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    1.9. उन्हें प्रणाम - (Unhen Pranam) - Class 9 - पद्य-खंड - Rajeev Prakashan

    • 3 hours ago
    • 7 min read

    1. पाठ का प्रकार: पद्य लेखक का नाम: सोहनलाल द्विवेदी विधा: कविता (काव्य संग्रह 'प्रभाती' से संकलित)  


    परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)

    विषय

    विवरण

    लेखक

    सोहनलाल द्विवेदी  


    जन्म वर्ष

    सन् 1906 ई.  


    पाठ की विधा

    कविता ('प्रभाती' संकलन के 'प्रथम प्रणाम' से)  


    पाठ्यपुस्तक

    पद्य-खंड, कक्षा 9

    सबसे प्रसिद्ध पंक्ति

    "मानवता का संस्थापन ही है जिनका धर्म।"  


    पाठ का केंद्रीय विषय

    राष्ट्रभक्तों, समाज सुधारकों और अनाम शहीदों के प्रति श्रद्धा  


    सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न

    सोहनलाल द्विवेदी का जीवन-परिचय और 'उन्हें प्रणाम' कविता का उद्देश्य।  


    1. लेखक परिचय (Author Introduction)


    जन्म एवं स्थान: सोहनलाल द्विवेदी का जन्म सन् 1906 ई. में उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बिंदकी नामक गाँव में हुआ था। शिक्षा: आपकी प्रारंभिक शिक्षा फतेहपुर में तथा उच्च शिक्षा काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में हुई। वहां मदनमोहन मालवीय के संपर्क में आने पर आपमें राष्ट्रीयता की भावना जाग्रत हुई। कार्यक्षेत्र: आपने लखनऊ से दैनिक पत्र 'अधिकार' का संपादन किया और 'बालसखा' के अवैतनिक संपादक भी रहे। गांधीवादी विचारधारा से प्रभावित होने के कारण आपकी कविताओं में खादी, ग्राम सुधार, सत्य और अहिंसा का स्वर प्रमुख है। प्रमुख रचनाएँ:  


    • काव्य संग्रह: भैरवी (प्रथम संग्रह, 1941), पूजागीत, प्रभाती, चेतना, बासंती (प्रेम-गीत)।  

    • बाल कविताएँ: दूधबताशा, बालभारती, शिशुभारती, नेहरू चाचा, बिगुल, बाँसुरी।  

    • आख्यान काव्य: वासवदत्ता, कुणाल, विषपान। सम्मान: भारत सरकार ने सन् 1969 में आपको पद्मश्री से सम्मानित किया। निधन: सन् 1988 ई. में आपका देहावसान हो गया।  


    English Summary of Introduction: Sohanlal Dwivedi (1906–1988) was a celebrated nationalistic poet, born in Fatehpur, UP. Deeply inspired by Mahatma Gandhi and Madan Mohan Malaviya, he dedicated his literature to patriotism, social reform, and non-violence. Awarded the Padma Shri in 1969, he is famous for both his powerful nationalistic anthems and his delightful children's poetry.  


    2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)


    हिन्दी: 'उन्हें प्रणाम' कविता में सोहनलाल द्विवेदी उन सभी अनाम महापुरुषों और क्रांतिकारियों को नमन करते हैं जिन्होंने मानवता की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। कवि उन्हें प्रणाम करते हैं जो निर्धनों, शोषितों और दलितों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होते हैं और जिनका एकमात्र धर्म मानवता की स्थापना करना है। कविता में उन देशभक्तों को भी याद किया गया है जो जेल की सीकचों के पीछे बेतों की मार सहते हुए भी भारत माता की जय-जयकार करते रहे, जो हँसते-हँसते फाँसी के तख्तों पर झूल गए। कवि का मानना है कि इन बलिदानियों की पावन ज्वाला ही एक ऐसे दिव्य भविष्य का निर्माण करेगी जहाँ सब स्वतंत्र और सुखी होंगे।  


    English: In 'Unhen Pranam', the poet pays tribute to the unsung heroes and revolutionaries who sacrificed everything for the upliftment of humanity and the liberation of the motherland. He salutes those who stood by the poor and marginalized, making human service their primary religion. The poem honors freedom fighters who endured prison torture and walked to the gallows with a smile, driven by selfless love for the nation. Ultimately, the poet believes that the sacred fire of their sacrifices will usher in a new era of freedom and global happiness.  


    3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)


    हिन्दी: इस कविता का मूल संदेश निस्वार्थ सेवा और राष्ट्रभक्ति है। कवि उन लोगों को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं जो स्वयं के यश या स्वार्थ की चिंता किए बिना समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण के लिए कार्य करते हैं। यह कविता पाठकों में स्वाभिमान, साहस और मानवतावादी मूल्यों के प्रति सम्मान पैदा करती है।  


    English: The core message is selfless service and undying patriotism. The poet highlights that true greatness lies in working for the welfare of others without seeking personal fame or gain. It inspires readers to respect humanitarian values and the spirit of sacrifice for a better future.  


