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    1.4. दोहावली - (Dohavali) - Class 9 - पद्य-खंड - Rajeev Prakashan

    • 1 day ago
    • 7 min read

    1. पाठ का प्रकार: पद्य लेखक का नाम: रहीम (अब्दुर्रहीम खाँ 'खानखाना') विधा: दोहा


    परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)

    विषय

    विवरण

    लेखक

    अब्दुर्रहीम खाँ 'खानखाना'

    जन्म वर्ष

    सन् 1556 ई.

    पाठ की विधा

    दोहा

    पाठ्यपुस्तक

    पद्य-खंड, कक्षा 9

    सबसे प्रसिद्ध पंक्ति

    "रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरेउ चटकाय।"

    पाठ का केंद्रीय विषय

    नीति, लोक-व्यवहार और जीवन की सीख

    सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न

    रहीम के अनुसार 'सच्चे मित्र' और 'सज्जन व्यक्ति' की क्या पहचान है?

    1. लेखक परिचय (Author Introduction)


    जन्म एवं स्थान: रहीम का जन्म सन् 1556 ई. में लाहौर में हुआ था। पिता एवं पालन-पोषण: वे अकबर के संरक्षक बैरम खाँ के पुत्र थे। पिता की मृत्यु के बाद अकबर ने स्वयं उनका पालन-पोषण किया और उन्हें 'खानखाना' की उपाधि दी। जीवन संघर्ष: रहीम का आरंभिक जीवन बहुत सम्मानित रहा, किंतु अंतिम समय अभाव और अकेलेपन में बीता। उनके काव्य में इन्हीं अनुभवों का यथार्थ झलकता है। मित्रता एवं प्रभाव: रामभक्त कवि तुलसीदास से उनकी गहरी मित्रता थी। माना जाता है कि रहीम की प्रेरणा से ही तुलसीदास ने 'बरवै रामायण' लिखी थी। भाषा-शैली: रहीम अरबी, तुर्की, फारसी, संस्कृत, ब्रज, अवधी और खड़ी बोली के ज्ञाता थे। उनके काव्य में शाब्दिक बनावटीपन नहीं है; वे उदाहरणों के माध्यम से बात को सहज बनाते हैं। निधन: सन् 1626 ई. में उनका देहांत हुआ। प्रमुख रचनाएँ:

    • दोहावली (लगभग 300 दोहे)

    • नगर शोभा

    • बरवै नायिका भेद

    • मदनाष्टक

    परीक्षक की दृष्टि से: रहीम के नीतिपरक दोहों पर संस्कृत की सूक्ति परंपरा का गहरा प्रभाव है। उनके दोहे केवल उपदेश नहीं, बल्कि जीवन के सच्चे अनुभवों का निचोड़ हैं।

    2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)

    हिन्दी: रहीम के ये दोहे जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं। वे बताते हैं कि उत्तम स्वभाव के व्यक्ति पर कुसंगति का असर नहीं पड़ता, जैसे चंदन पर साँप लिपटे रहने पर भी विष का प्रभाव नहीं होता। रहीम सच्चे मित्र की पहचान बताते हैं कि जो विपत्ति के समय साथ दे, वही सच्चा मित्र है। वे प्रेम संबंधों की कोमलता पर बल देते हुए कहते हैं कि प्रेम का धागा एक बार टूट जाए तो फिर जुड़ता नहीं और यदि जुड़े भी तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। परोपकार का महत्व बताते हुए वे वृक्ष और सरोवर का उदाहरण देते हैं कि वे अपना फल और जल स्वयं उपभोग नहीं करते।


    English: Rahim's couplets offer profound wisdom on life and human behavior. He states that a person of noble character remains unaffected by bad company, just as a sandalwood tree remains untainted by the venom of snakes. He identifies a true friend as one who stands by you during times of adversity. Emphasizing the delicacy of relationships, he warns that once the thread of love is broken, it can never be perfectly mended; even if reconnected, a 'knot' remains. Through the examples of trees and lakes, he teaches the value of altruism, noting that they do not consume their own fruit or water but exist for the benefit of others.


    3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)


    हिन्दी: रहीम के दोहों का मूल संदेश नीतिगत जीवन और चरित्र निर्माण है। वे मनुष्य को धैर्य, सज्जनता, परोपकार और संबंधों के निर्वाह की सीख देते हैं। वे सिखाते हैं कि बड़े लोगों के मिल जाने पर छोटों का त्याग नहीं करना चाहिए क्योंकि जहाँ सुई काम आती है, वहाँ तलवार कुछ नहीं कर सकती।


    English: The core message of Rahim's couplets is ethical living and character building. He teaches virtues like patience, nobility, philanthropy, and the nurturing of relationships. He advises that one should not discard the small or humble upon gaining the company of the great, for a sword cannot perform the task of a needle.


