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    10. महत्त्वाकांक्षा और लोभ - [Mahattvakanksha aur Lobh] - Class 11 - Yuvakbharati

    • Apr 16
    • 5 min read

    Updated: Apr 19

    लेखक: पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी | विधा: वैचारिक निबंध


    १. शब्दार्थ और मुहावरे (Glossary with English Context)

    क. शब्दार्थ (Word Meanings)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi)

    अर्थ (English Context)

    महत्त्वाकांक्षा

    उन्नति की तीव्र इच्छा

    Ambition

    प्राप्य

    जो प्राप्त हो चुका हो

    What is attained

    विरक्ति

    लगाव न होना / वैराग्य

    Detachment / Indifference

    अप्राप्य

    जो प्राप्त न हुआ हो

    Unattained

    क्षुद्र

    छोटा या नीच

    Petty / Small-minded

    निर्बुद्धि

    मूर्ख / बुद्धिहीन

    Foolish

    वैभव

    ऐश्वर्य / धन-संपत्ति

    Splendor / Opulence

    कृतघ्नता

    उपकार न मानना

    Ingratitude

    व्यग्रता

    अधीरता / बेचैनी

    Restlessness

    अभिलाषा

    प्रबल इच्छा

    Desire

    ख. मुहावरे (Idioms)

    मुहावरा (Idiom)

    अर्थ (Meaning)

    वाक्य प्रयोग (Sentence Usage)

    मन बहलना

    मनोरंजन होना

    अच्छे मित्र के साथ रहने से मन बहल जाता है।

    जाल में फँसना

    धोखे या लालच में आना

    लोभी व्यक्ति अक्सर अपनी ही इच्छाओं के जाल में फँस जाता है।

    दोषारोपण करना

    दोष मढ़ना

    अपनी गलती सुधारने के बजाय दूसरों पर दोषारोपण करना गलत है।

    २. परिचय और सारांश (Introduction & Summary)


    लेखक परिचय: पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी (१८९४-१९७१) हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित निबंधकार हैं। उनकी शैली में नाटकों की रमणीयता और कहानियों की मनोरंजकता का सुंदर मिश्रण पाया जाता है।


    केंद्रीय भाव (Central Idea - Bilingual):

    • हिन्दी: यह निबंध मानवीय लालसा, असंतोष और कृतघ्नता के दुष्परिणामों को एक मछली और मछुवे की कथा के माध्यम से स्पष्ट करता है।


    • English: This essay explores the consequences of excessive ambition, discontent, and ingratitude through the story of a fisherman and a magical fish.


    सारांश (Summary): प्रस्तुत निबंध 'महत्त्वाकांक्षा और लोभ' में लेखक ने स्पष्ट किया है कि जब बड़ों की उन्नति की इच्छा को हम छोटे या साधारण लोगों में देखते हैं, तो उसे 'लोभ' का नाम दे दिया जाता है। लेखक एक पुरानी कथा सुनाते हैं जिसमें एक मछुवा एक छोटी मछली की जान बचाता है और उसे नदी तक पहुँचाता है। मछली देवी का रूप होती है और मछुवे की प्रार्थना पर उसे घर, धन और अंततः राजकीय वैभव (रानी का पद) प्रदान करती है।


    मछुवे की पत्नी का असंतोष यहाँ तक बढ़ जाता है कि वह सूर्य, चंद्र और मेघों पर भी अधिकार चाहती है। इस अति-महत्त्वाकांक्षा से रुष्ट होकर मछली सब कुछ वापस ले लेती है और उन्हें पुनः उनकी पुरानी झोंपड़ी में भेज देती है।  लेखक यहाँ एक मौलिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं। वे केवल मछुवी को दोषी नहीं मानते, बल्कि मछली को भी दोषी ठहराते हैं क्योंकि उसने अपनी असीमित शक्तियों का प्रदर्शन कर मछुवी के मन में असीमित आशाएँ जगा दी थीं। अंत में, लेखक यह संदेश देते हैं कि कृतघ्नता और दूसरों पर दोषारोपण करना मनुष्य का स्वभाव है, जबकि उपकार को याद रखना ही सच्ची मानवता है।


    ३. HSC गद्य आकलन (Prose Pattern)


    कृति १: आकलन (Global Understanding - 2 Marks)

    प्रश्न १: संजाल पूर्ण कीजिए - मछुवा और मछुवी की प्रारंभिक स्थिति:

    • उत्तर: 1. झाड़ के नीचे टूटी-फूटी झोंपड़ी में रहना। 2. दिन भर कठिन परिश्रम करना। 3. केवल वर्तमान की चिंता करना। 4. भविष्य के प्रति कोई आशा या लालसा न होना।


    प्रश्न २: मछली द्वारा मछुवे को दिए गए वरदानों का क्रम:

    • उत्तर: अच्छा घर -> अपार धन -> राजकीय वैभव (महल/रानी का पद) -> पुनः झोंपड़ी (अभिशाप)।


