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    7. स्वागत है ! - Swagat Hai! - Class 11 - Yuvakbharati

    • 14 hours ago
    • 5 min read

    कवि: शाम दानीश्वर | विधा: प्रवासी भारतीय हिंदी साहित्य (कविता)


    १. शब्दार्थ और मुहावरे (Glossary with English Context)

    क. शब्दार्थ (Word Meanings)

    शब्द (Word)

    अर्थ (Hindi)

    अर्थ (English Context)

    लंगर

    जहाज खड़ा करने का भारी काँटा

    Anchor


    नैहर

    मायका

    Maternal Home


    बाबुल

    पिता

    Father


    प्रणयन

    ले जाना / रचना

    Conveying / Composition


    सहोदर

    एक ही माँ के बालक

    Real siblings / From the same womb


    प्रारब्ध

    भाग्य / नसीब

    Destiny / Fate


    पंक

    कीचड़

    Mud / Mire


    पंकज

    कमल

    Lotus


    गिरमिटिया

    अनुबंध पर गए मजदूर

    Indentured laborer


    प्रांगण

    आँगन

    Courtyard


    ख. मुहावरे (Idioms)

    मुहावरा (Idiom)

    अर्थ (Meaning)

    वाक्य प्रयोग (Sentence Usage)

    हक्का-बक्का रह जाना

    चकित रह जाना

    जब गिरमिटिये समुद्र तट पर पहुँचे, तो वे वहाँ की अनजान स्थिति देखकर हक्का-बक्का रह गए  ।


    हृदय के टुकड़े

    बहुत प्रिय होना

    कवि ने मॉरिशस आने वाले प्रवासी भारतीयों को अपने हृदय के टुकड़े कहकर संबोधित किया है  ।


    पत्थर में प्राण डालना

    असंभव को संभव करना

    गिरमिटियों ने अपनी कड़ी मेहनत से मॉरिशस की बंजर धरती और पत्थर में प्राण डाल दिए  ।


    जिगरछाप होना

    अमिट छाप होना

    गिरमिटियों के लिए उनका अनुबंध (परमीट) ही उनकी जिगरछाप थी  ।


    आँखों का तारा

    अत्यंत प्यारा

    प्रवासी भारतीय अपनी मातृभूमि और संस्कृति के लिए हमेशा आँखों का तारा बने रहते हैं  ।


    २. परिचय और सारांश (Introduction & Summary)

    कवि परिचय: शाम दानीश्वर (१९४३-२००६) मॉरिशस के एक प्रमुख प्रवासी हिंदी कवि थे  । अध्यापक के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने गुलामी का दंश, परिजनों से विछोह और प्रवासी भारतीयों की पीड़ा को अपने काव्य में संवेदना के साथ उभारा है  ।


    केंद्रीय भाव (Central Idea - Bilingual):

    • हिन्दी: कवि दुनिया भर में बिखरे हुए भारतीय भाइयों को पुरानी दुखद यादें भुलाकर 'लघु भारत' (मॉरिशस) की पावन भूमि पर आने का न्योता दे रहे हैं  ।


    • English: The poet invites the Indian diaspora scattered across the world to forget their painful past and welcome them to the sacred land of Mauritius, referred to as 'Mini India'.


    सारांश (Summary): कविता 'स्वागत है' में शाम दानीश्वर जी ने उन गिरमिटिया मजदूरों के वंशजों का आवाहन किया है जो युगों पहले जहाजों के माध्यम से विभिन्न देशों में बिखर गए थे  । कवि कहते हैं कि हम सब एक ही माँ के बालक और 'जहाजिया भाई' हैं, जिनका प्रारब्ध उन्हें अलग-अलग समुद्री तटों पर ले गया  ।


    वे संदेश देते हैं कि अब उस दुखद इतिहास और गुलामी के दिनों को भूल जाने का समय आ गया है  । आज मॉरिशस एक 'नैहर' के समान है जहाँ बिछड़े हुए भाई-बंधु पुनः मिल सकते हैं  । कवि गर्व से बताते हैं कि कैसे गिरमिटियों ने अपनी मेहनत से घास और पत्थरों में प्राण फूँककर इस भूमि को 'हिंद महासागर का स्वर्ग' बना दिया  । यह कविता विश्वबंधुत्व की भावना जगाती है और सभी प्रवासी भारतीयों का सप्रेम स्वागत करती है  ।


    ४. HSC पद्य आकलन (Poetry Pattern)

    कृति १: पद्यांश आकलन (2 Marks)

    • प्रश्न १: कवि ने प्रवासी भारतीयों को किन-किन नामों से संबोधित किया है?

      • उत्तर: (१) बिखरे हुए परम दोस्त  (२) जहाजिया भाई  (३) हृदय के टुकड़े  (४) सहोदर बंधु  ।


    • प्रश्न २: गिरमिटियों ने अपनी मेहनत से मॉरिशस में क्या परिवर्तन किया?

