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    2.4. निष्ठामूर्ति कस्तूरबा - Kasturba - Class 9 - गद्य-खंड - Rajeev Prakashan

    • May 3
    • 7 min read

    Updated: May 9

    पाठ का प्रकार: गद्य

    लेखक का नाम: काका कालेलकर

    विधा: संस्मरणात्मक निबंध  


    परीक्षा-उपयोगी तथ्य (Quick Exam Facts)

    विषय

    विवरण

    लेखक

    काका कालेलकर (दत्तात्रेय बालकृष्ण कालेलकर)  


    जन्म वर्ष

    सन् 1885 ई.  


    पाठ की विधा

    निबंध/संस्मरण  


    पाठ्यपुस्तक

    गद्य-खंड, कक्षा 9

    सबसे प्रसिद्ध पंक्ति

    "शुद्ध और रोचक साहित्य के पहाड़ों की अपेक्षा कृति का एक कण अधिक मूल्यवान और आबदार होता है।"  


    पाठ का केंद्रीय विषय

    कस्तूरबा गाँधी की निष्ठा, कर्तव्यपरायणता और आध्यात्मिक व्यक्तित्व  


    सर्वाधिक पूछा जाने वाला प्रश्न

    कस्तूरबा को 'राष्ट्रमाता' क्यों कहा जाता है और उनकी चारित्रिक विशेषताएँ क्या हैं?  


    1. लेखक परिचय (Author Introduction)


    जन्म एवं स्थान: काका कालेलकर का जन्म सन् 1885 ई. में महाराष्ट्र के सतारा जनपद में हुआ था। उनका मूल नाम दत्तात्रेय बालकृष्ण कालेलकर था। शिक्षा एवं कार्यक्षेत्र: आपने पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से बी.ए. किया। सन् 1915 में आप महात्मा गाँधी के संपर्क में आए और साबरमती आश्रम से जुड़कर देश सेवा में लग गए। आप गुजरात विद्यापीठ के कुलपति भी रहे। भाषायी ज्ञान: आप एक बहुभाषाविद थे। कोंकणी, मराठी, गुजराती, हिंदी, अंग्रेजी और बाँग्ला पर आपका समान अधिकार था। गाँधी जी आपको 'सवाई गाँधी' कहते थे। प्रमुख रचनाएँ:  


    • निबंध: जीवन साहित्य, जीवन का काव्य।

    • संस्मरण: बापू की झाँकी।

    • यात्रा वृत्तांत: हिमालय प्रवास, उस पार के पड़ोसी। सम्मान: आपको साहित्य अकादमी और पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। निधन: सन् 1981 ई. में दिल्ली में आपका निधन हुआ।  


    English Summary of Introduction: Kaka Kalelkar (1885–1981), born in Satara, Maharashtra, was a distinguished Gandhian scholar and polyglot. Inspired by Mahatma Gandhi, he dedicated his life to national service and the promotion of Hindi. Known for his simple yet profound writing style, he authored celebrated travelogues and essays, receiving honors like the Padma Bhushan and Sahitya Akademi Award.  


    2. पाठ का सारांश (Bilingual Summary)


    हिन्दी: 'निष्ठामूर्ति कस्तूरबा' पाठ में लेखक ने कस्तूरबा गाँधी ('बा') के महान व्यक्तित्व और उनकी अटूट निष्ठा का वर्णन किया है। कस्तूरबा केवल गाँधी जी की पत्नी होने के कारण नहीं, बल्कि अपने आंतरिक गुणों—धैर्य, सरलता और सेवा भाव—के कारण 'राष्ट्रमाता' बनीं। वे अनपढ़ थीं, किंतु उनमें जीवन की गहरी समझ थी। दक्षिण अफ्रीका से लेकर हिंदुस्तान तक के संघर्षों में वे हमेशा पति के साथ अडिग रहीं। उन्होंने 'शब्दों' (भाषण) के बजाय 'कृति' (कर्म) को अधिक महत्व दिया। जेल की यातनाएँ हों या बीमारी, उन्होंने अपनी धर्मनिष्ठा से कभी समझौता नहीं किया। उनके मूक बलिदान ने अंग्रेजी साम्राज्य की नींव हिला दी।  


