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    1.8. दान - (Daan) - Class 9 - पद्य-खंड - Rajeev Prakashan

    • 3 hours ago
    • 7 min read

    1. पाठ का प्रकार: पद्य लेखक का नाम: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' विधा: कविता (काव्य संग्रह 'अपरा' से संकलित)  


    परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)

    विषय

    विवरण

    लेखक

    सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'  


    जन्म वर्ष

    सन् 1896 ई.  


    पाठ की विधा

    कविता ('अपरा' से)  


    पाठ्यपुस्तक

    पद्य-खंड, कक्षा 9

    सबसे प्रसिद्ध पंक्ति

    "बोला मैं 'धन्य, श्रेष्ठ मानव!'" (व्यंग्य)

    पाठ का केंद्रीय विषय

    सामाजिक विषमता और ढोंगी मानवता पर कड़ा प्रहार

    सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न

    'दान' कविता में निहित व्यंग्य और भिक्षुक की दीन दशा का वर्णन।

    1. लेखक परिचय (Author Introduction)


    जन्म एवं स्थान: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्म सन् 1896 ई. में बंगाल के महिषादल (मेदिनीपुर) में हुआ था। वे मूलतः उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले (गढ़ाकोला) के निवासी थे। शिक्षा एवं संघर्ष: उनकी औपचारिक शिक्षा केवल नौवीं तक हुई, किंतु स्वाध्याय से उन्होंने संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी सीखी। उनका जीवन दुखों और संघर्षों से भरा था; आत्मीय जनों के निधन ने उन्हें भीतर तक तोड़ दिया था। साहित्यिक व्यक्तित्व: निराला छायावाद के चार स्तंभों में से एक हैं। वे विद्रोही स्वभाव के कवि थे जिन्होंने 'मुक्त छंद' का प्रवर्तन कर कविता को रूढ़ियों से मुक्त किया। प्रमुख रचनाएँ:  


    • काव्य: अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता, तुलसीदास, सरोज-स्मृति।  

    • गद्य: चतुरी चमार, कुल्ली भाट, बिल्लेसुर बकरिहा। पत्रकारिता: उन्होंने 'समन्वय' और 'मतवाला' जैसी पत्रिकाओं का संपादन किया। निधन: सन् 1961 ई. में प्रयाग में उनका देहांत हो गया।  


    English Summary of Introduction:

    Suryakant Tripathi 'Nirala' (1896–1961) was a revolutionary poet of the Chhayavad era. Born in Bengal but originally from UP, his life was marked by extreme personal tragedy and professional struggle. He introduced 'free verse' (Muktak Chand) to Hindi poetry, breaking traditional rhythmic barriers. His work ranges from highly philosophical epics to blunt social satires.


    2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)

    हिन्दी:

    'दान' कविता में निराला जी ने समाज के ढोंग और धार्मिक पाखंड पर तीखा व्यंग्य किया है। कविता की शुरुआत गोमती नदी के किनारे प्रातःकाल के सुंदर प्राकृतिक वर्णन से होती है। कवि दार्शनिक विचार करते हैं कि संसार में मानव ही श्रेष्ठ है। तभी वे पुल पर एक हड्डियों के ढाँचे के समान भिक्षुक को देखते हैं जो अत्यंत दयनीय अवस्था में है। वहीं एक 'विप्रवर' (ब्राह्मण) शिव की पूजा करके आते हैं और अपनी झोली से पुए निकालकर बंदरों को खिलाते हैं, किंतु उस भूख से तड़पते भिक्षुक को दुत्कार कर भगा देते हैं। यह देखकर कवि अत्यंत दुखी होते हैं और समाज की इस 'श्रेष्ठ मानवता' पर कटाक्ष करते हैं।


    English:

    The poem 'Daan' is a sharp satire on social hypocrisy and religious vanity. It begins with a beautiful description of a morning by the Gomti River. While observing nature's beauty, the poet reflects that humans are the supreme creation. However, his thoughts are interrupted when he sees a skeletal beggar in a miserable state. Soon, a religious man arrives after worshipping Lord Shiva; he feeds sweets (pua) to monkeys but harshly drives away the starving beggar. Witnessing this indifference, the poet ironically calls humans 'blessed and supreme', exposing the lack of true compassion in society.


