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    1.2. रोज मातीत - Roj Maatit - Class 11 -Yuvakbharati

    • 2 days ago
    • 5 min read

    Updated: 20 hours ago


     कवयित्री: कल्पना दुधाळ | विधा: कविता (गेय)


    १. शब्दार्थ और मुहावरे (Glossary with English Context)


    क. शब्दार्थ (Word Meanings)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi)

    अर्थ (English Context)

    सरी-वाफा

    क्यारियाँ

    Furrows/Raised beds

    जीव लावणे

    मन लगाकर काम करना

    Working with full devotion/soul

    गोंदणे

    त्वचा पर स्थायी नक्काशी (गोदना)

    Tattooing (Metaphor for planting)

    नांदणे

    निवास करना/बसना

    Dwelling/Living happily

    बेणं

    गन्ने के टुकड़े (रोपण हेतु)

    Sugarcane saplings/setts

    सांधणे

    जोड़ना

    Joining/Mending

    शेंदणे

    (कुएँ से) पानी निकालना

    Drawing water (from a well)

    काळी आई

    काली मिट्टी (धरती माता)

    Mother Earth (Black soil)

    ख. मुहावरे (Idioms)

    मुहावरा (Idiom)

    अर्थ (Meaning)

    वाक्य प्रयोग (Sentence Usage)

    राब राब राबणे

    कड़ी मेहनत करना

    किसान महिला दिन-रात खेतों में राब राब राबती है।

    हातभार लावणे

    मदद करना

    गृहिणी अपने परिश्रम से घर की प्रगति में हातभार लगाती है।

    मर मर मरणे

    अत्यधिक कष्ट सहना

    परिवार के भविष्य के लिए किसान महिला मर मर मरती है।

    अर्पण करणे

    समर्पित करना

    वह काली मिट्टी को अपना सर्वस्व अर्पण कर देती है।

    २. परिचय और सारांश (Introduction & Summary)


    कवयित्री परिचय: कल्पना दुधाळ (जन्म १९७८) एक प्रसिद्ध कवयित्री हैं । उनके कवितासंग्रह 'सिझर कर म्हणतेय माती' को 'कवी कुसुमाग्रज' पुरस्कार सहित २८ पुरस्कार प्राप्त हुए हैं ।


    केंद्रीय भाव (Central Idea - Bilingual):


    हिन्दी: यह कविता खेत में दिन-रात कड़ी मेहनत करने वाली एक किसान महिला के मनोगत और उसकी अटूट श्रमनिष्ठा को व्यक्त करती है । वह केवल फसल नहीं उगाती, बल्कि अपना सर्वस्व मिट्टी में अर्पण कर देती है ।


    English: This poem expresses the inner feelings of a female farmer who works tirelessly in the fields. She doesn't just plant crops; she implants her very soul and life into the soil to bring forth green prosperity.


    सारांश (Summary): 'रोज मातीत' कविता में एक किसान स्त्री के संघर्षमयी जीवन का चित्रण है । वह खेत की क्यारियों में प्याज की पौध लगाते समय कहती है कि वह केवल प्याज नहीं, बल्कि अपना 'जीव' (प्राण) लगा रही है । वह काली मिट्टी पर हरियाली को एक स्थायी 'गोंदण' (टैटू) की तरह उकेरती है ।


    जब वह गन्ने की बुवाई करती है, तो वह गन्ने के टुकड़ों के साथ-साथ अपने मन की इच्छाओं को भी दबा देती है ताकि उसका 'संसार' (परिवार) जुड़ा रहे । वह सोने जैसे पीले झेंडू के फूलों को तोड़कर घर के लिए खुशियों का तोरण बांधती है, लेकिन असल में वह फूलों के साथ अपना 'देह' (शरीर) तोड़ती है । वह कड़ी धूप में जलती है और गहरे कुएँ से पानी निकालकर खेतों को सींचती है, ताकि उसके पीछे केवल हरियाली शेष रहे । उसका पूरा जीवन मिट्टी में खपने और उसे उपजाऊ बनाने में ही समर्पित है ।


    ४. HSC पद्य आकलन (Poetry Pattern)

    कृति १: पद्यांश आकलन (2 Marks)


    प्रश्न १: कविता में स्त्री द्वारा किए जाने वाले विविध कार्य लिखें:


    • सरी-वाफ्यात कांदं लावणं


    • काळ्या आईला हिरवं गोंदणं


    • बेणं दाबणं (उसाची लागवड)


    • विहिरीचं पाणी शेंदणं


    प्रश्न २: उचित जोड़ियाँ मिलाइए:


