3.5. चन्द्रशेखरः - Chandra Shekhar - Class 10 - पद्य-खंड - Rajeev Prakashan
- May 16
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Updated: 5 days ago

पाठ का प्रकार: संस्कृत खंड (नाटक / दृश्य काव्य)
पाठ का नाम: देशभक्तः चन्द्रशेखरः (देशभक्त चन्द्रशेखर)
विषय: अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की निर्भीकता, देशभक्ति और उनके कारागार दंड का ऐतिहासिक चित्रण।
पात्र: चन्द्रशेखरः (16 वर्षीय गौरवर्ण किशोर), पारसीक न्यायाधीशः (कठोर मजिस्ट्रेट), गण्डासिंहः (आरक्षक/सिपाही), दुर्मुखः (चांडाल/कोड़े मारने वाला)।
परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)
विषय | विवरण |
मुख्य प्रसंग | असहयोग आंदोलन के दौरान आरक्षक दुर्जयसिंह पर पत्थर मारने के अपराध में चंद्रशेखर को न्यायालय में प्रस्तुत करना। |
चन्द्रशेखर का परिचय | पुष्टाङ्गः, गौरवर्णः, षोडशवर्षीयः किशोरः (पुष्ट अंगों वाले, गोरे रंग के, 16 साल के किशोर)। |
स्वनाम (अपना नाम) | आज़ादः (स्थिरीभूय - दृढ़ होकर)। |
पितुः नाम (पिता का नाम) | स्वतन्त्रः। |
गृहम् (अपना घर) | कारागार एव मम गृहम् (जेल ही मेरा घर है)। |
न्यायालय का दंड | पञ्चदश कशाघातान् (15 कोड़े मारने की सजा)। |
मुख्य नारा | भारतमाता की जय (जयतु भारतम्)। |
1. पाठ परिचय (Lesson Introduction)
स्थान: पहला दृश्य वाराणसी न्यायालय का है जहाँ एक कठोर पारसीक मजिस्ट्रेट बैठा है। सिपाही चंद्रशेखर को बन्दी बनाकर लाते हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ: यह पाठ भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आज़ाद के बचपन की उस घटना को दर्शाता है जब कोड़े की मार खाते हुए भी उनके मुख से केवल 'भारत माता की जय' का घोष निकला था।
शारीरिक व मानसिक दृढ़ता: कोड़े मारने वाले चांडाल के सामने खड़े होकर भी चंद्रशेखर तनिक भी विचलित नहीं होते और डंके की चोट पर अंग्रेजों के दमन का विरोध करते हैं।
2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)
हिन्दी:
वाराणसी न्यायालय में 16 वर्षीय देशभक्त चंद्रशेखर को राजद्रोह के आरोप में पेश किया जाता है। न्यायाधीश द्वारा नाम पूछने पर वे अपना नाम 'आज़ाद', पिता का नाम 'स्वतंत्र' और अपना घर 'जेल' बताते हैं। उनकी इस उद्दंडता और निर्भीकता से चिढ़कर न्यायाधीश उन्हें 15 कोड़े मारने की क्रूर सजा सुनाता है। जेल के अहाते में जब चांडाल दुर्मुख उन्हें कोड़े मारता है, तो प्रत्येक प्रहार पर चंद्रशेखर 'भारत माता की जय' का जयघोष करते हैं। कोड़ों से लहुलुहान होकर जब वे जेल से बाहर आते हैं, तो जनता उन्हें मालाओं से लाद देती है और उनके चरणों का स्पर्श करती है।
English:
In the Varanasi court, 16-year-old patriot Chandrashekhar is presented under charges of treason. When questioned by the magistrate, he fearlessly declares his name as 'Azad', his father's name as 'Swatantra' (Independent), and his home as 'Karagar' (Prison). Annoyed by his defiance, the judge sentences him to 15 lashes. In the prison courtyard, as the executioner Durmukh whips him, Chandrashekhar chants 'Jayatu Bharatam' (Victory to India) with every strike. Bleeding heavily, when he steps out of jail, the crowd greets him with garlands and touches his feet in reverence.
