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    1.2. साखी (Saakhi) - (The Witness / Testimony) - Class 9 - पद्य-खंड - Rajeev Prakashan

    • Apr 29
    • 8 min read

    Updated: May 6

    1. पाठ का प्रकार: पद्य लेखक का नाम: कबीरदास विधा: साखी (दोहा छंद)  


    परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)

    विषय

    विवरण

    लेखक

    कबीरदास  


    जन्म वर्ष

    सन् 1398 ई.  


    पाठ की विधा

    साखी (दोहा छंद)  


    पाठ्यपुस्तक

    पद्य-खंड, कक्षा 9

    सबसे प्रसिद्ध पंक्ति

    "मसि कागद छुयो नहीं, कलम गह्यो नहिं हाथ।"  


    पाठ का केंद्रीय विषय

    गुरु की महिमा, ज्ञान का महत्व और बाह्याडंबरों का विरोध  


    सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न

    कबीर की भक्ति एवं उनके समाज सुधारक विचारों का वर्णन कीजिए।  


    1. लेखक परिचय (Author Introduction)


    जन्म एवं स्थान: कबीरदास का जन्म सन् 1398 ई. में काशी में हुआ था। मृत्यु: आपका देहांत सन् 1518 ई. के आसपास मगहर में हुआ। शिक्षा एवं जीवन-वृत्त: कबीर ने विधिवत शिक्षा नहीं पाई थी; वे अनपढ़ थे। उनका पालन-पोषण नीमा और नीरू नामक जुलाहा दंपत्ति ने किया। उन्होंने स्वामी रामानंद को अपना गुरु माना। प्रमुख रचनाएँ: कबीर की रचनाओं का मुख्य संग्रह 'बीजक' है, जिसके तीन भाग हैं:  


    1. साखी (दोहा छंद)  


    2. सबद (गेय पद)  


    3. रमैनी (चौपाई एवं दोहा) भाषा-शैली: इनकी भाषा को 'सधुक्कड़ी' या 'पंचमेल खिचड़ी' कहा जाता है, जिसमें ब्रज, अवधी, भोजपुरी, राजस्थानी और पंजाबी का मिश्रण है। हजारी प्रसाद द्विवेदी ने इन्हें 'वाणी का डिक्टेटर' कहा है। साहित्य में स्थान: कबीर निर्गुण काव्यधारा की ज्ञानमार्गी शाखा के सर्वश्रेष्ठ कवि और महान समाज सुधारक हैं।  


    English Summary of Introduction: Kabir Das was a 15th-century mystic poet and saint of the Nirguna branch of Hindi literature, born in 1398 in Kashi. Despite being formally uneducated, his teachings on spirituality, social equality, and rejection of rituals are compiled in 'Bijak'. He is celebrated as a profound reformer who used a simple, direct language known as 'Sadhukkari'.  


    परीक्षक की दृष्टि से: जीवन परिचय में रचनाओं की सूची और भाषा-शैली - ये दो बिंदु सबसे अधिक अंक दिलाते हैं। जन्म-मृत्यु की तारीख सटीक लिखें। उत्तर 80-100 शब्दों में सीमित रखें।

    2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)

    हिन्दी: संकलित साखियों में कबीर ने गुरु की अपार महिमा का गान किया है। वे बताते हैं कि गुरु की कृपा से ही हृदय में ज्ञान का प्रकाश फैलता है और प्रेम के बादल बरसते हैं, जिससे भक्त का रोम-रोम भीग जाता है। कबीर संसार की क्षणभंगुरता की चेतावनी देते हुए कहते हैं कि यह शरीर मिट्टी के कच्चे घड़े के समान है जो ज़रा से धक्के से फूट सकता है। वे सांसारिक सुखों को 'झूठा सुख' बताते हैं क्योंकि काल (मृत्यु) के सामने यह सब चबैना (भोजन) मात्र है। कबीर ने माया-मोह के जाल से बचने और राम-नाम के स्मरण पर बल दिया है, क्योंकि अंततः केवल गुरु-ज्ञान ही मनुष्य का उद्धार कर सकता है।  


    English: In these 'Saakhis', Kabir emphasizes the supreme importance of the Satguru (true teacher). He explains that spiritual knowledge is only possible through a guru's grace, which showers divine love upon the devotee. Kabir warns about the transience of human life, comparing the body to a fragile clay pot and the world to a 'Sembul' flower that is beautiful but useless. He urges people to ignore worldly pleasures, which are merely food for 'Kaal' (Death), and instead focus on the constant remembrance of God's name to achieve liberation.  


