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    5.1. मध्ययुगीन काव्य: (अ) भक्ति महिमा - Bhakti Mahima - Class 11 - Yuvakbharati

    • Apr 14
    • 5 min read

    Updated: Apr 19

    कवि: संत दादू दयाल | विधा: साखी


    १. शब्दार्थ और मुहावरे (Glossary with English Context)


    क. शब्दार्थ (Word Meanings)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi)

    अर्थ (English Context)

    पाहण

    पत्थर

    Stone

    सुरति

    याद / स्मरण

    Remembrance / Memory

    बाँचे

    पढ़ना

    To read

    मरजीवा

    वैरागी / जीवित होते हुए भी मरा हुआ

    Ascetic / Dead while alive

    करतार

    सृष्टिकर्ता / ईश्वर

    Creator / God

    ठाम

    स्थान / जगह

    Place / Space

    बारीक

    बहुत संकरा

    Very narrow / Thin

    सुजान

    चतुर / ज्ञानी

    Wise / Knowledgeable

    अमोल

    अनमोल / बहुमूल्य

    Priceless

    उबरे

    पार होना / बचना

    To be saved / To cross over

    ख. मुहावरे (Idioms)

    मुहावरा (Idiom)

    अर्थ (Meaning)

    वाक्य प्रयोग (Sentence Usage)

    कागद काले करना

    व्यर्थ लिखना

    प्रेम के बिना पोथियाँ पढ़ना केवल कागद काले करने के समान है।

    भवसागर पार करना

    संसार से मुक्ति पाना

    ईश्वर की भक्ति ही मनुष्य को भवसागर पार करा सकती है।

    पत्थर पिघलना

    कठोर हृदय में दया आना

    राम नाम के स्मरण से पत्थर जैसा हृदय भी मक्खन बन जाता है।

    आपा खोना

    अहंकार करना

    ज्ञानी व्यक्ति कभी अपना आपा नहीं खोते और शांत रहते हैं।

    एक ही घाट का पानी पीना

    एकता होना

    संत दादू के अनुसार सभी मनुष्यों को एक ही घाट का पानी पीना चाहिए अर्थात समान रहना चाहिए।

    २. परिचय और सारांश (Introduction & Summary)

    कवि परिचय: संत दादू दयाल का जन्म १५४४ में अहमदाबाद (गुजरात) में हुआ । आपने 'दादू पंथ' की स्थापना की और कबीर की भाँति ईश्वर को निर्गुण व निराकार माना । सामाजिक कुरीतियों और अंधविश्वास का विरोध आपकी साखियों का मुख्य विषय है ।


    केंद्रीय भाव (Central Idea - Bilingual):

    • हिन्दी: इन साखियों में गुरु महिमा, अहंकार का त्याग और ईश्वर की सर्वव्यापकता का वर्णन किया गया है ।

    • English: These 'Sakhi' verses emphasize the greatness of the Guru, the renunciation of ego, and the omnipresence of God in every soul.


    सारांश (Summary): प्रस्तुत साखियों में संत दादू दयाल ने भक्ति के वास्तविक स्वरूप को स्पष्ट किया है । उनके अनुसार, जब मनुष्य 'माया रस' (सांसारिक सुख) पीता है, तो उसका कोमल मन पत्थर के समान कठोर हो जाता है, परंतु 'राम रस' का पान करते ही कठोर हृदय भी मक्खन जैसा कोमल बन जाता है । वे कहते हैं कि ईश्वर का मार्ग अत्यंत संकरा है, जहाँ 'मैं' (अहंकार) और 'राम' एक साथ नहीं रह सकते ।

    दादू दयाल के अनुसार, कोरी साक्षरता या वेद-पुराण पढ़ने से कोई ज्ञानी नहीं होता; सच्चा ज्ञानी वही है जो ईश्वर के प्रेम का एक अक्षर पढ़ ले । वे मनुष्य को स्वयं के अहंकार से बचने की सलाह देते हैं, क्योंकि अहंकार ही मनुष्य का असली शत्रु है । अंत में, वे संदेश देते हैं कि ईश्वर सभी जीवों में समान रूप से विद्यमान है, इसलिए किसी भी आत्मा को कष्ट नहीं देना चाहिए ।


    ४. HSC पद्य आकलन (Poetry Pattern)

    कृति १: पद्यांश आकलन (2 Marks)

    • प्रश्न १: अंतर स्पष्ट कीजिए:

      • माया रस: इसके प्रभाव से कोमल मन पत्थर (पाहण) जैसा कठोर हो जाता है ।

      • राम रस: इसके प्रभाव से पत्थर जैसा हृदय भी मक्खन (माखण) जैसा मुलायम हो जाता है ।


    • प्रश्न २: 'मैं ही मुझको मारता' से क्या तात्पर्य है?

