1.7. पुनर्मिलन - (Punar-milan) - Class 9 - पद्य-खंड - Rajeev Prakashan
- Apr 30
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Updated: May 6

पाठ का प्रकार: पद्य लेखक का नाम: जयशंकर प्रसाद विधा: महाकाव्य अंश ('कामायनी' के 'निर्वेद' सर्ग से)
परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)
विषय | विवरण |
लेखक | जयशंकर प्रसाद |
जन्म वर्ष | सन् 1889 ई. |
पाठ की विधा | महाकाव्य अंश (कामायनी) |
पाठ्यपुस्तक | पद्य-खंड, कक्षा 9 |
सबसे प्रसिद्ध पंक्ति | "जीवन है तो कभी मिलन है, कट जाती दुख की रातें।" |
पाठ का केंद्रीय विषय | श्रद्धा, मनु और उनके पुत्र कुमार का भावनात्मक पुनर्मिलन |
सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न | प्रसाद जी का जीवन-परिचय और 'कामायनी' का साहित्यिक महत्व। |
1. लेखक परिचय (Author Introduction)
जन्म एवं स्थान: जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 ई. में वाराणसी में हुआ था। उनके पिता का नाम देवीप्रसाद साहु था। शिक्षा एवं संघर्ष: पारिवारिक स्थितियों के कारण उनकी औपचारिक शिक्षा केवल आठवीं तक हो पाई, किंतु स्वाध्याय से उन्होंने संस्कृत, हिंदी और फारसी का गहरा ज्ञान प्राप्त किया। साहित्यिक व्यक्तित्व: वे छायावाद के प्रवर्तक और बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे कवि होने के साथ-साथ सफल नाटककार, उपन्यासकार और कहानीकार भी थे। प्रमुख रचनाएँ:
काव्य: कामायनी (महाकाव्य), आँसू, लहर, झरना, चित्राधार।
नाटक: चंद्रगुप्त, स्कंदगुप्त, अजातशत्रु, ध्रुवस्वामिनी।
उपन्यास: कंकाल, तितली, इरावती (अपूर्ण)।
कहानी संग्रह: आकाशदीप, आँधी, इंद्रजाल। सम्मान: 'कामायनी' पर उन्हें 'मंगलाप्रसाद पारितोषिक' से सम्मानित किया गया। निधन: अत्यधिक परिश्रम और यक्ष्मा (Tuberculosis) के कारण सन् 1937 ई. में उनका देहांत हो गया।
English Summary of Introduction: Jaishankar Prasad (1889–1937), born in Varanasi, was the pioneer of the 'Chhayavad' movement in Hindi literature. Despite leaving school early, he became a master of many genres. His masterpiece 'Kamayani' is considered the greatest modern Hindi epic. His work is noted for its emotional depth, philosophical insight, and refined Sanskritized Hindi.
2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)
हिन्दी: 'पुनर्मिलन' कविता प्रसाद जी के प्रसिद्ध महाकाव्य 'कामायनी' से ली गई है। इसमें श्रद्धा अपने पुत्र कुमार के साथ अपने बिछड़े हुए पति मनु की तलाश में निकलती है। वह रात के सन्नाटे में करुण पुकार करती हुई राजपथ पर चलती है। इड़ा उसे सहारा देती है और उसे उस स्थान पर ले जाती है जहाँ मनु घायल अवस्था में लेटे हुए हैं। श्रद्धा का स्पर्श मनु को चेतना में लाता है और कुमार भी अपने पिता को पाकर हर्षित हो उठता है। इस प्रकार एक बिछड़ा हुआ परिवार फिर से मिल जाता है और सूना मंडप आत्मीयता के संगीत से गूँज उठता है।
English: 'Punar-milan' (Reunion) is an excerpt from Prasad's epic 'Kamayani'. Shraddha, accompanied by her son Kumar, searches for her estranged husband Manu. Wandering through the silent night with a heart full of sorrow, she encounters Ida, who guides her to a sacrificial altar. There, she finds Manu lying injured. Her soothing touch revives him, and the family reunites. The poem ends on a high emotional note where the joy of the son and the presence of Shraddha transform the gloomy atmosphere into a harmonious family melody.
