3. अतीत में दबे पाँव- Atit Mein Dabe Paon - Class 12 - Vitan 2
- 15 hours ago
- 4 min read
Author: ओम थानवी
1. लेखक परिचय (Literary Profile)
साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): ओम थानवी एक प्रख्यात पत्रकार, संपादक और आलोचक हैं। उनके लेखन में ऐतिहासिक तथ्यों के साथ-साथ यात्रा-वृत्तांत की जीवंतता और सांस्कृतिक गहराई देखने को मिलती है। वे पुरातात्विक धरोहरों को केवल खंडहर नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के जीवंत दस्तावेज़ के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
प्रमुख रचनाएँ (Key Works): 'अतीत में दबे पाँव' (एक पुरातात्विक यात्रा-वृत्तांत)।
2. पाठ का सार (Executive Summary)
प्रतिपाद्य (Central Theme): यह पाठ दुनिया के सबसे पुराने नियोजित शहरों 'मुअनजो-दड़ो' और 'हड़प्पा' के पुरातात्विक साक्ष्यों का विश्लेषण है। लेखक सिंधु घाटी सभ्यता की साधन-संपन्नता, बेजोड़ नगर-नियोजन और जल-संस्कृति को आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत करते हैं।
English Summary: 'Atit Mein Dabe Paon' is a travelogue-based exploration of the Indus Valley Civilization, specifically Mohenjo-daro and Harappa. The author highlights the advanced urban planning, drainage systems, and the aesthetic sense of a society that was disciplined by understanding rather than force. It emphasizes that this civilization was prosperous yet minimalist, lacking grand monuments but rich in civic sense.
Key Points:
मुअनजो-दड़ो ताम्र काल का सबसे बड़ा और उत्कृष्ट नियोजित शहर था।
यहाँ का नगर-नियोजन (Grid Plan) और जल निकासी व्यवस्था आज के महानगरों से भी उन्नत थी।
सिंधु सभ्यता 'समाज-पोषित' थी, जहाँ राजसत्ता या धर्म का आडंबर नहीं था।
महान स्नानागार, अन्न कोठार और कुएँ इस सभ्यता की जल-संस्कृति के प्रमाण हैं।
3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)
शब्द (Word) | हिंदी अर्थ (Hindi Meaning) | English Context |
मुअनजो-दड़ो | मुर्दों का टीला | Mound of the Dead |
परवर्ती | बाद का / विकसित | Later/Mature stage |
नियोजित | योजनाबद्ध | Planned |
आडंबर | दिखावा | Ostentation/Grandeur |
धरोहर | विरासत | Heritage |
अजायबघर | संग्रहालय | Museum |
4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)
मूल संवेदना (Core Sentiment): सभ्यता की प्राचीनता और उसकी निरंतरता की खोज। लेखक यह संदेश देते हैं कि पुरानी सीढ़ियाँ भले ही कहीं न ले जाती हों, पर वे हमें इतिहास के पार झाँकने का मौका देती हैं।
कला पक्ष (Artistic Aspect):
शैली: यात्रा-वृत्तांत और ऐतिहासिक रिपोर्टाज का मिश्रण।
सौंदर्य-बोध: सिंधु सभ्यता का सौंदर्य 'राज-पोषित' न होकर 'समाज-पोषित' था, जो सादगी में भव्यता ढूँढता है।
5. गद्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)
Extract 1: "सिंधु-सभ्यता साधन-संपन्न थी, पर उसमें भव्यता का आडंबर नहीं था। ... वहाँ का सौंदर्य-बोध समाज-पोषित था।"
Interpretation: सिंधु सभ्यता को 'साधन-संपन्न' क्यों कहा गया है? (उत्तर: क्योंकि वहां उन्नत खेती, व्यापार और उत्कृष्ट नगर नियोजन था)।
Author's Intent: 'समाज-पोषित' सौंदर्य से लेखक का क्या आशय है? (उत्तर: कला और निर्माण आम जनता की जरूरतों और रुचि पर आधारित थे, न कि राजाओं के दिखावे पर)।
Inference: क्या सिंधु सभ्यता में राजसत्ता का अभाव था? (उत्तर: वहां अनुशासन था, पर वह ताकत के बजाय आपसी समझ से संचालित था)।
6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)
1. सिंधु-सभ्यता साधन-संपन्न थी, पर उसमें भव्यता का आडंबर नहीं था। कैसे?
