message is respect for the labor class and social justice. The poet warns against deceptive promises and advocates for genuine upliftment of the masses. The poem serves as an inspiration for persistent struggle and the rebuilding of a more equitable world.
4. पद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation)
महत्वपूर्ण अंश 1: "हर क्यारी में पद-चिह्न - - - हर शबनम ने जीवन की प्यास जगायी है।"
(क) सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'पद्य-खंड' के 'युगवाणी' पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता शिवमंगल सिंह 'सुमन' हैं। (ख) प्रसंग: कवि प्रकृति के सौंदर्य में श्रमिक के श्रम को देख रहे हैं। (ग) व्याख्या: कवि कहते हैं कि खेतों की हर क्यारी में मुझे तुम्हारे (श्रमिकों के) पैरों के निशान दिखते हैं और हर डाली की मुस्कान में तुम्हारी मेहनत की झलक है। काँटों में तुम्हारी पीड़ा है और ओस की बूँदें जीवन के प्रति नई प्यास जगाती हैं। (घ) काव्यगत सौंदर्य:
अलंकार: 'हर क्यारी', 'हर डाली' में अनुप्रास का पुट है।
भाषा: सरल और संगीतात्मक ब्रज-अवधि मिश्रित खड़ी बोली।
महत्वपूर्ण अंश 2: "जिस दिन सपनों के - - - उस दिन जीवन से मौत कहीं बढ़ जाएगी।"
(क) सन्दर्भ: पूर्ववत्। (ख) प्रसंग: संघर्षहीन जीवन की निरर्थकता पर प्रकाश। (ग) व्याख्या: कवि संकल्प करते हैं कि जिस दिन मैं अपने आदर्शों का सौदा करने लगूँगा या संघर्ष करना छोड़ दूँगा, और जिस दिन लाचारी मुझे घेर लेगी, वह दिन मेरे लिए मृत्यु से भी बदतर होगा। संघर्ष ही जीवन की सार्थकता है। (घ) काव्यगत सौंदर्य:
भाव: जुझारू प्रवृत्ति और स्वाभिमान का चित्रण।
5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)
शब्द | अर्थ | पर्यायवाची | विलोम |
शबनम | ओस | तुहिन कण | --- |
सरिता | नदी | तटिनी, तरंगिणी | --- |
किसलय | नई कोपलें | कोमल पत्ता | --- |
सिंधु | समुद्र | सागर, रत्नाकर | --- |
अकारथ | व्यर्थ | निरर्थक | सार्थक |
सर्वहारा | गरीब वर्ग | श्रमिक वर्ग | पूँजीपति |
सैलाब | बाढ़ | जल-प्रवाह | सूखा |
अंबर | आकाश | नभ, गगन | अवनि |
पावन | पवित्र | निर्मल | अपवित्र |
जमुहाई | उबासी | --- | --- |
6. सही या गलत - कारण सहित (True or False with Reason)
कथन 1: 'मिट्टी की बारात' के लिए सुमन जी को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
उत्तर: सही - कारण: यह उनके सबसे महत्वपूर्ण काव्य-संग्रहों में से एक है।
कथन 2: कवि ने 'युगवाणी' में पूँजीपतियों की प्रशंसा की है।
उत्तर: गलत - कारण: कवि ने श्रमिक और कृषक वर्ग को संबोधित करते हुए उनके उत्थान की कामना की है।
कथन 3: 'आजादी की प्रतिध्वनि' को कवि बेबसी की चीख के विरुद्ध खड़ा करते हैं।
उत्तर: सही - कारण: वे उन लोगों पर व्यंग्य करते हैं जो गरीबों की लाचारी को आजादी का नाम देकर बहलाते हैं।
7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: 'आँखों का पानी केवल पानी है' से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: इसका तात्पर्य संवेदनहीनता से है। यदि हम गरीबों का दुख देखकर भी नहीं पिघलते, तो हमारी आँखों के आँसू व्यर्थ हैं और हमारा जीना केवल एक 'मूक कहानी' मात्र है।
प्रश्न 2: 'अफीम आशा की' से कवि का क्या आशय है?
