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    5.2. वृंद के दोहे - Vrind Ke Dohe - Class 12 - Yuvakbharati

    • Apr 22
    • 4 min read

    Updated: Apr 25

    कवि: वृंद | विधा: दोहा

    १. शब्दार्थ और मुहावरे (Glossary with English Context)


    क. शब्दार्थ (Word Meanings)


    शब्द

    अर्थ (Hindi)

    अर्थ (English Context)

    सरसुति

    सरस्वती (विद्या की देवी)

    Goddess of Knowledge

    सौर

    चादर

    Bedspread/Sheet

    वायस

    कौआ

    Crow

    उद्यम

    प्रयत्न/परिश्रम

    Effort/Hard work

    पयोद

    बादल

    Cloud

    निबौरी

    नीम का फल

    Neem fruit

    अकारज

    हानिकारक कार्य/बिगाड़

    Harmful act

    आरसी

    आईना/दर्पण

    Mirror

    काठ

    लकड़ी

    Wood

    हिय

    हृदय/मन

    Heart/Mind

    २. परिचय और सारांश (Introduction & Summary)


    कवि परिचय: कवि वृंद (१६४३-१७२३) रीतिकालीन परंपरा के नीतिपरक कवि हैं । आपका पूरा नाम 'वृंदावनदास' है और आपकी भाषा में ब्रज व अवधी का सुंदर मिश्रण मिलता है ।


    केंद्रीय भाव (Central Idea):

    • हिन्दी: कवि वृंद ने इन दोहों के माध्यम से लोक-व्यवहार, नीति और व्यावहारिक अनुभवों की सीख दी है ।


    • English: Through these couplets, Poet Vrind provides lessons on public conduct, ethics, and practical life experiences .


    सारांश (Summary):  वृंद जी के दोहे जीवन का सच्चा मार्ग दिखाते हैं। वे कहते हैं कि सरस्वती का ज्ञान खर्च करने से बढ़ता है और आँखें मन के सच-झूठ का दर्पण होती हैं । मनुष्य को अपनी सामर्थ्य (चादर) के अनुसार ही कार्य करना चाहिए और व्यवहार में कभी कपट नहीं करना चाहिए क्योंकि छल बार-बार नहीं चलता । बिना गुणों के केवल ऊँचे पद पर बैठने से बड़प्पन नहीं मिलता, ठीक वैसे ही जैसे मंदिर के शिखर पर बैठने से कौआ गरुड़ नहीं बन जाता । कवि दुष्टों से दूर रहने और अपनी क्षमता को पहचानकर स्वावलंबी बनने की प्रेरणा देते हैं


    ४. HSC पद्य आकलन (Poetry Pattern)


    कृति १: पद्यांश आकलन (2 Marks) 


    • प्रश्न १: कारण लिखिए: सरस्वती के भंडार को 'अपूर्व' कहा गया है क्योंकि -

      उत्तर: यह खर्च करने पर बढ़ता है और न खर्च करने पर घट जाता है ।


    • प्रश्न २: सहसंबंध जोड़िए: १. ऊँचे बैठे ना लहैं -> गुन बिन बड़पन कोइ  २. बैठो देवल सिखर पर -> वायस गरुड़ न होइ  ३. कोकिल अंबहि लेत है -> काग निबौरी लेत 


    • प्रश्न ३: कपट का व्यापार दूसरी बार नहीं चलता क्योंकि -

      उत्तर: जैसे काठ (लकड़ी) की हाँड़ी आग पर दूसरी बार नहीं चढ़ती ।


    कृति २: पद्य विश्लेषण / रसास्वादन (6 Marks) 


    • शीर्षक: वृंद के दोहे।

    • रचनाकार: वृंद।

    • केंद्रीय कल्पना: व्यावहारिक नीति और लोक-व्यवहार की शिक्षा।

    • रस/अलंकार: इसमें 'शांत रस' की प्रधानता है। कवि ने 'दृष्टांत अलंकार' का प्रचुर प्रयोग किया है, जिससे कथ्य प्रभावोत्पादक बन गया है ।


    • प्रतीक विधान: 'काठ की हाँड़ी' कपट का, 'कौआ' गुणहीन व्यक्ति का और 'कोयल' गुणी व्यक्ति का प्रतीक है ।


    • भाव पक्ष: दोहे पाठकों को यथार्थ और वास्तविकता से परिचित कराते हैं। "तेते पाँव पसारिए, जेती लाँबी सौर" जैसी पंक्तियाँ आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं ।


    • कला पक्ष: यह 'दोहा' छंद में है जो एक अर्धसम मात्रिक छंद है । इसकी भाषा सरल और जनसाधारण की भाषा है।


    कृति ३: लघूत्तरी प्रश्न (2 Marks)

    • प्रश्न १: दोहा छंद की विशेषताएँ लिखिए।

      उत्तर: दोहा अर्धसम मात्रिक छंद है। इसके चार चरण होते हैं। प्रथम और तृतीय चरण में १३-१३ मात्राएँ तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में ११-११ मात्राएँ होती हैं ।


    ७. व्याकरण (Grammar Corner)


    अलंकार (Figures of Speech): 


    • १. रूपक (Metaphor): जहाँ उपमेय और उपमान को एकरूप मान लिया जाए ।

      • उदाहरण: "पायो जी मैंने राम रतन धन पायो" ।

      • Concept: Direct identification without 'like' or 'as'.


    • २. उपमा (Simile): जहाँ दो वस्तुओं की तुलना रंग, रूप या गुण के आधार पर की जाए ।

      • उदाहरण: "पीपर पात सरस मन डोला" ।

      • Concept: Comparison using words like 'sa', 'se', 'si', 'sam'.


    विलोम शब्द (Antonyms): 


    • १. आदर × अनादर

    • २. अस्त × उदय

    • ३. कपूत × सपूत

    • ४. पतन × उत्थान


    ८. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न

    • प्रश्न १: वृंद जी की किन्हीं चार रचनाओं के नाम लिखिए।

      उत्तर: १. वृंद सतसई २. यमक सतसई ३. भाव पंचाशिका ४. पवन पचीसी ।


    • प्रश्न २: "होनहार बिरवान के होत चीकने पात" लोकोक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

      उत्तर: इसका अर्थ है कि योग्य और प्रतिभाशाली व्यक्ति के लक्षण बचपन से ही दिखाई देने लगते हैं ।


    • प्रश्न ३: नीच व्यक्ति से क्यों नहीं उलझना चाहिए?

      उत्तर: क्योंकि उससे उलझने पर कीचड़ में पत्थर फेंकने के समान गंदगी हमारे ही शरीर पर आती है ।


    • प्रश्न ४: विद्या रूपी धन की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?

      उत्तर: इसकी विशेषता यह है कि इसे जितना अधिक खर्च (बाँटा) किया जाए, यह उतना ही बढ़ता है ।


    • प्रश्न ५: 'आरसी' (दर्पण) का उदाहरण कवि ने किस संदर्भ में दिया है?

      उत्तर: जिस प्रकार निर्मल दर्पण अच्छी-बुरी वस्तु को स्पष्ट दिखा देता है, वैसे ही हमारी आँखें हृदय के हित और अहित (सच-झूठ) को व्यक्त कर देती हैं ।

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