2.0. हिंदी गद्य साहित्य का विकास: एक विस्तृत अध्ययन - Hindi Gadya Vikas - Class 9 - गद्य-खंड - Rajeev Prakashan
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Updated: 4 days ago

हिंदी गद्य का वास्तविक विकास उन्नीसवीं सदी में हुआ。 यद्यपि हिंदी साहित्य का आरंभ आठवीं सदी के आस-पास हुआ था, परंतु प्रथम एक हजार वर्षों तक यह मुख्यतः पद्य (कविता) का साहित्य रहा。 अठारहवीं सदी की 'भाषा योगवाशिष्ठ' और 'जैन पद्मपुराण' जैसी रचनाओं को खड़ी बोली गद्य की आरंभिक कृतियों के रूप में जाना जाता है。
1. आधुनिकता का उदय और गद्य का विकास (उन्नीसवीं सदी)
उन्नीसवीं सदी में कई सामाजिक और संस्थागत कारकों ने हिंदी गद्य के विकास को गति प्रदान की:
समाज सुधारक संस्थाएँ: ब्रह्मसमाज (1828), आर्यसमाज (1875), और प्रार्थना समाज (1867) जैसी संस्थाओं ने समाज को अंधविश्वासों से मुक्त करने और वैज्ञानिक चेतना जगाने का प्रयास किया。
फोर्ट विलियम कॉलेज (1800): कोलकाता में स्थापित इस कॉलेज ने अंग्रेज कर्मचारियों को स्थानीय भाषाओं की शिक्षा देने हेतु लल्लूलाल (प्रेमसागर) और सदल मिश्र (नासिकेतोपाख्यान) जैसे लेखकों को नियुक्त किया。
प्रेस और पत्रकारिता:
हिंदी का पहला समाचार पत्र 'उदंत मार्तंड' (1826) कोलकाता से पं. जुगल किशोर के संपादन में निकला。
अन्य प्रमुख पत्र: बंगदूत (1829), प्रजामित्र (1834), और समाचार सुधावर्षण (1854)。
प्रारंभिक लेखक: इंशाअल्लाह खाँ ('रानी केतकी की कहानी') और सदासुख लाल नियाज ने भी इस काल में महत्वपूर्ण गद्य रचनाएँ कीं。
शासकीय एवं मिशनरी प्रयास: राजा शिवप्रसाद सितारेहिंद ने पाठ्यपुस्तकें तैयार कीं और 'बनारस अखबार' निकाला, जबकि राजा लक्ष्मण सिंह ने 'प्रजा हितैषी' पत्र निकाला。
2. हिंदी गद्य के प्रमुख युग
विद्वानों ने हिंदी आधुनिक काल (गद्यकाल) को चार प्रमुख चरणों में विभाजित किया है:
क. भारतेंदु युग (सन् 1868-1900 ई.)
भारतेंदु हरिश्चंद्र को आधुनिकता का अगुआ और गद्य विधाओं का जनक माना जाता है。
भारतेंदु मंडल: बदरीनारायण चौधरी 'प्रेमघन', बालकृष्ण भट्ट, और प्रतापनारायण मिश्र जैसे लेखकों का समूह。
प्रमुख विधाएँ:
निबंध: प्रतापनारायण मिश्र ('धोखा', 'नाक') और बालकृष्ण भट्ट ('बातचीत') इसके समर्थ निबंधकार थे。
नाटक: भारतेंदु के 'अंधेर नगरी' और 'भारत दुर्दशा' सर्वश्रेष्ठ नाटक माने जाते हैं。
उपन्यास: लाला श्रीनिवास दास का 'परीक्षा गुरु' (1882), श्रद्धाराम फुल्लौरी का 'भाग्यवती' (1877) प्रमुख हैं। देवकीनंदन खत्री ने 'चंद्रकांता' जैसे तिलिस्मी उपन्यास लिखे。
ख. द्विवेदी युग (सन् 1900-1918 ई.)
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के नाम पर इस युग का नामकरण हुआ, जिन्होंने हिंदी गद्य को माँजने और मानक रूप देने में केंद्रीय भूमिका निभाई。
सरस्वती पत्रिका (1900): आचार्य द्विवेदी 1903 में इसके संपादक बने और उन्होंने हिंदी साहित्य में एक वैचारिक आंदोलन खड़ा कर दिया。
प्रमुख विकास:
कहानी विधा का उदय: इस युग में कहानी विधा पूरी तरह स्थापित हुई。
'इंदुमती' (1900) - किशोरीलाल गोस्वामी
'उसने कहा था' (1915) - चंद्रधर शर्मा गुलेरी
'पंच परमेश्वर' (1916) - प्रेमचंद
निबंध: अध्यापक पूर्ण सिंह ('आचरण की सभ्यता') और बालमुकुंद गुप्त ('शिवशंभू के चिट्ठे') प्रमुख निबंधकार रहे。
उपन्यास: प्रेमचंद का उदय हुआ, जिन्होंने 'प्रेमा' (1907) और 'सेवासदन' (1918) के माध्यम से सामाजिक यथार्थ को केंद्र में रखा。
महत्वपूर्ण तथ्य तालिका (Quick Reference)
विधा/संस्था | नाम | लेखक/संपादक/संस्थापक | वर्ष |
प्रथम समाचार पत्र | उदंत मार्तंड | पं. जुगल किशोर | 1826 |
प्रथम उपन्यास | परीक्षा गुरु | लाला श्रीनिवास दास | 1882 |
प्रथम कहानी | इंदुमती | किशोरीलाल गोस्वामी | 1900 |
कॉलेज | फोर्ट विलियम कॉलेज | --- | 1800 |
संस्था | नागरी प्रचारिणी सभा | काशी | 1893 |
पत्रिका | सरस्वती | महावीर प्रसाद द्विवेदी (सं.) | 1903-1920 |
अभ्यास प्रश्न उत्तर (संक्षेप में)
फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना: 1800 ई. में कोलकाता में हुई。
हिंदुस्तानी विभाग के अध्यक्ष: जॉन गिलक्रिस्ट。
रानी केतकी की कहानी: इंशाअल्लाह खाँ。
भाग्यवती के लेखक: श्रद्धाराम फुल्लौरी。
वाणी का डिक्टेटर (संदर्भ): भारतेंदु को आधुनिकता का अगुआ माना जाता है。
द्विवेदी युग की मुख्य पत्रिका: सरस्वती。
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