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    14. हे भूख! मत मचल / हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर - Hey Bhookh! Mat Machal / Hey Mere Juhi Ke Phool Jaise Ishwar - Class 11 - Aroh

    • 2 days ago
    • 5 min read

    Updated: 14 hours ago

    लेखिका: अक्कमहादेवी


    1. कवयित्री परिचय (Literary Profile)

    • साहित्यिक विशेषताएँ (Literary Traits): अक्कमहादेवी 12वीं सदी के कर्नाटक के 'वीरशैव आंदोलन' से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कवयित्री हैं। कन्नड़ भाषा में 'अक्क' का अर्थ 'बहन' होता है। वे शिव (चन्नमल्लिकार्जुन) की अनन्य भक्त थीं। उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों और राजसी सुखों का त्याग कर अध्यात्म का मार्ग चुना। उनके वचनों में इंद्रिय निग्रह और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव मिलता है।


    • प्रमुख रचनाएँ (Key Works): वचन सौरभ (हिंदी अनुवाद), स्पीकिंग ऑफ़ शिवा (अंग्रेज़ी)।

    • संदर्भ: प्रस्तुत पाठ में अक्कमहादेवी के दो वचन संकलित हैं। पहला वचन इंद्रियों पर नियंत्रण का संदेश देता है और दूसरा ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का।

    2. पाठ का सार (Executive Summary)


    • प्रतिपाद्य (Central Theme): ये वचन मनुष्य को सांसारिक विकारों (भूख, प्यास, क्रोध, लोभ, मोह आदि) से मुक्त होकर ईश्वर की शरण में जाने के लिए प्रेरित करते हैं। कवयित्री का मानना है कि जब तक व्यक्ति का अहंकार (स्व) नष्ट नहीं होता, तब तक उसे सच्चे ईश्वर की प्राप्ति नहीं हो सकती।


    • English Summary: The verses of Akkamahadevi are profound spiritual calls. In the first verse, she urges her senses and emotions (hunger, anger, greed) to stop distracting her so she can focus on Lord Shiva. In the second verse, she seeks extreme humility and the destruction of her ego, even praying for a state where she has to beg and still receive nothing, so that her reliance is solely on the Divine.


    • Key Points:

      • इंद्रियों को संबोधन: कवयित्री भूख, प्यास, क्रोध और मोह को शांत रहने का आदेश देती हैं क्योंकि ये लक्ष्य प्राप्ति में बाधक हैं।

      • चराचर जगत को संदेश: वे सभी जड़-चेतन को अवसर न चूकने और शिव की भक्ति करने का संदेश देती हैं।

      • पूर्ण समर्पण: दूसरे वचन में वे ईश्वर से प्रार्थना करती हैं कि उनका अहंकार पूरी तरह नष्ट हो जाए, चाहे इसके लिए उन्हें भीख ही क्यों न माँगनी पड़े।

    3. कठिन शब्दार्थ (Glossary)

    शब्द

    हिंदी अर्थ

    English Context

    चन्नमल्लिकार्जुन

    शिव (मल्लिकार्जुन के समान सुंदर)

    Lord Shiva

    चराचर

    जड़ और चेतन (सजीव और निर्जीव)

    The entire creation

    पाश

    जाल / बंधन

    Trap / Bondage

    मद

    अहंकार / नशा

    Pride / Intoxication

    जूही के फूल

    कोमलता और पवित्रता का प्रतीक

    Jasmine flower (Symbol of purity)

    4. साहित्यिक विश्लेषण (Literary Analysis)


    • भाव पक्ष (Thematic Aspect): वचनों में शांत रस और भक्ति भाव की प्रधानता है। कवयित्री ने इंद्रियों के दमन को योग साधना का आधार माना है।


    • कला पक्ष (Artistic Aspect):

      • संबोधन शैली: यहाँ कवयित्री अपनी इंद्रियों (भूख, प्यास आदि) से सीधे बात कर रही हैं, जो प्रभाव उत्पन्न करता है।

      • उपमा अलंकार: 'हे मेरे जूही के फूल जैसे ईश्वर' (ईश्वर की कोमलता और सूक्ष्मता की तुलना जूही के फूल से की गई है)।

      • विरोधाभास: भीख माँगना और उसका न मिलना—यहाँ सांसारिक दरिद्रता को आध्यात्मिक अमीरी का साधन माना गया है।

    5. काव्यांश आधारित प्रश्न (Extract-Based Competency)


    Extract 1: "ओ चराचर! मत चूक अवसर / आई हूँ संदेश लेकर चन्नमल्लिकार्जुन का।"