    3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)

    हिन्दी: इस पाठ का मूल संदेश यह है कि मनुष्य को सांसारिक माया और अहंकार का त्याग कर गुरु की शरण में जाना चाहिए। ज्ञान के बिना ईश्वर की प्राप्ति असंभव है, और यह ज्ञान केवल गुरु ही प्रदान कर सकता है। जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए व्यर्थ के घमंड को छोड़कर निरंतर प्रभु का सुमिरन करना चाहिए।  


    English: The core message is the necessity of a spiritual guide to overcome the illusions of 'Maya' and ego. Kabir highlights that life is temporary and death is inevitable, making spiritual realization through a guru's wisdom the only true goal of existence.  


    4. गद्यांश / पद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation)


    महत्वपूर्ण अंश 1: "सतगुरु हम सूँ - - - भीजि गया सब अंग।"

      


    (क) सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'पद्य-खंड' के 'साखी' नामक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता कबीरदास हैं। (ख) प्रसंग: इसमें कबीर ने गुरु की महत्ता और उनके द्वारा दिए गए ज्ञान के प्रभाव का वर्णन किया है। (ग) व्याख्या: कबीर कहते हैं कि सतगुरु ने मुझ पर प्रसन्न होकर एक ऐसी ज्ञान की बात (प्रसंग) कही, जिससे मेरे हृदय में प्रेम के बादल उमड़ आए। उस प्रेम रूपी वर्षा से मेरा अंग-अंग भीग गया, अर्थात मैं भक्ति के आनंद में सराबोर हो गया। (घ) काव्यगत सौंदर्य:  


    • अलंकार: 'बादल प्रेम का' में रूपक अलंकार है।  

    • रस: शांत एवं भक्ति रस।

    • छंद: दोहा।  


    महत्वपूर्ण अंश 2: "माया दीपक नर - - - एक आध उबरंत।"

      


    (क) सन्दर्भ: पूर्ववत्। (ख) प्रसंग: यहाँ माया की मोहकता और उससे बचने के उपाय का वर्णन है। (ग) व्याख्या: कबीर के अनुसार, यह माया दीपक की लौ के समान आकर्षक है और मनुष्य पतंगे के समान है। जैसे पतंगा दीपक की चमक पर मोहित होकर उसमें जल मरता है, वैसे ही मनुष्य माया के भ्रम में पड़कर नष्ट हो जाता है। केवल वे ही 'एक-आध' व्यक्ति बच पाते हैं जिन्हें गुरु का ज्ञान प्राप्त हो जाता है। (घ) काव्यगत सौंदर्य:  


    • अलंकार: रूपक अलंकार (माया दीपक, नर पतंग)।  

    • भाव: गुरु-ज्ञान ही माया के बंधन से मुक्ति का एकमात्र द्वार है।  


    महत्वपूर्ण अंश 3: "झूठे सुख को - - - कछु मुख में कछु गोद।"

      


    (क) सन्दर्भ: पूर्ववत्। (ख) प्रसंग: कबीर संसार की मरणशीलता और सांसारिक सुखों की व्यर्थता बताते हैं। (ग) व्याख्या: मनुष्य सांसारिक सुखों को ही वास्तविक सुख मानकर मन में प्रसन्न होता रहता है, जबकि यह संपूर्ण जगत 'काल' (मृत्यु) का चबैना (सूखा भोजन) है। कुछ तो काल के मुख में जा चुके हैं और कुछ उसकी गोद में मृत्यु की प्रतीक्षा कर रहे हैं। (घ) काव्यगत सौंदर्य:  


    • अलंकार: रूपक अलंकार।  

    • संदेश: मृत्यु अटल है, अतः भौतिकता में सुख ढूँढना व्यर्थ है।  


    5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)