    English: The essay 'Nishthamurti Kasturba' highlights the spiritual strength and unwavering devotion of Kasturba Gandhi, affectionately known as 'Ba'. She earned the title of 'Mother of the Nation' not just as Gandhi's wife, but through her own virtues of resilience and selfless service. Despite being uneducated, she possessed profound wisdom and stood by her husband during freedom struggles in both South Africa and India. She prioritized action over words, showing that even a small act of righteousness is more valuable than vast literature. Her silent yet powerful sacrifice during imprisonment weakened the foundations of British rule.  


    3. केंद्रीय भाव / मूल संदेश (Central Idea / Theme)


    हिन्दी: इस पाठ का मूल संदेश कर्मनिष्ठा और चारित्र्य की शक्ति है। कस्तूरबा का जीवन सिखाता है कि बिना किसी बाहरी आडंबर या उच्च शिक्षा के भी, केवल अपनी निष्ठा और सिद्धांतों पर अडिग रहकर मनुष्य महान बन सकता है। वे भारतीय नारी के आदर्श—समर्पण और तेजस्विता—की जीवित प्रतिमा थीं।  


    English: The core message is the power of integrity and action. Kasturba's life teaches that one can achieve greatness through sheer devotion and adherence to principles, even without formal education. She embodies the traditional Indian ideal of a woman—combining immense humility with inner strength.  


    4. गद्यांश - ससन्दर्भ व्याख्या (Reference, Context & Explanation)


    महत्वपूर्ण अंश 1: "दुनिया में दो अमोघ शक्तियाँ हैं - - - जीवनसिद्धि प्राप्त की।"

    (क) सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक 'गद्य-खंड' के 'निष्ठामूर्ति कस्तूरबा' नामक पाठ से लिया गया है। इसके लेखक काका कालेलकर हैं। (ख) प्रसंग: लेखक 'शब्द' और 'कर्म' (कृति) के बीच के अंतर और कस्तूरबा की कार्यशैली को स्पष्ट कर रहे हैं। (ग) व्याख्या: संसार में दो बड़ी ताकतें हैं—प्रभावशाली वाणी और ठोस कार्य। हालाँकि शब्दों ने दुनिया को बदला है, पर वास्तविक और स्थायी शक्ति कर्म में होती है। कस्तूरबा ने लंबी चर्चाओं या भाषणों के बजाय चुपचाप सेवा करने (कृति) को चुना और इसी के माध्यम से जीवन की सार्थकता प्राप्त की। (घ) साहित्यिक विशेषता:  


    • शैली: विचारात्मक और सारगर्भित।  


    • संदेश: कथनी से करनी श्रेष्ठ होती है।  


    महत्वपूर्ण अंश 2: "जिस प्रकार पिंजड़े का पक्षी - - - उनकी हुकूमत कमजोर हुई।"

    (क) सन्दर्भ: पूर्ववत्। (ख) प्रसंग: कस्तूरबा की मृत्यु और उनके बलिदान के प्रभाव का वर्णन। (ग) व्याख्या: कस्तूरबा को आगा खाँ महल में कैद रखा गया था। वे शारीरिक रूप से बंदी थीं, लेकिन उनकी आत्मा को कैद नहीं किया जा सका। अंततः उन्होंने सरकार की कैद में ही अपने प्राण त्यागे, जैसे कोई पक्षी पिंजरा छोड़कर उड़ जाता है। उनके इस बलिदान ने भारतीयों में वह चेतना जगाई जिससे ब्रिटिश साम्राज्य की शक्ति क्षीण होने लगी। (घ) साहित्यिक विशेषता:  


    • उपमा: कस्तूरबा की आत्मा की तुलना पिंजरे के पक्षी से की गई है।  


    5. शब्दार्थ / शब्द-संपदा (Glossary)

