2.8. ठेले पर हिमालय - Thele Par Himalaya - Class 9 - गद्य-खंड - Rajeev Prakashan
- May 3
- 7 min read
Updated: May 8

पाठ का प्रकार: गद्य
लेखक का नाम: धर्मवीर भारती
विधा: यात्रा-वृत्तांत
परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)
विषय | विवरण |
लेखक | धर्मवीर भारती |
जन्म वर्ष | सन् 1926 ई. |
पाठ की विधा | यात्रा-वृत्तांत |
पाठ्यपुस्तक | गद्य-खंड, कक्षा 9 |
सबसे प्रसिद्ध पंक्ति | "यही बर्फ तो हिमालय की शोभा है।" |
पाठ का केंद्रीय विषय | हिमालय की अपार सौंदर्य राशि और आंतरिक शांति की खोज |
सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न | 'ठेले पर हिमालय' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। |
1. लेखक परिचय (Author Introduction)
जन्म एवं स्थान: धर्मवीर भारती का जन्म सन् 1926 ई. में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) में हुआ था।
शिक्षा: आपकी उच्च शिक्षा प्रयागराज में ही हुई, जहाँ के साहित्यिक वातावरण ने आपकी रचना-यात्रा को सुदृढ़ आधार दिया।
साहित्यिक व्यक्तित्व: आप आधुनिक हिंदी साहित्य के एक बहुमुखी प्रतिभा संपन्न लेखक थे। आप कवि, नाटककार, उपन्यासकार और संपादक के रूप में विख्यात रहे। आपने लंबे समय तक 'धर्मयुग' साप्ताहिक पत्रिका का संपादन किया।
प्रमुख रचनाएँ:
उपन्यास: गुनाहों का देवता, सूरज का सातवाँ घोड़ा।
काव्य: ठंडा लोहा, सात गीत वर्ष, कनुप्रिया।
नाटक: अंधा युग।
यात्रा-वृत्तांत: ठेले पर हिमालय।
सम्मान: आपको पद्मश्री और भारत-भारती जैसे अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया।
निधन: सन् 1997 ई. में आपका देहावसान हो गया।
English Summary of Introduction:
Dharamvir Bharati (1926–1997), born in Prayagraj, was a towering figure in modern Hindi literature. A master of many genres, he is famous for his novel 'Gunahon Ka Devta' and the verse play 'Andha Yug'. As the editor of 'Dharmayug', he significantly influenced Hindi journalism. His writing is noted for its emotional depth, lucidity, and focus on human values.
2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)
हिन्दी:
'ठेले पर हिमालय' एक दिलचस्प यात्रा-वृत्तांत है जिसका शीर्षक लेखक को एक पान की दुकान पर ठेले पर लदी बर्फ की सिलें देखकर सूझा। लेखक अपने मित्रों (शुक्ल जी और चित्रकार सेन) के साथ कौसानी की यात्रा पर जाते हैं ताकि बर्फ को निकट से देख सकें। कोसी से कौसानी तक का रास्ता पहले उन्हें उबाऊ और सूखा लगता है, जिससे उनके मन में निराशा छा जाती है। किंतु कौसानी पहुँचते ही सामने की कत्यूर घाटी का अपार सौंदर्य और बादलों के बीच से झाँकते हिमालय के हिमशिखरों को देखकर वे स्तब्ध रह जाते हैं। हिमालय की वह 'चिरंतन हिम' राशि लेखक के मन के सारे द्वंद्व और कष्टों को धो देती है। यह पाठ प्रकृति के प्रति गहरा अनुराग जगाता है और शहरी जीवन की आपाधापी के बीच मानसिक शांति की तलाश को रेखांकित करता है।
English:
'The Himalayas on a Cart' is an engaging travelogue that begins with a catchy title inspired by ice slabs on a street cart. The author travels to Kausani with his friends to witness the majestic Himalayas. Although the initial journey from Kosi felt dull and disappointing, reaching Kausani transformed their perspective as they were greeted by the breathtaking beauty of the Katyur Valley. The sight of the 'Eternal Snows' on the peaks brought profound inner peace, dissolving all mental conflicts. The narrative emphasizes the deep connection between humans and nature and the soul's yearning for tranquility away from the chaotic city life.
3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)
हिन्दी:
इस पाठ का मूल संदेश प्रकृति के साथ तादात्म्य और आत्मिक शांति की प्राप्ति है। लेखक यह समझाना चाहते हैं कि हिमालय केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है जो मनुष्य को ऊँचा उठने की प्रेरणा देता है। यह पाठ पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का भी संदेश देता है।
English:
The core message is the spiritual synergy with nature and the quest for inner peace. The Himalayas serve as a symbol of inspiration, urging humans to rise above mundane struggles and connect with a higher plane of consciousness. It also implicitly warns about the changing state of our natural environment.
