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    1.6. पंचवटी - (Panchvati) - Class 9 - पद्य-खंड - Rajeev Prakashan

    • 24 hours ago
    • 6 min read

    Updated: 17 minutes ago


    1. पाठ का प्रकार: पद्य लेखक का नाम: मैथिलीशरण गुप्त विधा: खंडकाव्य (अंश)  


    परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)

    विषय

    विवरण

    लेखक

    मैथिलीशरण गुप्त  


    जन्म वर्ष

    सन् 1886 ई.  


    पाठ की विधा

    पद्य (खंडकाव्य 'पंचवटी' से)  


    पाठ्यपुस्तक

    पद्य-खंड, कक्षा 9  


    सबसे प्रसिद्ध पंक्ति

    "चारु चंद्र की चंचल किरणें खेल रही हैं जल-थल में।"  


    पाठ का केंद्रीय विषय

    पंचवटी की प्राकृतिक सुषमा और लक्ष्मण का प्रहरी रूप  


    सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न

    मैथिलीशरण गुप्त का जीवन-परिचय और उनकी राष्ट्रभक्ति पर आधारित रचनाएँ।  


    1. लेखक परिचय (Author Introduction)


    जन्म एवं स्थान: मैथिलीशरण गुप्त का जन्म सन् 1886 ई. में चिरगाँव, जिला झाँसी (उ.प्र.) में हुआ था। काव्य-गुरु: आप आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी को अपना काव्य-गुरु मानते थे। उन्हीं की प्रेरणा से आपने खड़ी बोली में काव्य सृजन किया। साहित्यिक योगदान: गुप्त जी को 'राष्ट्रकवि' कहा जाता है। उन्होंने भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों को अपनी कविता का आधार बनाया। युवाओं में देश-प्रेम जगाने के लिए उन्होंने 'भारत-भारती' की रचना की। प्रमुख रचनाएँ: साकेत (महाकाव्य), यशोधरा, जयद्रथ वध, भारत भारती, पंचवटी, पंचवटी, जयभारत, विष्णुप्रिया। सम्मान: 'साकेत' महाकाव्य पर उन्हें 'मंगला प्रसाद पारितोषिक' सम्मान मिला। भाषा-शैली: आपकी भाषा व्याकरण-सम्मत विशुद्ध खड़ी बोली है। 'हरिगीतिका' आपका प्रिय छंद है। निधन: सन् 1964 ई. में आपका देहावसान हुआ।  


    English Summary of Introduction: Maithili Sharan Gupt (1886–1964), known as the 'Rashtrakavi' (National Poet), was born in Chirgaon, Jhansi. Guided by Mahavir Prasad Dwivedi, he became a pioneer of Khadi Boli poetry. His works, such as 'Saket' and 'Bharat Bharati', reflect deep patriotism and Indian historical values.  


    2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)


    हिन्दी: 'पंचवटी' कविता में गुप्त जी ने वनवास के समय पंचवटी की प्राकृतिक सुंदरता का मनोहारी चित्रण किया है। चाँदनी रात में चंद्रमा की किरणें जल और थल में खेल रही हैं। पंचवटी में एक सुंदर पत्तों की कुटिया बनी है, जिसके सामने एक शिला पर निडर लक्ष्मण प्रहरी के रूप में जाग रहे हैं। कवि प्रश्न करते हैं कि जब सारा संसार सो रहा है, तब यह धनुर्धर क्यों जाग रहा है? वे कुटिया में मौजूद 'तीन लोक की लक्ष्मी' (माता सीता) की रक्षा कर रहे हैं। अंत में लक्ष्मण वनवास की समाप्ति और भविष्य के उत्तरदायित्वों पर विचार करते हैं।  


    English: In the poem 'Panchvati', Gupt Ji describes the enchanting natural beauty of the Panchvati forest during Lord Ram's exile. The shimmering moonlight reflects on the water and land. Outside a modest leaf-hut, Lakshman stands guard on a clean stone, sleepless and fearless. The poet wonders why this archer is awake while the rest of the world sleeps. He is protecting Sita (the Goddess of the three worlds) and reflecting on the approaching end of their thirteen-year exile.  


    3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)


    हिन्दी: इस पाठ का मूल संदेश कर्तव्य-पालन और प्रकृति-प्रेम है। लक्ष्मण का चरित्र एक आदर्श रक्षक और कर्तव्यनिष्ठ भाई का है, जो अपनी सुख-सुविधाओं का त्याग कर अपनों की रक्षा में लीन है। साथ ही, प्रकृति को सजीव मानकर उसके प्रति संवेदनशीलता प्रकट की गई है।  


    English: The core message is devotion to duty and love for nature. Lakshman's character represents an ideal guardian and brother who sacrifices his own comfort for his family. The poem also personifies nature, showing deep sensitivity toward the environment.  


