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    4.5. सुभाषितानि (Subhashitani) - Class 9 - संस्कृत-खंड: - Rajeev Prakashan

    • May 5
    • 2 min read

    Updated: May 6

    पाठ का मुख्य विषय: नैतिक जीवन, सदाचार और मानवीय मूल्यों पर आधारित सुंदर उक्तियाँ।  


    1. पद्यों का ससन्दर्भ हिन्दी अनुवाद (Translation)


    श्लोक 1: "वरमेको गुणी पुत्रो... तारागणैरपि।।"

      

    • सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक हमारी पाठ्यपुस्तक के 'संस्कृत-खंड' के 'सुभाषितानि' नामक पाठ से उद्धृत है।  


    • अनुवाद: सौ मूर्ख पुत्रों की अपेक्षा एक गुणवान पुत्र श्रेष्ठ है। जिस प्रकार अकेला चंद्रमा अंधकार को नष्ट कर देता है, हज़ारों तारागण मिलकर भी उसे नष्ट नहीं कर पाते।  


    श्लोक 2: "मनीषिणः सन्ति न ते हितैषिणः... हितं च दुर्लभम्।।"

     

    • अनुवाद: जो विद्वान (बुद्धिमान) हैं वे प्रायः हित चाहने वाले नहीं होते और जो हित चाहने वाले हैं वे विद्वान नहीं होते। मनुष्यों में ऐसा मित्र जो विद्वान भी हो और हितैषी भी, दुर्लभ है; ठीक उसी प्रकार जैसे ऐसी औषधि दुर्लभ है जो स्वादिष्ट भी हो और हितकारी (गुणकारी) भी।  


    श्लोक 4: "अक्रोधेन जयेत् क्रोधम्... सत्येन चानृतम्।।"

      

    • अनुवाद: क्रोध को शांति (अक्रोध) से जीतना चाहिए, दुष्ट को सज्जनता (अच्छे व्यवहार) से जीतना चाहिए। कंजूस को दान से जीतना चाहिए और असत्य (झूठ) को सत्य से जीतना चाहिए।  


    श्लोक 7: "त्यज दुर्जनसंसर्गं... स्मर नित्यमनित्यताम्।।"

      

    • अनुवाद: दुष्टों की संगति का त्याग कर दो और सज्जनों का साथ प्राप्त करो। दिन-रात पुण्य के कार्य करो और नित्य इस संसार की क्षणभंगुरता (अनित्यता) का स्मरण करो।  


    2. महत्वपूर्ण शब्दार्थ (Glossary)


    • वरम्: श्रेष्ठ।  


    • मनीषिणः: विद्वान।  


    • हितैषिणः: भला चाहने वाले।  


    • अक्रोधेन: शांति से।  


    • कदर्यम्: कंजूसी को।  


    • अनृतम्: झूठ।  


    • पुण्यपीयूषपूर्णाः: पुण्य रूपी अमृत से भरा हुआ।  


    • पर्वतीकृत्य: पर्वत के समान बड़ा करके।  


    3. संस्कृत में प्रश्नोत्तर (Questions in Sanskrit)


    प्रश्न (ख): कः एकः तमः हन्ति? (अकेला कौन अंधकार का नाश करता है?)

    उत्तर: एकः चन्द्रः तमः हन्ति।  


    प्रश्न (घ): क्रोधं केन जयेत्? (क्रोध को किससे जीतना चाहिए?)

    उत्तर: क्रोधं अक्रोधेन जयेत्।  


    प्रश्न (च): कदर्यं केन जयेत? (कंजूसी को किससे जीतना चाहिए?)

    उत्तर: कदर्यं दानेन जयेत्।  


    प्रश्न (झ): मानवः कं त्यजेत् कं च भजेत्? (मनुष्य को किसका त्याग और किसका सेवन करना चाहिए?) उत्तर: मानवः दुर्जनसंसर्गं त्यजेत्, साधुसमागमम् च भजेत्।  


    4. व्याकरण-बोध (Grammar)


    सन्धि-विच्छेद:

    1. तारागणैरपि: तारागणैः + अपि (विसर्ग सन्धि)  

    2. यथौषधम्: यथा + औषधम् (वृद्धि सन्धि)  

    3. चानृतम्: च + अनृतम् (दीर्घ सन्धि)  

    4. तपस्तैलम्: तपः + तैलम् (विसर्ग सन्धि)  

    5. सुहृच्च: सुहृद् + च (श्चुत्व/व्यंजन सन्धि)  


    विभक्ति एवं वचन:

    1. मूर्खशतैः: तृतीया विभक्ति, बहुवचन।  

    2. मनस: तृतीया विभक्ति, एकवचन।  

    3. अन्धकारे: सप्तमी विभक्ति, एकवचन।  

    4. काये: सप्तमी विभक्ति, एकवचन।  

    5. परमाणून्: द्वितीया विभक्ति, बहुवचन।  


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