10. मीरा - Meera - Class 11 - Aroh
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Author: मीरा
1. कवि परिचय (Literary Profile)
साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): मीरा सगुण धारा की महत्वपूर्ण भक्त कवयित्री हैं। वे कृष्ण की अनन्य उपासिका थीं और उन्हें ही अपना आराध्य और पति मानती थीं। मीरा के काव्य में सगुण भक्ति मुख्य रूप से मौजूद है, लेकिन उन पर निर्गुण भक्ति और सूफियों का प्रभाव भी देखा जा सकता है। उनकी कविता के मूल में विरह और प्रेम की वेदना है।
प्रमुख रचनाएँ (Key Works): मीरा पदावली, नरसीजी-रो-माहेरो।
भाषा: मीरा की भाषा मूलतः राजस्थानी है, जिसमें कहीं-कहीं ब्रजभाषा और गुजराती का प्रभाव मिलता है।
2. पाठ का सार (Executive Summary)
प्रतिपाद्य (Central Theme): इस पद में मीरा ने कृष्ण के प्रति अपनी अनन्यता व्यक्त की है। वे सांसारिक बंधनों और लोक-लाज को छोड़कर पूरी तरह कृष्ण की भक्ति में लीन हैं। वे स्पष्ट करती हैं कि कृष्ण के अतिरिक्त इस संसार में उनका और कोई नहीं है।
English Summary: In this verse, Mirabai expresses her total surrender and singular devotion to Krishna. She declares that Krishna is her only master and husband, for whom she has renounced her family ties and social prestige. Using metaphors of churning milk and sowing seeds with tears, she illustrates the growth of her divine love while expressing sorrow for those entangled in worldly illusions.
Key Points:
कृष्ण ही सर्वस्व हैं; जिनके सिर पर मोर-मुकुट है, वही मीरा के पति हैं।
कृष्ण भक्ति के लिए मीरा ने कुल की मर्यादा (कुल की कानि) और लोक-लाज का त्याग कर दिया है।
'प्रेम-बेलि' को उन्होंने आंसुओं के जल से सींचकर बड़ा किया है, जिसमें अब आनंद रूपी फल लगने लगे हैं।
संसार की असारता (छाछ) को त्यागकर उन्होंने भक्ति के सार (घी) को प्राप्त कर लिया है।
2.1 पद्यांश अनुवाद (Line-by-Line Translation)
पंक्ति (Original Line) | हिंदी भावार्थ (Hindi Meaning) | English Translation |
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई। | मेरे तो केवल पर्वत को धारण करने वाले कृष्ण हैं, दूसरा कोई नहीं। | Mine is only Krishna, the lifter of the mountain, none else. |
जा के सिर मोर-मुकुट, मेरो पति सोई। | जिसके सिर पर मोर का मुकुट है, वही मेरे स्वामी/पति हैं। | He who wears the peacock crown on his head is my husband. |
छाँड़ि दयी कुल की कानि, कहा करिहै कोई? | मैंने कुल की मर्यादा छोड़ दी है, अब मेरा कोई क्या बिगाड़ लेगा? | I have left the dignity of my clan; what can anyone do to me? |
संतन ढिग बैठि-बैठि, लोक-लाज खोयी। | संतों के पास बैठ-बैठकर मैंने लोक-लाज का त्याग कर दिया है। | Sitting among the saints, I have lost all concern for social shame. |
अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी। | आँसुओं के जल से सींचकर मैंने प्रेम की बेल बोई है। | I have sown the vine of love, watering it with my tears. |
दधि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दयी छोयी। | मैंने दही मथकर घी निकाल लिया है और छाछ को त्याग दिया है। | I have churned the curd and extracted the ghee, discarding the buttermilk. |
3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)
Word | Hindi Meaning | English Context |
गिरधर | गिरि (पर्वत) को धारण करने वाले | Lifter of the mountain |
कानि | मर्यादा / मान | Dignity / Honor |
ढिग | पास / समीप | Near / Beside |
मथनियाँ | मथने का यंत्र (रई) | Churning tool |
छोयी | मट्ठा / छाछ (असार अंश) | Buttermilk (the useless part) |
मोही | मुझे / मुझको | Me / To me |
4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)
भाव पक्ष (Thematic Aspect): पद में माधुर्य भाव की भक्ति और शांत रस का अद्भुत समन्वय है। मीरा का समर्पण अनन्य और अडिग है।
कला पक्ष (Artistic Aspect):
अलंकार (Figures of Speech):
रूपक अलंकार: 'प्रेम-बेलि' (प्रेम रूपी बेल), 'आणंद-फल' (आनंद रूपी फल)।
पुनरुक्ति प्रकाश: 'बैठि-बैठि', 'सींचि-सींचि'।
द्रष्टांत अलंकार: दूध की मथनियाँ और घी-छाछ के उदाहरण से सार-असार का बोध कराना।
भाषा: राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा।
5. काव्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)
Extract 1: "अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी... दधि मथि घृत काढ़ि लियो, डारि दयी छोयी।"
Interpretation: मीरा ने अपनी प्रेम-बेलि को किससे सींचा है? (उत्तर: विरह और भक्ति के आँसुओं से)।
Aesthetics: 'घी' और 'छाछ' यहाँ किन बातों के प्रतीक हैं? (उत्तर: घी- कृष्ण की भक्ति/सत्य, छाछ- निस्सार संसार/माया)।
Inference: मीरा जगत को देखकर क्यों रोती हैं? (उत्तर: क्योंकि संसार के लोग व्यर्थ के मोह-माया में उलझे हैं और सच्चे ईश्वर को भूले हुए हैं)।
6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)
1. मीरा कृष्ण की उपासना किस रूप में करती हैं? वह रूप कैसा है?
