2.4. क्या लिखूँ - Kya likhun - Class 10 - पद्य-खंड - Rajeev Prakashan
- May 15
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Updated: 6 days ago

पाठ का प्रकार: गद्य-खंड (निबंध)
लेखक का नाम: पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
विधा: ललित एवं विचारात्मक निबंध
शीर्षक: क्या लिखूँ?
परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)
विषय | विवरण |
लेखक | पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी |
जन्म वर्ष | सन् 1894 ई. |
जन्म स्थान | खैरागढ़, जबलपुर (म.प्र.) |
संपादन | 'सरस्वती' पत्रिका (द्विवेदी जी के बाद) |
मुख्य विधा | आलोचना और निबंध |
भाषा | सरल, स्पष्ट और मुहावरेदार खड़ीबोली |
विचारधारा | मानवतावादी एवं प्रगतिशील |
1. लेखक परिचय (Author Introduction)
जन्म एवं शिक्षा: बख्शी जी का जन्म सन् 1894 ई. में खैरागढ़ में हुआ था। इनके पिता पुन्नालाल बख्शी और माता मनोरमा देवी थीं। इन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की।
साहित्यिक व्यक्तित्व: आप द्विवेदी युग के प्रमुख साहित्यकार थे। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के बाद आपने प्रसिद्ध पत्रिका 'सरस्वती' का सफलतापूर्वक संपादन किया। आप अंग्रेजी कवि वर्ड्सवर्थ से अत्यधिक प्रभावित थे।
प्रमुख रचनाएँ:
निबंध संग्रह: पंचपात्र, पद्मवन, कुछ और कुछ, मकरंद बिंदु।
आलोचना: हिंदी साहित्य विमर्श, विश्व साहित्य, प्रदीप।
कहानी: झलमला, अंजलि।
उपन्यास: कथा चक्र।
निधन: सन् 1971 ई. में।
2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)
हिन्दी:
'क्या लिखूँ?' निबंध में लेखक ने निबंध लेखन की कला और उसकी जटिलताओं का रोचक वर्णन किया है। लेखक के पास दो विषय हैं— 'कठिनाई' और 'अमीर खुसरो', लेकिन वे दुविधा में हैं कि शुरुआत कैसे करें। वे बताते हैं कि निबंध लेखन के लिए केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि एक विशेष मानसिक आवेग और शैली की आवश्यकता होती है। निबंध में लेखक ने यह भी स्पष्ट किया है कि हर पीढ़ी अपने समय को 'सुधार काल' मानती है और अतीत तथा भविष्य के बीच द्वंद्व चलता रहता है।
English:
In the essay 'Kya Likhoon?', Bakshi describes the art of essay writing and its complexities in an engaging way. Faced with two distinct topics—'Difficulty' and 'Amir Khusro'—he contemplates how to begin. He explains that writing requires not just knowledge, but a specific mental impulse and style. He also highlights that every generation views its time as an 'era of reform,' leading to a constant tug-of-war between nostalgia for the past and dreams for the future.
3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)
इस पाठ का मूल संदेश 'सृजन की प्रक्रिया और पीढ़ीगत परिवर्तन' है। लेखक यह समझाना चाहते हैं कि लेखन कोई यांत्रिक कार्य नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र विचारों की अभिव्यक्ति है। साथ ही, वे संदेश देते हैं कि संसार परिवर्तनशील है; आज के युवा कल वृद्ध होंगे और आज का नवीन साहित्य कल अतीत का स्मारक बन जाएगा।
4. गद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Critical Passages)
महत्वपूर्ण अंश 1: "निबंध लिखने के लिए उपयुक्त मानसिक स्थिति चाहिए... हृदय में एक आवेग-सा उठता है।"
(क) सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के 'क्या लिखूँ?' शीर्षक से लिया गया है। इसके लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हैं।
(ख) प्रसंग: लेखक निबंध लेखन की मानसिक प्रक्रिया को स्पष्ट कर रहे हैं।