    शब्द

    अर्थ

    पर्यायवाची

    विलोम

    सहधर्मचारिणी  


    पत्नी

    भार्या, जीवनसंगिनी

    ---

    लोकोत्तर  


    अलौकिक

    दिव्य

    सामान्य

    अमोघ  


    अचूक

    सफल

    विफल

    मर्मस्पर्शी  


    हृदय को छूने वाला

    मार्मिक

    ---

    निर्भर्त्सना  


    निंदा/बुराई

    अपमान

    प्रशंसा

    विचिकित्सा  


    संदेह/जाँच

    शंका

    निश्चय

    आबदार  


    चमकदार

    कांतियुक्त

    निस्तेज

    प्रत्युत्पन्नमति  


    हाजिरजवाबी

    तीव्र बुद्धि

    मंदबुद्धि

    कृतार्थ  


    सफल/सार्थक

    धन्य

    विफल

    पातिव्रत्य  


    पति के प्रति निष्ठा

    सतीत्व

    ---

    6. सही या गलत - कारण सहित (True or False with Reason)


    कथन 1: कस्तूरबा गाँधी को राष्ट्र ने 'बा' नाम से सम्मानित किया है।  

    • उत्तर: सही - कारण: जैसे महात्मा गाँधी को 'बापू' कहा जाता है, वैसे ही कस्तूरबा को राष्ट्रमाता के रूप में 'बा' पुकारा जाता है।  


    कथन 2: कस्तूरबा को कुरआन पढ़ने में बहुत रुचि थी।  

    • उत्तर: गलत - कारण: उनकी असाधारण श्रद्धा गीता और तुलसी-रामायण पर थी।  


    कथन 3: 'आगा खाँ महल' में कस्तूरबा को खाने-पीने की बहुत तकलीफ थी।  

    • उत्तर: गलत - कारण: वहाँ भौतिक सुख-सुविधाएँ तो थीं, लेकिन उनके लिए 'कैद' में रहना ही सबसे बड़ा दुख था।  


    कथन 4: बा आश्रम के कठोर नियमों को कभी-कभी बच्चों के लिए ताक पर रख देती थीं।  

    • उत्तर: सही - कारण: कस्तूरबा में वात्सल्य की अधिकता थी, इसलिए वे भूखे बच्चों के लिए नियमों की परवाह नहीं करती थीं।  


    7. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions - 2 अंक प्रत्येक)


    प्रश्न 1: कस्तूरबा राष्ट्रमाता क्यों बन पाईं?  

    • उत्तर: कस्तूरबा अपने आंतरिक सद्गुणों, अटूट निष्ठा और कठिन परीक्षाओं (दक्षिण अफ्रीका और भारत के संघर्ष) में खरी उतरने के कारण राष्ट्रमाता बन पाईं।  


    प्रश्न 2: कस्तूरबा की भाषा संबंधी जानकारी कैसी थी?  

    • उत्तर: उनका भाषा ज्ञान सामान्य देहाती जैसा था। वे दक्षिण अफ्रीका में रहने के कारण थोड़ी अंग्रेजी समझ लेती थीं और 25-30 शब्द बोल भी लेती थीं।  


    प्रश्न 3: 'अखाद्य' खाना खाने के बारे में कस्तूरबा के क्या विचार थे?  

    • उत्तर: जब डॉक्टर ने उन्हें धर्मविरुद्ध भोजन लेने की सलाह दी, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें अखाद्य खाकर जीने की इच्छा नहीं है, भले ही मौत सामने हो।  


    प्रश्न 4: लेखक को कस्तूरबा में 'आध्यात्मिक माँ-बाप' के दर्शन कब हुए?  