4. गद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation)
महत्वपूर्ण अंश 1: "यह मेरा मन - - - स्नेहभरी चुनौती भी दे रहा है - 'हिम्मत है? ऊँचे उठोगे?'"
(क) सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'गद्य-खंड' के 'ठेले पर हिमालय' नामक यात्रा-वृत्तांत से लिया गया है। इसके लेखक धर्मवीर भारती हैं।
(ख) प्रसंग: हिमालय के विराट स्वरूप के सामने लेखक अपनी लघुता और वैचारिक शून्यता का अनुभव कर रहे हैं।
(ग) व्याख्या: लेखक कहते हैं कि हिमालय की असीम ऊँचाई और भव्यता को देखकर उनका मन इतना प्रभावित हुआ कि वे कुछ भी लिख पाने में असमर्थ महसूस करने लगे। उन्हें लगा कि वे इस हिमसम्राट के सामने बहुत छोटे हैं। धीरे-धीरे उन्हें महसूस हुआ कि हिमालय एक बड़े भाई की तरह उन्हें प्रोत्साहित कर रहा है कि वे भी अपने जीवन में वैसी ही ऊँचाई और दृढ़ता प्राप्त करें।
(घ) साहित्यिक विशेषता:
शैली: भावात्मक और प्रतीकात्मक。
भाव: प्रकृति का मानवीकरण (बड़े भाई के रूप में)。
महत्वपूर्ण अंश 2: "क्यों पुराने साधकों ने - - - यह पहली बार मेरी समझ में आ रहा था।"
(क) सन्दर्भ: पूर्ववत्।
(ख) प्रसंग: हिमालय की शीतलता का लेखक के मन पर पड़ने वाले प्रभाव का वर्णन।
(ग) व्याख्या: लेखक को अनुभव हुआ कि जैसे बर्फ की सिल के पास खड़े होने पर ठंडी भाप महसूस होती है, वैसे ही हिमालय की उपस्थिति उनके माथे को ठंडक पहुँचा रही है। उन्हें समझ आया कि प्राचीन ऋषि-मुनि संसार के कष्टों (त्रिताप) से मुक्ति पाने के लिए हिमालय क्यों जाते थे, क्योंकि वहाँ की शांति मन के सारे क्लेशों को मिटा देती है।
(घ) साहित्यिक विशेषता:
संदेश: हिमालय की आध्यात्मिक शांति का महत्व।
5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)
शब्द | अर्थ | पर्यायवाची | विलोम |
हर्षातिरेक | अत्यधिक खुशी | उल्लास | विषाद |
निरावृत | आवरणहीन / खुला हुआ | नग्न | आवृत |
चिरंतन | प्राचीन / सदा रहने वाला | शाश्वत | नश्वर |
क्षोभ | दुख / व्याकुलता | क्षोभ | संतोष |
कौंधना | अचानक मन में आना | स्फुरण | --- |
तंद्रालस | नींद या थकान का आलस्य | प्रमाद | स्फूर्ति |
बेसाख्ता | अनायास / स्वाभाविक रूप से | स्वाभाविक | सप्रयास |
अदम्य | जिसे दबाया न जा सके | अजेय | दयनीय |
नगाधिराज | पर्वतों का राजा (हिमालय) | पर्वतराज | --- |
शमित | शांत करना | शांत | उत्तेजित |
6. सही या गलत - कारण सहित (True or False with Reason)
कथन 1: धर्मवीर भारती का जन्म अल्मोड़ा में हुआ था।
उत्तर: गलत - कारण: उनका जन्म प्रयागराज (इलाहाबाद) में हुआ था।
कथन 2: कौसानी को 'भारत का स्विट्जरलैंड' कहा जाता है।
उत्तर: सही - कारण: गाँधी जी ने कौसानी में स्विट्जरलैंड का आभास होने की बात कही थी।
कथन 3: चित्रकार सेन आधुनिक बम्बई की चित्रशैली से बहुत खुश थे।
उत्तर: गलत - कारण: वे बम्बई की अत्याधुनिक चित्रशैली से नाराज थे, इसीलिए उन्होंने हिमालय को
शीर्षासन कर 'अलग पर्सपेक्टिव' से देखा।
कथन 4: 'गुनाहों का देवता' धर्मवीर भारती का प्रसिद्ध उपन्यास है।
उत्तर: सही - कारण: यह उनकी ऐतिहासिक सफलता प्राप्त कृतियों में से एक है।
7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: 'ठेले पर हिमालय' शीर्षक लेखक के मन में कैसे आया?
