2.3. ममता - Mamta - Class 10 - गद्य-खंड - Rajeev Prakashan
- May 15
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Updated: 5 days ago

पाठ का प्रकार: गद्य-खंड (कहानी)
लेखक का नाम: जयशंकर प्रसाद
विधा: ऐतिहासिक कहानी
शीर्षक: ममता
परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)
विषय | विवरण |
लेखक | जयशंकर प्रसाद |
जन्म वर्ष | सन् 1889 ई. |
जन्म स्थान | वाराणसी (काशी) |
प्रमुख सम्मान | मंगलाप्रसाद पारितोषिक (कामायनी हेतु) |
युग | छायावादी युग के प्रवर्तक |
भाषा | तत्सम प्रधान, संस्कृतनिष्ठ और परिमार्जित खड़ीबोली |
मुख्य कृतियाँ | कामायनी (महाकाव्य), चंद्रगुप्त (नाटक), कंकाल (उपन्यास) |
1. लेखक परिचय (Author Introduction)
जन्म एवं शिक्षा: जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 ई. में वाराणसी के प्रसिद्ध 'सुँघनी साहु' परिवार में हुआ था। विपरीत स्थितियों के कारण इनकी औपचारिक शिक्षा केवल आठवीं तक हो पाई, किंतु स्वाध्याय से इन्होंने संस्कृत, हिंदी और फारसी का गहरा ज्ञान प्राप्त किया।
साहित्यिक व्यक्तित्व: प्रसाद जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वे कवि, नाटककार, उपन्यासकार और कहानीकार के रूप में विश्वविख्यात हैं। उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति और इतिहास का गौरव झलकता है।
प्रमुख रचनाएँ:
काव्य: कामायनी, आँसू, लहर, झरना।
नाटक: ध्रुवस्वामिनी, स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त, अजातशत्रु।
कहानी संग्रह: आकाशदीप, आँधी, इंद्रजाल, प्रतिध्वनि।
उपन्यास: कंकाल, तितली, इरावती (अपूर्ण)।
निधन: सन् 1937 ई. में।
2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)
हिन्दी:
'ममता' कहानी रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि की विधवा पुत्री 'ममता' के त्याग और स्वाभिमान की कथा है। ममता ने उत्कोच (रिश्वत) के रूप में मिले स्वर्ण को ठुकरा दिया और अपना जीवन कष्टों में बिताया। वर्षों बाद, जब वह एक झोपड़ी में रह रही थी, तब उसने घायल मुगल सम्राट हुमायूँ को 'अतिथि देवो भव:' की परंपरा का पालन करते हुए शरण दी। अंत में, उसकी झोपड़ी के स्थान पर एक भव्य मंदिर तो बना, लेकिन उसमें ममता के नाम का उल्लेख नहीं था।
English:
The story 'Mamta' narrates the sacrifice and self-respect of Mamta, the widowed daughter of Chuudamani, the minister of Rohtas Fort. She rejected the gold offered as a bribe and lived a life of austerity. Years later, living in a hut, she provided refuge to the injured Mughal Emperor Humayun, upholding the tradition of hospitality. Finally, a grand temple was built on the site of her hut, but it failed to acknowledge Mamta's name.
3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)
इस पाठ का मूल संदेश 'भारतीय गौरव और अतिथि सत्कार' है। लेखक यह समझाना चाहते हैं कि विपत्ति के समय भी अपने धर्म (कर्तव्य) का पालन करना ही श्रेष्ठता है। साथ ही, यह कहानी इतिहास के उन पात्रों के प्रति संवेदना प्रकट करती है जिनके त्याग की उपेक्षा कर दी गई।
4. गद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Critical Passages)
महत्वपूर्ण अंश 1: "हे भगवान्! तब के लिए! विपद के लिए इतना आयोजन!... क्या अधर्म न मिलेगा?"