    • उत्तर: सन् 1915 में शांति निकेतन में जब उन्होंने बा और बापू को आँगन के एक साधारण चबूतरे पर सोते हुए देखा, तब उन्हें यह अनुभव हुआ।  


    8. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions - 5 अंक प्रत्येक)


    प्रश्न 1: कस्तूरबा के चरित्र की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।  


    • उत्तर: कस्तूरबा का व्यक्तित्व सरलता और दृढ़ता का अनूठा संगम था। उनकी प्रमुख विशेषताएँ निम्न हैं:  

    • दृढ़ संकल्प: वे जिसे सही मानती थीं, उस पर अटल रहती थीं (जैसे सभा में जाने का निश्चय)।  

    • कर्तव्यपरायणता: उन्होंने पति का अनुसरण करना ही अपना धर्म माना।  

    • वात्सल्यमयी माँ: आश्रम में वे सभी कार्यकर्ताओं और बच्चों के लिए माँ की तरह स्नेहपूर्ण थीं।  

    • कर्मठता: बीमारी के बाद भी वे रसोई में जाकर काम करने से पीछे नहीं हटती थीं।  

    • सच्ची देशभक्त: उन्होंने कारावास की यातनाओं को सहा लेकिन कभी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।  


    प्रश्न 2: 'निष्ठामूर्ति कस्तूरबा' पाठ के आधार पर 'शब्द' और 'कृति' की शक्ति पर प्रकाश डालिए।  

    • उत्तर: लेखक के अनुसार शब्द और कृति (कार्य) दोनों ही संसार की अमोघ शक्तियाँ हैं। शब्दों के माध्यम से विचार बदलते हैं, लेकिन 'कृति' या कर्म ही वह अंतिम शक्ति है जो वास्तविक परिवर्तन लाती है। कस्तूरबा ने 'कृति' की साधना की। वे बहुत अधिक बोलती नहीं थीं, बल्कि अपने कार्यों से अपनी निष्ठा प्रकट करती थीं। लेखक का मानना है कि साहित्य के बड़े-बड़े ग्रंथों की तुलना में कर्तव्य का एक छोटा सा पालन (कृति का कण) कहीं अधिक मूल्यवान और प्रभावशाली होता है।  


    9. व्याकरण - पाठ पर आधारित (Grammar from the Lesson)


    प्रत्यय पहचानें:

    • स्वाभाविक: स्वभाव + इक

    • तेजस्विता: तेजस्वी + ता

    • धन्यता: धन्य + ता

    • आंतरिक: अंतर + इक


    संधि-विच्छेद:

    • शुभारंभ: शुभ + आरंभ (दीर्घ संधि)

    • सत्याग्रहाश्रम: सत्याग्रह + आश्रम (दीर्घ संधि)

    • महत्वाकांक्षा: महत्व + आकांक्षा (दीर्घ संधि)

    • लोकोत्तरी: लोक + उत्तरी (गुण संधि)


    समास-विग्रह:

    • माँ-बाप: माँ और बाप (द्वंद्व समास)

    • बंधनमुक्त: बंधन से मुक्त (तत्पुरुष समास)

    • देशसेवा: देश की सेवा (तत्पुरुष समास)


    10. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Previous Years' Board Questions)


    प्रश्न 1: काका कालेलकर को किस उपनाम से जाना जाता है?  

    • उत्तर: उन्हें सवाई गाँधी (गाँधी जी द्वारा दिया गया नाम) कहा जाता है।  


    प्रश्न 2: कस्तूरबा की मृत्यु कहाँ हुई थी?  

    • उत्तर: उनकी मृत्यु पुणे के आगा खाँ महल में कारावास के दौरान हुई थी।  


    11. UP Board परीक्षा में इस पाठ से अपेक्षित प्रश्न (Expected Exam Questions)


    5 अंक - दीर्घ उत्तरीय:

    • 'निष्ठामूर्ति कस्तूरबा' पाठ का सारांश अपने शब्दों में लिखिए।  


    6 अंक - गद्यांश व्याख्या:

    • "शुद्ध और रोचक साहित्य के पहाड़ों की अपेक्षा कृति का एक कण अधिक मूल्यवान होता है" वाले अंश की व्याख्या।  


    2 अंक - लघु उत्तरीय:

    • 'प्रत्युत्पन्नमति' गुण कस्तूरबा के भाषणों में कैसे दिखाई देता था?  

    • कस्तूरबा ने जेल जाने के समय क्या कहा था? 


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