1.13.अच्छा होता - (Achha Hota) - Class 9 - पद्य-खंड - Rajeev Prakashan
- May 2
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Updated: May 9

पाठ का प्रकार: पद्य
लेखक का नाम: केदारनाथ अग्रवाल
विधा: कविता
परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)
विषय | विवरण |
लेखक | केदारनाथ अग्रवाल |
जन्म वर्ष | सन् 1911 ई. |
पाठ की विधा | कविता |
पाठ्यपुस्तक | पद्य-खंड, कक्षा 9 |
सबसे प्रसिद्ध पंक्ति | "अच्छा होता अगर आदमी आदमी के लिए परार्थी होता।" |
पाठ का केंद्रीय विषय | मानवीय मूल्यों की स्थापना और स्वार्थहीन जीवन की चाह |
सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न | केदारनाथ अग्रवाल का जीवन-परिचय और 'अच्छा होता' कविता का संदेश। |
1. लेखक परिचय (Author Introduction)
जन्म एवं स्थान: केदारनाथ अग्रवाल का जन्म सन् 1911 ई. में उत्तर प्रदेश के बाँदा जनपद के कमासिन गाँव में हुआ था। शिक्षा एवं कार्यक्षेत्र: आपने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक और कानपुर के डी.ए.वी. कॉलेज से 'लॉ' (वकालत) की पढ़ाई की। इसके पश्चात् आपने बाँदा में वकालत की। साहित्यिक व्यक्तित्व: आप हिंदी की प्रगतिशील काव्यधारा के शीर्ष कवि माने जाते हैं। आपकी कविताओं में मानवीय संवेदना, संतोष और वैचारिक दृढ़ता का अद्भुत संगम है। प्रकृति और जनता का संघर्ष आपकी कविता के मुख्य विषय हैं।
प्रमुख रचनाएँ:
काव्य: युग की गंगा, नींद के बादल, पंख और पतवार, फूल नहीं रंग बोलते हैं, आईना, अपूर्वा, कहे केदार खरी-खरी। सम्मान: 'फूल नहीं रंग बोलते हैं' के लिए सोवियत लैंड नेहरू तथा 'अपूर्वा' के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। निधन: सन् 2000 ई. में आपका देहावसान हो गया।
English Summary of Introduction: Kedarnath Agarwal (1911–2000) was a prominent poet of the Progressive movement in Hindi literature. A lawyer by profession in Banda, his poetry is celebrated for its deep human sensitivity and ideological firmness. He received the Soviet Land Nehru Award and the Sahitya Akademi Award for his significant contributions to Hindi poetry.
2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)
हिन्दी: 'अच्छा होता' कविता में केदारनाथ अग्रवाल ने आधुनिक मनुष्य की संवेदनहीनता और स्वार्थी प्रवृत्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कवि कामना करते हैं कि काश मनुष्य दूसरों के लिए परोपकारी (परार्थी) होता और अपने वचनों का पक्का होता। वे एक ऐसे व्यक्ति की कल्पना करते हैं जो स्वार्थ के गर्त में न डूबा हो और जिसका चरित्र बेदाग हो। कवि के अनुसार, यदि मनुष्य हृदय से दिलेर, ईमानदार और उदार होता, तो संसार से भय और आतंक मिट जाता और सच्ची मानवता का कल्याण होता। यह कविता मनुष्य को अपनी खोई हुई नैतिक धरोहर (थाती) को फिर से सहेजने की प्रेरणा देती है।
English: In the poem 'Achha Hota', Kedarnath Agarwal reflects on the erosion of human values and the rising selfishness in modern society. The poet yearns for a world where individuals are selfless (pararthi), true to their word, and possess a clean character. He emphasizes that it would be wonderful if humans were courageous, honest, and kind-hearted instead of being deceptive or exploitative. The poem suggests that preserving these innate human virtues is essential for global peace and the ultimate welfare of mankind.