    शब्द

    अर्थ

    पर्यायवाची

    विलोम

    ग्यान  


    ज्ञान

    बोध, विद्या

    अज्ञान

    प्रसंग  


    उपदेश/चर्चा

    संदर्भ

    ---

    पटतरे  


    समतुल्य

    बराबर

    ---

    बीसरि  


    भूलना

    विस्मृति

    याद

    उबरंत  


    बचना/उद्धार

    रक्षा

    डूबना

    सुमिरण  


    याद करना

    भजन

    भूलना

    निहारि  


    देखना

    अवलोकन

    अनदेखा

    चबैना  


    सूखा भोजन

    आहार

    ---

    काचा  


    कच्चा

    अपक्व

    पक्का

    भुवंग  


    साँप

    सर्प, नाग

    ---

    6. सही या गलत - कारण सहित (True or False with Reason)


    कथन 1: कबीरदास सगुण भक्ति धारा के कवि थे।  

    • उत्तर: गलत - कारण: कबीर निर्गुण धारा के ज्ञानमार्गी कवि थे और निराकार ईश्वर में विश्वास रखते थे।  


    कथन 2: साखी शब्द का तद्भव रूप 'साक्षी' है।  

    • उत्तर: सही - कारण: साखी का अर्थ प्रत्यक्ष ज्ञान या साक्ष्य है, जो दोहा छंद में रचा गया है।  


    कथन 3: कबीर ने माया को दीपक और मनुष्य को पतंगा कहा है।  

    • उत्तर: सही - कारण: क्योंकि मनुष्य माया के आकर्षण में पड़कर पतंगे की तरह अपना जीवन नष्ट कर लेता है।  


    कथन 4: 'बीजक' के रचयिता स्वामी रामानंद हैं।  

    • उत्तर: गलत - कारण: बीजक कबीर की रचनाओं का संग्रह है, जिसे उनके शिष्य धर्मदास ने संकलित किया था।  


    कथन 5: कबीर के अनुसार शरीर एक मजबूत लोहे के समान है।  

    • उत्तर: गलत - कारण: कबीर ने शरीर को 'काचा कुंभ' (मिट्टी का कच्चा घड़ा) कहा है जो नश्वर है।  


    7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)

    प्रश्न 1: कबीर ने 'साक्षी' (साखी) का क्या अर्थ बताया है?  

    • उत्तर: साखी का अर्थ है 'प्रत्यक्ष ज्ञान'। यह उस ज्ञान का प्रतीक है जो अनुभव के धरातल पर आधारित हो, न कि केवल किताबी शिक्षा पर।  


    प्रश्न 2: गुरु से मिलन कब संभव है?  

    • उत्तर: कबीर के अनुसार, जब परमात्मा (गोविन्द) की विशेष कृपा होती है, तभी सच्चे गुरु की प्राप्ति संभव होती है।  


    प्रश्न 3: 'जीभड़ियाँ छाला पड्या' क्यों कहा गया है?  

    • उत्तर: निरंतर विरह में राम का नाम पुकारते-पुकारते कबीर की जीभ में छाले पड़ गए हैं, जो उनकी गहरी व्याकुलता को दर्शाता है।  


    प्रश्न 4: कबीर संसार को सेमल का फूल क्यों कहते हैं?  

    • उत्तर: सेमल का फूल देखने में बहुत सुंदर होता है परंतु उसमें फल या सुगंध नहीं होती। वैसे ही यह संसार मोहक तो है पर निःसार (व्यर्थ) है।  


    प्रश्न 5: कबीर ने 'हौंस रही मन माँहिं' क्यों कहा?  

    • उत्तर: गुरु के उपदेशों के बदले उन्हें देने के लिए कबीर के पास कुछ भी योग्य वस्तु नहीं है, इसलिए उनके मन में गुरु को संतुष्ट करने की तीव्र इच्छा अधूरी रह गई है।  


    8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)

    प्रश्न 1: कबीर की काव्यगत विशेषताओं और उनकी भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।  


    • अथवा

    • कबीर को 'वाणी का डिक्टेटर' क्यों कहा जाता है?  


