2.राजस्थान की रजत बूँदें - Rajasthan ki Rajat Boondein - Class 11 - Vitan 1
- 5h
- 5 min read

Author: अनुपम मिश्र
1. लेखक परिचय (Literary Profile)
साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): अनुपम मिश्र पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित लेखक और गांधीवादी विचारक थे। उन्होंने जल संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को पुनर्जीवित करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किया। उनकी भाषा सरल, चित्रात्मक और जन-संवेदनाओं से जुड़ी हुई है।
2. पाठ का सार (Executive Summary)
प्रतिपाद्य (Central Theme): 'राजस्थान की रजत बूँदें' राजस्थान की मरुभूमि में जल संरक्षण की अद्भुत और विशिष्ट तकनीक 'कुंई' पर आधारित है। यह पाठ समाज के उस सामूहिक मंथन और शास्त्र को उजागर करता है जिसने खारे पानी के सागर के बीच 'अमृत' जैसा मीठा पानी प्राप्त करने की कला विकसित की।
English Explanation: The chapter describes the traditional method of water harvesting in Rajasthan known as 'Kui'. It details the scientific and social aspects of building these small wells that capture 'Rejanipani' (moisture trapped in sand) prevented from mixing with salty groundwater by a gypsum layer. The text highlights the skills of 'Chejaro' craftsmen and the community's collective responsibility towards water.
Key Points:
कुंई का निर्माण और चेजारो (दक्षतम कारीगर) की विशिष्ट कला।
वर्षा जल के तीन रूप: पालरपानी, पातालपानी और रेजाणीपानी।
खड़िया पत्थर की पट्टी का महत्व जो मीठे पानी को खारे भूजल में मिलने से रोकती है।
कुंई का संकरा व्यास पानी को भाप बनकर उड़ने से बचाने के लिए।
2.1 पारिभाषिक शब्दावली (Key Terms)
शब्द (Term) | हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning) | English Context |
कुंई (Kui) | बहुत ही छोटा-सा कुआँ, जो केवल व्यास में छोटा होता है। | Small well with narrow diameter. |
चेलवांजी/चेजारो | कुंई की खुदाई और चिनाई करने वाले दक्ष लोग। | Skilled well-diggers. |
पालरपानी | सीधे बरसात से मिलने वाला धरातल पर बहने वाला पानी। | Direct rainwater/Surface water. |
पातालपानी | कुओं से निकाला जाने वाला खारा भूजल। | Groundwater/Artesian water. |
रेजाणीपानी | धरातल के नीचे उतरा लेकिन खड़िया पट्टी के कारण पाताल में न मिल पाया नमी वाला पानी। | Moisture trapped in sand above gypsum layer. |
रेजा (Reja) | धरातल में समाई वर्षा को मापने की इकाई। | Unit to measure absorbed rainfall. |
3. कुंई निर्माण की तकनीक (Literary Analysis)
खुदाई और सुरक्षा: कुंई बहुत संकरी होती है, इसलिए इसकी खुदाई 'बसौली' से की जाती है। गहराई में गरमी कम करने के लिए ऊपर से रेत फेंकी जाती है और कारीगर अपने सिर पर धातु का टोप पहनते हैं।
चिनाई के तरीके:
ईंट की चिनाई: जहाँ मिट्टी स्थिर हो।
रस्से की कुंडली: खींप घास से बना मोटा रस्सा कुंई की दीवार को थामने के लिए कुंडलीनुमा बिछाया जाता है
लकड़ी के लट्ठे: अरणी, बण, बावल या कुंबट की लकड़ियों को खड़ा करके साँपणी की तरह बाँधा जाता है।
4. सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू
निजी बनाम सार्वजनिक: कुंई निजी संपत्ति होती है, लेकिन यह सार्वजनिक ज़मीन पर बनी होती है। नई कुंई बनाने पर ग्राम समाज का अंकुश रहता है क्योंकि यह पहले से तय 'नमी' का बँटवारा करती है।
आच प्रथा: पुराने समय में चेजारो को वर्ष भर तीज-त्योहारों और मंगल अवसरों पर सम्मानित किया जाता था और फसल में हिस्सा दिया जाता था।
सुरक्षा: अमृत जैसे मीठे पानी की सुरक्षा के लिए अब कुंइयों पर ताले भी लगने लगे हैं।
5. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)
A. बोधात्मक प्रश्न (Short Answer):
Q1. राजस्थान में कुंई किसे कहते हैं? कुएँ और कुंई में क्या अंतर है?