    4. पद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation)


    महत्वपूर्ण अंश 1: "चारु चंद्र की - - - मंद पवन के झोंकों से।"

      

    (क) सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'पद्य-खंड' के 'पंचवटी' नामक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता मैथिलीशरण गुप्त हैं। (ख) प्रसंग: कवि ने चाँदनी रात में पंचवटी की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन किया है। (ग) व्याख्या: सुंदर चंद्रमा की चंचल किरणें जल और थल में क्रीड़ा कर रही हैं। धरती और आकाश में स्वच्छ चाँदनी फैली हुई है। पृथ्वी हरी घास की नोकों के माध्यम से अपनी खुशी प्रकट कर रही है और वृक्ष भी मंद हवा के झोंकों से झूमते हुए अपनी प्रसन्नता व्यक्त कर रहे हैं। (घ) काव्यगत सौंदर्य:  


    • अलंकार: 'चारु चंद्र की चंचल' में अनुप्रास अलंकार और 'मानो झूम रहे हैं' में उत्प्रेक्षा अलंकार है।  


    • भाषा: सरल और परिष्कृत खड़ी बोली।  


    महत्वपूर्ण अंश 2: "जाग रहा यह - - - बना दृष्टिगत होता है।।"

     

    (क) सन्दर्भ: पूर्ववत्। (ख) प्रसंग: कुटिया के बाहर पहरा देते लक्ष्मण के ओजस्वी रूप का वर्णन है। (ग) व्याख्या: कवि आश्चर्यचकित होकर पूछते हैं कि जब पूरा संसार सो रहा है, तब यह कौन सा धनुर्धर है जो जाग रहा है? वह वीर ऐसा प्रतीत होता है मानो साक्षात् कामदेव (भोगी) ने किसी योगी का रूप धारण कर लिया हो। (घ) काव्यगत सौंदर्य:  


    • अलंकार: 'योगी-सा' में उपमा अलंकार है।  

    • भाव: लक्ष्मण की एकाग्रता और उनके सौंदर्य का सजीव वर्णन।  


    5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)

    शब्द

    अर्थ

    पर्यायवाची

    विलोम

    अवनि  


    धरती

    पृथ्वी, वसुंधरा

    अंबर

    अंबर  


    आकाश

    नभ, गगन

    अवनि

    तरु  


    वृक्ष

    पेड़, विटप

    ---

    भुवन  


    संसार

    जग, लोक

    ---

    कुसुमायुध  


    कामदेव

    अनंग, मदन

    ---

    मर्त्यलोक  


    मृत्युलोक

    पृथ्वी, संसार

    देवलोक

    वसुंधरा  


    पृथ्वी

    अचला, अवनि

    ---

    तुहिन कण  


    ओस की बूँदें

    नीहार, शबनम

    ---

    अदय  


    निर्दयी

    दयाशून्य

    सदय

    आर्त  


    दुखी

    पीड़ित

    सुखी

    6. सही या गलत - कारण सहित (True or False with Reason)


    कथन 1: मैथिलीशरण गुप्त छायावादी युग के कवि हैं।  

    • उत्तर: गलत - कारण: गुप्त जी द्विवेदी युग के सबसे प्रमुख कवि माने जाते हैं।  


    कथन 2: 'साकेत' पर गुप्त जी को मंगला प्रसाद पारितोषिक मिला था।  

    • उत्तर: सही - कारण: उनकी इस कालजयी कृति के लिए उन्हें इस सम्मान से नवाजा गया था।  


    कथन 3: पंचवटी में लक्ष्मण सोने की ईंटों के घर की रक्षा कर रहे थे।  

    • उत्तर: गलत - कारण: लक्ष्मण पत्तों से बनी कुटिया (पर्ण-कुटीर) की रक्षा कर रहे थे।  


    कथन 4: 'रवि बटोर लेता है उनको सदा सबेरा होने पर' में 'उनको' का अर्थ मोती (ओस) है।  

    • उत्तर: सही - कारण: कवि कल्पना करते हैं कि रात में बिखरे ओस रूपी मोतियों को सूर्य की किरणें सुबह समेट लेती हैं।  


    7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)


    प्रश्न 1: लक्ष्मण किस धन की रक्षा कर रहे हैं?  

