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    2.2. तोता - (Tota) - Class 9 - गद्य-खंड - Rajeev Prakashan

    • May 2
    • 6 min read

    Updated: May 9

    पाठ का प्रकार: गद्य लेखक का नाम: रवींद्रनाथ टैगोर विधा: व्यंग्यात्मक कहानी  


    परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)

    विषय

    विवरण

    लेखक

    रवींद्रनाथ टैगोर  


    जन्म वर्ष

    सन् 1861 ई.  


    पाठ की विधा

    कहानी (व्यंग्य)  


    पाठ्यपुस्तक

    गद्य-खंड, कक्षा 9

    सबसे प्रसिद्ध पंक्ति

    "पिंजरे में दाना-पानी तो नहीं था, थी सिर्फ शिक्षा।"  


    पाठ का केंद्रीय विषय

    दोषपूर्ण शिक्षा व्यवस्था और सत्ता की हठधर्मिता पर प्रहार  


    सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न

    'तोता' कहानी के माध्यम से लेखक ने किस व्यवस्था पर व्यंग्य किया है?  


    1. लेखक परिचय (Author Introduction)


    जन्म एवं स्थान: रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म सन् 1861 ई. में कोलकाता के जोड़ासाँकू ठाकुरबाड़ी में हुआ था। शिक्षा एवं दर्शन: वे रटंत विद्या और कड़े अनुशासन के विरोधी थे। उन्होंने प्रकृति के सान्निध्य में शिक्षा देने के लिए बंगाल के बीरभूम में शांति निकेतन की स्थापना की। साहित्यिक उपलब्धियाँ: वे नोबल पुरस्कार (1913) पाने वाले पहले भारतीय थे, जो उन्हें उनकी कृति 'गीतांजलि' के लिए मिला। भारत और बांग्लादेश के राष्ट्रगान इन्हीं की रचनाएँ हैं। प्रमुख रचनाएँ:  


    • उपन्यास: गोरा, घरे बाइरे, राजर्षि।  


    • काव्य: मानसी, गीतांजलि, महुआ।  


    • कहानी: भिखारिणी, कंकाल, दृष्टिदान। निधन: सन् 1941 ई. में आपका देहावसान हुआ।  


    English Summary of Introduction: Rabindranath Tagore (1861–1941) was a global literary icon and the first Indian Nobel laureate (1913 for 'Gitanjali'). He founded Shantiniketan to promote natural learning. His story 'Tota' is a sharp critique of the artificial, rote-based educational system that stifles a student's innate potential.  


    2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)


    हिन्दी: 'तोता' कहानी एक प्रतीकात्मक व्यंग्य है जिसमें एक जंगली तोते को 'शिक्षित' करने का प्रयास किया जाता है। राजा को लगता है कि तोता मूर्ख है क्योंकि वह कायदा-कानून नहीं जानता। तोते को शिक्षा देने के लिए सोने का आलीशान पिंजरा बनाया जाता है और पोथियों के पहाड़ लगा दिए जाते हैं। शिक्षा के नाम पर तोते के मुँह में जबरन किताबों के पन्ने ठूँसे जाते हैं, जिससे उसका चहकना और उड़ना बंद हो जाता है। अंत में, तोता मर जाता है, पर राजा का भानजा कहता है कि उसकी शिक्षा पूरी हो गई है क्योंकि अब वह न हिलता है और न ही शोर मचाता है।  


    English: The story 'Tota' (The Parrot) is a satire on the modern educational system. A king decides to 'educate' a wild parrot that he deems foolish for not knowing 'laws'. Instead of freedom and food, the bird is given a golden cage and forced to swallow pages of textbooks. The process focuses on administrative grandeur—cages, pundits, and scrolls—while ignoring the bird's natural needs. Eventually, the parrot dies, but the system considers it a success because the 'student' has finally become quiet and compliant.  


    3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)

    हिन्दी: इस कहानी का मूल संदेश यह है कि स्वाभाविकता को कुचलने वाली शिक्षा व्यवस्था विनाशकारी होती है। शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान देना होना चाहिए, न कि शिक्षार्थी की नैसर्गिक प्रतिभा और जीवन को ही समाप्त कर देना।  


    English: The core message is that an educational system that crushes natural instincts is destructive. Education should nurture inherent talent rather than force-feeding information at the cost of the learner's life and freedom.  