    'अ' गट

    'ब' गट

    (१) नाही कांदं ग, जीव लावते

    (इ) स्वतःचा जीवच जणू कांदयाच्या रोपाच्या रूपात लावते

    (२) काळ्या आईला, हिरवं गोंदते

    (अ) गोंदणाच्या हिरव्या नक्षीप्रमाणे शेत पिकाने सजवते

    (३) हिरवी होऊन, मागं उरते

    (आ) अतोनात कष्टानंतर हिरव्या समृद्धीच्या स्वरूपात शिल्लक राहते

    कृति २: पद्य विश्लेषण / रसास्वादन (Appreciation - 6 Marks)

    • शीर्षक: रोज मातीत


    • रचनाकार: कल्पना दुधाळ


    • केंद्रीय कल्पना: किसान महिला का त्याग, समर्पण और उसकी श्रमनिष्ठा ।


    • रस/अलंकार: इसमें करुण रस (Pathos) की अंतर्धारा है। 'नाही कांदं ग, जीव लावते' में रूपक (Metaphor) का सुंदर प्रयोग है।

    • प्रतीक विधान: 'गोंदण' (Tattoo) मेहनत की निरंतरता और कलात्मकता का प्रतीक है ।


    • भाव पक्ष: कवयित्री ने दिखाया है कि खेत की हरियाली मुफ़्त में नहीं आती; उसके पीछे एक स्त्री का निरंतर 'मरना' और 'सर्वस्व अर्पण' करना शामिल है ।

    • कला पक्ष: कविता सरल, ग्रामीण और गेय (संगीतबद्ध) है 。


    कृति ३: लघूत्तरी प्रश्न (Short Answer - 2 Marks)


    प्रश्न: 'नाही बेणं ग, मन दाबते' इस पंक्ति का आशय स्पष्ट करें: उत्तर: जब किसान महिला गन्ने के टुकड़ों को मिट्टी में दबाती है, तो वह अपनी व्यक्तिगत खुशियों और मन की इच्छाओं का त्याग कर देती है । उसका पूरा ध्यान केवल फसल की सफलता और परिवार की खुशहाली पर होता है, चाहे इसके लिए उसे कितना भी मानसिक और शारीरिक कष्ट क्यों न सहना पड़े ।


    ७. व्याकरण (Grammar Corner with Explanations)


    समानार्थी शब्द (Synonyms):

    • काळी आई: धरणी / जमीन

    • संसार: प्रपंच / प्रपञ्च

    • विहीर: कूप / विवर


    वाक्य शुद्धिकरण (Sentence Correction):

    अशुद्ध: शेतकरी महिला शेतात काम करतो।

    शुद्ध: शेतकरी महिला शेतात काम करते

    Rule: [The verb must agree with the feminine subject 'Mahila'.]


    ८. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Board Questions)


    प्रश्न १: 'काळ्या आईला हिरवं गोंदते' पंक्ति का भावसौंदर्य स्पष्ट करें । उत्तर: जिस प्रकार गोंदण (टैटू) शरीर पर एक अमिट और सुंदर नक्काशी होती है, उसी प्रकार किसान महिला अपने कठोर परिश्रम से सूखी मिट्टी पर हरियाली की नक्काशी करती है । यह उसकी मेहनत और धरती के प्रति उसके प्रेम का प्रतीक है।


    प्रश्न २: किसान महिला अपने 'संसार' को कैसे जोड़ती (सांधते) है? उत्तर: वह गन्ने की एक-एक पोर (कांड्या-कांड्यांनी) को कड़ी मेहनत से मिट्टी में दबाकर फसल उगाती है । इसी प्रकार, वह अपने घर की हर छोटी जरूरत को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करती है और अपने परिवार को खुशियों के सूत्र में बाँधकर रखती है


    प्रश्न ३: "हिरवी होऊन, मागं उरते" पंक्ति से क्या तात्पर्य है? उत्तर: इसका तात्पर्य है कि स्त्री स्वयं धूप में जलकर और कष्ट सहकर 'मर' जाती है या थक जाती है, लेकिन उसकी मेहनत का परिणाम 'हरियाली' और 'समृद्धि' के रूप में खेत में सदैव शेष रहता है ।


    प्रश्न ४: कविता के आधार पर किसान महिला की सहनशीलता का वर्णन कीजिए । उत्तर: वह 'उन्हातान्हात' (कड़ी धूप में) काम करती है , 'खोल विहिरीचं पाणी' (गहरे कुएँ का पानी) निकालती है और अपने देह व मन के कष्टों को भूलकर परिवार के लिए खुशियों का तोरण बांधती है ।


    प्रश्न ५: 'सोन्याची फुलं' किसे कहा गया है और कवयित्री ने 'देह तोडते' क्यों कहा है? उत्तर: झेंडू के पीले फूलों को 'सोन्याची फुलं' कहा गया है । उन्हें तोड़ना केवल फूल तोड़ना नहीं है, बल्कि वह अपनी शारीरिक ऊर्जा और स्वास्थ्य को दाँव पर लगाकर उन्हें एकत्रित करती है, इसलिए इसे 'देह तोडणे' कहा गया है ।


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