      • उत्तर: इसका तात्पर्य है कि मनुष्य का अपना 'अहंकार' (आपा) ही उसका सबसे बड़ा विनाशक है ।


    • प्रश्न ३: संसार के दो अनमोल रत्न कौन से हैं?

      • उत्तर: (१) स्वयं ईश्वर (साईं) और (२) संतजन ।


    • प्रश्न ४: दादू दयाल के अनुसार सच्चा 'सुजान' (ज्ञानी) कौन है?

      • उत्तर: जो ईश्वर (पीव) के प्रेम का एक अक्षर पढ़ लेता है ।


    • प्रश्न ५: ईश्वर किनकी रक्षा करते हैं?

      • उत्तर: जो पूर्णतः ईश्वर के प्रति समर्पित होते हैं, ईश्वर उनकी रक्षा करते हैं और वे संसार रूपी सागर से तर जाते हैं ।


    कृति २: पद्य विश्लेषण / रसास्वादन (6 Marks) 

    • शीर्षक: भक्ति महिमा

    • रचनाकार: संत दादू दयाल

    • केंद्रीय कल्पना: अहंकार का त्याग कर प्रेमपूर्ण भक्ति द्वारा ईश्वर की प्राप्ति ।

    • रस/अलंकार: शांत रस (Peaceful Sentiment) और अनुप्रास अलंकार ।

    • प्रतीक विधान: 'महल बारीक' हृदय के संकुचित मार्ग का प्रतीक है और 'माखण' कोमलता का ।

    • भाव पक्ष: कवि ने गुरु भक्ति और आत्म-साक्षात्कार पर बल दिया है। वे कहते हैं कि ईश्वर बाहर नहीं, मनुष्य के भीतर ही है ।

    • कला पक्ष: 'साखी' दोहा छंद में लिखी गई है । भाषा सदुक्कड़ी (मिश्रित) है जो लोक-व्यवहार के करीब है ।


    ७. व्याकरण (Grammar Corner with Explanations)


    वाक्य शुद्धिकरण (Sentence Correction): १. अशुद्ध: तूम ने दीपक जेब में क्यों रख लिया? शुद्ध: तुम ने दीपक जेब में क्यों रख लिया? Rule: Fixed spelling of 'Tum' (Short 'u' sound).


    २. अशुद्ध: इसकी काम आएगा। शुद्ध: इसके काम आएगा। Rule: Correct use of possessive pronoun case.


    ३. अशुद्ध: तुम जूठे साबित होगा। शुद्ध: तुम झूठे साबित होगे। Rule: Spelling of 'jhoothe' (lying) and verb agreement.


    ४. अशुद्ध: उसे तुम्हारी शक्ती पर विश्वास हो गया। शुद्ध: उसे तुम्हारी शक्ति पर विश्वास हो गया। Rule: Correct spelling of 'Shakti' (Short 'i' sound).


    ८. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न


    प्रश्न १: 'अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है', इस उक्ति पर अपने विचार स्पष्ट कीजिए। 

    उत्तर: अहंकार मनुष्य की बुद्धि को भ्रमित कर देता है। संत दादू कहते हैं कि जब तक मन में 'मैं' का भाव रहता है, तब तक ईश्वर (राम) का वास नहीं हो सकता । अहंकार मनुष्य को अपनों से दूर कर देता है और पतन का कारण बनता है।


    प्रश्न २: निर्गुण शाखा के किन्हीं दो संत कवियों के नाम लिखिए। 

    उत्तर: (१) संत कबीर (२) संत दादू दयाल ।


    प्रश्न ३: संत दादू के साहित्यिक जीवन का मुख्य लक्ष्य क्या था? 

    उत्तर: समाज में व्याप्त कुरीतियों, अंधविश्वासों का विरोध करना और सत्य व ज्ञान का मार्ग दिखाना ।


    प्रश्न ४: "साईं है सब माहिं" पंक्ति का भावार्थ स्पष्ट कीजिए। 

    उत्तर: इसका अर्थ है कि ईश्वर प्रत्येक जीव की आत्मा में निवास करता है। अतः हमें किसी को भी दुख नहीं देना चाहिए क्योंकि सबमें एक ही आत्मा है ।


    प्रश्न ५: 'साखी' विधा से क्या तात्पर्य है? 

    उत्तर: साखी शब्द 'साक्षी' का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ है प्रत्यक्ष ज्ञान । यह प्रायः दोहा छंद में लिखी जाती है और नीति व ज्ञान का उपदेश देती है ।


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