    4. गद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation)


    महत्वपूर्ण अंश 1: "पिंजरे में दाना-पानी - - - देखने वाले के रोंगटे खड़े हो जाते।"

    (क) सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'गद्य-खंड' के 'तोता' नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक रवींद्रनाथ टैगोर हैं। (ख) प्रसंग: लेखक शिक्षा के नाम पर तोते पर किए जा रहे अत्याचारों का वर्णन कर रहे हैं। (ग) व्याख्या: राजा की व्यवस्था में तोते के भोजन (दाना-पानी) का कोई ध्यान नहीं रखा गया, केवल उसे शिक्षित करने का ढोंग किया गया। पोथियों के पन्ने फाड़कर उसके मुँह में ठूँसे गए जिससे उसकी वाणी बंद हो गई। यह शिक्षा नहीं, बल्कि एक जीव की हत्या थी। (घ) साहित्यिक विशेषता:  


    • शैली: तीक्ष्ण व्यंग्य।  

    • संदेश: रटंत विद्या की निरर्थकता का चित्रण।  


    महत्वपूर्ण अंश 2: "लोहे की सांकल - - - जिसे शिक्षा कहते हैं।"

    (क) सन्दर्भ: पूर्ववत्। (ख) प्रसंग: तोते की स्वाभाविक उड़ान को रोकने के लिए किए गए क्रूर उपायों का वर्णन। (ग) व्याख्या: जब तोता पिंजरे से निकलने की कोशिश करता है, तो उसे 'बेअदबी' मानकर उसके डैने काट दिए जाते हैं और उसे जंजीरों में बाँध दिया जाता है। लेखक व्यंग्य करते हैं कि कलम और बरछा लेकर जो क्रूरता पंडितों ने की, उसी का नाम समाज में 'शिक्षा' रख दिया गया है। (घ) साहित्यिक विशेषता:  


    • व्यंग्य: 'शिक्षा' शब्द के माध्यम से व्यवस्था की क्रूरता पर कटाक्ष।  


    5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)

    शब्द

    अर्थ

    पर्यायवाची

    विलोम

    टोटा  


    कमी

    अभाव

    प्रचुरता

    पोथी  


    पुस्तक

    किताब, ग्रंथ

    ---

    नकलनवीस  


    नकल करने वाला

    लिपिक

    ---

    मुसाहब  


    कर्मचारी/साथी

    दरबारी

    ---

    ताकीद  


    चेतावनी/निर्देश

    हिदायत

    ---

    अधमरा  


    आधा मरा हुआ

    मरणसन्न

    जीवित

    बेअदबी  


    अपमान/गुस्ताखी

    अशिष्टता

    सम्मान

    डैने  


    पंख

    पक्ष

    ---

    बयार  


    हवा

    पवन, समीर

    ---

    मुकुलित  


    अधखिला

    अधखिला

    ---

    6. सही या गलत - कारण सहित (True or False with Reason)


    कथन 1: रवींद्रनाथ टैगोर को 'गीतांजलि' के लिए नोबल पुरस्कार मिला।  

    • उत्तर: सही - कारण: उन्हें सन् 1913 में साहित्य के क्षेत्र में इस महान कृति के लिए यह पुरस्कार प्राप्त हुआ।  


    कथन 2: कहानी में तोते को शिक्षा देने का काम मंत्री को मिला।  

    • उत्तर: गलत - कारण: तोते को शिक्षित करने का उत्तरदायित्व राजा ने अपने भानजे को सौंपा था।  


    कथन 3: निंदकों ने राजा को सच्चाई बताने की कोशिश की थी।  

    • उत्तर: सही - कारण: निंदकों ने ही राजा तक यह बात पहुँचाई थी कि तोते की हालत खराब है और केवल पिंजरे की उन्नति हो रही है।  


    कथन 4: अंत में तोता उड़कर जंगल वापस चला गया।  

    • उत्तर: गलत - कारण: शिक्षा की क्रूर प्रक्रिया के कारण तोते की मृत्यु हो गई थी।  


    7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)

    प्रश्न 1: तोता क्या नहीं जानता था और राजा ने उसे मूर्ख क्यों माना?  