(ग) व्याख्या: लेखक का मानना है कि निबंध केवल सोचने से नहीं लिखा जाता, उसके लिए एक विशेष 'मूड' या मानसिक दशा चाहिए। जब मन में विचारों का वेग (आवेग) उठता है, तभी लेखनी प्रभावशाली रूप से चलती है। बिना इस आंतरिक प्रेरणा के लिखा गया निबंध नीरस होता है।
(घ) साहित्यिक विशेषता:
भाषा: सरल और व्यावहारिक।
विचार: मौलिक और मनोवैज्ञानिक।
महत्वपूर्ण अंश 2: "दोनों के ही स्वप्न सुखद होते हैं; क्योंकि दूर के ढोल सुहावने होते हैं।"
(क) सन्दर्भ: पूर्ववत्।
(ख) प्रसंग: वृद्धों के अतीत प्रेम और युवाओं के भविष्य प्रेम के बीच की तुलना।
(ग) व्याख्या: वृद्ध व्यक्ति अपने बीते हुए समय (अतीत) को महान मानते हैं, जबकि युवा आने वाले समय (भविष्य) के सुखद सपने देखते हैं। वास्तव में दोनों ही वास्तविकता से दूर हैं। 'दूर के ढोल सुहावने' लगने का अर्थ है कि जो चीज़ हमसे दूर होती है, वह हमें अधिक आकर्षक और दोषरहित दिखाई देती है।
5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)
शब्द | अर्थ | पर्यायवाची | विलोम |
आवेग | मानसिक उत्तेजना / जोश | जोश, उन्माद | शांति |
विवेचना | तर्कपूर्ण विचार / जाँच | मीमांसा, विवेचन | --- |
अतीत | बीता हुआ समय | भूतकाल | भविष्य |
स्मारक | याद दिलाने वाली वस्तु | स्मृति-चिह्न | --- |
स्वच्छंद | बंधनहीन / स्वतंत्र | आजाद, मुक्त | परतंत्र |
सुहावने | सुंदर / अच्छे लगने वाले | मनोहर, सुखद | डरावने |
6. सही या गलत (True or False)
कथन 1: पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ था।
उत्तर: सही।
कथन 2: बख्शी जी 'सरस्वती' पत्रिका के संपादक रहे।
उत्तर: सही।
कथन 3: 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' का अर्थ है कि ढोल पास से अच्छे लगते हैं।
उत्तर: गलत। कारण: इसका अर्थ है कि दूर की वस्तुएँ दोषरहित और अच्छी लगती हैं।
7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answers - 2 अंक)
प्रश्न 1: लेखक को निबंध लिखने के लिए कौन से दो विषय मिले थे?
उत्तर: लेखक को 'नमिता' और 'अमिता' द्वारा दो विषय मिले थे— 'कठिनाई' और 'अमीर खुसरो'।
प्रश्न 2: प्रगतिशीलता से लेखक का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: प्रगतिशीलता का तात्पर्य निरंतर परिवर्तन और सुधार की प्रक्रिया से है, जहाँ वर्तमान को सुधारने की कोशिश की जाती है।
प्रश्न 3: 'सरस्वती' पत्रिका के संपादक के रूप में बख्शी जी ने किसका स्थान लिया?
उत्तर: उन्होंने आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी का स्थान लिया।
8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answers - 5 अंक)
प्रश्न: पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की भाषा-शैली की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: बख्शी जी एक कुशल निबंधकार हैं:
सरल खड़ीबोली: आपकी भाषा जटिल नहीं है, बल्कि बोलचाल के शब्दों से युक्त स्पष्ट खड़ीबोली है।
विषय की रोचकता: आप नीरस विषयों को भी निजी अनुभवों और उदाहरणों (जैसे दूर के ढोल) से रोचक बना देते हैं।
मुहावरेदार प्रयोग: आपकी भाषा में मुहावरों का सहज प्रयोग मिलता है, जिससे अर्थ में गहराई आती है।
मानवतावादी दृष्टिकोण: आपकी शैली में मनुष्य के सुख-दुख और पीढ़ीगत बदलावों के प्रति सहानुभूति दिखाई देती है।
9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar)
प्रत्यय पहचानें:
प्रतिभावान: प्रतिभा + वान
कठिनाई: कठिन + आई
बनावट: बना + वट
उपसर्ग अलग करें:
विभूषण: वि
अभिव्यक्ति: अभि
अनुसरण: अनु
अर्थ स्पष्ट करें:
गरिमा: गौरव / महत्ता।
मनन: गहराई से सोचना।
10. UP Board परीक्षा हेतु अपेक्षित प्रश्न
व्याख्या हेतु: "जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे... दूर के ढोल सुहावने होते हैं।"
लघु उत्तरीय: बख्शी जी किस अंग्रेजी कवि से अधिक प्रभावित थे? (उत्तर: वर्ड्सवर्थ)।
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