top of page

    8. भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है? - Bharatvarsh ki Unnati Kaise Ho Sakti Hai? - Class 11 - Antra 1

    • Feb 20
    • 4 min read

    लेखक: भारतेंदु हरिश्चंद्र


    1. लेखक परिचय (Literary Profile)


    • साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): भारतेंदु हरिश्चंद्र को 'आधुनिक हिंदी साहित्य का पितामह' कहा जाता है। वे हिंदी पुनर्जागरण के अग्रदूत थे। उन्होंने कविता, नाटक, निबंध और पत्रकारिता के माध्यम से देश में राष्ट्रीय चेतना और सुधारवादी दृष्टिकोण का विकास किया। उनकी शैली में ओज, व्यंग्य और लोक-कल्याण का स्वर प्रधान है।

    • प्रमुख रचनाएँ (Key Works): भारत दुर्दशा, अंधेर नगरी, नील देवी (नाटक); कविवचनसुधा, हरिश्चंद्र मैगजीन (पत्रिका संपादन)।

    • संदर्भ: प्रस्तुत पाठ दिसंबर 1884 में बलिया के ददरी मेले के अवसर पर दिया गया एक प्रसिद्ध भाषण (Speech) है। यह भारतीयों को उनकी जड़ता त्यागने और उन्नति के मार्ग पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करता है।

    2. पाठ का सार (Executive Summary)


    • प्रतिपाद्य (Central Theme): लेखक ने भारतीयों की आलसी प्रवृत्ति और 'पिछड़ेपन' पर गहरा कटाक्ष करते हुए देश की सर्वांगीण उन्नति के उपाय बताए हैं। उन्होंने शिक्षा, उद्योग, आत्मनिर्भरता और एकता को प्रगति का मूल मंत्र माना है।

    • English Summary: 'Bharatvarsh Ki Unnati Kaise Ho Sakti Hai' is a historic speech by Bhartendu Harishchandra delivered in 1884. He critiques the laziness and lack of initiative among Indians, comparing them to a 'train engine' that remains stationary without steam. He urges the youth to abandon internal differences, focus on indigenous industries, promote local language, and unite for the socio-economic upliftment of the nation.

    • Key Points:

      • भारतीयों की तुलना 'रेलगाड़ी के डिब्बों' से करना: भारतीयों में प्रतिभा है पर उन्हें चलाने वाला 'इंजन' (नेतृत्व और उत्साह) गायब है।

      • समय का महत्व: दुनिया तेज़ी से प्रगति कर रही है और भारतीय अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहे हैं।

      • आत्मनिर्भरता का आह्वान: हम छोटी-छोटी चीजों (दियासलाई, सुई) के लिए भी विदेशों पर निर्भर हैं, जिसे बदलना होगा।

      • सामाजिक कुरीतियों का त्याग: जात-पात और धर्म के नाम पर आपसी झगड़े छोड़कर देशहित में एक होने की आवश्यकता।

      • अपनी भाषा (मातृभाषा) में उन्नति करने पर बल।

    3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)

    शब्द

    हिंदी अर्थ

    English Context

    गनीमत

    संतोषजनक / सौभाग्य

    Good fortune

    निकम्मेपन

    आलस / अकर्मण्यता

    Idleness / Laziness

    मस्करी

    मज़ाक / ठिठोली

    Jest / Joking

    अनुमोदन

    समर्थन / सहमति

    Approval / Endorsement

    कुटुंबी

    परिवार का सदस्य

    Family member

    4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)


    • मूल संवेदना (Core Sentiment): देशभक्ति और आत्म-चिंतन। लेखक भारतीयों को उनकी महान विरासत की याद दिलाते हुए वर्तमान की दयनीय स्थिति पर लज्जित होने और जागने को कहते हैं।

    • व्यंग्य का प्रयोग: लेखक ने भारतीयों के 'आलस' पर तीखा व्यंग्य किया है—"यहाँ के लोगों को तो निकम्मेपन ने घेर रखा है।"

    • उपमा और उदाहरण: रेलगाड़ी के डिब्बों, हनुमान जी की शक्ति को भूलने और 'परदेसी' चीजों पर निर्भरता के उदाहरण पाठ को प्रभावशाली बनाते हैं।

    5. गद्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)


    Extract 1: "जैसे हज़ार धारा होकर गंगा समुद्र में मिली हैं, वैसे ही तुम्हारी लक्ष्मी हज़ार तरह से इंग्लैंड, फरांसीस, जर्मनी, अमेरिका को जाती हैं।"

    1. Interpretation: लेखक ने 'लक्ष्मी के विदेश जाने' की तुलना गंगा से क्यों की है? (उत्तर: यह बताने के लिए कि हमारे देश का धन निरंतर और बड़ी मात्रा में विदेशों में जा रहा है)।

    2. Author's Intent: इस आर्थिक शोषण का मुख्य कारण लेखक ने क्या बताया? (उत्तर: भारतीयों का आत्मनिर्भर न होना और विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता)।

    3. Inference: भारत की उन्नति के लिए लेखक ने सबसे पहला कदम क्या बताया? (उत्तर: आलस्य का त्याग और स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग)।

    6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)


    • 1. भारतेंदु ने भारतीयों की तुलना रेलगाड़ी के डिब्बों से क्यों की है?