    3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)


    हिन्दी:

    इस कविता का मूल संदेश शोषितों और असहायों के प्रति संवेदना जागृत करना है। कवि यह बताना चाहते हैं कि पशुओं को खिलाना और पूजा-पाठ करना तब तक व्यर्थ है जब तक मनुष्य अपने सामने मौजूद भूखे और लाचार इंसान की मदद न करे। यह पाठ धार्मिक पाखंड और संवेदनहीन मानवता पर प्रहार करता है।


    English:

    The core message is to awaken empathy for the oppressed and the helpless. The poet argues that religious rituals and feeding animals are meaningless if one ignores a suffering human being right in front of them. It challenges religious hypocrisy and calls for a more compassionate form of humanity.


    4. पद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation)


    महत्वपूर्ण अंश 1: "निकला पहिला अरविंद आज - - - नटी नवल नृत्यपर-मधुर आवेश-चपल।" (क) सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'पद्य-खंड' के 'दान' नामक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' हैं। (ख) प्रसंग: कवि ने प्रातःकाल में गोमती नदी के किनारे की सुंदर प्रकृति का सजीव चित्रण किया है। (ग) व्याख्या: आज प्रातःकाल का पहला कमल खिल गया है, जो प्रकृति के सुंदर रहस्यों को देख रहा है। सुगंधित वस्त्रों वाली हवा (सुगंधित पवन) कानों में प्राणों की बात कह रही है। गोमती नदी अपनी कम गहराई के कारण ऐसी लग रही है जैसे कोई चंचल नर्तकी आवेश में आकर सुंदर नृत्य कर रही हो।


    (घ) काव्यगत सौंदर्य:  

    • अलंकार: 'नटी नवल' और 'कूकै लगीं' (संदर्भानुसार) में अनुप्रास एवं गोमती नदी पर नर्तकी का आरोप होने से मानवीकरण अलंकार है।

    • भाषा: तत्सम प्रधान सामासिक पदावली।  


    महत्वपूर्ण अंश 2: "देखा भी नहीं उधर फिर कर - - - बोला मैं "धन्य, श्रेष्ठ मानव !""


    (क) सन्दर्भ: पूर्ववत्।

    (ख) प्रसंग: धार्मिक व्यक्ति की संवेदनहीनता पर कवि का व्यंग्य।

    (ग) व्याख्या: सज्जन कहलाने वाले उस ब्राह्मण ने उस ओर मुड़कर भी नहीं देखा जहाँ वह लाचार भिक्षुक खड़ा था। उन्होंने हाथ बढ़ाकर बंदरों को तो पुए खिला दिए, लेकिन जैसे ही भिक्षुक पास आया, उसे 'दानव' कहकर दूर भगा दिया। यह देखकर कवि ने अत्यंत गहरे व्यंग्य में कहा—"वाह! मनुष्य वाकई बहुत महान और श्रेष्ठ है!"

    (घ) काव्यगत सौंदर्य:

    • अलंकार: विडंबना और गहरा व्यंग्य (Irony)।

    • भाव: समाज की गिरती हुई मानवीय संवेदनाओं पर प्रहार।


    5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)

    शब्द

    अर्थ

    पर्यायवाची

    विलोम

    अरविंद

    कमल

    जलज, पंकज

    ---

    समीर

    हवा

    पवन, वायु

    ---

    नटी

    नर्तकी

    डांसर

    ---

    कृशकाय

    दुबला-पतला

    कमजोर

    स्थूलकाय

    मृतप्राय

    मरणसन्न

    अधमरा

    जीवित

    विप्रवर

    श्रेष्ठ ब्राह्मण

    द्विज

    ---

    सलिल

    जल

    पानी, नीर

    ---

    कपि

    बंदर

    वानर, मर्कट

    ---

    मज्जन

    स्नान

    नहाना

    ---

    इतर

    दूसरी तरफ

    दूसरी ओर

    ---

    6. सही या गलत - कारण सहित (True or False with Reason)

    कथन 1: निराला जी का देहांत बनारस में हुआ था।  

    • उत्तर: गलत - कारण: उनका निधन सन् 1961 ई. में प्रयाग में हुआ था।  


    कथन 2: 'दान' कविता 'निराला रचनावली' के आठवें खंड से ली गई है।  

    • उत्तर: गलत - कारण: यह कविता निराला की प्रसिद्ध पुस्तक 'अपरा' से संकलित है।


    कथन 3: कवि ने गोमती नदी की तुलना एक नर्तकी (नटी) से की है।

    • उत्तर: सही - कारण: नदी के जल की चंचलता और कम गहराई के कारण उसे नाचती हुई नर्तकी जैसा बताया गया है।


    कथन 4: विप्र ने भिक्षुक को पुए खिलाए।

    • उत्तर: गलत - कारण: विप्र ने पुए बंदरों को खिलाए और भिक्षुक को दुत्कार कर भगा दिया।


    7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)


    प्रश्न 1: भिक्षुक की शारीरिक दशा कैसी थी?

