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    2.1. बात - (Baat) - Class 9 - गद्य-खंड - Rajeev Prakashan

    • May 2
    • 7 min read

    Updated: 4 days ago

    पाठ का प्रकार: गद्य

    लेखक का नाम: प्रतापनारायण मिश्र

    विधा: ललित निबंध  


    परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)

    विषय

    विवरण

    लेखक

    प्रतापनारायण मिश्र  


    जन्म वर्ष

    सन् 1856 ई.  


    पाठ की विधा

    निबंध  


    पाठ्यपुस्तक

    गद्य-खंड, कक्षा 9

    सबसे प्रसिद्ध पंक्ति

    "बातहि हाथी पाइए, बातहि हाथी पाँव।"  


    पाठ का केंद्रीय विषय

    मानव जीवन में वाणी का महत्व और उसकी शक्ति  


    सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न

    'बात' निबंध का उद्देश्य और लेखक की भाषा-शैली की विशेषताएँ।  


    1. लेखक परिचय (Author Introduction)


    जन्म एवं स्थान: प्रतापनारायण मिश्र का जन्म सन् 1856 ई. में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद के बैजे गाँव में हुआ था। शिक्षा: उन्होंने विधिवत स्कूली शिक्षा नहीं पाई थी, किंतु स्वाध्याय से संस्कृत, फारसी, उर्दू, अंग्रेजी, बाँग्ला, मराठी और पंजाबी जैसी कई भाषाएँ सीख ली थीं। साहित्यिक व्यक्तित्व: वे 'भारतेंदु मंडल' के प्रमुख लेखक और हिंदी में मौलिक निबंधों के आरंभकर्ताओं में से एक हैं। वे फक्कड़ स्वभाव के थे और अपनी विनोदपूर्ण शैली के लिए प्रसिद्ध थे। संपादन: आपने कानपुर से 'ब्राह्मण' नामक प्रसिद्ध पत्र निकाला। प्रमुख


    रचनाएँ:  

    • निबंध: समझदार की मौत है, दाँत, भौं, पेट, रिश्वत।  

    • नाटक: हठी हम्मीर, कलि-कौतुक, जुआरी-खुआरी।  

    • कविता: ब्रैडला स्वागत, मन की लहर। निधन: स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही के कारण सन् 1894 ई. में मात्र 38 वर्ष की आयु में आपका देहावसान हो गया।  


    English Summary of Introduction:

    Pratap Narayan Mishra (1856–1894) was a key figure of the Bharatendu era, known for his witty and satirical essays. Born in Unnao, he was largely self-taught in multiple languages. He edited the journal 'Brahman' and is celebrated for bringing folk elements and everyday conversational tone into Hindi prose.


    2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)


    हिन्दी: 'बात' शीर्षक निबंध में लेखक ने वाणी (Speech) की महिमा और उसके विविध रूपों का वर्णन किया है। लेखक के अनुसार, 'बात' के कारण ही मनुष्य समस्त जीवधारियों में श्रेष्ठ कहलाता है। यहाँ तक कि निराकार ईश्वर का ज्ञान भी 'वचन' या 'बात' के माध्यम से ही संभव होता है। 'बात' के अनगिनत रूप हैं—कड़वी, मीठी, खरी, खोटी। वाणी में वह शक्ति है जो शत्रु को मित्र बना सकती है और पुरस्कार के रूप में 'हाथी' दिला सकती है या दंड के रूप में 'हाथी के पाँव' के नीचे डलवा सकती है। अंत में लेखक भारतीयों की चुप्पी और स्वार्थ के कारण बदलती बात पर दुख प्रकट करते हुए सत्यनिष्ठा का आह्वान करते हैं।  


    English: In the essay 'Baat', the author explores the profound power of human speech. He argues that the ability to converse is what makes humans superior to all other creatures. Even religious scriptures define God through 'Words'. Speech manifests in countless forms—sweet, bitter, true, or false. A single 'word' can earn someone a grand reward (an elephant) or severe punishment (death under an elephant's foot). The author criticizes those who change their stance for personal gain and urges people to value the truth and commitment in their speech.  


    3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)


    हिन्दी: इस निबंध का मूल संदेश वाणी की महत्ता और वचनबद्धता है। लेखक समाज को यह समझाना चाहते हैं कि मनुष्य की पहचान उसकी 'बात' से होती है। हमें अपनी वाणी का उपयोग लोक-कल्याण और देशोद्धार के लिए करना चाहिए, न कि केवल अपने स्वार्थ की सिद्धि के लिए।  


    English: The core message is the sanctity and impact of speech. It teaches that a person's integrity is judged by their words. We should use our voice for social welfare and national progress rather than mere self-interest.  