उत्तर: कवि उन झूठे आश्वासनों पर प्रहार कर रहे हैं जो गरीबों को केवल भविष्य के सपने दिखाकर वर्तमान की समस्याओं को भुलाने के लिए दिए जाते हैं।
प्रश्न 3: इतिहास किसे माफ नहीं करेगा?
उत्तर: इतिहास उन लोगों को माफ नहीं करेगा जो समय की पुकार को अनसुना करते हैं और गरीबों के शोषण पर अपनी सत्ता बनाए रखते हैं।
प्रश्न 4: 'युग की गायत्री' किसे कहा गया है?
उत्तर: इस नए युग की चेतना और निर्माण की भावना को ही कवि ने 'युग की गायत्री' और 'छंदों की रानी' कहा है जो भू और स्वर्ग को एक करने आई है।
8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: शिवमंगल सिंह 'सुमन' का जीवन-परिचय देते हुए उनके साहित्यिक अवदान को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शिवमंगल सिंह 'सुमन' (1915-2002) प्रगतिशील कविता के सशक्त हस्ताक्षर थे। उनका जन्म उन्नाव में हुआ था। उनकी कविताओं में क्रांति और करुणा का संगम है। 'हिल्लोल', 'जीवनगान' और 'प्रलयसृजन' उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं। उन्हें पद्मभूषण और भारत-भारती जैसे शीर्ष सम्मानों से अलंकृत किया गया। उन्होंने साहित्य के माध्यम से समाज के वंचित वर्ग की आवाज बुलंद की और हिंदी कविता को नए भाव-बोध से जोड़ा।
प्रश्न 2: 'युगवाणी' कविता के माध्यम से कवि द्वारा दी गई चेतावनियों का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर: कवि सुमन ने समाज के शासकों को चेतावनी दी है कि वे असहायों के साथ 'खेल' करना बंद करें। वे कहते हैं कि यदि समय रहते 'सर्वहारा' का विश्वास बहाल नहीं किया गया और नव-निर्माण की खिड़कियाँ बंद रखी गईं, तो आने वाली पीढ़ियाँ पछताएँगी। वे 'कुर्बानी के बेमोल बिकने' और 'अमावस के घेरे' के प्रति सचेत करते हैं, जिसका अर्थ है कि यदि हम अब भी नहीं जागे तो आजादी का सवेरा फिर से अंधकार में बदल सकता है।
9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)
अलंकार पहचान:
"आँखों का पानी केवल पानी है": इसमें 'पानी' शब्द के पुनरावृत्ति से प्रभावी व्यंग्य पैदा हुआ है।
"सोने-चाँदी की फसलें": रूपक अलंकार
प्रत्यय:
मोहकता: मोहक (मूल शब्द) + ता (प्रत्यय)। इसी प्रकार: सुंदरता, मानवता।
उत्पत्ति:
माफ: अरबी/फारसी (विदेशी शब्द)।
कालिख: तद्भव/देशज।
10. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)
प्रश्न 1: 'मिट्टी की बारात' किसकी रचना है?
उत्तर: यह शिवमंगल सिंह 'सुमन' की सुप्रसिद्ध रचना है।
प्रश्न 2: सुमन जी किस विश्वविद्यालय से डी. लिट. की उपाधि प्राप्त की?
उत्तर: आपने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से एम.ए. और डी. लिट. की उपाधि प्राप्त की।
11. UP Board परीक्षा में इस पाठ से अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)
5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:
'युगवाणी' कविता में निहित 'श्रमिक-कृषक' चेतना का वर्णन कीजिए।
6 अंक - पद्यांश व्याख्या:
"हर क्यारी में पद-चिह्न तुम्हारे देखे हैं... हर कली हवा में मचल मचल इठलाती है।"
"इतिहास न तुमको माफ करेगा याद रहे... नव-निर्माणों की लपटों को मत मंद करो।"
2 अंक - लघु उत्तरीय:
'अमावस का घेरा' किसका प्रतीक है?
'युगवाणी' कविता किस काव्य-संग्रह से ली गई है? (उत्तर: यह उनके समग्र काव्य-वैभव का अंश है, मूलतः मानवतावादी कविताओं का संकलन है)।
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