    1. Interpretation: कवयित्री 'चराचर' से किस अवसर को न चूकने के लिए कह रही हैं? (उत्तर: मानव जीवन में ईश्वर की भक्ति और मुक्ति प्राप्त करने के अवसर को)।

    2. Author's Intent: ' संदेश लेकर आना' क्या दर्शाता है? (उत्तर: यह कवयित्री के आत्म-साक्षात्कार और गुरु के समान मार्गदर्शक होने का प्रमाण है)।

    3. Inference: चन्नमल्लिकार्जुन शब्द का यहाँ क्या महत्व है? (उत्तर: यह कवयित्री के आराध्य देव शिव का नाम है, जो उनकी अटूट श्रद्धा को दर्शाता है)।

    6. पाठ्यपुस्तक प्रश्नोत्तर (Textbook Q&A)

    1. लक्ष्य प्राप्ति में इंद्रियाँ बाधक होती हैं—इसके संदर्भ में अपने तर्क दीजिए।

    उत्तर: भूख, प्यास, लोभ, मोह और क्रोध जैसी इंद्रियाँ मनुष्य को सांसारिक सुखों और भ्रम में उलझाए रखती हैं। जब तक मन इन विकारों में भटकता रहेगा, तब तक वह एकाग्र होकर ईश्वर या अपने लक्ष्य की ओर नहीं बढ़ सकता।


    2. अक्कमहादेवी ईश्वर से अपनी झोली खाली रखना क्यों चाहती हैं?

    उत्तर: वे चाहती हैं कि उनका 'अहंकार' (ईगो) पूरी तरह नष्ट हो जाए। जब व्यक्ति के पास कुछ नहीं बचता और वह अत्यंत विवश (भीख माँगने की स्थिति) होता है, तब उसका सारा अभिमान टूट जाता है और वह पूरी तरह ईश्वर पर आश्रित हो जाता है।


    3. 'जूही के फूल' जैसी कोमलता ईश्वर के किस रूप को दर्शाती है?

    उत्तर: यह ईश्वर की सर्वव्यापकता, पवित्रता, निस्वार्थ प्रेम और सूक्ष्मता को दर्शाती है। जैसे फूल बिना किसी भेदभाव के सुगंध देता है, वैसे ही ईश्वर की अनुकंपा भी सबके लिए कोमल और सुलभ है।

    7. अभिव्यक्ति और माध्यम (Creative Writing Connection)

    • Topic: "इंद्रिय निग्रह: आत्म-नियंत्रण का महत्व"

    • Key Points:

      • आधुनिक दौर में मानसिक शांति की चुनौतियाँ।

      • संयम और सदाचार का व्यक्तित्व विकास में योगदान।

      • भक्ति और कर्मयोग का समन्वय।

    8. परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण कथन (Key Quotes)

    • "हे भूख! मत मचल, प्यास! तड़प मत।"

    • "कुछ ऐसा करो कि झोली फैलाऊँ और न मिले भीख।" (अहंकार विसर्जन की पराकाष्ठा)।

    • "मद! मत कर मदहोश।"

    9. सामान्य त्रुटियाँ (Common Student Errors)

    • Spelling: 'चन्नमल्लिकार्जुन' और 'अक्कमहादेवी' की वर्तनी पर ध्यान दें।

    • Conceptual: छात्र दूसरे वचन को केवल 'गरीबी' की प्रार्थना समझते हैं। यह गरीबी नहीं बल्कि अहंकार के विनाश की प्रार्थना है।

    10. विगत वर्षों के बोर्ड प्रश्न (PYQs)

    1. Short Answer (2 marks): कवयित्री ने 'लोभ' और 'मोह' से क्या प्रार्थना की है?

      Model Answer: कवयित्री ने मोह से अपने बंधन ढीले करने को कहा है और लोभ से उसे ललचाने के लिए मना किया है ताकि वह पूर्णतः ईश्वर की भक्ति में लीन हो सके।


    2. Long Answer (5 marks): अक्कमहादेवी के वचनों में निहित 'समर्पण' भाव का विश्लेषण कीजिए।

      Model Answer: अक्कमहादेवी का समर्पण अनूठा है। वे ईश्वर के लिए सब कुछ त्यागने को तैयार हैं। जहाँ पहले वचन में वे अपनी इंद्रियों पर विजय पाना चाहती हैं, वहीं दूसरे वचन में वे अपनी सामाजिक पहचान और अहम् को शून्य करना चाहती हैं। वे ऐसी स्थिति की कामना करती हैं जहाँ उनका कोई सहारा न रहे, ताकि वे केवल अपने 'चन्नमल्लिकार्जुन' के सहारे खड़ी हो सकें। यह समर्पण की वह ऊँचाई है जहाँ भक्त और भगवान के बीच कोई पर्दा नहीं रहता।


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