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    2.1. विंचू चावला... - Vinchu Chavla... - Class 11 -Yuvakbharati

    • 20 hours ago
    • 5 min read


     कवि: संत एकनाथ (१५३३-१५९९) | विधा: भारुड (आध्यात्मिक रूपक)


    १. शब्दार्थ और मुहावरे (Glossary with English Context)

    क. शब्दार्थ (Word Meanings)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi)

    अर्थ (English Context)

    विंचू / वृश्चिक

    बिच्छू

    Scorpion


    काम

    इच्छा / वासना

    Desire / Lust


    क्रोध

    गुस्सा / राग

    Anger / Wrath


    दाह

    जलन

    Burning sensation


    दारुण

    भयंकर / भयानक

    Dreadful / Severe


    इंगळी

    बड़ा जहरीला बिच्छू

    Large venomous scorpion


    उतारा

    उपाय / इलाज

    Remedy / Antidote


    फुणफुण

    हल्की टीस / दर्द

    Lingering throbbing pain


    अंगारा

    विभूति / भस्म

    Sacred ash (used here for virtues)


    ख. मुहावरे (Idioms)

    मुहावरा (Idiom)

    अर्थ (Meaning)

    वाक्य प्रयोग (Sentence Usage)

    नांगा मारणे

    डंक मारना

    काम-क्रोधरूपी बिच्छू ने इंसान को नांगा मारला है।


    प्राण चालणे

    मृत्यु के करीब होना

    काम-क्रोध के कारण व्यक्ति का प्राण चालिला (व्याकुल होना) है।


    मागे सारणे

    त्याग करना / पीछे छोड़ना

    मोह-माया को मागे सारून (पीछे छोड़कर) भक्ति करनी चाहिए।


    २. परिचय और सारांश (Introduction & Summary)


    कवि परिचय: संत एकनाथ महाराज (१५३३-१५९९) महाराष्ट्र के एक महान संत कवि थे । उन्होंने मानवतावाद और लोक शिक्षा के लिए 'भारुड' जैसे काव्य प्रकारों को लोकप्रिय बनाया । 'विंचू चावला' उनका अत्यंत प्रसिद्ध और नाट्यमय भारुड है ।


    केंद्रीय भाव (Central Idea - Bilingual):


    हिन्दी: 'विंचू' यहाँ 'काम' (इच्छा) और 'क्रोध' (गुस्सा) जैसे विकारों का प्रतीक है । यह भारुड सिखाता है कि इन विकारों को दूर करने के लिए 'सत्त्वगुण' (सद्गुणों) का आश्रय लेना चाहिए ।


    English: In this 'Bharud', the scorpion symbolizes human vices like lust and anger. Sant Eknath suggests that one can overcome these mental afflictions by adopting 'Sattvaguna' or virtuous qualities.


    सारांश (Summary): संत एकनाथ महाराज ने इस भारुड में 'बिच्छू' का रूपक इस्तेमाल किया है । वे कहते हैं कि जब इंसान को काम और क्रोध रूपी बिच्छू डंक मारता है, तो उसके पूरे शरीर में 'तम' (अंधकार/बुराई) का पसीना आने लगता है । उसके पंचप्राण व्याकुल हो जाते हैं और पूरे शरीर में असह्य जलन होने लगती है । लेखक ने मनुष्य के भीतर छिपे विकारों को 'इंगळी' (बड़ा बिच्छू) कहा है जो बहुत भयंकर होती है ।


    इस जहर को उतारने का उपाय तंत्र-मंत्र या अंधविश्वास नहीं है । एकनाथ महाराज उपदेश देते हैं कि 'तमोगुण' (बुरी प्रवृत्तियों) को पीछे छोड़कर 'सत्त्वगुण' का अंगारा लगाना चाहिए । जब इंसान सद्गुणों को अपनाता है, तो जहर उतर जाता है । यदि अंत में थोड़ी बहुत बेचैनी (फुणफुण) बच जाए, तो उसे ईश्वर (जनार्दन) की शरण में जाकर शांत किया जा सकता है ।


    ३. HSC पद्य आकलन (Poetry Pattern)


    कृति १: पद्यांश आकलन (2 Marks)

    प्रश्न १: उचित विकल्प चुनकर वाक्य पूर्ण करें:

    • १. 'तम घाम अंगासी आला' का अर्थ है: शीघ्रकोपी वृत्ति बढ़ना। 


    • २. 'मनुष्य इंगळी अति दारुण' का अर्थ है: मनुष्य के विकार रूपी बिच्छू अत्यंत भयंकर होते हैं। 


