2.2. रेशीमबंध - Reshimbadh - Class 11 -Yuvakbharati
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लेखक: डॉ. यू. म. पठाण (१९३०) | विधा: ललित गद्य
१. शब्दार्थ और मुहावरे (Glossary with English Context)
क. शब्दार्थ (Word Meanings)
शब्द (Word) | अर्थ (Hindi) | अर्थ (English Context) |
उत्तररात्र | रात का अंतिम प्रहर | Last part of the night |
नीरव | अत्यंत शांत | Pin-drop silence |
मुलायम | कोमल / नरम | Soft / Delicate |
आदिम | प्राचीन / युगांतरकारी | Ancient / Primitive |
असोशी | तीव्र इच्छा / तड़प | Intense longing / Yearning |
आल्हाद | आनंद / प्रसन्नता | Joy / Delight |
विरंगुळा | मनोरंजन / राहत | Pastime / Diversion |
तजेला | ताजगी | Freshness |
सडा | फूलों का बिखराव | Scattering (of flowers) |
रेशीमबंध | रेशमी बंधन (नाजुक रिश्ता) | Silken bonds (Delicate ties) |
ख. मुहावरे (Idioms)
मुहावरा (Idiom) | अर्थ (Meaning) | वाक्य प्रयोग (Sentence Usage) |
डोळा लागणे | नींद आना | उत्तररात्र होने के बाद भी लेखक का डोळा लागत नाही (नींद नहीं आती)। |
मन समेवर येणे | मन का शांत व स्थिर होना | उत्तररात्र की शांति में मन समेवर येते (स्थिर हो जाता है)। |
साखरझोपेत असणे | गहरी और मीठी नींद में होना | रात के तीन बजे सारा संसार साखरझोपेत असतो। |
खुदकन् हसणे | अचानक खिलखिलाकर हँसना | पानी का छिड़काव होने पर मोगरा खुदकन् हसतो (खिल उठता है)। |
२. परिचय और सारांश (Introduction & Summary)
लेखक परिचय: डॉ. यू. म. पठाण सुप्रसिद्ध साहित्यकार और संत साहित्य के विद्वान अभ्यासक हैं । उन्हें भारत सरकार द्वारा 'पद्मश्री' से सम्मानित किया गया है ।
केंद्रीय भाव (Central Idea - Bilingual):
हिन्दी: इस पाठ में लेखक ने उत्तररात्र, पहाड़ और सुबह के समय प्रकृति में होने वाले सूक्ष्म परिवर्तनों का वर्णन किया है। वे मानव और प्रकृति (वृक्ष, वेली, पाखरे) के बीच के प्राचीन और अटूट रिश्ते को 'रेशीमबंध' कहते हैं ।
English: In this essay, the author describes the serene beauty of the late night, dawn, and morning. He explores the deep-rooted, ancient connection between humans and nature (trees, vines, birds), naming this delicate bond 'Reshimbadh'.
सारांश (Summary): लेखक को उत्तररात्र के आगमन की आहट सहज ही मिल जाती है । रात के तीन-साढ़े तीन बजे जब पूरी दुनिया गहरी नींद में होती है, तब लेखक को प्रकृति के साथ एक एकांत जुड़ाव महसूस होता है । वे अपनी पोती 'अल्विशा' की मासूम नींद और उत्तररात्र की नीरवता में एक जैसा आदिम जुड़ाव देखते हैं ।
पहाड़ होने पर सबसे पहले पक्षी जागते हैं और आपस में कुजबुजाते हैं । पक्षियों के पंखों की फड़फड़ाहट सुनकर ही पहाड़ (dawn) आकाश में कदम रखती है । सुबह के समय बागे में मोगरा, सायली, गुलमोहर और जैक्रांडा जैसे वृक्ष-वेली खिल उठते हैं । लेखक जब उन्हें पानी देते हैं, तो वे अपनी नाराजगी छोड़कर सुगंध बिखेरने लगते हैं । अंत में लेखक को संत तुकाराम महाराज के अभंग का अर्थ समझ आता है कि वृक्ष और वल्लियाँ हमारे 'सोयरे' (रिश्तेदार) क्यों हैं ।
३. HSC गद्य आकलन (Prose Pattern)
कृति १: आकलन (Global Understanding - 2 Marks)
प्रश्न १: उत्तररात्री के आगमन की विशेषताएं लिखें:
१. अत्यंत हल्के से और अलगद कदम रखना ।
२. इतना मुलायम कि किसी को आहट भी न लगे ।
प्रश्न २: फूलों की विशेषताएं स्पष्ट करें:
१. चाफा: मंद-मंद गंध, लेकिन निशिगंध से अलग ।
२. घाणेरी: इवल्या इंद्रधनुषी फूलों वाली ।
कृति २: शब्द संपदा (Vocabulary - 2 Marks)
