5.2. मध्ययुगीन काव्य: (आ) बाल लीला - Bal Leela - Class 11 - Yuvakbharati
- Apr 14
- 5 min read
Updated: Apr 19

कवि: संत सूरदास | विधा: पद
१. शब्दार्थ और मुहावरे (Glossary with English Context)
क. शब्दार्थ (Word Meanings)
शब्द (Word) | अर्थ (Hindi) | अर्थ (English Context) |
बोधति | समझाती है | Explains / Persuades |
कलेऊ | जलपान / नाश्ता | Breakfast / Morning meal |
बासन | पात्र / बर्तन | Vessel / Utensil |
सफरी | अमरूद | Guava |
सँधानौं | अचार | Pickle |
पिराक | गुझिया जैसा एक पकवान | A sweet dumpling-like dish |
पनवारौ | पान खिलाई | Serving betel leaf |
खुबानी | जरदालू | Apricot |
जी जै | जी रही हूँ | I am living |
नैंकु | तनिक भी / थोड़ा भी | Not even a little |
ख. मुहावरे (Idioms)
मुहावरा (Idiom) | अर्थ (Meaning) | वाक्य प्रयोग (Sentence Usage) |
बलिहारी जाना | न्योछावर होना | बाल कृष्ण की मनमोहक छबि देखकर माता यशोदा उन पर बलिहारी जाती हैं । |
आँखों का तारा | बहुत प्यारा होना | हर बच्चा अपनी माँ की आँखों का तारा होता है। |
टस-से-मस न होना | अपनी जिद पर अड़े रहना | चाँद पाने की जिद पर अड़े कृष्ण अपनी जगह से टस-से-मस नहीं हो रहे थे । |
हाथ बँटाना | मदद करना | माता यशोदा कृष्ण की हर इच्छा पूरी करने में अपनी ममता से हाथ बँटाती हैं । |
हृदय से लगाना | बहुत प्रेम करना | यशोदा जी कृष्ण को दुलारते हुए उन्हें अपने हृदय से लगा लेती हैं । |
२. परिचय और सारांश (Introduction & Summary)
कवि परिचय: संत सूरदास का जन्म १४७८ में दिल्ली के पास 'सीही' नामक गाँव में हुआ । आपके गुरु वल्लभाचार्य थे । आप सगुण भक्ति काव्य धारा के ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाओं में वात्सल्य और सख्य भाव का सजीव चित्रण मिलता है । आपकी मृत्यु १५८० में हुई ।
केंद्रीय भाव (Central Idea - Bilingual):
हिन्दी: इन पदों में बाल कृष्ण की बाल सुलभ जिद (चाँद पाने की इच्छा) और माता यशोदा की ममतामयी चतुरता का सुंदर वर्णन है ।
English: These verses beautifully depict young Krishna's childhood stubbornness (his desire for the moon) and Mother Yashoda's loving ingenuity in comforting him.
सारांश (Summary): प्रस्तुत पदों में संत सूरदास ने बाल कृष्ण के बाल हठ और माता यशोदा के वात्सल्य का अनूठा वर्णन किया है । प्रथम पद में बाल कृष्ण चंद्रमा को पाने की जिद करते हैं । माता यशोदा उन्हें बहलाने के लिए जल से भरा पात्र (बासन) जमीन पर रखती हैं और उसमें चाँद की परछाई दिखाकर कृष्ण को शांत करती हैं । परछाई देखकर कृष्ण मुस्कुराने लगते हैं और माँ उन पर बलिहारी जाती हैं ।
द्वितीय पद में माता यशोदा कृष्ण को सुबह के कलेवा (नाश्ते) के लिए मना रही हैं । वे उनके सामने उनकी पसंद के विभिन्न पकवान जैसे घेवर, फेनी, लड्डू, दही, पुरी और अचार रखती हैं । वे विभिन्न फलों जैसे आम, केला, अमरूद और खुबानी का भी उल्लेख करती हैं । माँ यशोदा चाहती हैं कि उनका लाल भरपेट भोजन करे और अंत में उन्हें पान खिलाकर तृप्त करें ।
४. HSC पद्य आकलन (Poetry Pattern)
कृति १: पद्यांश आकलन (2 Marks)
प्रश्न १: यशोदा कृष्ण को चाँद के पास आने के लिए क्या प्रलोभन देती हैं?
उत्तर: वे चाँद से कहती हैं कि कृष्ण तुम्हें मधु, मेवा, पकवान और मिठाई खिलाएगा ।
प्रश्न २: माता यशोदा कृष्ण को चाँद किस प्रकार पकड़कर दिखाती हैं?