    • उत्तर: तोता शास्त्र नहीं पढ़ता था और कायदा-कानून नहीं जानता था। वह केवल उड़ता और गाता था, जिसे राजा ने निरर्थक और मूर्खता माना।  


    प्रश्न 2: पंडितों ने तोते की 'अविद्या' का क्या कारण बताया?  


    • उत्तर: पंडितों ने तर्क दिया कि तोता साधारण खर-पात के घोंसले में रहता है, जहाँ विद्या नहीं आ सकती। अतः इसके लिए सोने का पिंजरा आवश्यक है।  


    प्रश्न 3: 'उन्नति हो रही है'—लोग ऐसा क्यों कह रहे थे?  


    • उत्तर: लोग पिंजरे की साफ़-सफाई, मरम्मत, पालिश और पोथियों की नकलों के ढेर को देखकर इसे शिक्षा की उन्नति समझ रहे थे, जबकि तोते की उपेक्षा हो रही थी।  


    प्रश्न 4: अंत में राजा ने जब तोते को दबाया तो क्या हुआ?  


    • उत्तर: तोते ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी क्योंकि वह मर चुका था; केवल उसके पेट में भरे हुए पोथियों के सूखे पन्ने खड़खड़ाने लगे।  


    8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)


    प्रश्न 1: रवींद्रनाथ टैगोर का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए।  

    • उत्तर: रवींद्रनाथ टैगोर (1861-1941) बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे विश्वविख्यात कवि, उपन्यासकार और नाटककार थे। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में शांति निकेतन जैसी अनूठी संस्था दी। उनकी प्रमुख रचनाएँ 'गीतांजलि' (काव्य), 'गोरा' (उपन्यास) और 'डाकघर' (नाटक) हैं। उन्हें 1913 में नोबल पुरस्कार मिला। वे मानवतावादी और प्रकृति के सान्निध्य में विकास के समर्थक थे।  


    प्रश्न 2: 'तोता' कहानी के माध्यम से लेखक ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की किन कमियों पर चोट की है?  

    • उत्तर: टैगोर ने इस कहानी द्वारा शिक्षा की रटंत पद्धति और यांत्रिकता पर गहरा प्रहार किया है। व्यवस्था विद्यार्थी की जरूरतों के बजाय इमारतों, दिखावे (सोने का पिंजरा) और अनावश्यक पाठ्यक्रम (पोथियों के पहाड़) पर अधिक ध्यान देती है। शिक्षार्थी की नैसर्गिक रुचि और स्वतंत्रता को अनुशासन के नाम पर कुचल दिया जाता है। लेखक के अनुसार, ऐसी शिक्षा जो मनुष्य की स्वाभाविकता को मार दे, वह शिक्षा नहीं बल्कि बौद्धिक हत्या है।  


    9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)


    समास-विग्रह:

    • फल-बाजार: फलों का बाजार (तत्पुरुष समास)।  

    • मंत्र-पाठ: मंत्रों का पाठ (तत्पुरुष समास)।  


    प्रत्यय:

    • लुहारिन: लुहार + इन (प्रत्यय)।  


    विपरीतार्थक शब्द:

    • मूर्ख: विद्वान।  

    • इनाम: दंड।  

    • आकाश: पाताल।  


    10. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)


    प्रश्न 1: 'तोता' कहानी किस विश्वविख्यात लेखक की रचना है?  

    • उत्तर: यह रवींद्रनाथ टैगोर की रचना है।  


    प्रश्न 2: 'पिंजरे की तो उन्नति हो रही है, पर तोते की खोज खबर लेने वाला कोई नहीं है'—यह किसका कथन है?  

    • उत्तर: यह निंदकों का कथन है।  


    11. UP Board परीक्षा में इस पाठ से अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)


    5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:

    • 'तोता' कहानी का सारांश लिखते हुए उसका उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।  


    6 अंक - गद्यांश व्याख्या:

    • "तोता दिन पर दिन भद्र रीति के अनुसार अधमरा होता गया..."  

    • "पढ़ाने का ढंग तोते की तुलना में इतना बड़ा था कि तोता दिखाई ही नहीं पड़ता था।"  


    2 अंक - लघु उत्तरीय:

    • कान उमेटू सरदार को राजा ने क्या ताकीद की थी?  

    • तोते की मृत्यु की अफवाह किसने फैलाई थी?  


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