उत्तर: एक पान की दुकान पर ठेले पर लदी बर्फ की सिलें देखकर और अपने मित्र के यह कहने पर कि "यही बर्फ तो हिमालय की शोभा है", लेखक के मन में यह शीर्षक कौंध गया।
प्रश्न 2: कौसानी पहुँचने पर लेखक स्तब्ध क्यों रह गए?
उत्तर: कौसानी की पर्वतमाला के अंचल में छिपी कत्यूर घाटी के अपार सौंदर्य—मखमली खेत, गेरू की शिलाएँ और बेले की लड़ियों जैसी नदियाँ—को देखकर लेखक मंत्रमुग्ध और स्तब्ध रह गए।
प्रश्न 3: चित्रकार सेन ने हिमालय को देखने के लिए शीर्षासन क्यों किया?
उत्तर: वे हिमालय को हर 'पर्सपेक्टिव' (परिप्रेक्ष्य) से देखना चाहते थे और बम्बई की आधुनिक चित्रशैली के प्रति अपना विरोध दर्ज कराना चाहते थे।
प्रश्न 4: गाँधी जी ने कौसानी में कौन सी पुस्तक लिखी थी?
उत्तर: गाँधी जी ने कौसानी प्रवास के दौरान 'अनासक्ति योग' (गीता पर टीका) लिखी थी।
8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)
प्रश्न 1: 'ठेले पर हिमालय' पाठ के आधार पर हिमालय के सौंदर्य का वर्णन कीजिए।
उत्तर: लेखक ने हिमालय के सौंदर्य को अत्यंत सुकुमार और निष्कलंक बताया है। कत्यूर घाटी का दृश्य किसी दूसरे लोक जैसा प्रतीत होता है जहाँ मखमली कालीनों जैसे खेत और श्वेत पत्थरों की कतारें हैं। बादलों के हटने पर हिमालय की हिमशिखरों की रहस्यमयी और रोमांचक शृंखला प्रकट होती है। सूर्यास्त के समय ग्लेशियरों में पिघली केसर जैसी आभा और बर्फ का कमल के फूलों की तरह लाल होना एक अलौकिक दृश्य प्रस्तुत करता है। हिमालय की यह चिरंतन बर्फ शांति और शीतलता का प्रतीक है।
प्रश्न 2: धर्मवीर भारती की गद्य शैली की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: धर्मवीर भारती आधुनिक हिंदी गद्य के समर्थ लेखक हैं। उनकी शैली की विशेषताएँ हैं:
प्रवाहपूर्ण और पारदर्शी भाषा: उनकी भाषा अत्यंत सहज और कृत्रिमता से दूर है।
शब्द वैभव: वे तत्सम, देशज और विदेशज शब्दों का बहुत सटीक प्रयोग करते हैं।
भावुकता और विवेक का संतुलन: उनके लेखन में संवेदना और भावुकता केंद्र में रहती है, पर वे तार्किकता को नहीं छोड़ते।
संवादात्मकता: पाठकों के साथ सीधा संवाद स्थापित करना उनकी एक बड़ी खूबी है।
9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)
संधि-विच्छेद:
हिमालय: हिम + आलय
निरावृत: निः + आवृत
हर्षातिरेक: हर्ष + अतिरेक
नगाधिराज: नग + अधिराज
उपसर्ग पहचानें:
सुकुमार: सु (उपसर्ग) + कुमार
निराशा: निर (उपसर्ग) + आशा
असंतोष: अ (उपसर्ग) + संतोष
प्रत्यय:
ऊँचाई: ऊँचा + आई (इसी प्रकार: लिखाई, पढ़ाई, चौड़ाई)
रोमांचक: रोमांच + अक
10. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)
प्रश्न 1: 'धर्मयुग' पत्रिका के संपादक कौन थे?
उत्तर: 'धर्मयुग' के संपादक धर्मवीर भारती थे।
प्रश्न 2: 'सूरज का सातवाँ घोड़ा' किस विधा की रचना है?
उत्तर: यह धर्मवीर भारती का एक सुप्रसिद्ध उपन्यास है।
11. UP Board परीक्षा में इस पाठ से अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)
5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:
'ठेले पर हिमालय' यात्रा-वृत्तांत का सारांश लिखते हुए इसके संदेश को स्पष्ट कीजिए।
6 अंक - गद्यांश व्याख्या:
"यह मेरा मन इतना कल्पनाहीन क्यों हो गया है... हिम्मत है? ऊँचे उठोगे?"
"वे बर्फ की ऊँचाइयाँ बार-बार बुलाती हैं... वहीं मन रमता है।"
2 अंक - लघु उत्तरीय:
'चिरंतन हिम' (The Eternal Snows) का क्या अर्थ है?
कौसानी जाने वाले यात्रियों के चेहरे क्यों पीले पड़ गए थे?
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