Ans: कुंई का अर्थ है छोटा-सा कुआँ। अंतर यह है कि कुआँ भूजल (पातालपानी) पाने के लिए बनता है जो अक्सर खारा होता है, जबकि कुंई रेत की नमी (रेजाणीपानी) को बूँद-बूँद समेटती है जो मीठा होता है।
Q2. कुंई का मुँह छोटा रखने के क्या कारण हैं?
Ans: इसके तीन कारण हैं: 1. पानी कम फैलता है जिससे उसे निकालना आसान होता है। 2. पानी को भाप बनकर उड़ने से रोका जा सकता है। 3. छोटे मुँह को ढँकना और पानी को साफ़ रखना सरल होता है
B. विश्लेषणात्मक प्रश्न (Long Answer):
Q3. "रेत में बिखरे रहने में ही संगठन है" - मरुभूमि के संदर्भ में स्पष्ट करें।
Ans: अन्य मिट्टी के कण गीले होने पर चिपक जाते हैं और सूखने पर दरारें पैदा करते हैं जिससे नमी उड़ जाती है। परंतु रेत के कण अलग-अलग रहते हैं, वे चिपकते नहीं, इसलिए मरुभूमि में दरारें नहीं पड़तीं और वर्षा का जल भीतर सुरक्षित नमी के रूप में बना रहता है।
Q4. चेजारो के साथ समाज के व्यवहार में क्या बदलाव आया है?
Ans: पहले 'आच प्रथा' के तहत चेजारो का समाज से गहरा संबंध था, उन्हें वर्ष भर भेंट और अनाज दिया जाता था। अब यह संबंध केवल मज़दूरी देकर काम करवाने के रिवाज तक सिमट गया है।
6. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing)
विषय: "जल ही जीवन है: जल संरक्षण के पारंपरिक बनाम आधुनिक तरीके।"
Key Points:
पारंपरिक तरीकों (कुंई, बावड़ी) की कम लागत और स्थिरता।
आधुनिक तकनीकों में ऊर्जा की खपत और रखरखाव की समस्या।
समाज की सामूहिक भागीदारी की आवश्यकता।
7. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)
"खारे पानी के सागर में अमृत जैसा मीठा पानी।"
"कुंई यानी बहुत ही छोटा-सा कुआँ। कुआँ पुंलिंग है, कुंई स्त्रीलिंग।"
"सोने का एक अंडा देने वाली मुर्गी की चिरपरिचित कहानी को जमीन पर उतारती है कुंई।"
8. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)
भ्रम: 'रेजाणीपानी' को सीधे वर्षा का पानी समझ लेना (यह वर्षा के बाद रेत में समाई नमी है)।
गलती: चेजारो और कुंई के व्यास के बीच के संबंध को न समझना (संकेत: संकरा व्यास सुरक्षा और तकनीक दोनों के लिए है)।
9. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)
SA (2 Marks): खड़िया पत्थर की पट्टी का कुंई निर्माण में क्या महत्व है?
Model Ans: यह पट्टी वर्षा के मीठे जल को नीचे स्थित खारे भूजल में मिलने से रोकती है, जिससे कुंई में मीठा पानी जमा हो पाता है।
LA (5 Marks): कुंई निर्माण के दौरान चेलवांजी को किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है?
Model Ans: उन्हें संकरी जगह में उकड़ूँ बैठकर खुदाई करनी पड़ती है, जहाँ हवा की कमी और अत्यधिक गरमी होती है। ऊपर से रेत गिरने या मलबा गिरने का डर रहता है, जिससे बचने के लिए वे टोप पहनते हैं। चिनाई में थोड़ी भी चूक उनके प्राण ले सकती है।
About BhashaLab
BhashaLab is a dynamic platform dedicated to the exploration and mastery of languages - operating both online and offline. Aligned with the National Education Policy (NEP) 2020 and the National Credit Framework (NCrF), we offer language education that emphasizes measurable learning outcomes and recognized, transferable credits.
We offer:
1. NEP alligned offline language courses for degree colleges - English, Sanskrit, Marathi and Hindi
2. NEP alligned offline language courses for schools - English, Sanskrit, Marathi and Hindi
3. Std VIII, IX and X - English and Sanskrit Curriculum Tuitions - All boards
4. International English Olympiad Tuitions - All classes
5. Basic and Advanced English Grammar - Offline and Online - Class 3 and above
6. English Communication Skills for working professionals, adults and students - Offline and Online
Contact: +91 86577 20901, +91 97021 12044
Mail: info@bhashalab.com
Website: www.bhashalab.com




Comments