      • उत्तर: उन्होंने घास और पत्थरों वाली बंजर भूमि में अपनी मेहनत से प्राण डाल दिए  ।


    • प्रश्न ३: 'डर' का भाव व्यक्त करने वाली परिस्थिति क्या है?

      • उत्तर: पनिया-जहाज पर चढ़ने से डर लगता है कि कहीं इतिहास पुनः दोहरा न दिया जाए और हम फिर से बिखर न जाएँ  ।


    • प्रश्न ४: मॉरिशस को 'लघु भारत' क्यों कहा गया है?

      • उत्तर: क्योंकि यहाँ विभिन्न देशों से आए भारतीय मूल के लोग अपनी संस्कृति और संस्कारों के साथ मिल-जुलकर रहते हैं  ।


    • प्रश्न ५: कवि ने किन देशों के प्रवासी भारतीयों का स्वागत किया है?

      • उत्तर: भारत, नेपाल, श्रीलंका, फीजी, सूरीनाम, साऊथ अफ्रीका, यूके, यूएसए, फ्रांस आदि  ।


    कृति २: पद्य विश्लेषण / रसास्वादन (6 Marks)

    • शीर्षक: स्वागत है !


    • रचनाकार: शाम दानीश्वर


    • केंद्रीय कल्पना: गिरमिटियों की पीड़ा को भुलाकर पुनः मिलन और मॉरिशस की पावन भूमि का गुणगान  


    • रस/अलंकार: करुण रस (विगत पीड़ा के लिए) और वीर रस (नवनिर्माण के लिए); अनुप्रास अलंकार  ।


    • प्रतीक विधान: 'पंकज' संघर्ष से उपजी सफलता का प्रतीक है और 'नैहर' अपनेपन का प्रतीक है  ।


    • भाव पक्ष: कवि ने प्रवासी भारतीयों की पीड़ा और उनकी सृजनात्मक शक्ति को अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है  ।


    • कला पक्ष: सरल और प्रवाहमयी भाषा का प्रयोग किया गया है । 'जहाजिया भाई' जैसे शब्दों से आत्मीयता का भाव प्रकट होता है  ।


    ७. व्याकरण (Grammar Corner with Explanations)


    अलंकार (Alankar): १. अनुप्रास अलंकार: "चारु चंद्र की चंचल किरणें, खेल रही थीं जल-थल में ।" Concept: Repetition of a character (वर्ण) two or more times. 


    २. वक्रोक्ति अलंकार: "घनश्याम हौं, तौ कितहू बरसो ।" Concept: When the listener takes a different meaning of the speaker's statement intentionally for humor or effect. 


    शब्द भेद: १. 'मारीच' से बना शब्द: मॉरिशस  । २. 'दासता' के कीचड़ से निकलकर क्या बने: पंकज  ।


    ८. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न

    प्रश्न १: 'प्रवासी भारतीय हिंदी साहित्य' की दो विशेषताएँ लिखिए ।


    उत्तर: (१) इसमें भारतीयता, नीति-मूल्य और संस्कृति को सुरक्षित रखा जाता है  । (२) यह विदेशी भूमि पर रहने वाले भारतीयों के संघर्ष और स्मृतियों को व्यक्त करता है  ।


    प्रश्न २: कवि ने मॉरिशस को 'हिंद महासागर का स्वर्ग' क्यों कहा है?


    उत्तर: क्योंकि गिरमिटियों ने अपनी कड़ी मेहनत और खून-पसीने से इस बंजर भूमि को उपजाऊ और सुंदर बनाकर स्वर्ग जैसा रूप दे दिया है  ।


    प्रश्न ३: "पत्थर में प्राण हमने डाले" पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए ।


    उत्तर: इसका अर्थ है कि अत्यंत कठिन परिस्थितियों और संसाधनों के अभाव में भी गिरमिटिया मजदूरों ने अपनी अदम्य इच्छाशक्ति से असंभव कार्य को संभव कर दिखाया  ।


    प्रश्न ४: मातृभूमि की महत्ता पर अपने विचार लिखिए । उत्तर: मातृभूमि मनुष्य की पहचान होती है । प्रवासी होने के बावजूद भारतीय अपनी जड़ों (संस्कारों) से जुड़े रहते हैं, जो उन्हें हर मुश्किल में शक्ति प्रदान करता है  


    प्रश्न ५: 'गिरमिटिया' किसे कहा जाता है?


    उत्तर: अंग्रेजों द्वारा अनुबंध (परमीट) के आधार पर मजदूरी करने के लिए विदेशों में भेजे गए भारतीयों को 'गिरमिटिया' कहा जाता है  ।

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