    4. पद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation)


    महत्वपूर्ण अंश 1: "जो रहीम उत्तम प्रकृति - - - लिपटे रहत भुजंग।"


    (क) सन्दर्भ: प्रस्तुत दोहा हमारी पाठ्यपुस्तक 'पद्य-खंड' के 'दोहावली' पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता रहीम हैं। (ख) प्रसंग: इसमें उत्तम स्वभाव वाले व्यक्ति पर कुसंगति के प्रभावहीन होने की बात कही गई है। (ग) व्याख्या: रहीम कहते हैं कि जिस व्यक्ति का स्वभाव श्रेष्ठ और दृढ़ होता है, बुरी संगति उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। जिस प्रकार चंदन के वृक्ष पर विषैले साँप लिपटे रहते हैं, फिर भी चंदन अपनी शीतलता और सुगंध नहीं छोड़ता और न ही उसमें विष फैलता है। (घ) काव्यगत सौंदर्य:

    • अलंकार: दृष्टांत अलंकार।

    • संदेश: दृढ़ चरित्र वाले व्यक्ति को बाहरी बुराइयाँ प्रभावित नहीं करतीं।


    महत्वपूर्ण अंश 2: "रहिमन धागा प्रेम का - - - जुरै गाँठ परि जाय।"


    (क) सन्दर्भ: पूर्ववत्। (ख) प्रसंग: प्रेम संबंधों की नाजुकता और उनके निर्वाह पर प्रकाश डाला गया है। (ग) व्याख्या: रहीम कहते हैं कि प्रेम का संबंध एक कच्चे धागे की तरह कोमल होता है, इसे झटके से नहीं तोड़ना चाहिए। यदि एक बार यह प्रेम रूपी धागा टूट जाता है, तो फिर उसे पहले जैसा नहीं जोड़ा जा सकता। यदि जुड़ता भी है, तो मन में टीस या संदेह की गाँठ रह जाती है। (घ) काव्यगत सौंदर्य:

    • अलंकार: रूपक अलंकार (प्रेम रूपी धागा)।

    • भाव: आपसी विश्वास को कभी टूटने नहीं देना चाहिए।


    महत्वपूर्ण अंश 3: "तरुवर फल नहीं खात हैं - - - संचहिं सुजान।"


    (क) सन्दर्भ: पूर्ववत्। (ख) प्रसंग: परोपकार और सज्जनों के स्वभाव का वर्णन है। (ग) व्याख्या: रहीम कहते हैं कि वृक्ष अपने फल स्वयं नहीं खाते और सरोवर अपना जल स्वयं नहीं पीते। इसी प्रकार, जो सज्जन (सुजान) होते हैं, वे अपनी संपत्ति का संचय अपने स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि दूसरों के हित (परोपकार) के लिए करते हैं।


    (घ) काव्यगत सौंदर्य:

    • अलंकार: अनुप्रास अलंकार ('स' वर्ण की आवृत्ति)।

    • संदेश: परोपकार ही मानव जीवन का सर्वोच्च धर्म है।


    5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)

    शब्द

    अर्थ

    पर्यायवाची

    विलोम

    प्रकृति

    स्वभाव

    मिजाज

    ---

    भुजंग

    साँप

    सर्प, अहि

    ---

    जरदी

    पीलापन

    पीतिमा

    ---

    सुजन

    सज्जन

    साधु, भला आदमी

    दुर्जन

    विपति

    संकट

    मुसीबत, आपदा

    संपत्ति

    मीत

    मित्र

    सखा, दोस्त

    शत्रु

    तरुवर

    श्रेष्ठ वृक्ष

    विटप, द्रुम

    ---

    सुजान

    चतुर/सज्जन

    विद्वान

    मूर्ख

    लघु

    छोटा

    तुच्छ

    दीर्घ, विशाल

    ओछे

    नीच/तुच्छ

    अधम

    गंभीर, उत्तम

    6. सही या गलत - कारण सहित (True or False with Reason)


    कथन 1: रहीम को 'खानखाना' की उपाधि हुमायूँ ने दी थी।

    • उत्तर: गलत - कारण: रहीम को यह उपाधि सम्राट अकबर ने उनके सैन्य और प्रशासनिक कार्यों के लिए दी थी।


    कथन 2: चंदन के वृक्ष पर विष का प्रभाव नहीं पड़ता।

    • उत्तर: सही - कारण: अपनी शीतल और उत्तम प्रकृति के कारण चंदन सांपों के लिपटने पर भी विषैला नहीं होता।


    कथन 3: रहीम के अनुसार जो व्यक्ति दीन (गरीब) की मदद करता है, वह भगवान के समान है।

    • उत्तर: सही - कारण: रहीम ने लिखा है कि "जो रहीम दीनहिं लखै, दीनबन्धु सम होय।"


    कथन 4: 'नगर शोभा' एक भक्तिपरक रचना है।

    • उत्तर: गलत - कारण: 'नगर शोभा' एक शृंगारिक रचना है जो दोहा छंद में लिखी गई है।


    7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)


    प्रश्न 1: उत्तम प्रकृति का व्यक्ति किसे कहा जाता है?