3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)
हिन्दी: इस पाठ का मूल संदेश आशा, क्षमा और पारिवारिक एकता है। यह सिखाता है कि जीवन की कठिन यात्रा में बिछड़े हुए भी मिल सकते हैं यदि मन में धैर्य और समर्पण हो। श्रद्धा का चरित्र नारी के अटूट विश्वास और प्रेम का प्रतीक है जो मरुस्थल जैसे जीवन में भी सुख का संगीत भर देता है।
English: The central message is hope, forgiveness, and the sanctity of family. It teaches that even the lost can be found if there is persistence and love. Shraddha symbolizes a woman's unwavering faith and devotion that can revive a broken life and restore harmony.
4. पद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation)
महत्वपूर्ण अंश 1: "शिथिल शरीर वसन विशृंखल - - - ज्यों मुरझाई हुई कली।"
(क) सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'पद्य-खंड' के 'पुनर्मिलन' पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता जयशंकर प्रसाद हैं। (ख) प्रसंग: इसमें मनु को ढूँढती हुई श्रद्धा की दयनीय शारीरिक और मानसिक स्थिति का वर्णन है। (ग) व्याख्या: श्रद्धा का शरीर थकान से ढीला पड़ गया है, उसके वस्त्र अस्त-व्यस्त हैं और उसके बालों का जूड़ा (कबरी) खुल गया है। वह ऐसी दिखाई दे रही है जैसे पत्तों से गिरी हुई और पराग (मकरंद) से लूटी हुई कोई मुरझाई हुई कली हो। (घ) काव्यगत सौंदर्य:
अलंकार: 'मुरझाई हुई कली' में उपमा अलंकार है।
रस: करुण रस।
भाषा: परिष्कृत संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली।
महत्वपूर्ण अंश 2: "सहसा धधकी वेदी-ज्वाला - - - घुला हृदय, बन नीर बहा।"
(क) सन्दर्भ: पूर्ववत्। (ख) प्रसंग: श्रद्धा द्वारा मनु को घायल अवस्था में पहचानने का क्षण। (ग) व्याख्या: अचानक वेदी की अग्नि तेज़ हुई जिससे मंडप प्रकाशित हो गया। श्रद्धा (कामायनी) ने तेज़ कदमों से आगे बढ़कर देखा कि सामने सचमुच मनु घायल पड़े हैं। उसे अपने देखे हुए स्वप्न की सच्चाई पर यकीन हो गया और उसका हृदय पिघलकर आँसुओं के रूप में बहने लगा। (घ) काव्यगत सौंदर्य:
अलंकार: 'बन नीर बहा' में रूपक/अतिशयोक्ति का पुट।
भाव: पति को संकट में देखकर पत्नी की व्याकुलता और प्रेम का चित्रण।
5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)
शब्द | अर्थ | पर्यायवाची | विलोम |
निस्तब्ध | शांत / गतिहीन | मौन, स्तब्ध | मुखर |
साल रही | चुभ रही है | कसकना, पीड़ा देना | --- |
विशृंखल | अस्त-व्यस्त | बिखरा हुआ | सुव्यवस्थित |
अवलंब | सहारा | आश्रय, आधार | निराधार |
श्रांत | थका हुआ | क्लांत | अश्रांत |
वह्नि | अग्नि | आग, अनल | जल |
अनुलेपन | उबटन / लेप | लेपन | --- |
स्पंदन | कंपन | धड़कन | स्थिरता |
बटोही | पथिक | राहगीर, मुसाफिर | --- |
रजनी | रात | निशा, रात्रि | दिवस |
6. सही या गलत - कारण सहित (True or False with Reason)
कथन 1: जयशंकर प्रसाद को 'झरना' के लिए मंगलाप्रसाद पारितोषिक मिला था।
उत्तर: गलत - कारण: उन्हें उनकी कालजयी कृति 'कामायनी' के लिए यह पुरस्कार मिला था।
कथन 2: श्रद्धा के साथ उसका पुत्र कुमार (मानव) भी मनु की खोज में था।
उत्तर: सही - कारण: कविता में कुमार को माता की उँगली पकड़े और धैर्य के साथ चलते दिखाया गया है।
कथन 3: इड़ा ने श्रद्धा को देखकर उसे वहाँ से भगा दिया।
उत्तर: गलत - कारण: इड़ा दुखी श्रद्धा को देखकर द्रवित हो गई और उसे सहानुभूतिपूर्वक अपने पास बिठाया।
7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: श्रद्धा के हृदय में कौन सी भूल 'शूल' की तरह चुभ रही थी?