उत्तर: वे जल से भरा पात्र (जल-बासन) धरती पर रखकर उसमें चाँद की छबि दिखाती हैं ।
प्रश्न ३: दूसरे पद में वर्णित किन्हीं चार व्यंजनों के नाम लिखिए।
उत्तर: (१) घेवर (२) फेनी (३) पुरी (४) लड्डू ।
प्रश्न ४: माता यशोदा कृष्ण के लिए कौन-कौन से फल लाती हैं?
उत्तर: केला, आम, अमरूद (सफरी) और खुबानी ।
प्रश्न ५: कृष्ण के हँसने पर उनकी क्या प्रतिक्रिया होती है?
उत्तर: वे हँसकर मुस्कुराते हैं और बार-बार अपने दोनों हाथ हिलाते हैं ।
कृति २: पद्य विश्लेषण / रसास्वादन (6 Marks)
शीर्षक: बाल लीला
रचनाकार: संत सूरदास
केंद्रीय कल्पना: माता यशोदा की ममता और बाल कृष्ण की मनोहारी चेष्टाओं का वात्सल्यपूर्ण चित्रण ।
रस/अलंकार: वात्सल्य रस (Paternal/Maternal Affection) ।
प्रतीक विधान: 'चाँद' यहाँ बालक की अप्राप्य इच्छा का प्रतीक है, जिसे माँ अपनी बुद्धिमानी से 'जल-बासन' में साकार कर देती है ।
भाव पक्ष: पदों में माता के हृदय की उस व्याकुलता को दिखाया गया है जहाँ वह अपने पुत्र की हर इच्छा पूरी करना चाहती है ।
कला पक्ष: 'ब्रजभाषा' का प्रयोग हुआ है। पद गेय शैली में हैं जिनमें लय और संगीतात्मकता है ।
७. व्याकरण (Grammar Corner with Explanations)
रस (Ras): १. वात्सल्य रस: "जसोदा हरि पालनैं झुलावै । हलरावे दुलराइ मल्हावै..." Concept: Expresses affection towards children or younger ones.
२. हास्य रस: "मैं ऐसा शूर वीर हूँ, पापड़ तोड़ सकता हूँ । अगर गुस्सा आ जाए तो कागज मरोड़ सकता हूँ ।।" Concept: Created through strange behavior, speech, or appearance that causes laughter.
वाक्य शुद्धिकरण (Sentence Correction):
१. अशुद्ध: उसे तो मछुवे पर दया करना चाहिए था ।
शुद्ध: उसे तो मछुआरे पर दया करनी चाहिए थी ।
Rule: Correct gender agreement for 'daya' (feminine).
२. अशुद्ध: बाबु साहब ईश्वर के लिए मुझ पे दया कीजिए ।
शुद्ध: बाबू साहब, ईश्वर के लिए मुझ पर दया कीजिए ।
Rule: Fixed spelling of 'Babu' and 'par'.
८. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न
प्रश्न १: 'माँ ममता का सागर होती है', इस उक्ति को सूर के पदों के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: सूरदास के पदों में यशोदा कृष्ण की हर छोटी जिद को पूरा करने के लिए व्याकुल रहती हैं । वे चाँद को जमीन पर उतारने का जतन करती हैं और कृष्ण को रिझाने के लिए ढेरों पकवान बनाती हैं । यह निस्वार्थ ममता का चरमोत्कर्ष है ।
प्रश्न २: संत सूरदास के प्रमुख ग्रंथों के नाम लिखिए।
उत्तर: 'सूरसागर', 'सूरसारावली' और 'साहित्यलहरी' ।
प्रश्न ३: 'हास्य रस' की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर: जब काव्य में किसी की विचित्र वेशभूषा या व्यवहार को देखकर हास का भाव उत्पन्न हो, वहाँ हास्य रस होता है । उदाहरण: काका हाथरसी का तंबुरा वाला पद ।
प्रश्न ४: यशोदा कृष्ण को 'कलेवा' (नाश्ता) कराने के लिए क्या-क्या मनुहार करती हैं?
उत्तर: वे कृष्ण को दुलारते हुए उनके सामने विभिन्न फल (केला, आम) और पकवान (घेवर, लड्डू) रखती हैं और उन्हें खाने का आग्रह करती हैं ।
प्रश्न ५: 'पद' काव्य प्रकार की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: पद एक गेय शैली है जिसका उपयोग भक्ति भावना की अभिव्यक्ति के लिए किया जाता है । इसकी जड़ें लोकगीतों में मिलती हैं ।
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