    • ३. 'सत्त्व उतारा देऊन' का अर्थ है: सत्त्वगुणों का आश्रय लेना। 


    • ४. 'विंचू चावला' की द्विरुक्ति से: वेदनाओं की असहनीयता और तीव्रता महसूस होती है। 


    प्रश्न २: काम-क्रोध रूपी बिच्छू का जहर उतारने के उपाय लिखें: 


    • १. तमोगुण को पीछे छोड़ना।


    • २. सत्त्वगुण का अंगारा लगाना।


    कृति २: पद्य विश्लेषण / रसास्वादन (Appreciation - 6 Marks)

    • शीर्षक: विंचू चावला


    • रचनाकार: संत एकनाथ महाकेंद्रीय कल्पना: काम-क्रोध जैसे विकारों पर विजय पाने के लिए सद्गुणोंका महत्व ।


    • रस/अलंकार: इसमें शांत रस का भाव अंत में आता है। 'विंचू' काम-क्रोध का रूपक (Metaphor) है ।


    • प्रतीक विधान: 'विंचू/इंगळी' विकारों के प्रतीक हैं और 'अंगारा' सद्गुणों का प्रतीक है ।


    • भाव पक्ष: कवि अंधविश्वास पर प्रहार करते हुए आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग बताते हैं ।


    • कला पक्ष: भाषा सरल (सुगम) और नाट्यमय है, जो तुरंत आकर्षित करती है ।

      .

    कृति ३: लघूत्तरी प्रश्न (Short Answer - 2 Marks)


    प्रश्न: "सत्त्व उतारा देऊन... शांत केली जनार्दनें" इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट करें। उत्तर: संत एकनाथ कहते हैं कि जब व्यक्ति सत्त्वगुणों को अपनाता है, तो उसके भीतर का सारा तमोगुण (बुराई) समाप्त हो जाता है । विकारों का प्रभाव खत्म होने के बाद भी मन में जो हल्की सी अशांति या टीस (फुणफुण) रह जाती है, उसे गुरु जनार्दन स्वामी या ईश्वर की कृपा से पूरी तरह शांत किया जा सकता है ।


    ७. व्याकरण (Grammar Corner with Explanations)


    समानार्थी शब्द (Synonyms): 


    • १. वृश्चिक: बिच्छू / विंचू


    • २. दाह: जलन


    • ३. क्रोध: गुस्सा / राग


    काल परिवर्तन (Tense Change):

    १. विंचू चावला। (सामान्य भविष्यकाल में बदलें)

    उत्तर: विंचू चावेल।

    Rule: [Used 'el' suffix for future tense.]


    ८. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Board Questions)


    प्रश्न १: संत एकनाथ महाराज ने 'भारुड' के माध्यम से समाज को क्या संदेश दिया है? उत्तर: उन्होंने भारुड के माध्यम से लोक शिक्षा और आध्यात्मिक नैतिकता का संदेश दिया है । उन्होंने जाति-भेद का विरोध किया और सरल रूपकों के माध्यम से आम जनता को सद्गुणों को अपनाने की प्रेरणा दी ।


    प्रश्न २: काम-क्रोध की बाधा होने पर मनुष्य का व्यवहार कैसा हो जाता है? उत्तर: जब मनुष्य काम और क्रोध के वश में होता है, तो वह बेताल (अनियंत्रित) व्यवहार करने लगता है । उसका जीवन अविचारी हो जाता है और वह बिच्छू के जहर के समान मानसिक वेदनाओं से भर जाता है ।


    प्रश्न ३: 'अंगारा' शब्द का प्रयोग यहाँ किस संदर्भ में किया गया है? उत्तर: यहाँ 'अंगारा' किसी अंधविश्वास या राख के लिए नहीं, बल्कि 'सत्त्वगुण' यानी सद्गुणों के अंगीकार के लिए प्रयुक्त हुआ है । कवि का मानना है कि सद्गुणों का अंगारा ही दुर्गुणों को भगा सकता है ।


    प्रश्न ४: 'इंगळी' को 'अति दारुण' (अत्यंत भयंकर) क्यों कहा गया है? उत्तर: 'इंगळी' मनुष्य के भीतर के विकारों का प्रतीक है । जब ये विकार इंसान को डसते हैं, तो शरीर और मन में होने वाली पीड़ा असहनीय होती है, जिससे विवेक नष्ट हो जाता है, इसलिए इसे दारुण कहा गया है ।


    प्रश्न ५: संत एकनाथ के अनुसार परम शांति प्राप्त करने का अंतिम मार्ग क्या है? उत्तर: उनके अनुसार, सत्त्वगुणों को अपनाने के बाद अंततः ईश्वर या सद्गुरु (जनार्दन स्वामी) का स्मरण और उनकी शरण में जाना ही मन की पूरी शांति का अंतिम मार्ग है ।


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