उत्तर: श्रद्धा को इस बात का दुख था कि जब मनु उससे रूठकर गए, तो वह उन्हें मना नहीं पाई, जबकि वे उसके अपने ही थे। यही कमी उसे काँटे की तरह चुभ रही थी।
प्रश्न 2: इड़ा ने श्रद्धा को कौन सा आश्वासन दिया?
उत्तर: इड़ा ने कहा कि जीवन की लंबी यात्रा में बिछड़े हुए लोग भी मिल जाते हैं और यदि जीवन है तो मिलन की उम्मीद भी बनी रहती है।
प्रश्न 3: मनु के शरीर में चेतना कैसे लौटी?
उत्तर: जब श्रद्धा ने मनु के पास बैठकर उन्हें सहलाया, तो उनके कोमल और स्नेहपूर्ण स्पर्श से मनु की मूर्च्छा टूटी और शरीर में हलका स्पंदन आया।
प्रश्न 4: कुमार को देखकर सूना मंडप मुखर क्यों हो गया?
उत्तर: बालक कुमार ने जब अपने पिता को देखा, तो वह "पिता! आ गया लो" कहकर उत्साह से भर गया और पिता के लिए जल माँगने लगा, जिससे मंडप की खामोशी टूट गई।
8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: जयशंकर प्रसाद की साहित्यिक विशेषताओं और उनकी भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: जयशंकर प्रसाद छायावाद के आधार स्तंभ हैं। उनके साहित्य में कोमलता, माधुर्य और ओज का अद्भुत संगम है। उनकी भाषा संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली है, जो साहित्यिक और परिमार्जित है। वे अपने सूक्ष्म भावों को व्यक्त करने के लिए लक्षणा और व्यंजना शब्द-शक्तियों का प्रयोग करते हैं। उनकी शैली संगीतात्मक, लयात्मक और काव्यात्मक चमत्कारों से पूर्ण है।
प्रश्न 2: 'पुनर्मिलन' कविता के आधार पर श्रद्धा के चरित्र की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: 'पुनर्मिलन' में श्रद्धा एक आदर्श पत्नी और माता के रूप में उभरती है। उसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं:
अटूट धैर्य: वह कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानती और पति की खोज जारी रखती है।
क्षमशील स्वभाव: मनु के रूठकर चले जाने पर भी उसके मन में केवल प्रेम और उन्हें पाने की लालसा है।
वात्सल्य: वह अपने पुत्र कुमार का सहारा बनी हुई है और उसे पिता से मिलवाती है।
जीवन-संगीत: उसका व्यक्तित्व ऐसा है कि उसके आने से टूटे हुए रिश्तों में फिर से मधुरता आ जाती है।
9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)
काव्य-सौंदर्य:
"आत्मीयता घुली उस घर में, छोटा-सा परिवार बना"
विशेषता: इसमें 'छोटा-सा' में उपमा अलंकार है। पारिवारिक सुख और आत्मीयता का सुंदर चित्रण है। भाषा सरल और प्रभावपूर्ण है। शांत रस की अनुभूति होती है।
अलंकार पहचान:
"वाणी में थी करुण वेदना वह पुकार जैसे जलती": इसमें 'जैसे' के प्रयोग से उपमा/उत्प्रेक्षा का भाव है।
"मुखर हो गया सूना मंडप": इसमें विरोधाभास अलंकार का पुट है (सूना और मुखर का मेल)।
10. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)
प्रश्न 1: 'कामायनी' किस युग की रचना है?
उत्तर: यह छायावादी युग की सर्वश्रेष्ठ काव्य-कृति है।
प्रश्न 2: 'आधे-अधूरे' नाटक के रचयिता कौन हैं?
उत्तर: यह प्रसाद जी की रचना नहीं है (यह मोहन राकेश की है); प्रसाद जी के प्रसिद्ध नाटक 'ध्रुवस्वामिनी' और 'चंद्रगुप्त' हैं।
11. UP Board परीक्षा में इस पाठ से अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)
5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:
'पुनर्मिलन' कविता का भावार्थ अपने शब्दों में लिखिए और इसकी प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
6 अंक - पद्यांश व्याख्या:
"इड़ा उठी, दिख पड़ा राज-पथ... ज्यों मुरझाई हुई कली।"
"सहसा धधकी वेदी-ज्वाला... घुला हृदय, बन नीर बहा।"
2 अंक - लघु उत्तरीय:
'कामायनी' में मनु और श्रद्धा किसके प्रतीक हैं? (मनु-मन, श्रद्धा-हृदय)।
'शूल-सदृश' में कौन सा अलंकार है? (उपमा)।
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