उत्तर: मीरा कृष्ण की उपासना पति के रूप में करती हैं। उनका वह रूप मनमोहक है, जिनके सिर पर मोर-मुकुट है और जो गायों को चराने वाले (गोपाल) हैं।
2. भाव स्पष्ट कीजिए: 'अंसुवन जल सींचि-सींचि, प्रेम-बेलि बोयी / अब त बेलि फैलि गयी, आणंद-फल होयी'
उत्तर: मीरा कहती हैं कि उन्होंने कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को बहुत कष्ट सहकर और विरह के आँसुओं से सींचकर विकसित किया है। अब यह प्रेम पूरी तरह परिपक्व हो गया है और इसमें भक्ति का परमानंद (आनंद रूपी फल) मिलने लगा है।
3. 'लोग कहै मीरा भयी बावरी, न्यात कहै कुलनासी'—मीरा के बारे में लोग ऐसा क्यों कहते हैं?
उत्तर: समाज मीरा को 'बावरी' (पागल) कहता है क्योंकि वे राजघराने की पुत्रवधू होकर भी साधु-संतों के साथ नाचती-गाती थीं। परिवार वाले (न्यात) उन्हें 'कुलनासी' कहते हैं क्योंकि उन्हें लगता था कि मीरा के इन कार्यों से उनके वंश की प्रतिष्ठा नष्ट हो रही है।
7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)
Topic: "भक्ति और सामाजिक विद्रोह: मीरा का व्यक्तित्व"
Key Points:
पितृसत्तात्मक समाज में नारी की स्वतंत्रता।
लोक-लाज बनाम ईश्वर के प्रति सच्चा प्रेम।
मीरा के पदों में लोक-संस्कृति का प्रभाव।
8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)
"मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।"
"भगत देखि राजी हुयी, जगत देखि रोयी।"
"दासि मीरां लाल गिरधर! तारो अब मोही।"
9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)
Spelling: 'गिरधर' और 'मथनियाँ' की वर्तनी पर ध्यान दें।
Conceptual: मीरा को केवल 'विरहिणी' न समझें; वे एक क्रांतिकारी कवयित्री भी थीं जिन्होंने पर्दा-प्रथा और सामंती बंधनों को चुनौती दी।
10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)
Short Answer (2 marks): मीरा ने 'कुल की कानि' का त्याग क्यों किया?
Model Answer: मीरा के अनुसार कृष्ण ही उनके वास्तविक पति और स्वामी हैं। ईश्वर की प्राप्ति के मार्ग में उन्हें संसार और परिवार की मर्यादाएँ बाधा लगती थीं, इसलिए उन्होंने कृष्ण-भक्ति के लिए स्वेच्छा से कुल की मर्यादा छोड़ दी।
Long Answer (5 marks): मीरा के पदों में व्यक्त 'समर्पण' और 'साहस' का विश्लेषण कीजिए।
Model Answer: मीरा का समर्पण पूर्ण है; वे कृष्ण के लिए विष का प्याला हँसते हुए पी लेती हैं। उनका साहस इस बात में है कि उन्होंने मध्यकाल के रूढ़िवादी समाज में रहते हुए भी संतों की संगति की, सार्वजनिक रूप से मंदिरों में नृत्य किया और महलों के सुख त्याग दिए। उनकी भक्ति केवल भावना नहीं, बल्कि सामाजिक जड़ता के विरुद्ध एक मौन विद्रोह भी है।
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