2.7. पानी में चंदा और चाँद पर आदमी - Paani mein Chanda Aur Chand par Aadmi - Class 10 - गद्य -खंड - Rajeev Prakashan
- May 15
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Updated: 6 days ago

पाठ का प्रकार: गद्य-खंड (विज्ञान विषयक लेख)
लेखक का नाम: जयप्रकाश भारती
विधा: वैज्ञानिक निबंध / सूचनात्मक लेख
शीर्षक: पानी में चंदा और चाँद पर आदमी
परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)
विषय | विवरण |
लेखक | जयप्रकाश भारती |
जन्म वर्ष | सन् 1936 ई. |
जन्म स्थान | मेरठ (उत्तर प्रदेश) |
संपादन | 'नंदन' (प्रसिद्ध बाल पत्रिका) और 'साप्ताहिक हिंदुस्तान' |
प्रमुख सम्मान | यूनेस्को पुरस्कार, भारत सरकार का राष्ट्रीय पुरस्कार |
मुख्य विषय | विज्ञान, बाल-साहित्य और मानवतावादी सोच |
भाषा | सरल, सुबोध और प्रभावमयी खड़ीबोली |
1. लेखक परिचय (Author Introduction)
जन्म एवं शिक्षा: जयप्रकाश भारती का जन्म सन् 1936 ई. में मेरठ में हुआ था। इनके पिता श्री रघुनाथ सहाय मेरठ के प्रसिद्ध अधिवक्ता थे। इन्होंने विज्ञान विषय से स्नातक (B.Sc.) की शिक्षा प्राप्त की।
साहित्यिक एवं सामाजिक जीवन: भारती जी छात्र जीवन से ही समाज सेवा में सक्रिय रहे। इन्होंने साक्षरता अभियान और प्रौढ़ शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। इन्होंने हिंदी पत्रकारिता को वैज्ञानिक और मूल्यपरक दृष्टिकोण प्रदान किया।
प्रमुख रचनाएँ:
पुरस्कृत रचनाएँ: हिमालय की पुकार, अनंत आकाश, अथाह सागर (यूनेस्को द्वारा)।
विज्ञान साहित्य: चलो चाँद पर चलें, विज्ञान की विभूतियाँ।
जीवनी/प्रेरणा: सरदार भगत सिंह, हमारे गौरव के प्रतीक।
निधन: सन् 2005 ई. में।
2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)
हिन्दी:
'पानी में चंदा और चाँद पर आदमी' लेख में जयप्रकाश भारती ने मनुष्य की चंद्रमा पर विजय की ऐतिहासिक यात्रा का वर्णन किया है। लेखक बताते हैं कि जो चंद्रमा कभी कहानियों और कविताओं में 'चंदा मामा' बनकर कल्पनाओं तक सीमित था, विज्ञान की प्रगति ने उसे यथार्थ बना दिया। 21 जुलाई, 1969 को जब नील आर्मस्ट्रांग ने चंद्रमा पर कदम रखा, तो मानव सभ्यता का एक नया युग शुरू हुआ। इस लेख में अंतरिक्ष यात्रा की कठिनाइयों और चंद्रमा के धरातल की वास्तविकताओं का रोचक चित्रण किया गया है।
English:
In the article 'Paani Mein Chanda Aur Chand Par Aadmi', Jayaprakash Bharti narrates the historic journey of man's conquest of the moon. He explains how the moon, once a mere subject of myths and poems as 'Chanda Mama', became a reality through scientific progress. On July 21, 1969, when Neil Armstrong stepped onto the lunar surface, a new era for human civilization began. The article vividly describes the challenges of space travel and the physical realities of the lunar landscape.
