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    12. सहर्ष स्वीकारा है - [Sahorsh Swikara Hai] - Class 11 - Yuvakbharati

    • Apr 16
    • 5 min read

    Updated: Apr 19

     कवि: गजानन माधव 'मुक्तिबोध' | विधा: नई कविता


    १. शब्दार्थ और मुहावरे (Glossary with English Context)

    क. शब्दार्थ (Word Meanings)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi)

    अर्थ (English Context)

    गरबीली

    स्वाभिमानी


    Proud / Self-respecting

    वैभव

    ऐश्वर्य / समृद्धि


    Splendor / Prosperity

    मौलिक

    मूलभूत / वास्तविक


    Original / Fundamental

    संवेदन

    अनुभूति / संवेदना


    Sensitivity / Sensation

    सोता

    झरना


    Spring / Source

    आच्छादित

    ढका हुआ


    Covered / Shrouded

    विवर

    बिल / गड्ढा


    Cave / Crevice

    पिराती

    दर्द करती है


    Aches / Pains

    भवितव्यता

    भविष्य की होने वाली घटना


    Destiny / Future inevitability

    अक्षम

    असमर्थ


    Incapable / Feeble

    २. परिचय और सारांश (Introduction & Summary)


    कवि परिचय: गजानन माधव 'मुक्तिबोध' (१९१७-१९६४) नई कविता के सर्वाधिक चर्चित और प्रभावशाली कवि माने जाते हैं । उन्होंने 'हंस' और 'नया खून' जैसी पत्रिकाओं का संपादन भी किया ।


    केंद्रीय भाव (Central Idea - Bilingual):

    • हिन्दी: इस कविता में कवि ने जीवन के सुख-दुख, संघर्ष और अभावों को अपनी किसी प्रिय सत्ता की प्रेरणा मानकर सानंद स्वीकार करने का संदेश दिया है ।


    • English: In this poem, the poet emphasizes embracing life's joys, sorrows, struggles, and scarcities with joy, attributing them to the inspiration of a beloved divine or personal power.


    सारांश (Summary): मुक्तिबोध जी की कविता 'सहर्ष स्वीकारा है' जीवन के प्रति एक सकारात्मक और यथार्थवादी दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है । कवि कहते हैं कि उनकी जिंदगी में जो कुछ भी है—चाहे वह 'गरबीली गरीबी' हो, गहरे अनुभव हों या विचारों का वैभव—वह सब उन्हें सहर्ष स्वीकार है क्योंकि यह सब उनके उस 'प्रिय' को प्यारा है जो उनके अस्तित्व का आधार है । कवि के हृदय में प्रेम का एक ऐसा अक्षय झरना है जिसे वे जितना उँड़ेलते हैं, वह उतना ही फिर भर आता है ।


    कविता के उत्तरार्ध में कवि उस प्रिय की अत्यधिक आत्मीयता और ममता के उजाले से डरने लगते हैं, क्योंकि यह कोमलता उन्हें भीतर से कमजोर और भविष्य के प्रति आशंकित बना रही है । इसलिए वे स्वयं के लिए दंड की माँग करते हैं ताकि वे 'पाताली अंधेरे की गुफाओं' में विलीन हो सकें और आत्मनिर्भर बन सकें । अंततः वे स्वीकार करते हैं कि उस विस्मृति और अंधेरे में भी उन्हें उस प्रिय की स्मृतियों का ही सहारा मिलेगा ।


    ४. HSC पद्य आकलन (Poetry Pattern)


    कृति १: पद्यांश आकलन (2 Marks)

    प्रश्न १: कविता के आधार पर 'सत्य' कथन छाँटकर लिखिए:

    • उत्तर: १. कवि के पास स्वाभिमानी गरीबी और विचारों का वैभव है । २. कवि की छाती को भविष्य की चिंता (भवितव्यता) डराती है । ३. जो कुछ भी जाग्रत और अपलक है, वह प्रिय की ही संवेदना है । ४. कवि ममता के बादलों की कोमलता से मुक्त होना चाहता है ।


    कृति २: पद्य विश्लेषण / रसास्वादन (Appreciation - 6 Marks)

    • शीर्षक: सहर्ष स्वीकारा है


    • रचनाकार: गजानन माधव 'मुक्तिबोध'


    • केंद्रीय कल्पना: जीवन की हर परिस्थिति को बिना किसी शिकायत के अपनाना क्योंकि वह ईश्वर या किसी प्रिय शक्ति द्वारा प्रदत्त है ।


    • रस/अलंकार: शांत रस (Calm/Peaceful sentiment)। इसमें अनुप्रास (विचार-वैभव), रूपक (ममता के बादल), और पुनरुक्ति प्रकाश (पल-पल, भर-भर) अलंकारों का सुंदर प्रयोग है ।