    • उत्तर: भिक्षुक का शरीर हड्डियों का ढाँचा (कंकाल) मात्र रह गया था। वह अत्यंत दुबला-पतला (कृशकाय) और मृत्यु के निकट (मृतप्राय) दिखाई दे रहा था।


    प्रश्न 2: ब्राह्मण (विप्र) पुल पर क्या करने आए थे?

    • उत्तर: ब्राह्मण देव सरिता (नदी) में स्नान करके आए थे और अपनी झोली में बंदरों को खिलाने के लिए पुए लेकर आए थे।


    प्रश्न 3: 'दान' कविता में प्रकृति को 'सदया' क्यों कहा गया है?

    • उत्तर: क्योंकि प्रकृति बिना किसी भेदभाव के सबको अपना सौंदर्य, गीत और गंध अनायास ही प्रदान करती है, वह दयालु है।


    प्रश्न 4: कवि ने 'धन्य, श्रेष्ठ मानव' किसे और क्यों कहा?

    • उत्तर: यह एक तीखा व्यंग्य है। कवि ने उस ब्राह्मण को ऐसा कहा क्योंकि उसने भूखे इंसान की मदद करने के बजाय बंदरों को खिलाने को अधिक श्रेष्ठ समझा।


    8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)


    प्रश्न 1: निराला जी का जीवन-परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए।  

    • उत्तर: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' छायावाद के विद्रोही और क्रांतिकारी कवि थे। उनका जीवन अत्यंत अभावपूर्ण और दुखों से भरा था। उनकी प्रमुख काव्य कृतियाँ हैं: अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता, तुलसीदास और सरोज-स्मृति। उन्होंने उपन्यास, कहानी और निबंध विधाओं में भी उत्कृष्ट लेखन किया है। उनकी संपूर्ण रचनाएँ 'निराला रचनावली' के आठ खंडों में प्रकाशित हैं।  


    प्रश्न 2: 'दान' कविता के माध्यम से कवि ने समाज के किस पाखंड पर प्रहार किया है?

    • उत्तर: कवि ने समाज के उस खोखले धार्मिक पाखंड पर प्रहार किया है जहाँ जीव-जंतुओं के प्रति तो दया दिखाई जाती है, किंतु अपने ही जैसे शोषित और लाचार इंसान की उपेक्षा की जाती है। ब्राह्मण का बंदरों को पुए खिलाना और भिक्षुक को 'दानव' कहना यह दर्शाता है कि हमारा धर्म केवल कर्मकांडों तक सीमित रह गया है, उसमें सच्ची मानवीय संवेदना और करुणा लुप्त हो चुकी है।


    9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)


    अलंकार पहचान:

    • "जीता ज्यों जीवन से उदास": इसमें 'ज' वर्ण की आवृत्ति और 'ज्यों' के कारण उपमा/उत्प्रेक्षा का पुट है।

    • "नटी नवल नृत्यपर": अनुप्रास अलंकार।

    • "कपि-कुल": (पाठ संदर्भ) अनुप्रास अलंकार।


    समास-विग्रह:

    • कृशकाय: कृश (दुबला) है जो काय (शरीर) - (कर्मधारय)।

    • राम-भक्त: राम का भक्त - (तत्पुरुष)।

    • सरिता-मज्जन: सरिता में मज्जन (स्नान) - (तत्पुरुष)।

    • दूर्वादल: दूर्वा का दल (घास का समूह) - (तत्पुरुष)।


    10. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)


    प्रश्न 1: निराला ने समाज के किस वर्ग के प्रति संवेदना व्यक्त की है?

    • उत्तर: निराला ने समाज के शोषित, असहाय और उपेक्षित वर्ग (जैसे भिक्षुक) के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।


    प्रश्न 2: 'अपरा' के रचयिता कौन हैं?  

    • उत्तर: 'अपरा' सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का काव्य संग्रह है।  


    11. UP Board परीक्षा में इस पाठ से अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)


    5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:

    • 'दान' कविता का भावार्थ लिखते हुए उसमें निहित सामाजिक संदेश स्पष्ट कीजिए।


    6 अंक - पद्यांश व्याख्या:

    • "मैंने झुक नीचे को देखा... जपते हैं श्रीमन्नारायण।"

    • "निकला पहिला अरविंद आज... आवेश-चपल।"


    2 अंक - लघु उत्तरीय:

    • ब्राह्मण (द्विज) बारहों मास किसे भजते हैं? (उत्तर: शिव को)

    • 'निश्चल नियम' से कवि का क्या तात्पर्य है? (उत्तर: प्रकृति का अटल नियम)


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