(क) सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के 'ममता' शीर्षक से लिया गया है। इसके लेखक जयशंकर प्रसाद हैं।
(ख) प्रसंग: ममता अपने पिता द्वारा रिश्वत में लिए गए स्वर्ण को देखकर अपनी घृणा और ईश्वर पर विश्वास प्रकट कर रही है।
(ग) व्याख्या: ममता कहती है कि आने वाली विपत्ति के डर से इतना संचय करना ईश्वर की इच्छा के विरुद्ध है। क्या इस धरती पर ऐसा कोई दयालु व्यक्ति नहीं बचेगा जो एक विधवा को दो मुट्ठी अन्न दे सके? रिश्वत का यह सोना चमक नहीं, बल्कि विपत्ति का कारण है।
(घ) साहित्यिक विशेषता:
भाषा: तत्सम प्रधान।
भाव: निर्लोभ और ईश्वर पर भरोसा।
महत्वपूर्ण अंश 2: "ममता के प्राण-पक्षी अनन्त में उड़ गये... पर उसमें ममता का कहीं नाम नहीं।"
(क) सन्दर्भ: पूर्ववत्।
(ख) प्रसंग: ममता की मृत्यु और उसके द्वारा किए गए उपकार की स्मृति में बने मंदिर का वर्णन।
(ग) व्याख्या: ममता की मृत्यु हो गई और उसकी आत्मा परमात्मा में विलीन हो गई। हुमायूँ के पुत्र अकबर ने पिता की स्मृति में वहाँ एक विशाल मंदिर बनवाया, लेकिन उस शिलालेख पर हुमायूँ और अकबर का नाम तो था, पर उस ममता का नाम कहीं नहीं था जिसने हुमायूँ की जान बचाई थी। यह इतिहास की कृतघ्नता का प्रतीक है।
5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)
शब्द | अर्थ | पर्यायवाची | विलोम |
प्रकोष्ठ | राजमहल का मुख्य कक्ष | कक्ष, कमरा | --- |
तीक्ष्ण | तेज / तीव्र | तेज | मंद |
निराश्रय | बेसहारा | अनाथ, असहाय | सनाथ |
उत्कोच | घूस / रिश्वत | रिश्वत | --- |
आततायी | अत्याचारी | दुष्ट, अपराधी | दयालु |
जीर्ण | पुराना / टूटा-फूटा | जर्जर | नवीन |
6. सही या गलत (True or False)
कथन 1: जयशंकर प्रसाद का जन्म वाराणसी में हुआ था।
उत्तर: सही।
कथन 2: हुमायूँ ने ममता की झोपड़ी में विश्राम किया था।
उत्तर: सही।
कथन 3: ममता के पिता का नाम देवीप्रसाद साहु था।
उत्तर: गलत। कारण: लेखक के पिता का नाम देवीप्रसाद साहु था, ममता के पिता का नाम चूड़ामणि था।
7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answers - 2 अंक)
प्रश्न 1: ममता कौन थी और वह क्यों दुखी थी?
उत्तर: ममता रोहतास दुर्ग के मंत्री चूड़ामणि की एकमात्र विधवा पुत्री थी। वह यौवन के दुख और भविष्य की अनिश्चितता के कारण दुखी थी।
प्रश्न 2: 'प्राण-पक्षी अनन्त में उड़ गये' का क्या आशय है?
उत्तर: इसका आशय ममता की मृत्यु से है। जैसे पक्षी पिंजरा छोड़कर उड़ जाता है, वैसे ही ममता की आत्मा शरीर छोड़ गई।
प्रश्न 3: ममता ने मुगल को शरण क्यों दी?
उत्तर: क्योंकि भारतीय संस्कृति में 'अतिथि देवो भव:' का सिद्धांत सर्वोपरि है और वह अपने धर्म से विमुख नहीं होना चाहती थी।
8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answers - 5 अंक)
प्रश्न: जयशंकर प्रसाद की भाषा-शैली की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: प्रसाद जी छायावादी गद्य के स्तंभ हैं:
संस्कृतनिष्ठ शब्दावली: आपकी भाषा में तत्सम शब्दों का प्रचुर प्रयोग है, जिससे वातावरण में गंभीरता आती है।
काव्यात्मक गद्य: आपके गद्य में भी कविता जैसा माधुर्य और प्रवाह मिलता है।
ऐतिहासिक चित्रण: आप इतिहास के नीरस प्रसंगों को भी कल्पना के माध्यम से सजीव और भावपूर्ण बना देते हैं।
दार्शनिकता: आपकी कहानियों के संवादों में जीवन के गहरे सत्य और दार्शनिक विचार छिपे होते हैं।
9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar)
प्रत्यय अलग करें:
भारतीय: भारत + ईय
पीलापन: पीला + पन
प्रसन्नता: प्रसन्न + ता
संधि-विच्छेद:
अश्वारोही: अश्व + आरोही
दीपालोक: दीप + आलोक
पतनोन्मुख: पतन + उन्मुख
समास विग्रह:
आजीवन: जीवन भर (अव्ययीभाव समास)
अष्टकोण: आठ कोणों का समूह (द्विगु समास)
दुर्गपति: दुर्ग का पति/स्वामी (तत्पुरुष समास)
10. UP Board परीक्षा हेतु अपेक्षित प्रश्न
व्याख्या हेतु: "काशी के उत्तर में धर्मचक्र स्तूप... उन भग्न कुंजों में महक रहा था।"
लघु उत्तरीय: चौसा का युद्ध किसके मध्य हुआ था? (उत्तर: हुमायूँ और शेरशाह सूरी के मध्य)।
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