4.4. वृत्तलेख - Vruttalekh (Feature Writing) - Class 11 -Yuvakbharati
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विधा: व्यावहारिक हिंदी (Applied Hindi)
१. शब्दार्थ और पारिभाषिक शब्दावली (Glossary & Technical Terms)
क. शब्दार्थ (Word Meanings)
शब्द (Word) | अर्थ (Hindi) | अर्थ (English Context) |
जिज्ञासा | जानने की इच्छा | Curiosity / Inquisitiveness |
वस्तुनिष्ठ | निष्पक्ष / तथ्यपरक | Objective / Factual |
रंजक | मनोरंजक | Entertaining / Interesting |
नावीन्यपूर्ण | नयापन / अभिनव | Innovative / Novel |
सूक्ष्म | बारीकी से | Subtle / Minute |
चपखल | सटीक / उचित | Apt / Precise |
ओघवती | प्रवाहपूर्ण | Fluent / Flowing |
उत्कंठा | उत्सुकता | Eagerness / Suspense |
कृतज्ञता | आभार | Gratitude |
मागोवा | जायजा / पीछा करना | Review / Tracking |
ख. पारिभाषिक शब्दावली (Applied Technical Terms)
English Term | मराठी / हिंदी प्रतिशब्द |
Feature Writing | वृत्तलेख |
News | बातमी |
Information | माहिती |
Entertainment | मनोरंजन |
Public Awareness | लोकजागृती |
२. परिचय और संकल्पना (Introduction & Concept)
संकल्पना (Concept Explanation): वृत्तलेख (Feature Writing) समाचार के 'आगे' की जानकारी है। जहाँ 'बातमी' (News) केवल वस्तुनिष्ठ जानकारी देती है कि क्या हुआ, वहीं 'वृत्तलेख' उस घटना के पीछे के मानवीय पहलुओं, बारीकियों और रंजक विवरणों को उजागर करता है। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार, यह समाचार पत्र का एक ऐसा लेख है जो समाचार मात्र नहीं होता (It is a non-news article)।
६. व्यावहारिक हिंदी (Applied Tasks)
वृत्तलेख और समाचार में अंतर (Difference between Feature & News):
समाचार (News): इसमें 'मैं' (लेखक के विचार) का स्थान नहीं होता। यह केवल तथ्यों पर आधारित होता है।
वृत्तलेख (Feature): इसमें लेखक की कल्पनाशीलता, भाषा-कौशल और शैली का महत्व होता है। यह सूचना के साथ मनोरंजन भी करता है।
वृत्तलेख के अंग (Parts of a Feature): १. शीर्षक: यह संक्षिप्त, आकर्षक और पाठकों में जिज्ञासा पैदा करने वाला होना चाहिए। २. प्रस्तावना: पहले पैराग्राफ में ही विषय की रोचकता स्पष्ट होनी चाहिए। ३. विषय विस्तार: तथ्यों को कथात्मक शैली में पेश किया जाना चाहिए। ४. समारोप: अंत ऐसा होना चाहिए जो पाठकों के मन पर गहरा प्रभाव छोड़े।
उदाहरण (Model Task): विषय: डॉ. श्रीराम लागू - एक संवेदनशील कलावंत (वृत्तलेख सारांश) डॉ. लागू केवल एक महान अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि एक विचारवान सामाजिक कार्यकर्ता भी थे। उन्होंने 'सामाजिक कृतज्ञता निधि' के माध्यम से समाज के लिए सक्रिय योगदान दिया। ऊँचाई छूने के बाद भी वे जमीन से जुड़े रहे।
७. व्याकरण (Grammar Corner with Explanations)
वाक्य रूपांतर (Sentence Transformation):
१. "वृत्तलेखात माहिती आणि मनोरंजन यांचा संगम असतो।" (प्रश्नार्थी करें) उत्तर: वृत्तलेखात माहिती आणि मनोरंजन यांचा संगम असतो का? Rule: [Added 'ka' to turn a statement into an inquiry.]
२. "बातमी वस्तुनिष्ठ असते।" (नकारार्थी करें) उत्तर: बातमी अवस्तुनिष्ठ नसते। Rule: [Used the negative of the opposite word to maintain meaning.]
८. पिछली बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न (Practice Questions)
प्रश्न १: 'वृत्तलेख' और 'बातमी' में प्रमुख अंतर क्या है?
उत्तर: समाचार (बातमी) में 'क्या हुआ' का विवरण होता है, जबकि वृत्तलेख में 'कैसे' और 'क्यों' के साथ-साथ रंजक और सूक्ष्म विवरण शामिल होते हैं। समाचार शुष्क हो सकता है, लेकिन वृत्तलेख हमेशा रोचक होता है।
प्रश्न २: वृत्तलेख के शीर्षक का क्या महत्व है?
उत्तर: शीर्षक वृत्तलेख का प्रवेश द्वार है। एक सटीक और चपखल शीर्षक पाठक को लेख पढ़ने के लिए विवश कर देता है। शीर्षक से ही लेख की गहराई का पता चलता है।
प्रश्न ३: डॉ. श्रीराम लागू के व्यक्तित्व पर आधारित वृत्तलेख के मुख्य बिंदु क्या होंगे?
उत्तर: १. एक महान रंगकर्मी और अभिनेता। २. सामाजिक चेतना और 'कृतज्ञता निधि' का निर्माण। ३. सादा जीवन और उच्च विचार। ४. विचारों और कृति में सामंजस्य।
प्रश्न ४: एक अच्छे वृत्तलेखकार के पास कौन-से गुण होने चाहिए?
उत्तर: १. सूक्ष्म निरीक्षण शक्ति। २. कल्पनाशक्ति। ३. प्रभावी भाषाशैली। ४. विषय की गहरी समझ और शोध करने की वृत्ति।
प्रश्न ५: वृत्तलेख के विभिन्न प्रकार कौन-कौन से हैं?
उत्तर: १. व्यक्तिपरक (Biographical)। २. प्रसंगपरक (Event-based)। ३. ऐतिहासिक। ४. यात्रा-वृत्तांत (Travelogue)। ५. वैज्ञानिक या तकनीकी।
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