    4. पद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation)


    महत्वपूर्ण अंश 1: "कोटि-कोटि नंगों, - - - उन्हें प्रणाम ! सतत प्रणाम !"

    (क) सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'पद्य-खंड' के 'उन्हें प्रणाम' नामक कविता से लिया गया है। इसके रचयिता सोहनलाल द्विवेदी हैं। (ख) प्रसंग: कवि उन अनाम महापुरुषों को नमन कर रहे हैं जो गरीबों और शोषितों के रक्षक बने। (ग) व्याख्या: करोड़ों निर्धन और भिखमंगों के साथ जो लोग गर्व से खड़े हैं, जिन्होंने शोषित और पीड़ित जनता का हाथ थामकर उन्हें पूर्ण मुक्ति की ओर अग्रसर किया है—भले ही दुनिया उनके नाम न जानती हो, पर वे नमन के योग्य हैं। (घ) काव्यगत सौंदर्य:  

    • अलंकार: 'कोटि-कोटि' में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है。  

    • भाषा: सरल, सरस और प्रवाहमयी।  


    महत्वपूर्ण अंश 2: "भेद गया है दीन-अश्रु से - - - मानवता का संस्थापन ही है जिनका धर्म।"

    (क) सन्दर्भ: पूर्ववत्। (ख) प्रसंग: मानवता के प्रति समर्पित कर्मयोगियों की विशेषता का वर्णन। (ग) व्याख्या: वे लोग जिनका हृदय गरीबों के आँसू देखकर पिघल जाता है, जिन्हें निर्धनों के साथ रहने में कोई शर्म नहीं आती और जो किसी भी वेश में रहकर केवल सेवा करते हैं—उनका सबसे बड़ा धर्म मानवता की स्थापना करना है। (घ) काव्यगत सौंदर्य:  

    • रस: करुण एवं वीर रस का समन्वय।  

    • भाव: मानवता को ही सर्वोपरि धर्म माना गया है।  


    महत्वपूर्ण अंश 3: "जो फाँसी के तख्तों पर - - - नवयुग के उस नव प्रभात को कोटि प्रणाम।"

    (क) सन्दर्भ: पूर्ववत्। (ख) प्रसंग: क्रांतिकारियों के बलिदान और सुखद भविष्य की आशा। (ग) व्याख्या: जो वीर हँसते-हँसते फाँसी के फंदे को चूम लेते हैं और अत्याचार के सामने कभी नहीं झुकते, उनकी पावन आहुति से जो उज्ज्वल भविष्य (अनागत) आने वाला है, उस नए युग के नए सवेरे को कवि करोड़ों बार प्रणाम करते हैं।  


    5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)

    शब्द

    अर्थ

    पर्यायवाची

    विलोम

    कोटि  


    करोड़ों

    असंख्य

    ---

    उन्नत माथ  


    ऊँचा मस्तक

    स्वाभिमानी

    अवनत

    मर्म  


    हृदय/रहस्य

    उर, जिय

    ---

    मुहताज  


    निर्धन

    गरीब, दीन

    संपन्न

    सतत  


    निरंतर

    लगातार

    कभी-कभी

    वितान  


    विस्तार/आकाश

    फैलाव

    ---

    मधुकरियाँ  


    रोटियाँ (भिक्षा की)

    टुकड़ा

    ---

    सीकचों  


    लोहे की सलाखें

    जेल

    ---

    अनागत  


    न आने वाला/भविष्य

    आगामी

    आगत

    हविष्य  


    आहुति

    भेंट

    ---

    6. सही या गलत - कारण सहित (True or False with Reason)


    कथन 1: सोहनलाल द्विवेदी ने 'सरस्वती' पत्रिका का संपादन किया था।  

    • उत्तर: गलत - कारण: उन्होंने दैनिक पत्र 'अधिकार' का संपादन किया था।  


    कथन 2: 'भैरवी' सोहनलाल द्विवेदी का प्रथम काव्य संग्रह है।  

    • उत्तर: सही - कारण: यह सन् 1941 ई. में प्रकाशित हुआ था।  


    कथन 3: कवि ने केवल राजाओं और प्रसिद्ध नेताओं को प्रणाम किया है।  

    • उत्तर: गलत - कारण: कवि ने विशेष रूप से उन अनाम महापुरुषों, गरीबों के सहायकों और क्रांतिकारियों को प्रणाम किया है जिनके नाम जगत नहीं जानता।  


    कथन 4: 'मानवता का संस्थापन' ही देशभक्तों का मूल धर्म है।  

    • उत्तर: सही - कारण: कविता के अनुसार, वे किसी भी देश या वेश में हों, उनका लक्ष्य मानवता की सेवा ही होता है।  


    7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)


    प्रश्न 1: कवि किन्हें 'प्रथम प्रणाम' कर रहे हैं?  