3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)
हिन्दी: इस कविता का मूल संदेश मानवतावाद और नैतिक मूल्यों का पुनरुद्धार है। कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि बाहरी प्रगति के बजाय मनुष्य को अपने चरित्र और नियत को सच्चा बनाना चाहिए। निस्वार्थ सेवा और ईमानदारी ही वे गुण हैं जो संसार को रहने योग्य बना सकते हैं।
English: The core message is the revival of humanism and moral values. The poet argues that instead of material progress, humans should focus on refining their intentions and character. Selflessness and integrity are the virtues that can truly eradicate fear and lead to the welfare of the world.
4. पद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation)
महत्वपूर्ण अंश 1: "अच्छा होता / अगर आदमी / आदमी के लिए / परार्थी-"
(क) सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'पद्य-खंड' के 'अच्छा होता' नामक कविता से लिया गया है। इसके रचयिता केदारनाथ अग्रवाल हैं। (ख) प्रसंग: कवि मनुष्य में अपेक्षित आदर्श गुणों का वर्णन कर रहे हैं। (ग) व्याख्या: कवि कहते हैं कि वर्तमान समाज में मनुष्य बहुत स्वार्थी हो गया है। कितना अच्छा होता यदि एक मनुष्य दूसरे मनुष्य के दुख-सुख में काम आता और दूसरों के हित (परार्थी) के बारे में सोचता। (घ) काव्यगत
सौंदर्य:
भाषा: सरल, सुबोध और प्रभावशाली खड़ी बोली।
भाव: परोपकार की भावना पर बल दिया गया है।
महत्वपूर्ण अंश 2: "न स्वार्थ का चहबच्चा / न दगैल-दागी- / न चरित्र का कच्चा होता।"
(क) सन्दर्भ: पूर्ववत्। (ख) प्रसंग: कवि समाज में व्याप्त बुराइयों और चारित्रिक पतन पर चोट कर रहे हैं। (ग) व्याख्या: कवि की इच्छा है कि मनुष्य स्वार्थ के कीचड़ (चहबच्चा) में न डूबा हो। वह कलंकित (दगैल-दागी) न हो और उसका चरित्र मजबूत हो, ताकि समाज में विश्वास और सच्चाई बनी रहे। (घ) काव्यगत सौंदर्य:
शब्द चयन: 'चहबच्चा' और 'दगैल-दागी' जैसे शब्दों के प्रयोग से व्यंग्य को प्रभावी बनाया गया है।
5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)
शब्द | अर्थ | पर्यायवाची | विलोम |
परार्थी | दूसरों के लिए | परोपकारी | स्वार्थी |
नियत | स्वभाव / मंशा | इरादा, प्रकृति | --- |
चहबच्चा | गर्त / गड्ढा | हौज, कीचड़ | --- |
दगैल-दागी | दोषी / कलंकी | दागदार | निष्कलंक |
दिलेर | हिम्मत वाला | साहसी, वीर | डरपोक |
थाती | धरोहर | अमानत, न्यास | --- |
घाती | विनाशक / धोखेबाज | घातक, मारक | रक्षक |
ठगैत | ठगने वाला | वंचक, लुटेरा | --- |
दिलदार | उदार हृदय | सहृदय, दानी | संकुचित |
अक्षुण्ण | जो नष्ट न हो | अखंड, सुरक्षित | क्षुण्ण |
6. सही या गलत - कारण सहित (True or False with Reason)
कथन 1: केदारनाथ अग्रवाल को 'अपूर्वा' के लिए सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार मिला था।
उत्तर: गलत - कारण: उन्हें 'अपूर्वा' के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला था, जबकि 'फूल नहीं रंग बोलते हैं' के लिए सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार मिला।
कथन 2: कवि के अनुसार मनुष्य को 'परार्थी' होना चाहिए।
उत्तर: सही - कारण: परोपकार ही मनुष्य का श्रेष्ठ गुण है जिससे मानवता का कल्याण होता है।
कथन 3: 'मौत का बराती' होना एक सकारात्मक गुण है।
उत्तर: गलत - कारण: 'मौत का बराती' का आशय विनाशकारी या नकारात्मक प्रवृत्तियों में शामिल होना है, जिससे कवि बचने की सलाह देते हैं।
7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: 'चरित्र का कच्चा' होने का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: इसका तात्पर्य नैतिक रूप से कमजोर होना है। जो व्यक्ति अपने मूल्यों पर अडिग नहीं रहता और प्रलोभन में आकर गलत काम करता है, उसे 'चरित्र का कच्चा' कहा जाता है।
प्रश्न 2: कवि मनुष्य को 'स्वार्थ का चहबच्चा' क्यों नहीं देखना चाहते?