    • उत्तर: जिसका स्वभाव दृढ़ और पवित्र हो, जिस पर बुरी संगति का कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े, उसे उत्तम प्रकृति का व्यक्ति कहते हैं।


    प्रश्न 2: हल्दी और चूने के उदाहरण से रहीम क्या समझाना चाहते हैं?

    • उत्तर: जैसे हल्दी (पीली) और चूना (सफेद) मिलकर अपना रंग छोड़ देते हैं और एक नया (लाल) रंग बनाते हैं, वैसे ही प्रेम में दो व्यक्तियों को अपना अहंकार भूलकर एक हो जाना चाहिए।


    प्रश्न 3: सच्चे मित्र की क्या पहचान है?

    • उत्तर: रहीम के अनुसार जो मित्र विपत्ति या संकट की घड़ी में साथ निभाए और मदद करे, वही सच्चा मित्र है।


    प्रश्न 4: 'जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तरवारि' का भाव क्या है?

    • उत्तर: इसका भाव यह है कि हर वस्तु और व्यक्ति का अपना महत्व होता है। जो काम छोटी सी सुई कर सकती है (जैसे कपड़ा सिलना), उसे बड़ी तलवार नहीं कर सकती।


    प्रश्न 5: रहीम ने 'ओछे नरन' (नीच व्यक्तियों) से दूरी बनाने को क्यों कहा है?

    • उत्तर: क्योंकि नीच व्यक्ति से न तो दुश्मनी अच्छी होती है और न ही बहुत अधिक दोस्ती; जैसे कुत्ते का काटना और चाटना दोनों ही नुकसानदेह और अपवित्र होते हैं


    8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)


    प्रश्न 1: रहीम के जीवन-परिचय और उनकी काव्यगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

    • उत्तर: अब्दुर्रहीम खाँ 'खानखाना' अकबर के नवरत्नों में से एक थे। उनका जन्म 1556 ई. में हुआ था। वे एक कुशल योद्धा होने के साथ-साथ अरबी, फारसी, संस्कृत और हिंदी के प्रकांड विद्वान थे। उनकी कविता की मुख्य विशेषता 'सहज संप्रेषणीयता' है। वे नीति की गहरी बातों को लोक-जीवन के सरल उदाहरणों से समझाते हैं। उनके काव्य में भक्ति, नीति और शृंगार का अद्भुत संगम मिलता है।


    प्रश्न 2: पाठ में संकलित दोहों के आधार पर रहीम की 'सीख' का सारांश लिखिए।

    • उत्तर: रहीम हमें आदर्श जीवन जीने की सीख देते हैं। उनके अनुसार हमें:

    • अपने चरित्र को चंदन की तरह अडिग रखना चाहिए।

    • सज्जनों के रूठने पर उन्हें बार-बार मनाना चाहिए, जैसे फटे हुए मोतियों के हार को पिरोया जाता है।

    • अपनी गुप्त बातें घर से बाहर नहीं बतानी चाहिए, अन्यथा विभीषण की तरह घर का भेद खुल सकता है।

    • परोपकारी बनना चाहिए और अपनी संपत्ति का उपयोग दूसरों की भलाई के लिए करना चाहिए।

    • प्रेम संबंधों में कोमलता और अटूट विश्वास बनाए रखना चाहिए।


    9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)


    अलंकार (Alankar):

    • "चन्दन विष व्यापत नहीं": दृष्टांत अलंकार।

    • "तरुवर फल नहीं खात हैं": अनुप्रास एवं मानवीकरण का पुट।

    • "बिपति-कसौटी जे कसे": रूपक अलंकार (विपत्ति रूपी कसौटी)।


    समास (Samas):

    • मुक्ताहार: मोतियों का हार (तत्पुरुष समास)।

    • दीनबन्धु: दीनों के बंधु (तत्पुरुष समास)।

    • दीननाथ: दीनों के नाथ (तत्पुरुष समास)।


    पर्यायवाची:

    • पथिक: राहगीर, मुसाफिर, बटोही।

    • सरवर: तालाब, जलाशय, सरोवर।

    • तरुवर: वृक्ष, पेड़, विटप।


    10. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)


    प्रश्न 1: रहीम किस काल के कवि हैं?

    • उत्तर: रहीम भक्तिकाल के प्रसिद्ध नीतिपरक कवि हैं।


    प्रश्न 2: 'बरवै नायिका भेद' किसकी रचना है?

    • उत्तर: यह रहीम की प्रसिद्ध रचना है, जो बरवै छंद में लिखी गई है।


    11. UP Board परीक्षा में इस पाठ से अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)


    5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:

    • रहीम के दोहों की प्रासंगिकता वर्तमान समाज में स्पष्ट कीजिए।


    6 अंक - पद्यांश व्याख्या:

    • "रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि। जहाँ काम आवै सुई, कहा करै तरवारि।।"


    2 अंक - लघु उत्तरीय:

    • रहीम ने मछली और जल के प्रेम को किस प्रकार वर्णित किया है?

    • 'भरी सराय' वाले दोहे में 'पथिक' किसे कहा गया है?

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