    4. गद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation)


    महत्वपूर्ण अंश 1: "परमात्मा को सब - - - वंचित न रहने देंगे।"

    (क) सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'गद्य-खंड' के 'बात' नामक निबंध से लिया गया है। इसके लेखक प्रतापनारायण मिश्र हैं। (ख) प्रसंग: लेखक ईश्वर और वाणी (बात) के अटूट संबंध को स्पष्ट कर रहे हैं। (ग) व्याख्या: लेखक कहते हैं कि यद्यपि ईश्वर को 'निराकार' (बिना आकार वाला) कहा जाता है, फिर भी हर धर्म उसे वाणी से जोड़ता है। वेदों को ईश्वर का 'वचन' कहा गया है और कुरआन को 'कलामुल्लाह' (अल्लाह की बात)। बिना मुख के बात संभव नहीं, फिर भी भक्त ईश्वर की मीठी बातों का आनंद लेना चाहते हैं। इससे सिद्ध होता है कि 'बात' की महिमा ईश्वर तक व्याप्त है। (घ) साहित्यिक विशेषता:  

    • भाषा: उर्दू, फारसी और संस्कृत शब्दों का सहज मिश्रण।  

    • शैली: विचारात्मक एवं तर्कपूर्ण।  


    महत्वपूर्ण अंश 2: "बातहि हाथी पाइए, - - - कुराही इत्यादि बन जाते हैं।"

    (क) सन्दर्भ: पूर्ववत्। (ख) प्रसंग: वाणी के व्यावहारिक प्रभाव और उसकी शक्ति का वर्णन। (ग) व्याख्या: लेखक एक प्राचीन कहावत के माध्यम से बताते हैं कि अच्छी बात या प्रभावी भाषण से मनुष्य हाथी जैसा महान पुरस्कार पा सकता है, जबकि गलत बात कहने पर उसे हाथी के पैरों तले कुचले जाने का दंड मिल सकता है। वाणी में वह सामर्थ्य है कि वह कंजूस को उदार और कायर को वीर बना सकती है। (घ) साहित्यिक विशेषता:  


    • मुहावरा: कहावतों का सुंदर प्रयोग।  

    • भाव: वाणी ही मनुष्य के भाग्य का निर्माण करती है।  


    5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)

    शब्द

    अर्थ

    पर्यायवाची

    विलोम

    प्रयोजन  


    उद्देश्य

    लक्ष्य, हेतु

    निष्प्रयोजन

    हृदयस्थ  


    हृदय में स्थित

    मनोगत

    ---

    अशरफुल मखलूकात  


    श्रेष्ठ जीव (मानव)

    शिरोमणि

    ---

    निराकार  


    जिसका कोई आकार न हो

    अरूप

    साकार

    गात  


    शरीर

    तन, देह

    ---

    विदित  


    ज्ञात

    मालूम

    अज्ञात

    विज्ञ  


    विद्वान

    ज्ञानी

    अज्ञ

    मुवाफिक  


    अनुसार

    अनुकूल

    प्रतिकूल

    शऊर  


    सलीका

    ढंग, तरीका

    ---

    बतंगड़  


    बात का बढ़ाना

    प्रपंच

    ---

    6. सही या गलत - कारण सहित (True or False with Reason)


    कथन 1: प्रतापनारायण मिश्र ने 'हिंदी प्रदीप' पत्रिका का संपादन किया था।  

    • उत्तर: गलत - कारण: उन्होंने 'ब्राह्मण' पत्रिका का संपादन किया था; 'हिंदी प्रदीप' बालकृष्ण भट्ट की पत्रिका थी।  


    कथन 2: लेखक के अनुसार पक्षी भी अपनी मीठी बातों के कारण आदर पाते हैं।  

    • उत्तर: सही - कारण: तोता और मैना जैसे पक्षी थोड़ी सी समझने योग्य बातें बोल सकते हैं, इसलिए वे अन्य पक्षियों से अधिक प्रिय समझे जाते हैं।  


    कथन 3: 'बात' का कोई निश्चित रूप या आकार नहीं होता।  

    • उत्तर: सही - कारण: लेखक के अनुसार ईश्वर की तरह 'बात' के भी अगणित रूप हैं, जिसे आँखों से देखा नहीं जा सकता, केवल महसूस किया जा सकता है।  


    कथन 4: पापी पेट के लिए बात बदलना नीति सम्मत है।  

    • उत्तर: गलत - कारण: लेखक के अनुसार केवल देशोद्धार या जाति के उपकार के लिए बात बदलना उचित है, निजी स्वार्थ या पेट के लिए नहीं।  


    7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)


    प्रश्न 1: मानव जाति को 'शिरोमणि' क्यों कहा गया है?  

    • उत्तर: क्योंकि केवल मनुष्य के पास ही ऐसी वाणी या 'बात' करने की शक्ति है जिससे वह अपने हृदय के जटिल भावों को व्यक्त कर सकता है और दूसरों को प्रभावित कर सकता है।  


    प्रश्न 2: 'बिन बानी वक्ता बड़ योगी' का क्या आशय है?  