3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)
इस पाठ का मूल संदेश 'अदम्य साहस, निर्भीकता और चरम राष्ट्रभक्ति' है। यह पाठ नई पीढ़ी को संदेश देता है कि अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए शारीरिक कष्टों और मृत्यु के भय को भी हंसते-हंसते स्वीकार कर लेना ही सच्ची देशभक्ति है।
4. महत्वपूर्ण गद्यांश - ससन्दर्भ अनुवाद (Critical Passages)
महत्वपूर्ण अंश 1: "न्यायाधीशः- रे बालक ! तव किं नाम?... चन्द्रशेखरः- नास्ति चिन्ता।"
सन्दर्भ: प्रस्तुत संवाद हमारी पाठ्यपुस्तक के 'संस्कृत खंड' के 'देशभक्तः चन्द्रशेखरः' पाठ से लिया गया है।
हिन्दी अनुवाद: न्यायाधीश पूछता है— "रे बालक! तुम्हारा क्या नाम है?" चंद्रशेखर कहते हैं— "आज़ाद (दृढ़ होकर)।" न्यायाधीश— "तुम्हारे पिता का क्या नाम है?" चंद्रशेखर— "स्वतंत्र।" न्यायाधीश— "तुम कहाँ रहते हो? तुम्हारा घर कहाँ है?" चंद्रशेखर— "कारागार (जेल) ही मेरा घर है।" न्यायाधीश (क्रोध से)— "यह नवयुवक स्वतंत्रता के लिए कितना पागल है! मैं इसे पंद्रह कोड़े मारने का दंड देता हूँ।" चंद्रशेखर— "कोई चिंता नहीं है।"
महत्वपूर्ण अंश 2: "गण्डासिंहः- दुर्मुख ! द्वतीयः कशाघातः... चन्द्रशेखरः पुनः पुनः भारतमाता की जय इति वदति।"
सन्दर्भ: पूर्ववत्।
हिन्दी अनुवाद: गण्डासिंह (सिपाही) कहता है— "दुर्मुख! दूसरा कोड़ा मारो।" दुर्मुख कोड़े से मारता है। कोड़े से पिटते हुए चंद्रशेखर फिर से बोलते हैं— "भारत माता की जय!" इस प्रकार वे पंद्रह कोड़े खाकर भी बार-बार 'भारत माता की जय' ही बोलते रहते हैं, जिससे उनका सारा शरीर रक्त की बूंदों से नहा जाता है।
5. शब्दार्थ (Glossary)
शब्द | अर्थ | विलोम |
दुर्धर्षः | जिसे वश में करना कठिन हो / कठोर | सौम्यः |
आरक्षकाः | सिपाही / पुलिसकर्मी | --- |
प्रस्तरखण्डेन | पत्थर के टुकड़े से | --- |
स्थिरीभूय | स्थिर या दृढ़ होकर | विचलितो भूत्वा |
कशाघातः | कोड़े की मार | --- |
कौपीनमात्र | केवल लंगोटी पहने हुए | --- |
6. सही या गलत (True or False)
कथन 1: चंद्रशेखर की आयु उस समय बीस वर्ष थी।
उत्तर: गलत। कारण: उनकी आयु षोडशवर्षीय (16 वर्ष) थी।
कथन 2: चंद्रशेखर ने अपने पिता का नाम 'स्वतन्त्रः' बताया।
उत्तर: सही।
कथन 3: कोड़े मारने की सजा पारसीक न्यायाधीश ने दी थी।
उत्तर: सही।
7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answers - संस्कृत में)
प्रश्न 1: चन्द्रशेखरः कः आसीत्?
उत्तर: चन्द्रशेखरः एकः प्रसिद्धः क्रान्तिकारी देशभक्तः च आसीत्।
प्रश्न 2: चन्द्रशेखरः स्वगृहं किम् अवदत्?
उत्तर: चन्द्रशेखरः 'कारागार एव मम गृहम्' इति अवदत्।
प्रश्न 3: कशाघातेन ताडितः चन्द्रशेखरः पुनः पुनः किम् अवदत्?
उत्तर: कशाघातेन ताडितः चन्द्रशेखरः पुनः पुनः "भारतमाता की जय" इति अवदत्।
8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answers - 5 अंक)
प्रश्न: चंद्रशेखर आज़ाद की चारित्रिक विशेषताओं को पाठ के आधार पर रेखांकित कीजिए।
उत्तर: पाठ के नाटकीय दृश्यों के आधार पर चंद्रशेखर के चरित्र की मुख्य विशेषताएँ निम्न हैं:
निर्भीकता: वे ब्रिटिश मजिस्ट्रेट और कोड़े की मार के सामने तनिक भी नहीं डरते。
स्वाभिमानी एवं चतुर: उन्होंने अपने नाम, पिता के नाम और घर का ऐसा उत्तर दिया जिससे ब्रिटिश शासन का उपहास उड़ा और भारतीय स्वाभिमान ऊँचा हुआ।
कठोर सहिष्णुता: 15 कोड़ों की असहनीय और लहू सुखाने वाली मार को भी उन्होंने हँसते-हँसते 'नास्ति चिन्ता' कहकर स्वीकार किया।
परम राष्ट्रभक्त: उनके शरीर से गिरती रक्त की प्रत्येक बूँद भारत माता की स्वतंत्रता की साक्षी बन रही थी।
9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar)
समास विग्रह:
कशाघातः: कशायाः घातः (कोड़े का आघात) (तत्पुरुष समास)।
रक्तबिन्दवः: रक्तस्य बिन्दवः (खून की बूँदें) (तत्पुरुष समास)。
नवयुवकः: नवः च असौ युवकः (कर्मधारय समास)。
संज्ञा शब्द पहचानें:
चन्द्रशेखरः, गण्डासिंहः - व्यक्तिवाचक संज्ञा।
सभा, न्यायालयः - समूहवाचक/स्थानवाचक संज्ञा。
10. UP Board परीक्षा हेतु अपेक्षित प्रश्न
अनुवाद हेतु: "न्यायाधीशः- त्वं कुत्र निवससि? तव गृहं कुत्रास्ति?... चन्द्रशेखरः- कारागार एव मम गृहम्।"
लघु उत्तरीय: न्यायाधीशः चन्द्रशेखरं कति कशाघातान् अदण्डयत्? (पञ्चदश कशाघातान् - 15 कोड़े)।
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