    • उत्तर: कबीर निर्गुण ज्ञानमार्गी धारा के महान कवि थे। उनकी काव्यगत विशेषताओं में धर्म के बाह्याडंबरों का कड़ा विरोध और सामाजिक समानता पर बल देना प्रमुख है। वे अपनी बात को अत्यंत निर्भीकता और स्पष्टता से कहते थे। उनकी भाषा को 'सधुक्कड़ी' कहा जाता है, जिसमें अनेक भाषाओं का मेल है। हजारी प्रसाद द्विवेदी ने उन्हें 'वाणी का डिक्टेटर' इसलिए कहा क्योंकि वे भाषा को मनचाहे ढंग से प्रयोग करने में समर्थ थे। यदि भाषा सीधी तरह से बात नहीं कह पाती थी, तो वे उसे 'दरेरा' देकर मनवा लेते थे।  


    प्रश्न 2: साखियों के आधार पर कबीर द्वारा वर्णित 'क्षणभंगुरता' के सिद्धांत को स्पष्ट कीजिए।  


    • अथवा

    • 'यह तन काचा कुंभ है' पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।  


    • उत्तर: कबीरदास ने मनुष्य को शरीर के प्रति अत्यधिक मोह न करने की सलाह दी है। वे कहते हैं कि यह शरीर मिट्टी के कच्चे घड़े के समान है जो ज़रा सा धक्का लगने पर फूट जाता है और हाथ कुछ नहीं आता। इसी प्रकार वे ऊँचे महलों (अवास) पर गर्व करने वालों को चेतावनी देते हैं कि कल ये सब नष्ट हो जाएँगे और उन पर घास जम जाएगी। कबीर का मानना है कि मृत्यु (काल) सभी का अंत करने वाली है, इसलिए सांसारिक अहंकार त्याग कर भक्ति का मार्ग चुनना चाहिए।  


    9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)

    रस (Ras):

    पंक्ति (पाठ से)

    रस का नाम

    स्थायी भाव

    "बरस्या बादल प्रेम का"  


    भक्ति रस

    अनुराग/रति

    "जगत चबैना काल का"  


    शांत रस

    निर्वेद

    अलंकार (Alankar):

    पंक्ति (पाठ से)

    अलंकार का नाम

    कारण

    "भ्रमि भ्रमि इवै पड़ंत"  


    पुनरुक्ति प्रकाश

    'भ्रमि' शब्द की आवृत्ति हुई है।

    "माया दीपक नर पतंग"  


    रूपक

    माया पर दीपक और नर पर पतंगे का आरोप है।

    "निहारि-निहारि"  


    पुनरुक्ति प्रकाश

    एक ही शब्द की बार-बार आवृत्ति।

    समास (Samas):

    समस्तपद

    विग्रह

    समास का भेद

    राम-नाम

    राम का नाम

    तत्पुरुष

    गुरु-ग्यान

    गुरु का ज्ञान

    तत्पुरुष

    तत्सम-रूप:

      

    • ग्यान: ज्ञान

    • सैंबल: शाल्मली

    • भगति: भक्ति

    • ब्यौहार: व्यवहार


    10. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)


    प्रश्न 1: कबीर की रचनाओं का संग्रह किस नाम से जाना जाता है?  


    • उत्तर: कबीर की रचनाओं का संग्रह 'बीजक' के नाम से जाना जाता है।  


    प्रश्न 2: 'बीछड़ियाँ मिलिबौ नहीं, काँचली भुवंग' का आशय क्या है?  


    • उत्तर: जैसे साँप एक बार केंचुली छोड़ दे तो वह उसे दोबारा प्राप्त नहीं कर सकता, वैसे ही मृत्यु के बाद यह सुंदर शरीर दोबारा नहीं मिलता।  


    11. UP Board परीक्षा में इस पाठ से अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)


    5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:

    • कबीरदास का जीवन-परिचय देते हुए उनकी साहित्यिक सेवाओं पर प्रकाश डालिए।  


    6 अंक - पद्यांश व्याख्या:

    • "माया दीपक नर पतंग..." अथवा "झूठे सुख को सुख कहै..."  


    2 अंक - लघु उत्तरीय:

    • 'साक्षी' शब्द से कबीर का क्या अभिप्राय है?  

    • कबीर ने गुरु को गोविन्द से बड़ा क्यों माना है?  


    1 अंक - MCQ:

    • कबीर को वाणी का डिक्टेटर किसने कहा? (हजारी प्रसाद द्विवेदी)  

    • कबीर के शिष्य कौन थे? (धर्मदास)  


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