    • उत्तर: लक्ष्मण माता सीता रूपी धन की रक्षा कर रहे हैं, जो वीर वंश की लाज और तीन लोक की लक्ष्मी हैं।  

    प्रश्न 2: नियति-नटी के कार्य-कलाप कैसे चल रहे हैं?  

    • उत्तर: नियति-नटी (भाग्य रूपी नर्तकी) के कार्य बहुत ही शांत, चुपचाप और एकांत भाव से निरंतर चल रहे हैं।  


    प्रश्न 3: प्रकृति किन कणों से हँसती और रोती प्रतीत होती है?  

    • उत्तर: प्रकृति सरल और तरल ओस की बूँदों (तुहिन कणों) के माध्यम से हँसती और रोती हुई प्रतीत होती है।  


    प्रश्न 4: लक्ष्मण को कौन सी बात 'कल की बात' लगती है?  

    • उत्तर: वन को आते समय अपने पिता (तात) का दुखी और बेहोश होना उन्हें तेरह वर्ष बाद भी कल की बात जैसा ताजा लगता है।  


    8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)


    प्रश्न 1: मैथिलीशरण गुप्त का जीवन-परिचय देते हुए उनकी काव्यगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।  


    • उत्तर: मैथिलीशरण गुप्त (1886-1964) आधुनिक हिंदी काव्य के स्तंभ हैं। उनकी काव्यगत विशेषताएँ निम्न हैं:  

    • राष्ट्रभक्ति: उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति और देश-प्रेम का गौरवशाली चित्रण मिलता है।  

    • खड़ी बोली का विकास: उन्होंने आचार्य द्विवेदी के मार्गदर्शन में खड़ी बोली को काव्य की मधुर भाषा बनाया।  

    • ऐतिहासिक कथावस्तु: उन्होंने साकेत, यशोधरा जैसे काव्यों में उपेक्षित पात्रों को सम्मान दिलाया।  

    • छंद और अलंकार: हरिगीतिका छंद और अनुप्रास, उपमा जैसे अलंकारों का उन्होंने सहज प्रयोग किया है।  


    प्रश्न 2: 'पंचवटी' कविता में प्रकृति चित्रण की क्या विशेषताएँ हैं?  


    • उत्तर: 'पंचवटी' में प्रकृति का अत्यंत सजीव और मानवीकृत चित्रण हुआ है। कवि ने चंद्रमा की किरणों को 'खेलते' हुए और पृथ्वी को 'पुलक प्रकट' करते हुए दिखाया है। ओस की बूँदों को 'मोती' और 'आँसू' के रूप में कल्पित किया गया है। सूर्य को 'मोती बटोरने वाला' और संध्या को 'विरामदायिनी' बताया गया है। यह प्रकृति चित्रण केवल सजावटी नहीं है, बल्कि यह पात्रों के भावों और वातावरण की गंभीरता को भी व्यक्त करता है।  


    9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)


    समास-विग्रह:

    • पंचवटी: पाँच वटों का समूह (द्विगु समास)।

    • धनुर्धर: धनुष को धारण करने वाला (बहुब्रीहि)।

    • लोकोपकार: लोक का उपकार (तत्पुरुष)।

    • कुसुमायुध: कुसुम (फूल) हैं आयुध (शस्त्र) जिसके - कामदेव (बहुब्रीहि)।


    संधि-विच्छेद:

    • निरानंद: निः + आनंद (विसर्ग संधि)।

    • निस्तब्ध: निः + स्तब्ध (विसर्ग संधि)।

    • लोकोपकार: लोक + उपकार (गुण स्वर संधि)।


    10. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)

    प्रश्न 1: 'हरिगीतिका' किस कवि का प्रिय छंद है?  

    • उत्तर: 'हरिगीतिका' मैथिलीशरण गुप्त का प्रिय छंद है।  


    प्रश्न 2: 'पंचवटी' किस विधा की रचना है?  

    • उत्तर: यह एक प्रसिद्ध खंडकाव्य है।  


    11. UP Board परीक्षा में इस पाठ से अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)


    5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:

    • लक्ष्मण के चरित्र की विशेषताओं का 'पंचवटी' पाठ के आधार पर वर्णन कीजिए।  


    6 अंक - पद्यांश व्याख्या:

    • "है बिखेर देती वसुंधरा मोती..." अथवा "किस व्रत में है व्रती वीर यह..."  


    2 अंक - लघु उत्तरीय:

    • 'तीन लोक की लक्ष्मी' किसे कहा गया है?  

    • 'नियति-नटी' में कौन सा अलंकार है? (रूपक)  


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