उत्तर: यहाँ की सड़कें, मकान और नालियाँ व्यवस्थित थीं, लेकिन मिस्र की तरह ऊँचे पिरामिड या भव्य राजमहल नहीं थे। यहाँ की संपन्नता उपयोगिता में थी, दिखावे में नहीं।
2. सिंधु सभ्यता को 'जल-संस्कृति' कहना कहाँ तक उचित है?
उत्तर: यह पूरी तरह उचित है क्योंकि यहाँ पानी की निकासी की अद्भुत व्यवस्था थी, लगभग 700 कुएँ मिले हैं और एक विशाल स्नानागार (Great Bath) मौजूद है, जो पानी के प्रति उनकी जागरूकता को दर्शाता है।
3. 'सिंधु सभ्यता ताकत से शासित होने की अपेक्षा समझ से अनुशासित सभ्यता थी।' कथन को स्पष्ट करें।
उत्तर: खुदाई में कोई बड़ा हथियार, सैन्य छावनी या भव्य राजमहल नहीं मिला है। मुहरों और नगर नियोजन की एकरूपता बताती है कि लोग किसी डंडे के डर से नहीं, बल्कि नागरिक बोध और आपसी समझ से नियम पालते थे।
7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)
Topic: "हमारी ऐतिहासिक धरोहरें: पहचान और संरक्षण"
Key Points:
प्राचीन सभ्यताओं से आधुनिक नगर नियोजन की सीख।
पुरातात्विक स्थलों का पर्यटन और शैक्षिक महत्व।
विकास की बलि चढ़ते साक्ष्य (जैसे हड़प्पा का उदाहरण)।
8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)
"मुअनजो-दड़ो ताम्र काल के शहरों में सबसे बड़ा और उत्कृष्ट है।"
"अधूरे पायदानों पर खड़े होकर अनुभव किया जा सकता है कि आप इतिहास को नहीं, उसके पार झाँक रहे हैं।"
"सिंधु घाटी की खूबी उसका सौंदर्य-बोध है जो समाज-पोषित था।"
9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)
Confusion: मुअनजो-दड़ो और हड़प्पा के बीच भ्रम। मुअनजो-दड़ो बेहतर संरक्षित है, जबकि हड़प्पा के साक्ष्य रेल लाइन बिछाने के दौरान नष्ट हो गए थे।
Spelling: 'मुअनजो-दड़ो' और 'पुरातत्त्व' की वर्तनी का अभ्यास करें।
10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)
Short Answer (2 marks): लेखक ने मुअनजो-दड़ो को 'दुनिया की छत' क्यों कहा है?
Model Answer: शहर के ऊँचे टीलों और स्तूप पर खड़े होकर चारों ओर का नज़ारा दुनिया की छत जैसा अहसास देता है, जहाँ से हज़ारों साल पुराना इतिहास साफ़ दिखाई देता है।
Long Answer (5 marks): सिंधु घाटी सभ्यता की जल निकासी व्यवस्था आधुनिक इंजीनियरिंग के लिए प्रेरणा का स्रोत कैसे है?
Model Answer: हज़ारों साल पहले मुअनजो-दड़ो में पक्की ईंटों की ढकी हुई नालियाँ थीं। हर घर का गंदा पानी एक छोटी नाली से बड़ी नाली में जाता था। सफाई के लिए मैनहोल की व्यवस्था थी। यह योजना आज के आधुनिक शहरों के 'ड्रेनेज सिस्टम' का आधार है।
About BhashaLab
BhashaLab is a dynamic platform dedicated to the exploration and mastery of languages - operating both online and offline. Aligned with the National Education Policy (NEP) 2020 and the National Credit Framework (NCrF), we offer language education that emphasizes measurable learning outcomes and recognized, transferable credits.
We offer:
1. NEP alligned offline language courses for degree colleges - English, Sanskrit, Marathi and Hindi
2. NEP alligned offline language courses for schools - English, Sanskrit, Marathi and Hindi
3. Std VIII, IX and X - English and Sanskrit Curriculum Tuitions - All boards
4. International English Olympiad Tuitions - All classes
5. Basic and Advanced English Grammar - Offline and Online - Class 3 and above
6. English Communication Skills for working professionals, adults and students - Offline and Online
Contact: +91 86577 20901, +91 97021 12044
Mail: info@bhashalab.com
Website: www.bhashalab.com

Comments