    कृति २: शब्द संपदा (Vocabulary - 2 Marks)

    प्रश्न: निम्नलिखित शब्दों के विरुद्धार्थी (Antonyms) शब्द लिखिए:

    1. सुबुद्धि x निर्बुद्धि 


    2. संतोष x असंतोष 


    3. वरदान x अभिशाप 


    4. उपकार x अपकार/कृतघ्नता 


    कृति ३: अभिव्यक्ति (Personal Response - 2 Marks)


    प्रश्न १: 'महत्त्वाकांक्षाओं का कभी अंत नहीं होता', इस वास्तविकता को स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर:

    यह सत्य है कि मनुष्य की इच्छाएँ समुद्र की लहरों की तरह असीमित होती हैं। जब एक इच्छा पूरी होती है, तो दूसरी तुरंत जन्म ले लेती है।

    प्रस्तुत पाठ में मछुवी की कहानी इसका ज्वलंत उदाहरण है। उसे पहले घर चाहिए था, फिर धन, फिर राजकीय सत्ता और अंत में वह प्रकृति के तत्वों पर अधिकार चाहती थी। यह 'प्राप्य के प्रति विरक्ति और अप्राप्य की लालसा' का मानवीय स्वभाव है।


    अतः, यदि महत्त्वाकांक्षा पर विवेक का अंकुश न हो, तो वह लोभ बन जाती है और मनुष्य के विनाश का कारण बनती है।

    उपयोगी शब्द: असीमित इच्छाएँ, असंतोष, विवेक, मानवीय स्वभाव।


    ७. व्याकरण (Grammar Corner with Explanations)


    काल परिवर्तन (Tense Change):

    1. मछली हँसती हुई पानी में तैरने लगी। (सामान्य भविष्यकाल में बदलिए)

      • उत्तर: मछली हँसती हुई पानी में तैरने लगेगी

      • Rule: Future tense uses 'ga/ge/gi' endings for the verb.


    2. वह देवी होगी। (सामान्य वर्तमानकाल में बदलिए)

      • उत्तर: वह देवी है

      • Rule: Present tense indicates a current state using 'hai'.


    अलंकार (Figures of Speech):

    1. "निबंध को गद्य की कसौटी कहा गया है।"

      • उत्तर: रूपक अलंकार (Metaphor)

      • Concept: Direct comparison between 'Nibandh' and 'Kasauti'.


    वाक्य शुद्धिकरण (Sentence Correction):

    1. मछुवा ने मछली को देखा।

      • उत्तर: मछुवे ने मछली को देखा।


    2. हम अपनी दोषों को छिपाते हैं।

      • उत्तर: हम अपने दोषों को छिपाते हैं।


    ८. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)

    प्रश्न १: लेखक ने मछली को दोषी क्यों माना है?


    उत्तर: लेखक के अनुसार मछली ने पहले अपनी शक्तियों से यह आभास दिया कि वह सब कुछ कर सकती है, जिससे मछुवी के मन में बड़ी आशाएँ जागीं। मछली को मछुवे के उस उपकार को नहीं भूलना चाहिए था जब उसने उसकी जान बचाई थी। उसे क्रोधित होकर वरदान को अभिशाप में नहीं बदलना चाहिए था।


    प्रश्न २: निबंध विधा का परिचय दीजिए।


    उत्तर: निबंध को गद्य की कसौटी माना गया है। इसमें किसी विषय के स्वरूप, गुण-दोष आदि पर लेखक की गद्यात्मक अभिव्यक्ति होती है। इसमें सरलता, आडंबरहीनता और लेखक के व्यक्तिगत दृष्टिकोण की प्रधानता होती है।


    प्रश्न ३: मानवीय स्वभाव की किन्हीं दो विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए। उत्तर: १. मनुष्य जो प्राप्त हो जाता है उससे विरक्त हो जाता है और जो प्राप्त नहीं है उसकी लालसा करता है।  २. मनुष्य अक्सर अपने दोषों को छिपाकर दूसरों पर दोषारोपण करता है।


    प्रश्न ४: 'अति से तो अमृत भी जहर बन जाता है' - आशय स्पष्ट कीजिए। उत्तर: किसी भी वस्तु या इच्छा की अति विनाशकारी होती है। जिस तरह मछुवी की 'अति लालसा' ने उसके सुख-वैभव को नष्ट कर दिया, उसी तरह जीवन में संतुलन का अभाव अमृत तुल्य सुविधाओं को भी कष्टकारी बना देता है।


    प्रश्न ५: प्रस्तुत पाठ में 'कृतघ्नता' का क्या अर्थ बताया गया है? उत्तर: कृतघ्नता का अर्थ है किए गए उपकार को भूल जाना। मछली ने मछुवे के उस प्राण-दान वाले उपकार को भुलाकर उसे पुनः दरिद्र बना दिया, जिसे लेखक ने अनुचित और दैवी स्वभाव के विरुद्ध माना है।

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