प्रश्न: निम्नलिखित सामासिक शब्दों का विग्रह करें: १. पांढराशुभ्र: पांढरा असा शुभ्र (कर्मधारय समास) २. वृक्षवेली: वृक्ष आणि वेली (इतरेतर द्वंद्व समास) ३. गप्पागोष्टी: गप्पा, गोष्टी वगैरे (समाहार द्वंद्व समास) ४. सुखदुःख: सुख किंवा दुःख (वैकल्पिक द्वंद्व समास)
कृति ३: अभिव्यक्ति (Personal Response - 2 Marks)
प्रश्न १: 'रेशीमबंध' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट करें ।
उत्तर:
लेखक ने मानव और प्रकृति के बीच के सूक्ष्म और नाजुक रिश्ते को दर्शाने के लिए 'रेशीमबंध' शब्द का प्रयोग किया है। रेशम का धागा जितना कोमल होता है, उतना ही मजबूत भी होता है।
बागे के वृक्ष, वेली और पक्षी लेखक के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। वे उनकी खुशी में खुश होते हैं और पानी न मिलने पर रुस (नाराज) भी जाते हैं। यह रिश्ता आज का नहीं बल्कि 'आदिम' और युगांतरकारी है। यह स्नेह और जड़ता से परे एक आत्मिक रिश्ता है, इसलिए 'रेशीमबंध' शीर्षक पूर्णतः सार्थक है।
७. व्याकरण (Grammar Corner with Explanations)
वाक्य परिवर्तन (Sentence Transformation):
१. "वृक्षवेली आपल्याला केवढा तजेला, केवढा विरंगुळा देऊन जातात!" (विधानार्थी करें)
उत्तर: वृक्षवेली आपल्याला खूप तजेला आणि विरंगुळा देऊन जातात।
Rule: [Removed 'Kevdha' and exclamation mark to make it a simple factual statement.]
२. "वाफे तर कोरडेच आहेत।" (नकारार्थी करें)
उत्तर: वाफे मुळीच ओले नाहीत।
Rule: [Used the antonym of 'Korde' (Dry) which is 'Ole' (Wet) along with 'Nahit' to negate while keeping the meaning same.]
प्रयोग पहचानें (Recognize Voice):
१. "खिडकी हलकेच उघडतो।" उत्तर: कर्तरी प्रयोग (Subject-driven)
२. "मानवाला निसर्गाची ओढ लागून राहिली।" उत्तर: भावे प्रयोग (Neutral)
८. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Board Questions)
प्रश्न १: पहाड़ (Dawn) और पक्षियों के बीच के रिश्ते का वर्णन करें । उत्तर: पहाड़ और पक्षियों का रिश्ता अत्यंत निकट का है। लेखक के अनुसार, जब तक पक्षी अपने पंख नहीं फड़फड़ाते, पहाड़ आकाश में नहीं आती। पक्षियों की कुजबुज और फड़फड़ाहट ही पहाड़ को आने का संकेत देती है, और फिर पहाड़ अत्यंत हल्के कदमों से आकाश में प्रवेश करती है ।
प्रश्न २: लेखक ने अपनी पोती अल्विशा का वर्णन किस प्रकार किया है? उत्तर: अल्विशा लेखक की बेटी अल्मास की छोटी बेटी है। वह अभी एक साल की भी नहीं हुई है, लेकिन दिनभर लेखक के साथ चिपकी रहती है। उत्तररात्र की नीरव शांति और अल्विशा की मासूम नींद में लेखक को एक जैसा 'आदिम' और निरागस साम्य दिखाई देता है ।
प्रश्न ३: मोगरे के पौधे के 'रुसने' (नाराज होने) का प्रसंग स्पष्ट करें । उत्तर: यदि किसी दिन मोगरे को पानी देना भूल जाएँ, तो वह रुसकर मुरझा जाता है। लेकिन जैसे ही उसे पानी मिलता है, अगले दिन वह सुंदर कलियों के रूप में 'खुदूखुदू' हँसने लगता है और अपनी सुगंध बिखेर देता है। इससे लेखक को वृक्षों की भावुकता का पता चलता है ।
प्रश्न ४: लेखक उत्तररात्र के समय खिड़की से बाहर क्या देखते हैं? उत्तर: लेखक खिड़की खोलकर देखते हैं कि चारों ओर गहरा काला अंधेरा छाया हुआ है। बागे के सभी वृक्ष, वेली और पक्षी गहरी नींद में सोए हुए हैं। उस समय प्रकृति में एक अद्भुत नीरव शांति होती है जो लेखक के मन को आल्हाद देती है ।
प्रश्न ५: संत तुकाराम ने वृक्षों को 'सोयरे' क्यों कहा होगा? उत्तर: वृक्ष हमें फल, फूल, छाया और ऑक्सीजन देते हैं बिना किसी स्वार्थ के। वे हमारे सुख-दुख में साथ रहते हैं और हमारी संवेदनाओं पर प्रतिक्रिया देते हैं। यह निस्वार्थ प्रेम केवल एक सगे संबंधी (सोयरे) जैसा ही हो सकता है, इसलिए उन्हें युगांतरकारी रिश्तेदार कहा गया है ।
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