    • प्रतीक विधान: 'पाताली अंधेरा' और 'अमावस्या' विस्मृति और संघर्ष के प्रतीक हैं । 'मीठे पानी का सोता' प्रेम की अविरल धारा का प्रतीक है ।


    • भाव पक्ष (Thematic Aspect): यह कविता केवल भक्ति की नहीं, बल्कि आत्म-साक्षात्कार की कविता है । कवि अपनी कमजोरियों को स्वीकारते हुए उस शक्ति से जुड़ना चाहते हैं जो उन्हें संघर्षों में दृढ़ बनाती है ।


    • कला पक्ष (Artistic Aspect): नई कविता की मुक्त छंद शैली है । भाषा तत्सम प्रधान होते हुए भी भावाभिव्यक्ति में अत्यंत सटीक और सशक्त है ।


    कृति ३: लघूत्तरी प्रश्न (Short Answer - 2 Marks)

    प्रश्न: 'जितना भी उँड़ेलता हूँ, भर-भर फिर आता है' पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।


    उत्तर: इस पंक्ति के माध्यम से कवि अपने हृदय में समाहित असीम प्रेम और संवेदनाओं को व्यक्त करते हैं । वे कहते हैं कि उनके दिल में प्रेम का ऐसा 'मीठे पानी का सोता' (झरना) है, जिसे वे दुनिया पर जितना अधिक न्यौछावर करते हैं, वह कम होने के बजाय और भी बढ़ जाता है । यह प्रेम की अक्षय और शाश्वत प्रकृति को दर्शाता है।


    ७. व्याकरण (Grammar Corner with Explanations)


    अलंकार (Figures of Speech): १. "मुसकाता चाँद ज्यों धरती पर रात भर" 

    • उत्तर: उत्प्रेक्षा अलंकार (Hyperbole/Imaginative comparison)

    • Concept: Using 'jyo' (like/as) to imagine the moon's smile on earth compared to the beloved's face.


    २. "ममता के बादल की मँड़राती कोमलता" 


    • उत्तर: रूपक अलंकार (Metaphor)

    • Concept: Direct comparison where 'Mamta' (affection) is treated as a 'Badal' (cloud).


    वाक्य परिवर्तन (Sentence Transformation):

    १. मुझे दंड दो। (प्रश्नार्थक वाक्य बनाइए)

    • उत्तर: क्या तुम मुझे दंड दोगे?

      २. ममता की कोमलता भीतर पिराती है। (विस्मयादिबोधक वाक्य बनाइए)

    • उत्तर: आह! ममता की कोमलता भीतर पिराती है!


    ८. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)


    प्रश्न १: कवि अपनी गरीबी को 'गरबीली' क्यों कहता है?  उत्तर: कवि अपनी गरीबी को 'गरबीली' (स्वाभिमानी) इसलिए कहता है क्योंकि वह अभावों में भी अपना स्वाभिमान नहीं खोता। उसे अपनी दरिद्रता पर हीनता का भाव नहीं, बल्कि गौरव का अनुभव होता है क्योंकि वह भी उसके अनुभवों का एक हिस्सा है ।


    प्रश्न २: कवि दक्षिण ध्रुवी अंधकार में क्यों जाना चाहता है? उत्तर: कवि प्रिय की अत्यधिक ममता और सहारा पाकर मानसिक रूप से कमजोर (अक्षम) हो गया है । वह आत्मनिर्भर होने और अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए उस 'अमावस्या' रूपी विस्मृति के अंधेरे में खो जाना चाहता है ताकि वह संघर्ष करना सीख सके ।


    प्रश्न ३: 'सहर्ष स्वीकारना' और 'केवल स्वीकारना' में क्या अंतर है? उत्तर: 'केवल स्वीकारना' मजबूरी में किसी परिस्थिति को झेलना है, जबकि 'सहर्ष स्वीकारना' का अर्थ है किसी भी परिस्थिति (सुख या दुख) को बिना किसी शिकायत के प्रसन्नता के साथ अपनाना, यह मानकर कि यह सब ईश्वर की इच्छा है ।


    प्रश्न ४: 'भीतर की सरिता' से कवि का क्या तात्पर्य है? उत्तर: 'भीतर की सरिता' से कवि का तात्पर्य उनके मन में उठने वाली कोमल भावनाओं, संवेदनाओं और विचारों के प्रवाह से है जो निरंतर उनके व्यक्तित्व को सींचते रहते हैं ।


    प्रश्न ५: मुक्तिबोध की भाषा शैली की विशेषताएँ लिखिए।  उत्तर: मुक्तिबोध की भाषा परिष्कृत, क्लिष्ट और प्रतीकात्मक है। वे जटिल अनुभवों को व्यक्त करने के लिए 'नई कविता' के शिल्प का प्रयोग करते हैं जिसमें कल्पनाप्रियता और यथार्थ का अद्भुत समन्वय होता है ।

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