    • उत्तर: कवि उन्हें 'प्रथम प्रणाम' कर रहे हैं जो पीड़ित मानवता के घावों पर मरहम लगाने का कार्य करते हैं और जो दूसरों के सुख के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर देते हैं।  


    प्रश्न 2: 'सूखी मधुकरियाँ' किनका सहारा बनती हैं?  

    • उत्तर: 'सूखी मधुकरियाँ' (भिक्षा की रोटियाँ) उन महापुरुषों का सहारा बनती हैं जो राजसी ठाठ-बाट त्यागकर गरीबों के लिए स्वयं भिखारी बनकर दर-दर भटकते हैं।  


    प्रश्न 3: यौवन में वैराग्य लेने वालों का क्या उद्देश्य है?  

    • उत्तर: उनका उद्देश्य नगर-नगर और गांव-गांव की धूल छानकर सोई हुई जनता को उसकी भूल समझाना और उसे जगाना है।  


    प्रश्न 4: साम्राज्यशाही की दीवार कैसे गिरती है?  

    • उत्तर: साम्राज्यशाही की दृढ़ दीवार उन मतवाले वीरों के बार-बार प्राणों का बलिदान देने से गिरती है जो स्वार्थ और यश के लोभ से ऊपर होते हैं।  


    8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)


    प्रश्न 1: सोहनलाल द्विवेदी का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख कृतियों का उल्लेख कीजिए।  

    • उत्तर: सोहनलाल द्विवेदी राष्ट्रीय चेतना के प्रमुख कवि हैं। गांधीवादी मूल्यों (सत्य, अहिंसा, देशभक्ति) का आपकी रचनाओं पर गहरा प्रभाव है। आपने भैरवी, पूजागीत और चेतना जैसे ओजस्वी काव्य संग्रहों के साथ-साथ बच्चों के लिए दूधबताशा और बालभारती जैसी मधुर बाल कविताएँ भी लिखीं। आपकी भाषा सरल और प्रवाहमयी है। भारत सरकार ने आपको पद्मश्री से सम्मानित किया था।  


    प्रश्न 2: 'उन्हें प्रणाम' कविता का भावार्थ और इसके माध्यम से कवि द्वारा दिए गए संदेश को स्पष्ट कीजिए।  

    • उत्तर: इस कविता में कवि उन सभी ज्ञात-अज्ञात महापुरुषों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं जिन्होंने मानवता की रक्षा और देश की आजादी के लिए कष्ट सहे। कवि का संदेश है कि मनुष्य को स्वार्थ और लोभ का त्याग कर समाज के दबे-कुचले लोगों के उत्थान के लिए कार्य करना चाहिए। फाँसी के तख्तों पर झूलने वाले और जेलों में मार सहने वाले वीरों का बलिदान ही समाज में 'नवयुग के नव प्रभात' का उदय करेगा। यह कविता देशभक्ति को पूजा की तरह पवित्र मानती है।  


    9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)


    पर्यायवाची शब्द:

    • राजा: नृप, महीप, नरेश।

    • दीन: निर्धन, दरिद्र, रंक।

    • जगत: संसार, विश्व, लोक।


    विलोम शब्द:

    • उन्नत: अवनत।

    • स्वतंत्र: परतंत्र।

    • शांति: अशांति।

    • शोषित: पोषक।


    विशेषण-विशेष्य छांटिए:

    • नवयुग: नव (विशेषण), युग (विशेष्य)।

    • नवप्रभात: नव (विशेषण), प्रभात (विशेष्य)।

    • मरणमधुर: मधुर (विशेषण), मरण (विशेष्य)।


    10. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)


    प्रश्न 1: सोहनलाल द्विवेदी को भारत सरकार द्वारा किस सम्मान से अलंकृत किया गया?  

    • उत्तर: आपको सन् 1969 में पद्मश्री उपाधि से सम्मानित किया गया था।  


    प्रश्न 2: 'भैरवी' किस विधा की रचना है और इसका प्रकाशन कब हुआ?  

    • उत्तर: 'भैरवी' एक काव्य संग्रह है, जिसका प्रकाशन सन् 1941 ई. में हुआ था।  


    11. UP Board परीक्षा में इस पाठ से अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)


    5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:

    • 'उन्हें प्रणाम' कविता के आधार पर क्रांतिकारियों के साहस और बलिदान का वर्णन कीजिए।  


    6 अंक - पद्यांश व्याख्या:

    • "जो फाँसी के तख्तों पर जाते हैं झूम... नवयुग के उस नव प्रभात को कोटि प्रणाम।"  


    2 अंक - लघु उत्तरीय:

    • कवि ने 'नवयुग का नव प्रभात' किसे कहा है?  

    • 'नंगों-भिखमंगों' के साथ खड़े होने वाले महापुरुषों की क्या विशेषता है?  

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