उत्तर: क्योंकि स्वार्थ में डूबा व्यक्ति केवल अपने बारे में सोचता है और दूसरों का शोषण करता है, जिससे समाज में संवेदनहीनता और अविश्वास फैलता है।
प्रश्न 3: 'हृदय की थाती' से कवि का क्या आशय है?
उत्तर: इसका आशय हृदय में संजोए गए उन मानवीय गुणों (जैसे दया, प्रेम, ईमानदारी) से है जो ईश्वर द्वारा मनुष्य को एक अनमोल धरोहर के रूप में दिए गए हैं।
प्रश्न 4: कवि ने मनुष्य के लिए 'दिलेर' और 'दिलदार' शब्दों का प्रयोग क्यों किया है?
उत्तर: ताकि मनुष्य निर्भीकता (दिलेर) से सच्चाई का साथ दे सके और उदारता (दिलदार) से दूसरों की मदद कर सके।
8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: केदारनाथ अग्रवाल का जीवन-परिचय देते हुए उनकी काव्यगत विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: केदारनाथ अग्रवाल (1911-2000) प्रगतिशील काव्यधारा के प्रमुख कवि थे। उनका जन्म बाँदा (उ.प्र.) में हुआ था और वे पेशे से वकील थे। उनकी कविताओं की मुख्य विशेषता 'मानवीय संवेदना' और 'जनता का संघर्ष' है। उनकी भाषा में फूलों जैसी कोमलता और लोहे जैसी कठोरता का अनूठा मिश्रण है। वे मार्क्सवादी विचारधारा से प्रभावित थे और उन्होंने 'नींद के बादल' तथा 'युग की गंगा' जैसी सशक्त रचनाओं के माध्यम से सामाजिक चेतना जागृत की।
प्रश्न 2: 'अच्छा होता' कविता के माध्यम से कवि के आदर्श समाज की परिकल्पना को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: कवि के आदर्श समाज में मनुष्य स्वार्थी न होकर परोपकारी (परार्थी) होता है। वहाँ लोग अपने वचनों के पक्के और व्यवहार में सच्चे होते हैं। कवि एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहाँ कोई किसी को ठगता (ठगैत) नहीं है और न ही कोई ईमान का घातक होता है। यदि मनुष्य दिलेर और ईमानदार हो जाए, तो संसार से भय और आतंक समाप्त हो जाएगा। संक्षेप में, कवि मानवीय गुणों की रक्षा को ही मानवता के कल्याण का आधार मानते हैं।
9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)
तत्सम, तद्भव एवं विदेशी शब्द:
तत्सम: नियत, चरित्र, हृदय।
तद्भव: पक्का, सच्चा, मौत, थाती।
विदेशी: ईमान (अरबी), आदमी (फारसी), बराती (तद्भव/देशज)।
विलोम शब्द:
परार्थी: स्वार्थी।
पक्का: कच्चा।
घाती: रक्षक।
सच्चा: झूठा।
10. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)
प्रश्न 1: केदारनाथ अग्रवाल को 'साहित्य अकादेमी' पुरस्कार किस कृति पर मिला?
उत्तर: उन्हें उनकी कृति 'अपूर्वा' के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
प्रश्न 2: 'युग की गंगा' के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: इस प्रसिद्ध काव्य-संग्रह के रचयिता केदारनाथ अग्रवाल हैं।
11. UP Board परीक्षा में इस पाठ से अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)
5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:
आधुनिक संदर्भ में 'अच्छा होता' कविता की प्रासंगिकता सिद्ध कीजिए।
6 अंक - पद्यांश व्याख्या:
"अच्छा होता / दिलदार- / दिलेर- / और हृदय की थाती होता..."
2 अंक - लघु उत्तरीय:
'ईमान का घाती' होने से क्या नुकसान है?
कवि ने मनुष्य को 'परार्थी' क्यों कहा है?
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