      • उत्तर: रेलगाड़ी के डिब्बे बहुत अच्छे और कीमती हो सकते हैं, लेकिन वे बिना इंजन के एक कदम भी नहीं चल सकते। उसी प्रकार भारतीयों में अपार शक्ति और बुद्धि है, लेकिन उन्हें सही दिशा दिखाने वाले नेतृत्व और प्रेरणा (इंजन) की कमी है।


    • 2. 'अपने देश में अपनी भाषा में उन्नति करो'—लेखक का इससे क्या तात्पर्य है?

      • उत्तर: लेखक का मानना है कि वास्तविक विकास तभी संभव है जब शिक्षा और व्यापार हमारी अपनी भाषा में हो। विदेशी भाषा और संस्कृति को अपनाकर हम अपनी जड़ों से कट जाते हैं और मौलिक सोच खो देते हैं।


    • 3. लेखक जनता से 'मत-मतांतर' छोड़कर आपसी प्रेम बढ़ाने का आग्रह क्यों करता है?

      • उत्तर: क्योंकि धर्म और संप्रदाय के नाम पर होने वाले झगड़े देश की शक्ति को कम करते हैं। उन्नति के लिए सभी धर्मों और वर्गों के लोगों का एक उद्देश्य (देशहित) के लिए मिलकर काम करना अनिवार्य है।

    7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)


    • Topic: "21वीं सदी का भारत: भारतेंदु के सपनों की कसौटी पर"

    • Key Points:

      • डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बढ़ते कदम।

      • वर्तमान समय में शिक्षा और कौशल विकास का महत्व।

      • आज भी मौजूद सामाजिक चुनौतियाँ (जातिवाद और भ्रष्टाचार)।

    8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)


    • "निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।"

    • "अभागे आलसी देश में जो कुछ हो जाए वही बहुत है।" (तीखा व्यंग्य)।

    • "परदेसी वस्तु और परदेसी भाषा का भरोसा मत रखो।"

    9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)


    • Spelling: 'गनीमत', 'पुनर्जागरण' और 'आत्मनिर्भरता' की वर्तनी पर ध्यान दें।

    • Conceptual: यह न समझें कि लेखक 'विदेशी' चीजों से नफरत करते थे; वे वास्तव में भारतीयों की पराधीनता और आलस्य के विरोधी थे।

    10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)


    1. Short Answer (2 marks): भाषण के रूप में इस पाठ की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

      • Model Answer: 1. संबोधन शैली: "भाइयों!", "सज्जनों!" जैसे शब्दों का प्रयोग कर सीधे श्रोताओं से जुड़ना। 2. प्रेरक भाषा: श्रोताओं में जोश और देश-प्रेम की भावना जगाने वाली ओजस्वी भाषा।


    2. Long Answer (5 marks): भारतेंदु हरिश्चंद्र ने देश की उन्नति के लिए कौन-कौन से ठोस उपाय सुझाए हैं?

      • Model Answer: लेखक ने निम्नलिखित उपाय सुझाए हैं: 1. आलस्य का पूर्ण त्याग करना। 2. शिक्षा का व्यापक प्रसार करना, विशेषकर तकनीकी शिक्षा। 3. स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देना ताकि देश का धन बाहर न जाए। 4. अपनी भाषा (मातृभाषा) का गौरव बढ़ाना। 5. आपसी भेदभाव और पुरानी रूढ़ियों को छोड़कर एकता के सूत्र में बँधना।


    About BhashaLab


    BhashaLab is a dynamic platform dedicated to the exploration and mastery of languages - operating both online and offline. Aligned with the National Education Policy (NEP) 2020 and the National Credit Framework (NCrF), we offer language education that emphasizes measurable learning outcomes and recognized, transferable credits.


    We offer:

    1. NEP alligned offline language courses for degree colleges - English, Sanskrit, Marathi and Hindi

    2. NEP alligned offline language courses for schools - English, Sanskrit, Marathi and Hindi

    3. Std VIII, IX and X - English and Sanskrit Curriculum Tuitions - All boards

    4. International English Olympiad Tuitions - All classes

    5. Basic and Advanced English Grammar - Offline and Online - Class 3 and above

    6. English Communication Skills for working professionals, adults and students - Offline and Online


    Contact: +91 86577 20901, +91 97021 12044


     
     
     

    Recent Posts

    See All

    Comments


    bottom of page