4.3. पुरुषोत्तमः रामः - (Purushottamah Ramah) - Class 9 - संस्कृत-खंड: - Rajeev Prakashan
- May 5
- 3 min read
Updated: May 6

पाठ का मुख्य विषय: भगवान श्री राम के दिव्य गुणों, शारीरिक विशेषताओं और उनके महान व्यक्तित्व का वर्णन।
1. पद्यों का ससन्दर्भ हिन्दी अनुवाद (Translation)
श्लोक 1: "इक्ष्वाकुवंशप्रभवो... धृतिमान् वशी।।"
सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के 'संस्कृत-खंड' के 'पुरुषोत्तमः रामः' नामक पाठ से उद्धृत है।
अनुवाद: इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न राम नाम के व्यक्ति (महापुरुष) के बारे में लोगों द्वारा सुना गया है। वे अपने मन को वश में रखने वाले, महापराक्रमी, कान्तिमान (तेजस्वी), धैर्यशाली और अपनी इन्द्रियों को वश में रखने वाले (जितेन्द्रिय) हैं।
श्लोक 2: "बुद्धिमान् नीतिमान्... महानुः।।"
अनुवाद: वे बुद्धिमान, नीतिज्ञ, कुशल वक्ता, शोभा सम्पन्न (श्रीमान) और शत्रुओं का विनाश करने वाले हैं। उनके कंधे विशाल हैं, भुजाएँ लम्बी हैं, गर्दन शंख जैसी (सुडौल) है और उनकी ठोड़ी ऊँची है।
श्लोक 4: "समः समविभक्ताङ्गः... शुभलक्षणः।।"
अनुवाद: वे पक्षपातरहित हैं, उनके अंग समान रूप से विभाजित (सुडौल) हैं, उनका रंग सुन्दर है और वे प्रतापी हैं। उनकी छाती पुष्ट है, नेत्र बड़े-बड़े हैं, वे लक्ष्मी (सम्पत्ति) से सम्पन्न हैं और शुभ लक्षणों (अच्छे गुणों) वाले हैं।
श्लोक 9: "सच नित्यं प्रशान्तात्मा... प्रतिपद्यते।।"
अनुवाद: वे (राम) सदा शान्त मन वाले हैं और मधुरता के साथ बात करते हैं। स्वाभिमानी या सम्माननीय होने पर भी वे किसी के कठोर वचनों का उत्तर कठोरता से नहीं देते।
श्लोक 10: "कदाचिदुपकारेण... शतमप्यात्मशक्तया।।"
अनुवाद: वे किसी के द्वारा किए गए एक ही उपकार से संतुष्ट हो जाते हैं, परन्तु अपनी आत्म-शक्ति के कारण वे दूसरों द्वारा किए गए सौ अपकारों (बुराइयों) को भी याद नहीं रखते।
2. महत्वपूर्ण शब्दार्थ (Glossary)
नियतात्मा: मन को वश में रखने वाले।
शत्रुनिवर्हणः: शत्रुओं का नाश करने वाले।
कम्बुग्रीवः: शंख जैसी गर्दन वाले।
आजानुबाहुः: घुटनों तक लम्बी भुजाओं वाले।
सत्यसन्धः: सत्य प्रतिज्ञा वाले।
अदीनात्मा: स्वाभिमानी/स्वतन्त्र।
अमोघक्रोधहर्षः: जिनका क्रोध और प्रसन्नता व्यर्थ नहीं जाती।
3. संस्कृत में प्रश्नोत्तर (Questions in Sanskrit)
प्रश्न (क): रामः कस्मिन् वंशे प्रभवः आसीत्? (राम किस वंश में उत्पन्न हुए थे?)
उत्तर: रामः इक्ष्वाकुवंशे प्रभवः आसीत्।
प्रश्न (च): महाबाहुः कः आसीत्? (लम्बी भुजाओं वाले कौन थे?)
उत्तर: रामः महाबाहुः आसीत्।
प्रश्न (ठ): प्रशान्तात्मा कः? (शान्त मन वाले कौन हैं?)
उत्तर: रामः नित्यं प्रशान्तात्मा अस्ति।
प्रश्न (ड): कः एकेन उपकारेण तुष्यति? (कौन एक ही उपकार से संतुष्ट हो जाता है?)
उत्तर: रामः एकेन उपकारेण तुष्यति।
प्रश्न (थ): कः अमोघक्रोधहर्षः? (किनका क्रोध और हर्ष अचूक है?)
उत्तर: रामः अमोघक्रोधहर्षः अस्ति।
4. व्याकरण-बोध (Grammar)
सन्धि-विच्छेद:
नियतात्मा: नियत + आत्मा (दीर्घ सन्धि)
महोरस्कः: महा + उरस्कः (गुण सन्धि)
विशालाक्षः: विशाल + अक्षः (दीर्घ सन्धि)
नोत्तरम्: न + उत्तरम् (गुण सन्धि)
विभक्ति एवं वचन:
जनैः: तृतीया विभक्ति, बहुवचन। (नोट: स्रोत में 'एकवचन' लिखा है, जो सामान्य व्याकरणिक रूप से त्रुटिपूर्ण हो सकता है, 'जनैः' बहुवचन है)।
धर्मस्य: षष्ठी विभक्ति, एकवचन।
उपकारेण: तृतीया विभक्ति, एकवचन।
अपकाराणाम्: षष्ठी विभक्ति, बहुवचन।
About BhashaLab
BhashaLab is a dynamic platform dedicated to the exploration and mastery of languages - operating both online and offline. Aligned with the National Education Policy (NEP) 2020 and the National Credit Framework (NCrF), we offer language education that emphasizes measurable learning outcomes and recognized, transferable credits.
We offer:
1. NEP alligned offline language courses for degree colleges - English, Sanskrit, Marathi and Hindi
2. NEP alligned offline language courses for schools - English, Sanskrit, Marathi and Hindi
3. Std VIII, IX and X - English and Sanskrit Curriculum Tuitions - All boards
4. International English Olympiad Tuitions - All classes
5. Basic and Advanced English Grammar - Offline and Online - Class 3 and above
6. English Communication Skills for working professionals, adults and students - Offline and Online
Contact: +91 86577 20901, +91 97021 12044
Mail: info@bhashalab.com
Website: www.bhashalab.com