3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)
इस पाठ का मूल संदेश 'जिज्ञासा और वैज्ञानिक प्रगति' है। लेखक यह समझाना चाहते हैं कि मनुष्य की अदम्य इच्छाशक्ति और विज्ञान के मेल से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। यह पाठ छात्रों में अज्ञात रहस्यों को खोजने की प्रेरणा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करता है।
4. गद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Critical Passages)
महत्वपूर्ण अंश 1: "मानव मन सदैव अज्ञात के रहस्यों को खोलने के लिए उत्सुक रहा है... यह पृथ्वी मानव के लिए पालने के समान है।"
(क) सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के 'पानी में चंदा और चाँद पर आदमी' शीर्षक से लिया गया है। इसके लेखक जयप्रकाश भारती हैं।
(ख) प्रसंग: लेखक मनुष्य की निरंतर खोज करने वाली प्रवृत्ति का वर्णन कर रहे हैं।
(ग) व्याख्या: मनुष्य का स्वभाव है कि वह हमेशा नई और अनजानी चीजों के बारे में जानना चाहता है। जिस प्रकार एक बच्चा पालने में ज्यादा देर नहीं रह सकता, वैसे ही पृथ्वी मानव जाति के लिए केवल एक शुरुआती घर (पालने) की तरह है। वह अनंत अंतरिक्ष में अपनी पहुँच बनाने के लिए बेचैन है और हमेशा सीमाओं को लाँघने का प्रयास करता है।
(घ) साहित्यिक विशेषता:
भाषा: प्रतीकात्मक और प्रभावी।
बिंब: पृथ्वी की तुलना पालने से करना।
महत्वपूर्ण अंश 2: "21 जुलाई, 1969 का दिन इतिहास का अत्यंत गौरवशाली दिन था... मानव का कदम चंद्रमा पर पड़ा।"
(क) सन्दर्भ: पूर्ववत्।
(ख) प्रसंग: चंद्रमा पर प्रथम मानव पदार्पण की ऐतिहासिकता।
(ग) व्याख्या: यह वह क्षण था जब सदियों का सपना सच हुआ। अपोलो-11 के माध्यम से मनुष्य ने चंद्रमा की धूल भरी धरती पर अपने कदम रखे। यह केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि पूरी मानव जाति की वैज्ञानिक विजय का प्रतीक था।
5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)
शब्द | अर्थ | पर्यायवाची | विलोम |
कपोल-कल्पना | झूठी कहानी / कोरी कल्पना | मनगढ़ंत | यथार्थ |
रजनीपति | चंद्रमा | मयंक, हिमांशु | सूर्य |
प्रक्षेपण | सामने की ओर फेंकना | छोड़ना | --- |
अपरिमेय | जिसे मापा न जा सके | असीमित | परिमेय |
क्षुब्ध | दुखी / व्याकुल | परेशान | शांत |
पद प्रहार | पैर का आघात | ठोकर | --- |
6. सही या गलत (True or False)
कथन 1: जयप्रकाश भारती का जन्म उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में हुआ था।
उत्तर: सही।
कथन 2: चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले व्यक्ति एड्रिन थे।
उत्तर: गलत। कारण: पहले व्यक्ति नील आर्मस्ट्रांग थे।
कथन 3: भारती जी ने प्रसिद्ध बाल पत्रिका 'नंदन' का संपादन किया।
उत्तर: सही।
7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answers - 2 अंक)
प्रश्न 1: 'पृथ्वी मानव के लिए पालने के समान है'—इसका क्या अर्थ है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि मनुष्य का अस्तित्व केवल पृथ्वी तक सीमित नहीं रह सकता; उसे विकास के लिए अंतरिक्ष के अन्य ग्रहों तक जाना ही होगा।
प्रश्न 2: चंद्रमा पर पहुँचने वाले पहले अंतरिक्ष यान का नाम क्या था?
उत्तर: अपोलो-11 (Apollo-11)।
प्रश्न 3: अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने से क्या लाभ होगा?
उत्तर: इससे ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों की परतों को खोलने और सुदूर ग्रहों के अध्ययन में काफी सहायता मिलेगी।
8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answers - 5 अंक)
प्रश्न: जयप्रकाश भारती की लेखन शैली और बाल-साहित्य में उनके योगदान पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: भारती जी बाल-साहित्य के अनन्य चितेरे थे:
वैज्ञानिक चेतना: आपने बच्चों के लिए जटिल वैज्ञानिक विषयों को भी कहानियों की तरह सरल और रोमांचक बना दिया।
भाषा-शैली: आपकी भाषा अत्यंत सरल, प्रवाहपूर्ण और रोचक खड़ीबोली है, जो बच्चों और बड़ों दोनों को आकर्षित करती है।
संपादकीय कौशल: 'नंदन' के माध्यम से आपने बाल-साहित्य को नई ऊँचाईयाँ दीं और नई पीढ़ी में पढ़ने की रुचि जाग्रत की।
मानवतावादी दृष्टिकोण: आपकी रचनाएँ विज्ञान के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को भी महत्व देती हैं।
9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar)
उपसर्ग अलग कीजिए:
विशेष: वि
अनुसंधान: अनु
प्रहार: प्र
अज्ञात: अ
प्रत्यय पहचानें:
महानता: महान + ता
मानवता: मानव + ता
ऐतिहासिक: इतिहास + इक
अंग्रेजी शब्द (पाठ से): राकेट, स्टेशन, यान (Spacecraft), रेडियो।
10. UP Board परीक्षा हेतु अपेक्षित प्रश्न
व्याख्या हेतु: "यह पृथ्वी मानव के लिए पालने के समान है... अज्ञात की खोज में वह कहाँ तक पहुँचेगा, कौन कह सकता है?"
लघु उत्तरीय: जयप्रकाश भारती की किन्हीं दो रचनाओं के नाम बताइए जिन्हें यूनेस्को द्वारा पुरस्कृत किया गया? (उत्तर: हिमालय की पुकार, अनंत आकाश)।
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