    • उत्तर: इसका आशय ईश्वर से है, जिसे बिना वाणी के भी सबसे बड़ा वक्ता माना जाता है क्योंकि उसके 'वचन' (शास्त्र) समस्त जगत का मार्गदर्शन करते हैं।  


    प्रश्न 3: लेखक ने 'पाषाण खंड' (पत्थर का टुकड़ा) किसे कहा है?  

    • उत्तर: जिस मनुष्य के हृदय पर सुंदर, रसीली या प्रभावशाली बातों का कोई असर नहीं होता, उसे लेखक ने पशु से भी बदतर 'पाषाण खंड' कहा है।  


    प्रश्न 4: 'भारत कुपुत्रों' की लेखक ने क्या पहचान बताई है?  

    • उत्तर: जो लोग अपने स्वार्थ के लिए अपनी बात से पलट जाते हैं और जिनकी ज़बान गाड़ी के पहिये की तरह घूमती रहती है, उन्हें लेखक ने 'भारत कुपुत्र' कहा है।  


    8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)


    प्रश्न 1: प्रतापनारायण मिश्र का जीवन-परिचय देते हुए उनकी भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।  

    • उत्तर: प्रतापनारायण मिश्र (1856-1894) भारतेंदु युग के ओजस्वी लेखक थे। उनका जन्म उन्नाव में हुआ था। उनकी भाषा-शैली की मुख्य विशेषता 'विनोदप्रियता' और 'स्वच्छंदता' है। वे अपने निबंधों में ग्रामीण कहावतों, मुहावरों और लोक-भाषा के शब्दों (जैसे—उड़ावेंगे, टेड़ो बात) का बहुत सुंदरता से प्रयोग करते थे। उनकी शैली में उर्दू, फारसी और अंग्रेजी के शब्द भी बड़ी सहजता से घुल-मिल गए हैं। वे गंभीर विषयों को भी हास्य के पुट के साथ प्रस्तुत करने में कुशल थे।  


    प्रश्न 2: 'बात' निबंध के आधार पर सिद्ध कीजिए कि 'बात' निर्माण और जागरण का साधन है।  

    • उत्तर: लेखक के अनुसार 'बात' केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि इसमें समाज को बदलने की शक्ति है। शास्त्र, पुराण और इतिहास सब 'बात' के ही विस्तार हैं जो हमारी बुद्धि और चित्त को नई दिशा देते हैं। 'बात' के माध्यम से ही स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीयों को जगाने का प्रयास किया गया। यदि वाणी प्रभावशाली हो, तो वह कुमार्गी को सुमार्ग पर ला सकती है और देशोद्धार के लिए क्रांति की ज्वाला जला सकती है। अतः वाणी ही सामाजिक और वैचारिक निर्माण का मुख्य आधार है।  


    9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)


    संधि-विच्छेद:

    • कवीश्वर: कवि + ईश्वर (दीर्घ संधि)

    • निराकार: निः + आकार (विसर्ग संधि)

    • परमेश्वर: परम + ईश्वर (गुण संधि)

    • प्रत्यक्ष: प्रति + अक्ष (यण संधि)


    समास-विग्रह:

    • श्रद्धा-घृणा: श्रद्धा और घृणा (द्वंद्व समास)

    • यथासामर्थ्य: सामर्थ्य के अनुसार (अव्ययीभाव समास)

    • मक्खीचूस: बहुत अधिक कंजूस (बहुब्रीहि / तत्पुरुष)


    उपसर्ग पहचान:

    • अगणित: अ + गणित

    • अपूर्व: अ + पूर्व


    10. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)


    प्रश्न 1: 'ब्राह्मण' पत्र के संपादक कौन थे?  

    • उत्तर: 'ब्राह्मण' पत्र के संपादक प्रतापनारायण मिश्र थे।  


    प्रश्न 2: 'बातहि हाथी पाइए' कहावत का क्या अर्थ है?  

    • उत्तर: इसका अर्थ है कि मधुर और विवेकपूर्ण वाणी से मनुष्य को महान सम्मान और वैभव प्राप्त होता है।  


    11. UP Board परीक्षा में इस पाठ से अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)


    5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:

    • 'बात' निबंध के आधार पर लेखक के देश-प्रेम और समाज-सुधार की भावना को स्पष्ट कीजिए।  


    6 अंक - गद्यांश व्याख्या:

    • "नाना शास्त्र, पुराण, इतिहास... भली बात, बुरी बात... सब बात ही तो हैं?"  


    2 अंक - लघु उत्तरीय:

    • 'बात का बतंगड़' बनाना मुहावरे का क्या अर्थ है?  

    • लेखक ने 'सत्यसंध' किसे कहा है?

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